"नगदी रहित बीमा यात्रा"
पिछले कुछ
समय से कुछ तकलीफ थी सोचा क्यों न डॉक्टर
को दिखा कर सलाह ले ली जाये। बैसे न भी दिखाने जाता तो भी चल जाता क्योंकि ऐसी कोई
भारी तकलीफ नहीं थी जिसकी बजह से दिनचर्या मे कोई समस्या हो पर सेवानिवृत जीवन के
पश्चात बीमा लिया ही था तो सोचा क्यों ने
इस का लाभ ले बीमा को परीक्षा की कसौटी पर कस लिया जाये, ऐसा सोच कर मैंने अपोलो
हॉस्पिटल की राह पकड़ी। प्रातः 11.00 "शाहीन बाग का सच" जानने के लगभग 3.00 घंटे बाद अपोलो हॉस्पिटल चिकित्सकीय सलाह हेतु डॉक्टर के
पास पहुंचा। दिल्ली मे नौकरी मे रहते तीन साल से लगातार वार्षिक चिकित्सा सुविधा
का लाभ लेते हुए अपोलो जाने का अभ्यस्त तो था ही तो सीधा डॉक्टर के पास हाजिर हो
गया। डॉक्टर ने जांच के बाद उम्र के साथ होने बाली परेशानी का जिक्र कर ऑपरेशन की
सलाह दे डाली। यध्यपी "ऑपरेशन" भारतीय सांस्कृति मे एक अपने आप मे बड़ा
ही गंभीर शब्द है जिसे मै बहुत ही साधारण तरीके से लेता हूँ और मानता हूँ कि ये भी
एक तरह अन्य समस्याओं की तरह एक समस्या है जिसका निदान सिर्फ चिकित्सक ही कर सकता
है तो अपने आराध्य को याद कर क्यों न अपने आपको
चिकित्सक के हवाले कर निश्चिंत हुआ जाये।
लेकिन ऑपरेशन की चर्चा परिवार को बगैर बताये तो संभव नहीं थी। अचानक इस
मुद्दे पर इस चर्चा से घर का माहौल कुछ भय मिश्रित तनाव मे होना स्वाभिक था पर डॉक्टर से हुई चर्चा के बारे
मे बमुश्किल सबको समझा सका कि ये एक मामूली ऑपरेशन है चिंता जैसी कोई बात नहीं।
परिवार जनों की भिन्न भिन्न राय जैसे कि क्यों न
दूसरे डॉक्टर की सलाह ले? कब से तकलीफ थी? पहले क्यों नहीं दिखाया? आदि ऐसे सबाल जो स्वाभाविक थे ने मेरे द्रढ़ निश्चय को हिलाने का स्थिति
उत्पन्न कर दी पर जब समस्या का निदान देश के एक प्रसिद्ध हॉस्पिटल के प्रिसिद्ध
डॉक्टर श्री सुशील जैन को करना है तो इस
मुद्दे पर घर मे अनावश्यक इतना विचार विमर्श क्यों? एक बारगी लगा कोई ऐसा स्थान या परिस्थिति होती कि
घर मे बगैर किसी को बताये इलाज़ करा बापस आ जाता, पर क्या ऐसा करना संभव हो पाता? हमे याद है एक बार लखनऊ
मे मेरे बायें हाथ की अंगुली के फैक्चर
को हज़रत गंज, लखनऊ स्थित जिला हॉस्पिटल मे दिखाने गया था जहां पर हमारे एक
रिश्तेदार डॉक्टर थे तुरंत ही एक्सरे कर उन्होने प्लास्टर चढ़ाने का निर्णय लिया और
शीघ्र ही साथी डॉक्टर से मिल कर प्लास्टर की तैयारी के तहत बगैर वेहोश किये ही
हड्डी सेट कर प्लास्टर चढ़ा डाला। बाप रे
बाप ऐसा दर्द और ऐसी वेदना मैंने ज़िंदगी
मे कभी महसूस नहीं की थी जिससे होकर उस दिन मै गुजरा था। वस प्राण ही नहीं निकले थे उस दिन। जब कभी उस दिन
को सोचता हूँ तो डर के मारे रोंगटे खड़े हो जाते। लगभग 2 घंटे तक मै हॉस्पिटल की
कुर्सी पर ही निढाल, वदहाल पड़ा दर्द को सामान्य होने का इंतज़ार करता रहा। हमे याद
है उस दिन भी घर पर भाई साहब-भाभी को बगैर बताये बैंक से सीधे हॉस्पिटल पहुँच गया था।
आज जब डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह लिखते पर्चा बना
दिया तो हमने भी सोचा लगे हाथ नगदी रहित बीमा स्कीम के अंतर्गत टीपीए से जानकारी
ले कर उसको नगदी रहित स्वीकृति प्राप्त कर ली जाये। जब हॉस्पिटल स्थिति टीपीए
कार्यालय से संपर्क किया तो उन्होने एक फ़ॉर्म भर कर बापस करने को कहा। फ़ॉर्म का एक
भाग डॉक्टर से भरबा कर तथा दूसरा खुद भरकर
नियमानुसार अनुमानित खर्च बनवाने हेतु हम संबन्धित विभाग मे पहुंचे तो उन्होने भी
बमुश्किल 5 मिनिट मे अनुमानित खर्च बना हमे दे दिया। तब लगे हाथ हमने ऑपरेशन की
तारीख़ स्वयं निश्चित कर प्रिक्रिया को टीपीए के पास प्रस्तुत किया। अब समस्या थी
कि इन्श्योरेंस से संबन्धित कोई आईडी या पॉलिसी
संख्या आदि उस समय वहाँ हमारे पास नहीं
थी। लेकिन टीपीए सहायता डेस्क ने बड़ी तत्परता से केवल बैंक का नाम और पीएफ़ नंबर पूंछ कर सारी डिटेल
उपलब्ध करा दी। आधार की प्रति लेकर एवं अन्य
छोटी-मोटी पूंछ-तांछ कर फ़ॉर्म को स्वीकार कर लिया और स्वीकृति एसएमएस के जरिये 1-2
घंटे मे जारी करने का आश्वासन दिया। अगले
दिन रविवार होने के कारण टीपीए के कुछ
प्रश्नों के जबाब हॉस्पिटल से विलंब के कारण नगदी रहित स्वीकृति मिलने मे कुछ देर
हुई। सोमवार को एक नई तरह की समस्या आन पड़ी टीपीए से जो स्वीकृति मिली बो मात्र
चालीस हजार के लिए थी जबकि अस्पताल ने अनुमानित बिल 1.05 लाख का दिया था। अब हमे
शंका हुई कि 1.05 के विरुद्ध 0.40 की स्वीकृति मे कही ऐसा तो नहीं कि अंतर की राशि
0.65 लाख हमे अपनी जेब से वहन करना पड़े। इस शंका के समाधान हेतु हमने अस्पताल, ओबीसी मेडिकल समाधान
व्हाट्सप्प मे श्री आर के भसीन, श्री विनय मल्होत्रा एवं
सेफवे टीपीए से इस संबंध मे पूंछ तांछ की सभी ने यही बताया टीपीए स्वीकृति
अनुमानित बिल के 40-50 प्रतिशत ही स्वीकृत करता है फ़ाइनल बिल के समय शेष राशि का भुगतान
कंपनी सीधे हॉस्पिटल को करेगी।
उक्त स्पष्टीकरण के बाद हमने दिनांक 15 को हॉस्पिटल
मे दाखिल होकर ऑपरेशन कराया दो दिन के अस्पताल मे दाखिले के बाद 17 जनवरी को
हॉस्पिटल मे सफल ऑपरेशन के बाद मुक्त करने का निर्णय लिया। नगदी रहित भुगतान प्रिक्रिया पूरी करने मे कुछ अधिक समय लग रहा था श्री आरके
भसीन जी की सलाह पर हमने मेडम एंजिलिना को फोन कर साहायता करने को कहा उन्होने आधा
घंटे मे स्वीकृति भेजने का आश्वासन दिया और मुश्किल से 20 मिनिट मे 1.22 लाख के
भुगतान हॉस्पिटल को प्राप्त हो गया हमारे
द्वारा प्रारम्भिक जमा राशि से लगभग 3 हजार का भुगतान को काट कर शेष राशि हमे नगद
बापस कर दी गई। इस तरह नगदी रहित बीमा का पहला अनुभव सेफवे टीपीए के साथ अच्छा
रहा। यहाँ यह लिखना आवश्यक है कि सेफवे
टीपीए की मेडम एंजिलिना सहित अन्य कर्मचारी
जिन्हे मै नहीं जनता कि वे कौन है या
किस पद पर कार्यरत है लेकिन उनकी तत्पर ग्राहक सेवा उस संस्थान की गरिमा को ग्राहकों के मन मे बढ़ाता
और दिलों मे गहरा सम्मान दिलाता है जिसके लिए मेडम एंजिलिना और उनकी टीम को
हार्दिक साधुवाद।
यहाँ इस अनुभव लिखने का मकसद अपना चिकित्सकीय अनुभव
लिखना तो है ही साथ ही अपने ऐसे मित्रों, रिशतेदारों, शुभचिंतकों, सहचरों, जानने बालों खास तौर पर नौजवान साथियों को ये संदेश देना है कि वे सभी आकस्मिक समय मे
आने बाली चिकिसकीय समस्यों के निदान के लिये अपने परिवार की सुरक्षा हेतु यदि कोई
अन्य चिकित्सकीय सुरक्षा कवच उपलब्ध नहीं है तो मेडिकल इंश्योरेंस
पॉलिसी अवश्य ले।
विजय सहगल



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