सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

ओखला पक्षी अभ्यारण


"ओखला पक्षी अभ्यारण"














आज आप जब नोएडा या दिल्ली मे  अपने मिलने बाले मित्र, पड़ौसी, या रिश्तेदार से बात करे तो उनसे अवश्य पूंछना कि आपने ओखला पक्षी विहार देखा है तो हम दावे के साथ कह सकते है कि इस शहर के नब्बे प्रतिशत रहवासियों ने ओखला पक्षी विहार नहीं देखा होगा। अभी तक मै भी इसी श्रेणी मे था पर आज 16 फरवरी  2020 से मै इस श्रेणी से बाहर हो गया। अब मै दावे के साथ कह सकता हूँ "जी हाँ मैंने ओखला पक्षी विहार देखा है।" प्रायः ऐसा होता है हम दुनियाँ मे एक से बढ़ कर एक पर्यटन स्थल या धार्मिक स्थल देख लेते है पर अपने शहर मे या आसपास के प्रसिद्ध स्थलों को देखने मे अक्सर वंचित रह जाते है।

मै जबसे मै नोएडा आया कई बार ओखला पक्षी विहार जाने का कार्यक्रम बनाया पर किसी न किसी बजह से पक्षी विहार देखने से वंचित रहा। पर आज अचानक सुबह मैंने पक्षी विहार जाने का निश्चय कर लिया क्योंकि पिछले दिनों हमने अपना स्कूल खो दिया था  इस लिये इस दोपहर को ओखला पक्षी अभ्यारण चल दिया। पक्षी विहार हमारे नोएडा स्थित घर से बमुश्किल 4-5 किमी होगा। पिछले 65-66 दिनों से  अपृहृत इस सड़क पर  बैसे भी आजकल  बहुत ज्यादा ट्रैफिक नहीं था। मै लगभग प्रातः 11 बजे ओखला पक्षी विहार पहुँच गया। बैसे पक्षी विहार मौसम के हिसाब से प्रातः 7.30 से 8.00 बजे खुल जाता है। गहमा गहमी से दूर राष्ट्रीय  राजधानी क्षेत्र स्थित इस पक्षी विहार मे नितांत शांति, कोलाहल रहित प्रकृतिक जंगल से परिपूर्ण यमुना नदी के किनारे बने खादरों मे बारहमास बहते पानी से परिपूर्ण जल मे लगभग 300 से अधिक प्रकार के नभ चरों का आश्रय स्थल देखने का एक अलग ही सुख है। 30 रूपये के साधारण प्रवेश शुल्क देकर आप शाम 5.00 बजे तक प्रवेश कर सकते है। कालिंदी कुंज मार्ग के गेट संख्या 1 से मैंने इस पक्षी विहार मे प्रवेश किया जो पिंक लाइन मेट्रो स्टेशन से नजदीक है पर बेहतर होगा यदि आप अपने वाहन से जा रहे है तो आप मयूर विहार रोड पर स्थित गेट संख्या 2 से प्रवेश करे जहां सभी तरह के वाहन पार्किंग की निशुल्क व अच्छी  व्यवस्था है। गेट संख्या 1 से गेट संख्या 2 के बीच बना पक्षी विहार लगभग 2 किमी लंबी सड़क के दोनों ओर आच्छादित पेड़ो से ढकी सड़क पर फैला है। सड़क के एक ओर पेड़ों के किनारे किनारे यमुना नदी के जल से परिपूर्ण जलराशि, वेराज के किनारे बड़ा मनमोहक और प्रकृतिक द्रश्य प्रदर्शित करती है, जहां पर देशी और प्रवासी पक्षियों का सुखद  कलरव मन को मोह लेता है। प्रवेश द्वार के निकट नाव की आकृति मे नदी के किनारे बने बैठने का स्थान बड़ा ही आकर्षण का केंद्र था जिस पर बैठ कर नदी मे विचरते पक्षियों को देखना बड़ा सुकून देने बाला था। नदी के किनारे जगह जगह विश्राम के लिए लोहे और सीमेंट की बेंच पर बैठ कर नदी के जलचरों को निहारना अच्छा लग रहा था। कुछ दूर तक सड़क से हट के कच्चे रास्ते पर पैदल ट्रैकिंग करना जंगल ट्रैकिंग की याद  करा रहा था। एक जगह कच्ची सड़क पर गिरा पेड़ जंगल सफारी का अहसास करा रहा था। वन विभाग द्वारा नदी के बीच-बीच मे पक्षियों को जल क्रीडा से विश्राम देने के लिये बांस-बल्ली के सहारे मंच बनाये गये थे जिन पर पक्षी पंख फैला कर आराम कर रहे थे। 

दूर दूर तक यमुना नदी मे विभिन्न प्रकार के जलचर पानी मे अठखेलियाँ करते नज़र आ रहे थे। कुछ सफ़ेद हंस से दिखने बाले बड़े एगरेट, सफ़ेद, सुनहरे, काले बतख़ सैकड़ो की संख्या मे जल क्रीड़ा करते नज़र आये। जगह जगह पक्षियों का नाम लिखे पेंटिंग के बोर्ड पर्यटकों का मार्ग दर्शन कर रहे थे। तमाम पक्षी प्रेमी बड़े बड़े कैमरे लेकर पक्षियों के फोटो निकालने मे मशगूल थे। लगभग 2.00-2.50 किमी के बाद गेट संख्या 2 था। इस गेट से भी लगभग 1.00-1.50 किमी और आगे कच्चे रास्ते पर पक्षियों को निहारने के लिये वॉच टावर संख्या 1 व 2 पर जाने का रास्ता था। लकड़ी के टुकड़ों से एक सुंदर सा पुल बना कर वॉच टावर तक जाने के लिये सुंदर सा पुल बनाया गया था जिस पर होकर आप प्रकृतिक लंबी लंबी घनी  घास के सूखे पत्तों से बनी  पगडंडी से होकर आगे रास्ते पर बढ़ सकते है। दल दल से बनी इन जंगली घास के बीच इन पक्षियों के घोसलों को आप इनके प्रकृतिक आवास को मे देख सकते है। इस निपट सुनसान और शांत जगह से होकर हम वॉच टावर 2 पर पहुंचे। लोहे लकड़ी कि सहायता से बने लगभग 30-40 फुट ऊंची टावर पर चढ़ कर पक्षी अभ्यारण का नज़ारा  देखने बाला था। दूर दूर तक जल के बीच बने इन टापू नुमा धरातल पर पक्षी जल क्रीड़ा कर कुछ देर धूप मे विश्राम करते नज़र आए। टावर पर कुछ समय व्यतीत कर उन्ही रस्तों से बापस गेट नंबर 2 पर बापस आये। अबतक लगभग 5 किमी की यात्रा पैदल पैदल हो चुकी थी। पुनः पैदल चल कर 1 नंबर गेट तक चलने की हिम्मत जबाब दे चुकी थी अतः वहाँ उपलब्ध ई-रिक्शा सेवा  का लाभ उठाया।  कुछ इंतज़ार के बाद ई-रिक्शा की सहायता से हम पुनः गेट संख्या 1 पर 30/- रूपये किराया देकर बापस आये। और इस तरह एक लंबे समय से लंबित यात्रा का सुखद और यादगार यात्रा का समापन किया।

अतः सभी एनसीआर विशेषतः नोएडा के निवासियों से अनुरोध है एक बार इस पक्षी विहार मे परिवार और मित्रों के साथ यहाँ अवश्य  जाये साथ मे कुछ हल्का खाना एवं पानी ले जाना न भूले क्योंकि अंदर कुछ भी उपलब्ध नहीं है। और हाँ आपका कोई रिश्तेदार, मित्र या पड़ौसी फोन पर कभी पूंछे कि आप ओखला पक्षी अभ्यारण गये है? तो गर्व के साथ चौड़ा सीना कर उन्हे अवश्य बताये कि हम ओखला पक्षी विहार गये है।

विजय सहगल             

3 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

Well done really good description

Unknown ने कहा…

अति सुंदर प्रस्तुति।

Unknown ने कहा…

अति सुंदर प्रस्तुति
बहुत अच्छा।