शुक्रवार, 27 मार्च 2026

श्री राम नवमी पर विशेष, "राम की अयोध्या, अयोध्या के राम"

 

श्री राम नवमी पर विशेष "अयोध्या के राम, राम की अयोध्या"









2 नवंबर 2025 को मुझे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्थान अयोध्या जाने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। भारत भूमि की सनातन संस्कृति के आराध्य भगवान श्री राम के प्रति यहाँ के करोड़ो करोड़ लोगों की, वे  आस्था, सम्मान श्रद्धा के केंद्र हैं। ऐसी परम पावन राम जन्म भूमि अयोध्या  के दर्शन का सुयोग मुझे दूसरी बार प्राप्त हुआ। इसके पूर्व शायद 1972 मे मै अपने ताऊ-ताई और बुआ के साथ गया था। तब की वीरान और सुनसान अयोध्या और आज की अयोध्या मे जमीन आसमान का अंतर स्पष्ट दिखलाई पड़ता है। उन दिनों बिड़ला धर्मशाला मे रुका था जो राम जन्मभूमि के ठीक सामने आज भी स्थित है। संजोग देखिये धर्मशाला के सामने रुकने के बावजूद राम जन्मभूमि के दर्शन का आनंद, सुख सौभाग्य मुझे अभी ही प्राप्त हुआ। भगवान राम को यूं ही मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहा जाता है, आज दुनियाँ के तमाम धर्मों, संप्रदाय या वंशों मे ऐसा दृष्टांत देखने को नहीं मिलता जब एक पुत्र के रूप मे भगवान श्री राम ने पिता की आज्ञानुसार राज्य को त्याग कर वनवास जाना स्वीकार किया और विडंबना देखिये जिस माता कैकई ने अपने पुत्र भरत के लिए राज्य सिंहासन  की मांग की थी उसने भी राम की पादुकाओं को सिंहासन पर रख, स्वयं वनवासी के रूप मे रहते हुए एक सेवक के रूप मे राम काज किया!! अन्यथा दुनियाँ के सारे मजहब, धर्म पंथ और संप्रदाय मे सत्ता के सिंहासन के लिए हिंसा, युद्ध झगड़े हुए जिसमे मानव हत्या, षड्यंत्र और संहार हुए है।      

1 नवंबर को देवठानी ग्यारश होने के कारण परिक्रमा लगाने बालों की बड़ी भारी  भीड़ के कारण अयोध्या मे पहुँचने के बावजूद वहाँ के केंद्र रमजन्मभूमि पहुँचना कठिन हो गया। रात के 11 भी बज चुके थे अतः रात्रि विश्राम के बाद 2 नवंबर की सुबह ही राम जन्मभूमि जाना हुआ। एक विशाल प्रवेश द्वार से होकर जब श्री राम जन्मभूमि की ओर बढ़े तो हजारों लोगो के कदम भी उसी ओर बढ़ रहे थे। पूरे विशाल परिसर मे लाखों  लोगों  की तरह ही राम जन्मभूमि के प्रथम बार  दर्शनों की जिज्ञासा, आतुरता, कौतूहल और उत्सुकता मेरे हृदय मे भी हिलोरे मार रही थी। जल्दी से जल्दी न केवल राम लला के दर्शन की अभिलाषा अपितु पूरे जन्मभूमि परिसर देखने की उत्कंठा सब कुछ शीघ्र अति शीघ्र करना चाहती थी। परिसर मे दर्शन, बहुमूल्य समान की सुरक्षा एवं पादुकाओं के रखने के स्थान आदि व्यवस्था समझने के पश्चात मेरी राय थी कि इतनी सुचारु व्यवस्था, इतना सुविधा जनक तंत्र और इतनी सुरक्षित प्रणाली मैंने पहले कभी नहीं देखी!! मंदिर परिसर के बाहरी क्षेत्र मे बने एक विशाल हाल मे बनी लगभग 50 एकल खिड़की बनी हैं। यहाँ पर हर खिड़की पर मोबाइल, मूल्यवान वस्तुएँ एवं चरण पादुकाएं रखने की  सुविधा प्रदान की जाती हैं। एक खिड़की के  दोनों ओर 7-7 खंड के लॉकर कैबिनेट एक सिरे से दूसरे सिरे तक रक्खे गए हैं। एक खंड मे लगभग 20 लॉकर हैं इस तरह एक खिड़की से 280 लगभग लॉकर संचालित होते हैं। अप अपना सारा मूल्यवान सामान, मोबाइल एक प्लास्टिक की टोकरी मे रखते हैं एवं सारे जूते चप्पल एक प्लास्टिक की बोरी मे रख कर खिड़की मे बैठे कर्मचारी को दे दीजिये। वह आपके सामने ही किसी भी खाली लॉकर मे मूल्यवान वस्तुओं और मोबाइल को रख कर उसमे ताला लगा कर चाबी आपको दे देगा, जिसमे आपके खिड़की संख्या और लॉकर संख्या अंकित होगी। जूते चप्पल भी उस लॉकर के कुंडे मे लटका दिये जाएंगे। बापसी के समय हाल मे दूसरे तरफ बनी उसी नंबर की खिड़की से आपके वस्तुओं को आपको सुपुर्द कर दिया जाएगा। कहने का तात्पर्य वस्तुओं की प्राप्ति और सुपुर्दगी की खिड़कियाँ अलग अलग है। जिससे व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती है। ये सारी सुविधाएं निशुल्क हैं।

विशाल परिसर मे जगह जगह पीने के पानी एवं टॉइलेट  की व्यवस्था है। अब जब आप मंदिर परिसर के बाहरी क्षेत्र से मंदिर के दर्शन हेतु प्रवेश करते हैं तो 8-10 स्टील के पाइप से बनी लाइनों से अंदर प्रवेश करते हैं। प्रथम साधारण सुरक्षा जांच से गुजर कर जब आप मंदिर के प्रवेश द्वार के पूर्व सघन सुरक्षा जांच क्षेत्र मे पहुँचते है जहां  आपकी ठोस और गहन जांच होती हैं। किसी भी तरह के आग्नेय अस्त्र/शस्त्र बीड़ी, मोबाइल, सिगरेट, पान मसाला आदि ले जाना सख्त निषेध है। इस जांच परिसर के बाहर आते ही कुछ कदम की दूरी पर मुख्य मंदिर का विशाल चबूतरा बना है। चबूतरे के दायें व बाएँ दो दो लाइने एवं मध्य मे चार लाइनों के माध्यम से बनी 30-32  सीढ़ियाँ चढ़ कर आप मुख्य मंदिर मे प्रवेश करते हैं। मुझे बताया गया था कि आप सबसे दाहिने की सीढ़ियाँ चढ़ कर ही जायें क्योंकि ये पहली वाली लाइन रामलला भगवान के सबसे निकट, ठीक सामने से होकर जाती हैं बाकी की लाइने भी एक के पीछे एक छह लाइन मे लग कर लोग दर्शन करते हैं। असक्त और वृद्ध जनों के लिए व्हील चेयर की व्यवस्था है जो लिफ्ट के माध्यम से मंदिर के गर्भ गृह तक जा सकती हैं। मुख्य मंदिर मे पाँच कक्ष है जिनहे क्रमशः नृत्य, रंग शाला, सभा कक्ष, प्रार्थना और कीर्तन मंडप कहते है तत्पश्चात गर्भ गृह मे भगवान राम लला बालरूप मे  विराजमान हैं। नागर शैली मे गुलाबी  राजस्थानी बलुआ पत्थर से बने इस परिसर मे काफी दूर से ही ऊंचे चबूतरे पर विराजित रामलला के सहज, सरल दर्शन हो जाते हैं। हर मंडप मे बने स्तंभों पर देवी देवताओं की छोटी बड़ी मूर्तियों को उत्कीर्ण किया गया है। बारीक नक्काशी की बेल बूटे मूर्तिकारों के श्रम और कलात्मकता को दर्शाते हर ओर दिखलाई देते हैं। आज के आधुनिक समय मे बिना लोहे के निर्मित इस तीन मंज़िला भवन की भव्यता और दिव्यता देखते ही बनती हैं। मुख्य मंदिर की आधार चबूतरे की लंबाई 380 फुट चौड़ाई 250 फुट और ऊंचाई 161 फुट हैं। मंदिर मे 392 खंबे और 44 दरबाजे हैं जिसमे 42 दरबाजे स्वर्ण जड़ित हैं। पूरे  मंदिर का निर्माण बिना किसी राज्याश्रय के देश के पाँच लाख गाँव से एकत्रित आम जनों के दान और भेंट से एकत्रित तीन हजार करोड़ रुपए से किया जा रहा है।

500 वर्षों के लंबे संघर्ष कानूनी दांव पेंचों के बाद बने इस भव्य मंदिर पर प्रत्येक भारतवासी को गर्व है। दर्शनों के बाद उत्तरी दिशा के दरवाजे से हम लोग बाहरी बरामदे मे निकले जहां निर्माण का शेष कार्य काफी तेजी से चल रहा था। बाहरी दरबाजे के निकासी द्वार पर प्रत्येक भक्तजन को इलाइचि दाने का सील बंद सफ़ेद कागज के लिफाफे मे प्रसाद के रूप मे प्रदान किया जा रहा था। बापसी के समय एक हरे घास के मैदान पर एक सुंदर गिलहरी की प्रतिमा भगवान राम और गिलहरी के प्रसंग के प्रतीक की कहानी कह रहा था। बापसी मे अमानती समान गृह से वस्तुओं को लेने के पूर्व शानदार प्रतीक्षालय मे कुछ विश्राम और प्रसाधन सुविधाओं के उपभोग पश्चात पुनः मंदिर परिसर की भव्यता को निहारते हुए भगवान श्री राम का स्मरण करते हुए  अगले लक्ष्य की ओर बढ़ लिए। भगवान श्री राम की नवमी पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें।

जय श्री राम!!

विजय सहगल  

 

                           

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

अनियोजित गंगा -संगम स्नान, पटना

 

"अनियोजित गंगा स्नान, पटना"












कभी कभी निरुद्देश्य घूमते हुए जब ये भी न पता चले की अगले  कदम पर कहाँ जाना है और फिर एक नया कदम, बगैर पूर्वनियोजित घूमते हुए 2-3 घंटे हो जाएँ तो एक अच्छी ख़ासी कहानी बन जाती है। 9 मार्च 2026 को ऐसा ही कुछ हुआ जब मै अपने पटना प्रवास पर सुबह 6.30 बजे प्रातः पैदल-पैदल भ्रमण पर निकला। रोज एक ही जगह एक पार्क मे जाने वाले बोरिंग रूटीन से हट कर मन मे आया चलो गंगा घाट की तरफ चलते हैं। कदम बढ़ते जा रहे थे रास्ता गूगल दिखा रहा था। चूंकि कार या मोटरसाइकल का रास्ता तीव्र गति से चलने के कारण  आसानी से समझ आ जाता है पर पैदल रास्ता दिखाने मे गूगल, कभी दायें-कभी बाएँ कभी विपरीत दिशा बताने के कारण उलझन हो रही थी। कुछ ऐसी ही उलझन आज भी थी। पता नहीं किन पतली, छोटी गलियों से होकर जब मुख्य सड़क पर आया और आस-पास के दुकानों पर लगी बोर्ड पर नज़र डाली तो पता लगा कि मै खजांची रोड पर हूँ।  मै पहली बार पटना मे इन अंजान रास्ते पर अकेले जा रहा था। एक दो जगह कुछ भ्रमित होने पर लोगो से मार्ग दर्शन  लिया और इस तरह खोजते खोजते दरभंगा हाउस पहुँच गया जहां से काली घाट के  रास्ते से मै परिचित था। घाट पर सुबह लोग चहल-कदमी करते और घूमते नज़र आए। मै भी खुश था कि चलो आज बंधे-बंधाये रास्ते को छोड़ एक नई जगह पर तो आए।

लोगो के प्रातः भ्रमण के बीच, घाट पर साफ सफाई का काम भी चल रहा था। घाट अच्छे थे, घूमना अच्छा लग रहा था।  हमारी सनातन संस्कृति मे पावन गंगा का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। गंगा को प्रणाम कर,  मन मे आया कि चलो गंगा जल की कुछ बूंदों से आचमन कर अमृतपान किया जाय। मानवीय तृष्णा ने, घाट से कुछ दूर बह रही पवित्र गंगा का किनारा काफी अस्वच्छ बना दिया था, आगे शायद कुछ स्वच्छता मिले, ऐसा विचार कर आगे बढ़ते-बढ़ते विश्वविध्यालय घाट, कृष्णा घाट होते हुए जब गांधी घाट पर पहुंच गया। लेकिन आगे भी स्वच्छता के स्तर कोई सकारात्मक परिणाम न पा कर आचमन का विचार त्याग कर पूरे शरीर पर गंगा जल छिड़क कर ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्र का जाप कर पवित्र होने की सोची। इसी आशय से घाट की सीढ़ियाँ उतर कर कुछ दूर बह रही गंगा नदी की ओर बढ़ा। तभी वहाँ खड़ी नाव के मल्लाह ने गंगा पार जाने की आवाज लगा लोगों को आमंत्रित किया। इरादा तो मात्र घाट पार प्रातः भ्रमण का था, गंगा किनारे आचमन और पवित्रीकरणम का विचार भी हमारी संस्कृति के कारण वरवश आना ही था पर गंगा पार जाने का कहीं कोई दूर दूर तक जाने का  इरादा न था, क्योंकि सुबह विविध भारती सुनने के शौक के कारण, सिवाय मोबाइल के, जेब मे फूटी कौड़ी भी नहीं थी।  जिज्ञाशा वश मल्लाह से पूंछा कितने पैसे लोगे?  तब उसने बताया रुपए 50/- दोनों तरफ अर्थात जाने और आने के। फिर पूंछा क्या यूपीआई से पेमेंट लेते हो? उसने सिर हिलाते हुए कहा हाँ! फिर क्या था, मै भी लपक कर नाव मे पहली सवारी के रूप मे चढ़ गया।  

घाट पर गंगा पार जाने वालों की कोई बहुत  ज्यादा भीड़ नहीं थी। नाव वाला हर थोड़ी देर बाद "गंगा पार" जाने की आवाज लगाता। मै भी चुप चाप इंतज़ार करता रहा, नाविक की सहायता के लिए मैंने भी कुछ लोगों से गंगा पार चलने का आग्रह किया। अब तक एक-दो सवारी और आ चुकी थीं। फिर 7-8 की संख्या मे एक परिवार भी आ गया। इस तरह गंगा पार जाने की नाव की यात्रा शुरू हो चुकी थी। नदी के बीच पानी काफी गहरा था। मन ही मन माँ गंगा को प्रणाम कर जगत के कल्याण की कामना की और एक नौजवान सहयात्री जो मेरी तरह अकेला ही मेरा सहयात्री था। रूपेश!, हाँ यही नाम बताया था उस युवा ने। हजारी बाग से आया था। होली पर लगे ग्रहण के बाद गंगा  स्नना के उद्देश्य से ही उसका पटना आना हुआ था। गंगा पार पहुँच कर केवट नानजी नाव किनारे लगा कर, सभी यात्रियों को गंगा पार रेतीले मैदान मे उतर दिया। सभी यात्री नहाने के सुविधाजनक स्थान की तलाश मे यहाँ वहाँ हो लिये। यहाँ पानी साफ सुथरा, आचमन के योग्य था पर यहाँ फिर मै असमंजस के दो राहे पर खड़ा था। गंगा स्नान का कोई उद्देश्य तो नहीं था। क्योंकि न तो कपड़े, न तौलिया, न कच्छा बनियान? क्या करें? रूपेश ने अपने लाये बैग को किनारे पर रख नाव के आगे की  तरफ साफ पानी मे स्नान की तैयारी कर स्नान भी शुरू कर दिया। कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करें? कहाँ गंगा जल से आचमन फिर अपने शरीर पर गंगा जल से छींटे डालने की सोची, अब तो यहाँ गंगा स्नान का शुभ अवसर सामने था!!   हमने तुरंत ही इन्ही और ऐसी ही  परिस्थितियों मे स्नान करने का निर्णय लिया और किनारे पर ही लोअर, टी शर्ट और बनियान रख कर, प्राप्त हुए गंगा स्नान के ईश्वरीय सुयोग और सुअवसर का लाभ उठाते हुए गंगा की गोद मे बढ़ लिया। पानी ठंडा था, लेकिन एक डुबकी लगते ही ठंड तिरोहित हो गयी। अब तो अनेकों डुबकी लगा, सूर्य को अर्घ देते हुए अपने पूर्वजों को हाथ जोड़ कर उनके लिये शांति और श्रद्धा से नमन करते हुए गंगा का पवित्र जल अर्पित किया। बापस आकर अपने बासे वस्त्रो पर गंगा जल के छींटे डाल पवित्र किया, बनियान से तौलिये का काम लिया और चाय की दुकान के पीछे बने अस्थाई चेंजिंग रूम मे उन्ही बासी कपड़ों को पहन लिया। इसी बीच हजारी बाग के उस युवक रूपेश ने गंगा के पूर्वोत्तर छोर पर रेतीले मैदान के टीले के पीछे बहने वाली गंडक नदी को दिखलाया। गंडक गर्मी के इस शुरुआत के दिनों मे भी अपने तीव्र वेग और विशाल जलराशि के साथ बहते हुए भयावह लग रही थी। 15-20 फुट के ऊंचे टीले के रेतीले किनारे गंडक के तीक्ष्ण वेग से लगातार कट कर नदी मे गिर रहे थे। दृश्य बड़ा डरावना था। रेतीले टीले के  किनारे की थोड़ी भी चूक आपको गंडक मे फिसलने या गिरने से नहीं रोक सकती थी। गंडक नदी के रौद्र रूप का अभी ये हाल है तो बरसात मे इसकी विकरालता, तीव्रता और उग्रता का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। कुछ कदम आगे गंडक और गंगा का संगम स्पष्ट दिखलाई दे रहा था। संगम की धाराओं को प्रणाम कर हम दोनों,  वहाँ से  दिख रही  एक मात्र चाय की गुमटी  की ओर बढ़ लिये।

चाय के टपरे पर शिव पूजन यादव जी से भेंट हुई जो गाय का दूध निकाल रहे थे। गाय देखने मे तो साधारण लग रही थी पर जब स्टील की बाल्टी दूध से पूरी भर गयी, जो 12-13 लीटर से कम न थी, तब गाय की ऊंची नस्ल का अहसास हुआ। शिव पूजन जी की दुकान पर चाय, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक पेड़ा आदि रक्खे थे। चाय-नमकीन की इच्छा तो थी पर यहाँ फिर नगदी भुगतान की समस्या आने को थी क्योंकि सिवा यूपीआई भुगतान के  जेब मे तो ठन-ठन गोपाल थी। पर अचानक दुकान पर यूपीआई कोड देख कर तसल्ली हुई। एक बात तो माननी पड़ेगी कि मोदी सरकार द्वारा यूपीआई लागू करने से हम जैसे लोगों ने पर्स रखना ही छोड़ दिया। प्रसंशा करनी होगी क्योंकि हर छोटा बड़ा दुकानदार, व्यापारी अब यूपीआई से भुगतान लेने लगा है। इस नदी के रेतीले किनारे पर पर दूर दूर तक शिवपूजन की दुकान के अतिरिक्त कोई दुकान न थी और इस घोर निर्जन मे यूपीआई की सुविधा!!, कहना अतिशयोक्ति न होगी कि भारत दुनियाँ मे डिजिटल भुगतान के मामले मे नंबर वन है।

यूपीआई भुगतान सुनिश्चित होने पर दम आ गयी, फिर क्या था इस निर्जन टापू पर  रूपेश, नानकी, शिवपूजन, महेश जनार्दन के साथ एक छोटी सी चाय पार्टी हो गयी क्योंकि अब पेमेंट की कोई चिंता जो नहीं थी।

आज का प्रातः भ्रमण भी यादगार हो गया कहाँ गंगा जल के  आचमन मे भी बाधा आ रही थी और कहाँ गंगा स्नान भी हो गया। एक अनियोजित यात्रा सुनियोजित यात्रा मे जो, बदल गयी थी।

विजय सहगल

    

      

 

जब मैंने कौतूहल से यहाँ संगम के बारे मे पूंछा तो रूपेश ने बताया, यहाँ पटना मे गंगा और गंडक नदी का संगम है।                

 

शनिवार, 14 मार्च 2026

सांई राम फिल्लिंग स्टेशन, चेतकपुरी ग्वालियर द्वारा ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी और बेईमानी

इंडियन ऑइल के सांई राम फिल्लिंग स्टेशन, चेतकपुरी ग्वालियर द्वारा ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी और बेईमानी







ईरान के विरुद्ध ईस्राइल अमेरिका के युद्ध ने हमारे देश के पेरोलियम उत्पाद पर भी असर डाला है। कुछ असामाजिक देश पर आयी इस आपदा पर अवसर तलाश रहें है, और गैस, और अन्य पेट्रोलियम उतपदों की कालाबाजारी कर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे है। पर ग्वालियर के चेतकपुरी के सामने स्थित यह पेट्रोल पंप पूरे साल बिना किसी आपदाओं के कम तौली कर लोगो को लूट रहा है और इंडियन ऑइल के अधिकारी इससे साठगांठ कर इसे बचा रहे हैं।   

मै आपका  ध्यान इंडियन ऑइल के सांई राम फिल्लिंग स्टेशन, चेतकपुरी ग्वालियर  द्वारा अपने ग्राहकों के साथ की पेट्रोल भरने के दौरान की बेईमानी, धोखाधड़ी और कम पेट्रोल भरने की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ जब मै  दिनांक 07 फरवरी 2026, शनिवार  को सायंकाल 05.10 बजे अपने एक्टिवा मे पेट्रोल लेने के लिए पहुंचा तो पेट्रोल भरने बाले स्टाफ ने बगैर पूंछे ही 100.00 रुपए का पेट्रोल भर दिया, जब मैंने कहा कि आपने बगैर पूंछे ही क्यों एक सौ का पेट्रोल भर दिया, मै तो अपने दुपहिया वाहन को फुल कराना चाहता था  तो उसने बहाना बनाते हुए  कहा कि  मै समझा आपको एक सौ का पेट्रोल लेना है। चलिये मै टैंक फुल कर देता हूँ। उस स्टाफ ने बगैर मशीन को ज़ीरो किए और पेट्रोल डाला। उस समय मशीन रुपए 350/- की रीडिंग दर्शा रहा था। जब मैंने भुगतान के लिए अपना कार्ड दिया तो पेट्रोल पंप स्टाफ ने रुपए 450/- का भुगतान करने हेतु मशीन पास वर्ड डालने हेतु थमा दी। जब मैंने 450/- रुपए के भुगतान का हिसाब पूंछा तो उसने कहा कि पहले 100/- रुपए का पेट्रोल डाला और बाद मे 350/- रुपए का पेट्रोल भरा इस तरह कुल 450/- रुपए हुए। मैंने प्रतिवाद करते हुए जब पूंछा कि उसने 100/- रुपए के भुगतान के बाद मशीन को ज़ीरो पर सेट तो किया ही नहीं? तो उस स्टाफ ने बहस बाजी करते हुए रुपए 450/- के भुगतान करने का दबाव बनाया। जब मैंने भी क्रोध प्रकट करते हुए 350/- से एक पैसा ज्यादा भुगतान करने से मना कर दिया।

जब मैंने उस स्टाफ की शिकायत इंडियन ऑइल के अधिकारियों से करने की धमकी दी तब उस स्टाफ ने बड़ी अभद्रता के साथ कहा कि शिकायत से हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा और अभद्र व्यवहार करते हुए 450/- रुपए भुगतान की मांग करता रहा। लेकिन मैंने भी 350/- रुपए का ही भुगतान करने के अपने निर्णय बताया, तब हार कर उसने 350/- रुपए का भुगतान लेते हुए कहा कि आप सीनियर सिटिज़न हैं कोई और होता तो बताते!! मैंने उसे हमसे इस तरह मारपीट की धमकी देने की शिकायत इंडियन ऑइल के उच्च  अधिकारियों से करने के प्रति चेतावनी दी पर उस के व्यवहार मे रत्ती भर भी पश्चाताप और गलती का अहसास नहीं था। इसी बीच पेट्रोल पंप की ओनर मेडम भी वहाँ आ गयी लेकिन उन्होने भी अपने स्टाफ को ज्यादा पैसे लेने और दुर्व्यव्हार के लिए कुछ भी नहीं कहा।

मैंने पेट्रोल का बिल और कार्ड से भुगतान की  रसीद ले कर उसी दिन इंडियन ऑइल के अधिकारियों को "एक्स" और ई-मेल के माध्यम से संक्षेप मे शिकायत की। शिकायत को पेट्रोलियम मंत्रालय के "एक्स" पर शिकायत की। इंडियन ऑइल द्वारा सोश्ल मीडिया पर मुझ से मेरे मोबाइल नंबर मांग कर संपर्क करने का अनुरोध किया जिसे मैंने तुरंत ही डाइरैक्ट मैसेज के माध्यम से पेट्रोल पंप के विरुद्ध कार्यवाही की प्रत्याशा से अपना मोबाइल भेज दिया। मुझे इंडियन ऑइल के अधिकारियों द्वारा हमारी शिकायत को शिकायत क्रमांक 1-1469292762660 दिनांक 7 फरवरी 2026 पर दर्ज़ कर दी। इंडियन ऑइल द्वारा उसी दिन इस त्वरित प्राथमिक कार्यवाही से मुझे काफी प्रसन्नता थी। चूंकि 7 फरवरी को शनिवार और 8 फरवरी को रविवार के कारण छुट्टी थी। 9 फरवरी को इंडियन ऑइल के अधिकारी श्री राम प्रजापति जी का फोन 15.42 पर आया और उन्होने घटना के बारे मे जानकारी मांगी। मैंने संक्षेप मे घटना की सिलसिलेवार जानकारी उनको बताई। उन्होने पेट्रोल बिल और कार्ड के भुगतान की रसीद उनको व्हाट्सप के माध्यम से तत्काल प्रेषित कर दी।

इसी बीच जब मैंने साईं राम फिल्लिंग स्टेशन चेतकपुरी ग्वालियर के रिव्यू देखे तो आश्चर्य जनक रूप से 3.6 स्टार रेटिंग के साथ काफी खराब थे। 269 रिव्यू मे से अधिकांश मे धोखाधड़ी का तरीका वही था जो हमारे साथ किया गया। अर्थात पहले अपने मन से पेट्रोल भरना और फिर बगैर ज़ीरो किए ग्राहक द्वारा मांगी गयी राशि का पेट्रोल भर देना। इस तरह की धोखाधड़ी के रिव्यू ग्राहक श्री विकास कुशवाह, Mehta LED, श्री एश्वर्य सिंह पोतदार, श्री प्रथमेश, सुश्री प्रियंका प्रिय, Laughing Teddy, सुश्री आयुषी पाठक, श्री अनुज प्रताप सिंह, श्री विरूपाक्ष कदम, श्री प्रफुल्ल नायक, श्री खान साहब, श्री विपुल सोनी, श्री अमन श्रीवास्तव उक्त सारे ग्राहकों ने पेट्रोल भरने मे धोखाधड़ी की शिकायत अपने रिव्यू मे की जिसे अभी भी देखा जा सकता है।

जैसा कि प्रायः सरकारी विभागों का ढर्रा रहा है कि विभाग द्वारा बड़े ही चलताऊ ढंग से  लीपापोती कर अधिकारियों और पेट्रोल पंप के मालिकों की  सांठगांठ से शिकायत को बंद कर दिया जाता है यहाँ भी मेरी शिकायत पर ऐसा ही हुआ।  जब मैंने अपनी शिकायत के संबंध मे इंडियन ऑइल के जांच अधिकारी श्री राम प्रजापति से 14 फरवरी को संपर्क किया तो उन्होने भी घुमा फिराकर बात की और घुलमुल जबाव  दिया। उन्होने बताया कि ऑफिस से लेटर जा रहा है। फिर जब 13 फरवरी के मैसेज के माध्यम से मुझे कंपनी ने सूचित किया कि आपकी शिकायत संख्या 1-1469292762660 पर  आवश्यक कार्यवाही की जा चुकी है, धन्यवाद। बड़ा खेद और अफसोस हैं एक ही तरीके से की गयी धोखाधड़ी से ग्राहकों से की जा रही शिकायत के बावजूद इंडियन ऑइल के सांई राम फिल्लिंग स्टेशन, चेतकपुरी ग्वालियर के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी।

मेरा इंडियन ऑइल कंपनी के अधिकारियों से पुनः अनुरोध है कि इस सांई राम फिल्लिंग स्टेशन, चेतकपुरी ग्वालियर का लाइसेन्स निरस्त कर इसे बंद किया जाय और कंपनी के मिलीभगत कर सांठगांठ करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्यवाही की जाय ताकि ग्राहकों के साथ कमतौली और दुर्व्यवहार करने वाले पंप को बंद कर अन्य लोगो को सख्त संदेश दिया जा सके।

विजय सहगल

           

 

       

   


रविवार, 8 मार्च 2026

"अम्माँ" - कहां तुम चली गईं?

"अम्माँ" - कहां तुम चली गईं?








पौर मे देखा आँगन निहारे।
रसोई भी खोजी, थी तेरे सहारे॥
मंदिर में आसन औं खाली, पिढ़ी थी।
इतनी भी जावे की क्या जल्दी पड़ी थी॥
ठाकुर, कलेवा करा के तो जातीं ।
मुहँ अपना थोड़ा जूठारे तो आतीं॥
बिना सहारे के चलना था भारी ।
लंबी डगर कैसे तूने गुजारी ॥
अब न सफ़र करो।
कुछ तो खबर करो॥ ,
जहाँ तुम चली गईं?
कहां तुम चली गईं ?


स्कूल से जब घर आता था।
तुम को जब न पाता था॥
सीधा नानी घर जाते थे।
पक्का तुम मिल जाते थे॥
पर आज वहां मैं टेर रहा ।
हर कोई आंखें फ़ेर रहा॥
हमसे नजर चुराता है।
मुझ को ये बतलाता है॥
आज तुम यहीं नहीं ।
कहां फिर चली गईं ॥
कुछ तो खबर करो ।
अब न डगर चढ़ो॥
जहाँ तुम चली गईं?
कहां तुम चली गईं?



घबड़ाता है दिल बेचैनी है।
ये कैसी अजब अनहोनी है॥
रात में जब उठ जाते हैं।
विस्तर पे न तुझ को पाते हैं॥
पथरीली राहों में कांटे भी होंगे।
नंगे पैरों को रुलाते भी होंगे॥
चप्पल बिना कैसे चलती तूँ होगी।
तेरी कमी मुझको सलती तो होगी॥
जाना कहां था, बता के तो जाती।
जाने के पहले, जता के तो जाती ॥
अब न सबर करो ।
जल्दी खबर करो ॥
जहाँ तुम चली गई ।
कहाँ तुम चली गई ॥


दुःखों ने फिर से घेरा है।
चारों तरफ अंधेरा है ॥
पहले भी तुमने साधा है।
दूर रहीं सब बाधा है ॥
हर पीड़ा को बेध दिया ।
चक्रव्यूह को भेद दिया ॥
फिर से आज उबारो मां ।
आये संकट को टारो मां ॥
राहें न सूझ रहीं ।
भूलें क्या बूझ रहीं ॥
सच्ची ख़बर करो ।
अब तो ख़बर करो ॥
तहां तुम चली गईं।
कहां तुम चली गईं ॥

-विजय सहगल