रविवार, 17 मई 2026

श्री भद्र मारुति मंदिर, ग्राम-वेरुल, संभाजी नगर महाराष्ट्र

 

"श्री भद्र मारुति मंदिर, ग्राम-वेरुल,  संभाजी नगर महाराष्ट्र"







रविवार 13 जुलाई 2025 को अपने यात्रा प्रवास के दौरान महाराष्ट्र राज्य के संभाजी नगर जिले मे स्थित खुल्दाबाद मे स्थित श्री भद्र मारुति मंदिर मे लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस पवन भूमि के आसपास जहां बारहवें  ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर (5 किमी॰), विश्व प्रसिद्ध एलोरा की गुफाएँ (4किमी॰) की दूरी पर स्थित हैं। प्रातः ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर के परम दर्शनों के पश्चात शाम को जब विदित हुआ कि यहाँ लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर है तो दर्शनों की अभिलाषा बलवती हो गई। इसके पूर्व प्रयागराज मे अनेकों बार जाना हुआ और हाल ही मे महा कुम्भ मे पूरे कुम्भ क्षेत्र मे भी घंटों रहना और भ्रमण करना हुआ, मन मे तीव्र आकांक्षा और अभिलाषा के बावजूद  पर प्रयाग के  संगम तट पर स्थित लेटे हनुमान के दर्शन अत्याधिक भीड़ के कारण  भाग्य मे नहीं लिखे थे, लेकिन कहीं कुछ तो नियति या प्रारब्ध था कि प्रयाग मे  लेटे हुए हनुमान के दर्शनों के पूर्व हजारों किमी॰ दूर, लेटे हनुमान श्री भद्र मारुति के दर्शन संभाजी नगर के खुलदाबाद कस्बे मे होंगे। वास्तव मे मुझे तो जानकारी भी नहीं थी कि प्रयागराज के अलावा कहीं अन्य जगह भी कोई लेटे हुए हनुमान का मंदिर भी है? बाद मे ज्ञात हुआ कि प्रयागराज और भद्रवती (खुल्दबाद) के साथ ही मध्य प्रदेश के जिला पाढुर्ना पूर्व छिंदवाड़ा के  जामसावली मे भी लेटे हुए हनुमान मंदिर स्थित हैं।  

मंदिर मे लेटे हुए हनुमान जी के दर्शनों की एक अलग ही उत्कंठा, उत्सुकता और उमंग मन मे लिए हम अपनी पत्नी रीता के साथ मंदिर मे पहुंचे। मंदिर के विशाल  प्रांगण देख कर, नये शहर मे कार पार्किंग के अदृश्य भय और चिंता नहीं रही। हम लोग शायद मंदिर के पिछले गेट से प्रवेश कर एक विशाल बरामदे और हाल को पार कर मंदिर प्रांगण मे पहुंचे। रविवार के कारण बहुत ज्यादा श्रद्धालु नहीं थे। प्रायः मंगलवार और शनिवार को भक्तों की परंपरागत भीड़ तो पूरे भारत मे सर्विदित है लेकिन इस मंदिर मे हनुमान जयंती और रामनवमी पर पूरे संभाजीनगर क्षेत्र से लोग पैदल चलकर दर्शनों को आते हैं। ऐसी किवदंती है कि प्राचीन काल मे खुल्दाबाद जिसे भद्रावती के नाम से जाना जाता है,  के महान प्रतापी शासक राजा भद्रसेन, भगवान राम के परम भक्त थे और उनकी स्तुति मे अपने सुमधुर कंठ से उनके भजन गाया करते थे। एक बार राजा भद्रसेन के भक्ति गीतों को श्री हनुमान जी मंत्रमुग्ध हो  भाव विभोर हो गये और अनजाने मे ही समाधि मे लीन हो कर विश्राम की मुद्रा मे लेट  गए। जब राजा ने हनुमान जी को समाधि की अवस्था मे देखा तो उनसे सदा यहीं रह भक्तों को अपना आशीर्वाद देने की प्रार्थना की। राजा की अटूट भक्ति और श्रद्धा से हनुमान जी प्रसन्न हो गए और शास्वत रूप से विराजमान हो कर अपना आशीर्वाद प्रदान किया। ऐसी भी मान्यता है कि हनुमान जी जब लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान जी जिस पर्वत को लेकर लंका जा रहे थे रास्ते मे इसी स्थान पर उन्होने विश्राम किया था। एक अन्य लोककथा के अनुसार प्रसिद्ध संत श्री स्वामी समर्थ रामदास ने लेटे हुए हनुमान की खोज की थी और इस स्थान को  श्री भद्र अर्थात "शुभ" और  मारुति अर्थात "हनुमान" मंदिर के रूप मे स्थापित किया।

मध्यकाल मे जब इस क्षेत्र पर मुगलों का कब्जा हो गया तो आततायी मुगलों द्वारा इस मंदिर को भी नष्ट किया गया लेकिन कुछ लोगों ने मंदिर की प्रतिमा को बचा कर छुपा दिया। 1960 मे प्रतिमा को इस भव्य मंदिर मे स्थापित कर इसे वर्तमान स्वरूप दिया गया तब से इस मंदिर मे श्री भद्र मारुति के दर्शनों हेतु श्रद्धालु बड़ी संख्या मे हर रोज आते हैं। मंदिर मे भगवान श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता के भी मंदिर हैं।

मंदिर के केंद्र मे स्थित गर्भगृह मे श्री हनुमान की लेटी हुई प्रतिमा है। प्रतिमा के चारों ओर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बड़ी बड़ी जंगले/खिड़की नुमा आकृति बनाई गयी है जहां से भक्तगण मारुति नन्दन के दर्शन कर सकते हैं जिनको स्टील की रैलिंग द्वारा घेरा गया हैं जिसमे से होकर दर्शनार्थी दर्शन करते हैं। हम दोनों मे भी परिक्रमा  लेते हुए भद्र मारुति  हनुमान की प्रतिमा के दर्शन, हर दिशा और कोण से किए। तत्पश्चात मंदिर मे स्थित गर्भगृह के चारों ओर बने मंडपम मे बैठ कर श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया।

जहां एक ओर महाराष्ट्र के संभाजी नगर जिले मे स्थित तहसील खुल्ताबाद के वेरुल गाँव की इस धरा पर सनातन धर्म के पवित्र बारह ज्योतिर्लिंग मे से एक  घृष्नेश्वर महादेव स्थित है और दुनियाँ का सबसे सुंदर एक चट्टान को काट कर, तराशकर  बनाई गयी एलोरा की विश्वप्रसिद्ध गुफाएँ विशेषकर (गुफा संख्या सोलह) कैलाश मंदिर होने का सौभाग्य प्राप्त है वहीं एक दुष्ट, आततायी, धर्मांध मुगल शासक औरंगजेब की मृत्यु स्थल भी यहाँ है। समय एक साक्षी की तरह वेरुल मे दुनियाँ को ये संदेश देता है कि सनातन के बारह ज्योतिर्लिंग मे से एक और विश्व के सर्वाधिक एलोरा निर्माण को देखने हर रोज़ लाखों लोग यहाँ आते हैं वहीं ध्वंस का प्रतीक की मज़ार पर कदाचित ही लोग जाते हैं।

विजय सहगल       

शनिवार, 9 मई 2026

प॰ बंगाल चुनाव 2026- ममता बैनर्जी के किले मे भाजपा की सेंध

 

"प॰ बंगाल चुनाव 2026- ममता बैनर्जी के किले मे भाजपा की सेंध"









धर्म के आधार पर देश के विभाजन के कट्टर विरोधी, राष्ट्रवाद के प्रखर समर्थक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक स्व॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पश्चिमी बंगाल मे पहली बार    अंततः 4 मई 2026 को,  तृणमूल कॉंग्रेस के अभेद्य किले मे सेंध लगा कर भारतीय जनता पार्टी ने आज 11 दिसम्बर 2026 शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व मे अपनी सरकार का गठन कर ही लिया। पश्चिमी बंगाल राज्य मे शून्य से शिखर तक और गंगोत्री  से गंगा सागर तक  की इस यात्रा मे भाजपा की राह बहुत आसान नहीं रही। काँटों से भरी इस पथरीली राह मे चलते हुए भाजपा के अनेकों कार्यकर्ताओं की पिछले लोकसभा, विधान सभा और नगर पंचायतों के चुनावों मे नृशंस हत्या, आगजनी हिंसा की गयी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता राज्य मे मारे गए अपने 321 कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया और उनके बलिदानों से भाजपा को राज्य मे मिली आशातीत  सफलता के लिए याद किया। इस अवसर पर भाजपा ने  एक एक बगलादेशी घुसपैठियों को चुन चुन कर उनके देश बापस भेजने के संकल्प को भी दुहराया जो देश और राज्य के विकास मे सेंध मार्कर दीमक की तरह खा रहा है।   

जब तृणमूल कॉंग्रेस के पिछले 15 वर्ष के शासन काल पर दृष्टिपात करते हैं तो स्पष्ट होता है कि जिस प्रयोजन, लक्ष्य और उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तृणमूल कॉंग्रेस की मुखिया ममता बैनर्जी ने 20 मई 2011 को राज्य की बागडोर संभाली थी और  34 साल के वाम मोर्चा के कुशासन का अंत किया था, दुर्भाग्य से ममता बैनर्जी उन लक्ष्यों की  प्राप्ति मे असफल रहीं और उन  पर  खरी नहीं उतर पाईं। ये ममता बैनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा और सुनहरा  मौका था कि वे वाम मोर्चा सरकार के 34 सालों के  भय, भ्रष्टाचार, टोलाबाजी, कट मनी और संगठित अपराध गिरोह को समाप्त कर एक भय रहित स्वतंत्र और निष्पक्ष वातावरण निर्मित कर समाज के वंचित और दबे कुचले वर्ग के विकास और उन्नति के लिए कार्य करती, लेकिन दुर्भाग्य से जिन अपराधियों, गुंडों और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लड़ कर ममता बैनर्जी मई 2011 मे पश्चिमी बंगाल मे सत्ता मे आयीं और उन्ही कपटी, धूर्त चाटुकारों के चंगुल मे फंस कर कुशासन, कुप्रबंधन और अन्यायपूर्ण राज्य की एक ऐसी मिसाल बन गयी जिसका स्वतंत्र भारत मे कहीं कोई उदाहरण देखने और सुनने मे नहीं मिलता। पश्चिमी बंगाल मे चुनाव पश्चात हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा हैं। हाल ही मे 6 मई 2026 को शुभेन्दु अधिकारी के पीए चन्द्र नाथ रथ की हत्या उनके घर के पास कर दी गयी, भाजपा के नेताओं ने इस हत्या के आरोप टीएमसी के नेता और मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बैनर्जी पर लगाए गये। ये ममता बैनर्जी और तृणमूल कॉंग्रेस का अहंकार, अभिमान और घमंड ही था कि ममता बैनर्जी के भतीजे अभिषेक बैनर्जी जिन्हे  टीएमसी के लोग  भाइपो! के नाम से भी बुलाते हैं, ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बंगाल चुनाव नतीजों के बाद 4 मई को कोलकाता मे रहने का चैलेंज दिया था। यही नहीं भइपो! के, दुस्साहस, ढिठाई और धृष्टता देखिये कि अपने विरोधियों को ललकारते हुए वो कहता हैं कि 4 मई के बाद देख लूँगा!! दिल्ली से किसके बाप आएंगे बचाने!! ये तृणमूल के बड़बोले पन, दंभ हेकड़ी और अक्खड़पन की पराकाष्ठा थी जो तृणमूल कॉंग्रेस को चुनावों मे ले डूबी।  

तृणमूल कॉंग्रेस द्वारा सत्ता प्राप्ति हेतु अनुचित और अन्याय पूर्ण चुनावी पृक्रिया अपनाने के आरोप लगना चिंता और हैरानी पैदा करने वाला है। तृणमूल कॉंग्रेस द्वारा सत्ता प्राप्ति हेतु अपनाए गए चुनावी हथकंडे किसी भी लोकतान्त्रिक प्रणाली के लिए शर्मनाक और कलंकित करने वाले हैं। तृणमूल कॉंग्रेस के समर्थकों द्वारा  लोगो और आम मतदाताओं को मतदान केन्द्रों तक जाने से रोकने के लिए,  चुनाव पूर्व बमबाजी, हिंसा और आगजनी फैला कर दहशत और डर का माहौल निर्मित कर शांति प्रिय नागरिकों को वोट न करने देने जैसे चालबाजी, बेईमानी और फरेब को अपनाया गया। इस चुनावी पृक्रिया का सबसे स्याह,  काला और आपत्तिजनक पक्ष बंग्लादेशी घुसपैठियों और तृणमूल कॉंग्रेस के गुंडों, असामाजिक तत्वों द्वारा हिंदुओं विशेषकर अनुसूचित जाति, मतुआ समाज, नाम शूद्र समाज  और जनजाति के लोगों और ख़ासकर महिलाओं को हिंसा, बलात्कार और हत्या की धमकी देकर वोट न करने देने की नीति को अपनाया गया। समाज के जिन वंचित और कमजोर वर्ग ने तृणमूल कॉंग्रेस के इस तानाशाही रवैये की अवेहलना की उन लोगो की हत्या, आगजनी पिछले चुनावों मे की गयी। तृणमूल कॉंग्रेस के  मुस्लिम गुंडों और असामाजिक तत्वों द्वारा अपने धर्म की महिलाओं को छोड़कर अन्य धर्मों की महिलाओं के साथ बदसलूकी, अपमान जनक व्यवहार के उदाहरण चिंताजनक करने वाले थे। 24 परगना के संदेशखाली के तृणमूल के नेता और बाहुबली  शाहजहाँ शेख और फाल्टा विधान सभा का तृणमूल प्रत्याशी जहाँगीर खान उनमे से मुख्य हैं। ऐसे लोगों की जांच कर उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही भाजपा की प्राथमिकता होना चाहिए ताकि धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव करने और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा फैलाने वालों लोगों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हो और  लोगों को न्याय मिल सके ।        

पिछले दो बार से ममता बैनर्जी को उनके ही गढ़ मे हराने वाले शुभेन्दु अधिकारी ने जिस धैर्य, हिम्मत और बहादुरी  से तृणमूल कॉंग्रेस के कैडर बेस्ड असामाजिक तत्वों से लड़ते हुए सत्ता हांसिल की वो एक मिसाल हैं। पश्चिमी बंगाल के 2026 के इस चुनाव मे  शुभेन्दु अधिकारी की इस अप्रत्याशित और अनपेक्षित सफलता को अल्पमत मे आयी तृणमूल कॉंग्रेस और स्वयं भवानीपुर विधान सभा सीट से शुभेन्दु अधिकारी से पराजित हुई ममता बैनर्जी ने अपने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने से इंकार कर भारतीय संविधान को न मानने और झुठलाने की अधम और असफल  कोशिश की, मानों वे इस्तीफा नहीं देंगी तो नया मुख्यमंत्री शायद शपथ ही न ले सके? उन्हे शायद इस बात की गलतफहमी थी कि जिस गाँव मे मुर्गा नहीं होगा वहाँ सवेरा नहीं होगा? वे शायद 1975 मे श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगा कर 19 महीने गैरकानूनी तरह से सत्ता हथियाने के सबक को भूल  गयी। लेकिन उनकी इस भ्रांति और भ्रम को पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल श्री आर एन रवि ने 7 मई 2026 को विधान सभा को भंग कर 18वीं विधान सभा के गठन का मार्ग प्रशस्त कर दिया। एसआईआर के बाद पश्चिमी बंगाल मे  अब तक हुए चुनावों मे ये पहली बार चुनाव, बिना किसी चुनावी हिंसा और हत्या, आगजनी  के,  चुनाव आयोग द्वारा, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का इतिहासिक रेकॉर्ड बनाया। केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण लोगो का  निडर होकर अब तक का उच्चतम मतदान प्रतिशत इस बात का सबूत है कि पश्चिमी बंगाल मे इस बार बिना भय और पक्षपात के मतदान किया और देश के अन्य राज्यों के मतदाताओं को ये संदेश दिया कि प्रत्येक मतदान पृक्रिया मे अधिक से अधिक मतदान करना ही सच्चा लोकतन्त्र है। निश्चित ही चुनाव आयोग और केन्द्रीय सुरक्षा बल इस के लिए बधाई के पात्र हैं।

शुभेन्दु अधिकारी के आज मुख्यमंत्री के रूप मे पश्चिमी बंगाल राज्य के मुख्यमंत्री के रूप मे कार्यभार ग्रहण करने से स्वयं उन पर और भारतीय जनता पार्टी और एक नई एवं महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी आ गयी हैं कि अपनी नीतियों और कार्यक्रमों से राज्य मे व्याप्त अराजकता, हिंसा और भ्रष्टाचार को समाप्त कर राज्य के लोगों को कल्याण के लिए, महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सही ढंग लागू  करे और सोनार बंगला के अनुरूप एक स्वर्णिम बंगाल का निर्माण करें।  

विजय सहगल   

 

         


रविवार, 3 मई 2026

चुनाव 2026-शाबाश!! भालो करा, प॰ बंगा

 

"चुनाव 2026-शाबाश!! भालो करा, प॰ बंगा"







पश्चिमी बंगाल राज्य की बांग्लादेश से 2217 किमी लंबी सीमा लगी होने के कारण,    स्वतन्त्रता के बाद से पश्चिमी बंगाल राज्य के चुनाव सदैव से ही बंगलादेशी घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय पर एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। 1977 से 2011 तक लगभग 34 साल के मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट सरकार और 2011 से 2026 तक पिछले 15 वर्षों से तृणमूल कॉंग्रेस की सरकारों पर अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों को आश्रय देकर चुनाव धांधली के आरोप लगते रहे हैं। इन दलों पर समय समय पर ये भी आरोप लगे हैं कि एक संगठित अपराध व्यवस्था स्थापित कर लोगों को मताधिकार से वंचित कर सरकार के हर स्तर पर कट मनी, कमीशन  के माध्यम से भय और भ्रष्टाचार स्थापित कर चुनावों को जीता नहीं अपितु लूटा गया है। ये पहली बार हुआ हैं कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों और शक्तियों  का उपयोग कर इन संगठित अपराधियों की इस व्यवस्था को ध्वस्त कर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराएं गए है जिसका नतीजा पश्चिमी बंगाल मे अब तक का उच्चतम मतदान प्रतिशत से दिखलाई दे रहा है।                                    

पाँच राज्यों मे हुए 2026 के मतदान का परिणाम कुछ भी हो लेकिन जिस तरह पश्चिमी बंगाल के मतदाताओं ने चुनाव मे देश की स्वतन्त्रता के बाद से, दोनों चरणों मे अब तक हुए  92.47% से अधिक मतदान कर, देश मे अब तक के सर्वाधिक मतदान का  रिकॉर्ड तोड़ दिया, इसके लिये पश्चिमी बंगाल के मतदाता बाकई मे बधाई के पात्र हैं। इस मतदान की एक और खूबी ये रही कि इस मतदान प्रतिशत मे पुरुषों का मत प्रतिशत 91.74 के मुक़ाबले महिलाओं का मत प्रतिशत 93.24% रहा है जो जो पुरुषों की तुलना मेन  1.5 प्रतिशत अधिक रहा, जो  भी एक रिकॉर्ड है। जिस प॰ बंगाल मे कोई भी इलैक्शन, चुनाव पूर्व, चुनाव के दौरान और चुनाव के पश्चात  हिंसा, हत्या और आगजनी के बिना  कभी संभव न हुआ हो उस बंगाल मे चुनाव 2026 का चुनाव छुट-पुट हिंसा को छोड़कर बिना किसी बड़ी हिंसा और हत्या के पश्चिमी बंगाल मे चुनाव संपादित होना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिये। बिना भय, पक्षपात और हिंसा के स्वतंत्र  चुनाव संपादित कराने मे केंद्रीय चुनाव आयोग और पश्चिमी बंगाल राज्य चुनाव आयोग की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत  ने भी एक नागरिक के तौर पर पश्चिमी बंगाल के पहले चरण मे हुए सर्वाधिक चुनाव मतदान के लिए राज्य की  जागरूक जनता   की प्रशंसा और बड़ाई की है। उन्होने कहा कि एक नागरिक के रूप मे हुए इतने अधिक मतदान के लिए उन्हे गर्व महसूस हुआ है। केंद्रीय और राज्य चुनाव आयोग ने पश्चिमी बंगाल के चुनावी हिंसा के इतिहास को देखते हुए, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या मे केन्द्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की  भी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पश्चिमी बंगाल चुनाव 2026 के पूर्व चुनाव सूची का विशेष गहन पुनिरीक्षण (SIR) के दौरान  लगभग 92 लाख मतदाताओं का नाम काटे जाने से उपजे  संभावित टीएमसी के असंतोष को  देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती करना और भी आवश्यक हो गया था।

चुनाव 2026  की घोषणा के बाद जिस तरह से चुनाव आयोग ने सक्रिय होकर उन राज्य पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के विरुद्ध  सख्त रुख अपनाया और केंद्रीय बलों के साथ राज्य पुलिस की संयुक्त तैनाती कर एक कठोर संदेश राज्य के राजनैतिक दलों के बाहुबलियों, गुंडों और असामाजिक तत्वों को दिया गया कि राज्य मे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों मे किसी भी गड़बड़ी, हिंसा और अराजकता को सख्ती से निपटा जाएगा। जिसका असर ये हुआ कि एक ओर तो टीएमसी के इन संगठित छुट भैये अपराधियों, गुंडों  और अराजक तत्वों को समय रहते चुनाव पूर्व हिंसा फैलाने से रोका गया वहीं दूसरी ओर  राज्य के मतदाताओं द्वारा  बिना भय, पक्षपात के निडर होकर अब तक के सर्वाधिक मतदान को इस सुखद परिणाम के रूप मे देखा जा सकता है, इसलिए तृणमूल कॉंग्रेस सरकार का  चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाना कि केंद्रीय बलों की तैनाती राज्य की जनता को डराने के लिए की गयी हैं,  सच से परे मिथ्या  है। ये कहना अतिसन्योक्ति न होगी कि यदि केंद्रीय सुरक्षा  बलों, राष्ट्रीय जांच एजन्सि सहित अन्य राज्य पुलिस बलों  की तैनाती नहीं की गयी होती तो राज्य के टीएमसी द्वारा पोषित संगठित अपराधियों द्वारा पिछले चुनावों की तरह चुनावी  हिंसा, आगजनी, बमबाजी, हत्या को उसी तरह अंजाम देकर भय के माहौल को बनाया जाता जिससे शांति पसंद मतदाता कदाचित ही मतदान के लिए मतदान केन्द्रों तक निकलते।

जहां एक ओर राज्य मे हुए सर्वोच्च मत प्रतिशत देखने को मिला वही टीवी मीडिया पर आम मतदाताओं के विरोधाभाषी ब्यान चिंतित, हैरान और परेशान करने वाले है। विभिन्न टीवी चैनलों पर जहां मुस्लिम बाहुल विधान सभा क्षेत्रों मे महिला सुरक्षा, बेरोजगारी और टीएमसी के  भ्रष्टाचार कट मनी जैसे विषयों के बावजूद  खुल कर ममता के प्रति समर्थन व्यक्त किया इसके विपरीत अन्य विधान सभा क्षेत्रों मे हिन्दू  मतदाताओं ने महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर चर्चा तो की लेकिन खुल कर किसी भी राजनैतिक दल के पक्ष मे समर्थन व्यक्त नहीं किया। इन मतदाताओं के चेहरे पर टीएमसी के बदलाब या भाजपा के समर्थन का सुनते ही एक अदृश्य भय देखने को मिल जाता जिसको उनके चेहरों पर उभरे भावों को देख कर स्पष्ट रूप से देखा और पढ़ा जा सकता था। इसका एक बड़ा कारण टीएमसी के मुस्लिम नेताओं औग गुंडों द्वारा सिर्फ हिन्दू समुदाय और उनकी महिलाओं के साथ अभद्रता, दुर्व्यवहार और धमकी देकर वोट देने से रोकने की घटनाएँ देखने को मिली ऐसी अधिकतर घटनाएँ 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र मे दिखाई पड़ी जहां से टीएमसी के विधायक जहांगीर द्वारा डराने, धमकाने की घटनाएँ सुनाई दी।  पूरे देश मे सड़क, रेल और हवाई  परिवहन जैसी आधारभूत संरचना, निर्बल और कमजोर वर्ग की महिलाओं और किसानों की हितैषी योजनाओं को नज़रअंदाज़ कर सिर्फ एक दल विशेष का समर्थन और दूसरे दल के प्रति लगभग ज़ीरो सहमति, सहनशक्ति और सहिष्णुता रखने वाले ऐसे मतदाताओं के मनोविज्ञान  पर विश्वविध्यालय के शोधर्थियों, विध्यार्थियों  और समाज विज्ञानियों को शोध करना चाहिये।

जहां एक ओर केंद्रीय चुनाव आयोग और प॰ बंगाल राज्य चुनाव आयोग और उसकी संबन्धित एजेंसियाँ, केंद्रीय और राज्य  सुरक्षा बल और संबन्धित विभाग  राज्य मे सफल चुनाव सम्पन्न कराने के लिए बधाई का पात्र है। पश्चिमी बंगाल के चुनाव 2026 का नतीजा कुछ भी हो लेकिन एक बात तो निश्चित हैं कि पश्चिमी बंगाल के मतदाताओं ने जिस निडरता से अब तक का सर्वाधिक मतदान कर सारे देश की जनता को एक स्पष्ट संदेश तो दिया ही है कि लोकतन्त्र के प्रति सच्चा समर्थन और समर्पण निडर होकर मतदान से ही संभव किया जा सकता है।           

विजय सहगल