शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

Golden of Caves Park चेरापूँजी (मेघालय)



 

गुफाओं का पार्क (Golden of Caves), चेरापूँजी (मेघालय)














काफी दिनों पूर्व मैंने अपने ब्लॉग में एशिया के सबसे साफ सुथरे गाँव मावलिननाँग, का उल्लेख किया था। उसी संदर्भ में  आज पुनः सोहरा (चेरपूँजी) की सबसे साफ सुथरे भ्रमण स्थान का खासी भाषा में ब्री सीनराङ्ग पार्क अर्थात गोल्डन ऑफ केव्स का उल्लेख करूंगा। 2 नवंबर 2022 को   अपने पारवारिक मित्रों के साथ उक्त स्थान का भ्रमण करने गया जो बड़ा ही अद्भुत पार्क ही नहीं प्राकृतिक गुफाओं, जलकुंड, प्राकृतिक पुल, झरनों, घने जंगल और चट्टानों से बना एक खूबसूरत पार्क है। इस पार्क को घूमने की दृष्टि से मुख्यतः 6 स्थानों में  विभक्त किया जा सकता है। इस पार्क की खासियत है कि यहाँ प्रकृति के साथ साथ खासी जनजाति के इतिहास और लोक सांस्कृति की झलक भी मिलती है। पूर्वी खासी हिल्स जिले के लैतमावसियांग गाँव में  स्थित है जो शिलांग से लगभग 50-55 किमी और चेरापूँजी से 20-25 किमी दूर है। 2.5 हेक्टेयर के परिक्रमा पथ में  फैली ये गुफ़ाएं कहीं हल्की छोटी पहाड़ियों, कहीं झरनों और जंगलों से होकर जाती है। कहीं खाईं, कहीं चट्टानों पर लगातार  गिर रहे पानी से  प्राकृतिक रूप से बनी चट्टानों की विशेष आकार प्रकार की आकृति देखने को मिलती है, जो प्रकृति की अद्भुत रचना को देख कर ईश्वरीय चमत्कार के सामने नतमस्तक होने को मजबूर करता है। खासी जनजाति और और उनके शासकों ने इन प्राकृतिक गुफाओं में  आश्रय स्थल और शरण लेने में  किया था। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भी खासी लोगों के लिए आश्रय और पानी के प्राकृतिक बनावट के कारण इसका रणनीतिक महत्व रहा।

यहाँ स्थित एक झरने को राजा की गुफा जिसे खासी भाषा में  सीनराङ्ग सईएम कहते अद्भुत है। ऊपर गोलाकार आकृति से चारों ओर से गिर रहे झरने के बीच झरने के चारों तरफ प्राकृतिक रूप से बनी चट्टानों से  बने प्राकृतिक गलियारे में  कुर्सी और विस्तर के आकर के कारण यहाँ राजा विश्राम करते थे इसलिए इस शानदार गुफा को राजा की गुफा कहा जाता है। लगातार गिरते पानी के कारण कुछ चट्टानों में  बड़ी सुन्दर आकृतियाँ बन गई हैं। इनमे एक दिल के आकार के आकृति और उसमे भरे पारदर्शी पानी के कारण इसको खासी भाषा में  मावदोहनूड माव का अर्थ है पत्थर और डोहनूड का अर्थ दिल होता है इसलिए इसे दिल कहा जाता है यहाँ के लोग इसे अपनी मनौती या मनोकामना से जोड़कर देखते हैं इसी कारण श्रद्धा के वशीभूत मनौती पूरी होने के लिए पैसे चढ़ाते हैं।

एक गुफा में  फ़ब्बारे की तरह से गिर रहे झरने को राजा का स्नान गृह कहा जाता है। हम सभी लोग कभी सीढ़ियाँ चढ़कर पहाड़ी पर पहुंचे और कभी जलधाराओं के ऊपर बने  लकड़ी और बांस से बने पुल से गुजर कर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते रहे। हर जगह बहते पानी और झरने से गिर रहे पानी का रंग बदलते दिखलाई दे रहा था कहीं तो पानी हरा, कहीं पारदर्शी और कहीं आसमानी रंग का था जो मौसम और प्रकाश की तीव्रता से अपना रंग रूप बदलता  दिखलाई देता है, लेकिन हर पानी का स्रोत साफ और पारदर्शी था। कहीं भी प्रदूषण, दूर दूर दिखलाई नहीं दिया शायद इसी लिए मेघालय को बादलों का घर उचित ही कहा गया। एक और झरने के सामने चट्टान से बनी ढाल की तरह बनी आकृति के कारण प्रकृति का एक और अजूबा देखने को मिला जो अद्भुत ही था। गिरते झरनों के पीछे बने गलियारे से निकलना भी रोमांचकारी अनुभव था जब गिरते झरनों की कुछ फुहारे आपके शरीर को तरोताजगी का एक मीठा और ठंडा हवा का झोंका देती हैं और मन सहित आपके पूरे शरीर मे ताजगी का संचार कर देती हैं।  एक अन्य चट्टान में  एक शिशु की आकृति को देखा तो मानों प्रकृति ने अपनी कोख में  उसे पूरे प्यार और जतन से छुपा रक्खा हो। लगभग एक-डेढ़ किमी की चढ़ाई, उतराई और चलाई के बाद हम लोगों ने इस गोल्डन केव्स के अविस्मरणीय भ्रमण और गुफाओं की सुनहरी यादों को दिल मे सँजोये, ग्रुप के सदस्य, मेघालय के अगले पढ़ाव के लिए प्रस्थान कर गए।

विजय सहगल          

          

 

                                             

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

गरुण रथ मंदिर, हम्पी, कर्नाटक

 

“गरुण रथ मंदिर, (विट्ठल मंदिर), हम्पी (कर्नाटक)”













“गरुण रथ मंदिर, हम्पी (कर्नाटक)”

10 सितम्बर 2026 को मुझे हम्पी जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हम्पी कर्नाटक राज्य के विजय नगर जिले में तुंगभद्रा नदी के किनारे वसा एक एतिहासिक कस्बा है जो देवराय द्वितीय (1422-46 ई.) द्वारा  अपने विजय नगर शैली के बनवाये कलात्मक मंदिर और  अपने पुराने वैभव और संस्कृति को समेटे एक समृद्ध शाली शहर है। राजा कृष्णदेव राय (सं 1509-29) ने अपने शासन काल में इन मंदिरों में बड़े महत्वपूर्ण परिवर्तन करायें थे। इन मंदिरों की इसी एश्वर्य और भव्य धरोहर के चलते संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे विश्व धरोहर के रूप दर्जा दिया गया हैं। यूं तो हम्पी को भगवान राम के त्रेता युग से जुड़े प्रसंग में भगवान हनुमान के किष्किन्धा पर्वत से भी याद किया जाता है। यहीं पर मारुति नंदन हनुमान की जन्मस्थली भी  है। माता शबरी से जुड़े प्रसंग पंपा सरोवर भी इसी क्षेत्र में है जहाँ भगवान श्रीराम ने माता शबरी के आश्रम में आथित्य स्वीकार कर प्रेम से पगे जूठे बेर ग्रहण किये थे। 14वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था और हम्पी का वैभव लगभग 40-50 किमी क्षेत्र में फैला है। निर्विवाद रूप से हम्पी में फैले पुरातत्व कालीन अवशेषों में गरुण भगवान को समर्पित रथ मंदिर जो विजय विट्ठल मंदिर का हिस्सा है अपने  वैभव, समृद्ध विरासत, भव्यता और उसकी चमक सभी स्थलों से सर्वोपरि है। यही कारण है कि पुरातत्व विभाग ने इस स्थल तक पहुँचने के लिए वाहन स्थल और बाजार से दूर एकांत में रक्खा है जहाँ पहुँचने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की शासन द्वारा व्यवस्था की गई है ताकि हर तरह की गंदगी और प्रदूषण से इस विश्वधरोहर स्थल को बदूर रख कर बचाया जा सके।

बैसे तो हम्पी ट्रेन मार्ग से कर्नाटक राज्य के होसपेट रेल स्टेशन से 13 किमी दूर है और बेंगलुरू से लगभग 350 किमी दूर है लेकिन इस छोटे ग्रामीण कस्बे में रुकने के लिए  राज्य सरकार के पर्यटन विभाग के होटल के साथ अन्य छोटे बड़े होटल भी है और दक्षिण भारतीय खाने की सुविधा ऊपलब्ध है लेकिन होसपेट एक बड़ा शहर होने के कारण बहुत से लोग होसपेट में रुकना पसंद करते हैं लेकिन अपने चारपाहिया वाहन से यात्रा के कारण स्थानीय आवागमन की सुविधा की दृष्टि से भी मैंने हम्पी में ही रुकने को प्राथमिकता दी थी। बैट्री कार से लगभग एक किमी की यात्रा के बाद जब हम विट्ठल मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचे तो ऊंची ऊंची दीवारों से घिरे विट्ठल मंदिर की भव्यता और वैभव के दर्शन नहीं होते लेकिन जैसे ही प्रवेश द्वार के माध्यम से मंदिर प्रांगण में प्रवेश किया तो विजय नगर साम्राज्य की समृद्धशाली स्थापत्य के दर्शन हुए। पूरा मंदिर एक ओर जहाँ भगवान विष्णु के विट्ठल रूप को समर्पित है और वहीं भगवान गरुण के रूप में स्थापित पत्थरों की बारीक नक्काशी से बने रथ की भव्यता देखते ही बनती है। चार गोल पत्थरों से बने नक्काशी दार पहियों से निर्मित रथ की भव्यता और उसके मध्य में बने छिद्र में लगी धुरी पर भी बारीक कलात्मक बेलबूटे ऐसे लगते है मानों लकड़ी का धुरा चारों पहियों को मजबूती से एक दूसरे को  जोड़कर रक्खे हों। इन पहियों के धुरों पर बने रथ का चौकोर नक्काशी दार चबूतरा जगन्नाथ पुरी के रथ के विशालाकार की याद दिला रहा था। ऐसा कहा जाता है कि राजा कृष्णदेव राय ने, उड़ीसा में युद्ध के दौरान कोणार्क के सूर्य मंदिर के रथ से प्रेरित होकर इस गरुण मंदिर रथ  का निर्माण कराया था। चबूतरे पर पाषाण स्तंभों का आलंबन लिए बना मंदिर अति सुन्दर प्रतीत लग रहा था। मंदिर के आगे पीछे बने द्वार और दायें बाएं दो छोटी खिड़कियां मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगा रही थी। चबूतरे पर देव, किन्नर और यक्ष की प्रतिमाओं को बनाया गया है साथ ही एक जगह सिंह गर्जना करते सिंह की प्रतिमा भी उकेरी गई है। रथ के आगे बने दो हाथी बने थे मानों एरावत के आदेश मिलते ही रथ को खींच कर आगे बढ़ने को आतुर हों। पूरा रथ एकदम जीवंत मुद्रा में चलने के लिए तैयार प्रतीत लग रहा था। इस रथ के  रेखा चित्र को भारतीय मुद्रा के 50 रुपये के नोट पर भी उकेरा गया है। इस रथ को एकटक देखते रहने की लालसा को मै बहुत देर तक पूरी करता रहा।  एक पल के लिए भी निगाहें हटाने का मन नहीं कर रहा था। इसक गरुड़ मंदिर की तस्वीरों को लेने की दीवानगी पागल करने जैसी हो रही थी। हर पल को कैद करने का जुनून रथ के चारों ओर घूम कर देखने को मजबूर कर रहा था। मन भरकर देखने और फोटो लेने के बाद फिर अन्य भवनों, मंडपों को देखने के लिए आगे बढ़।  

रथ के पीछे एवं बाएं तथा दायें भी विशाल मंडप बने थे। जिन पर अलग अलग नक्काशी और अद्भुत विशेषता लिए हूएं थे जिनका विवरण आगले अंक में प्रस्तुत करेंगे।  

विजय सहगल   



बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

पीएनबी प्रबंधन द्वारा बैंक कर्मियों को खलनायक के रूप मे निंदनीय प्रस्तुतिकरण

 

विज्ञापनों में पीएनबी प्रबंधन द्वारा बैंक कर्मियों को खलनायक के रूप मे  निंदनीय प्रस्तुतिकरण

 





पिछले दिनों बैंक की संयुक्त बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों की 28 सितमबर 2026 से 30 सितमबर 2026 तक की प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल के आवाहन पर पंजाब नैशनल बैंक प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर जो विज्ञापन प्रचारित किए उसमें उच्च बैंक प्रबंधन का, जहाँ एक ओर कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रति घिनौना, अमानवीय और अनैतिक चेहरा दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर बैंक के अध्यक्ष और उच्च प्रबंधन, वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय के सचिवों के सामने नतमस्तक हो चाटुकारिता और चापलूसी करते नज़र आए। प्रबंधन ने अपने ही हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को खलनायक की तरह प्रस्तुत करने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर दिए अपने विज्ञापन मे  अग्निशमन, डॉक्टर और पुलिस के स्टाफ को बैंक कर्मियों के विरुद्ध प्रातिस्पर्धी के रूप मे प्रस्तुत कर उन पर व्यंगयात्मक टिप्पड़ी  करते हुए दिखलाया, कि डॉक्टर, पुलिस स्टाफ और अग्निशमन का स्टाफ 24 घंटे सेवा मे तत्पर रह काम करता हैं और हम  पाँच दिवसीय हफ्ते की मांग नहीं कर रहे!!

इसमे कोई शक नहीं डॉक्टर, अग्निशमन सेवकों, पुलिस या सुरक्षा बलों की सेवा देश और समाज मे इसलिए सम्मान की दृष्टि से देखी जाती है क्योंकि वे निरंतर 24 घंटे अपनी सेवाओं से देश और समाज की सेवा मे रत हैं, क्योंकि इन सेवाओं मे कार्यरत स्टाफ को कभी भी चिकित्सा, अग्नि और कानून व्यवस्था के लिये कभी भी जाना पद सकता है। इन विभागों मे उसी तरह समुचित मात्रा मे स्टाफ भी ऊपलब्ध कराया जाता है ताकि स्टाफ को समुचित आराम के साथ पारवारिक जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन भी कर सकें। बैंक कर्मी और चिकित्सा सेवा, अग्निशमन सेवा और सुरक्षा/पुलिस बल एक दूसरे के पूरक हैं प्रातिस्पर्धी नहीं। लेकिन पीएनबी प्रबन्धन का बैंक कर्मियों को इन सेवाओं मे कार्यरत कर्मियों के विरुद्ध प्रातिस्पर्धी के रूप मे खड़ा कर खलनायक के रूप मे प्रस्तुत करना घोर आपत्तिजनक और  निंदनीय है।     

दरअसल विज्ञापन देने के लिये जिम्मेदार PNB बैंक प्रबंधन विज्ञापन के माध्यम से  एक तीर से दो निशाने लगाना चाहता था। बैंक प्रबंधन ने विज्ञापन के माध्यम से जहाँ बैंक कर्मियों को सदेश दिया कि एक ओर तो बैंक कर्मी, कितने स्वार्थी, खुदगर्ज और मतलबी हैं कि अपने लिये आप 5 दिन के हफ्ते की मांग कर रहे है और वही दूसरी ओर डॉक्टर, पुलिस के जवान और अग्निशमन सेवा के कर्मी दिन-रात 24 घंटे सेवा देते हैं और वे हफ्ते मे 5 दिन कार्य दिवस की मांग नहीं करते? ये बैंक प्रबंधन की अंग्रेजों की तरह बाँटों और राज करों नीति का कुत्सित हिस्सा है। बैंक प्रबंधन यहीं नहीं रुका, उसने सोशल मीडिया एक्स पर दिए अपने विभत्स और बैंक कर्मी विरोधी, अपने विज्ञापनों के माध्यम से वित्त मंत्री और बैंकिंग विभाग के सचिवों की जी हज़ूरी, चापलूसी और खुशामद करने के लिए इन विज्ञापनों की प्रतियां भी उनके एक्स एकाउंट @DFS_India (भारत सरकार के बैंक से जुड़े वित्त सेवा विभाग) एवं @FinMinIndia (भारत सरकार के वित्त मंत्री का विभाग) पर भी भेजीं। दूसरे अन्य बैंकों ने भी लोगों और आम जनता में जागरूकता फैलाने के लिए अपने बैंक क्रियाकलापों को हड़ताल के पूर्व करने की सलाह अवश्य दी जो एक जिम्मेदार संस्थानों के रूप मे उचित थी, पर किसी भी अन्य सरकारी बैंक ने इस तरह की अशिष्ट, असभ्य और गैरजिम्मेदार भरा विज्ञापन नहीं दिया। आम जनों को बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान करने और असुविधा से बचाने के लिए इन्ही बैंक कर्मियों और अधिकारियों ने रविवार को भी बैंक खोलकर आम जनों को बैंकिंग सेवायें उपलब्ध कराई और यही निर्लज्ज, PNB बैंक प्रबंधन दुनियाँ के सामने अपने ही  बैंक कर्मियों की व्यंग्यात्मक तरह से खिल्ली उड़ा रहा था जो इनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है। जैसे ही उक्त विज्ञापन सोशल मीडिया पर आए मैंने तुरंत ही एक्स पर इन विज्ञापनों के विरोध मे अपना तीखा विरोध दर्ज कराया। ऐसे ही अन्य लोगों के विरोध के चलते उक्त तीनों विज्ञापन को 27 सितम्बर 2026 को प्रबंधन ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट से  डिलीट कर हटा  दिया जो इनके डरपोंक कायरतापूर्ण कुकृत्य और प्रबंधन के मानसिक दिवालिया पन, नकारात्मक सोच और नैतिक पतन को दर्शाता है।     

ऐसा नहीं था कि हफ्ते मे 5 दिवसिय कार्य दिवस की मांग अनोखी थी या पहली बार की गई थी। बैंक कर्मियों की ये मांग 2015 से निरंतर चली आ रही है, बैंक कर्मी अपनी हर  मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन और प्रदर्शन करते हैं। यहाँ ये लिखना आवश्यक हैं कि बैंक कर्मी जब भी हड़ताल करते हैं तो No works, No pay नीति के तहत प्रत्येक हड़ताल के दिनों का वेतन उनकी तनखा से काट लिया जाता है, अन्य सरकारी विभागों की तरह नहीं कि चाहें जितनी हड़ताल करो पर वेतन मे दिन तो छोड़िए घंटे भर की भी वेतन कटौती नहीं होती। ये बैंक कर्मियों का दुर्भाग्य हैं कि हड़ताल के दूसरे दिन दुगना बैंकिंग कार्य भी उन्हे देर रात तक बैठ कर निपटना पड़ता हैं, हर दिन का कार्य उसी दिन  करना बैंक कर्मियों की नियति है अन्य विभागों की तरह कार्य को आगे बढ़ाना या पेंडिंग रखना बैंक की कार्य प्रणाली मे संभव ही नहीं हैं। बैंकिंग क्षेत्र मे हफ्ते मे 5 दिवसीय कार्य की मांग के अनुरूप ही इन्श्योरेन्स सेक्टर और भारतीय रिजर्व बैंक मे 5 दिवसीय कार्यदिवस  मई 2021 से लागू हो गया पर बैंक कर्मी अभी भी 5 दिवसीय हफ्ते की मांग के लिए धरना, प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे है। आज के सूचना प्रौधयोगिक युग मे जहां, एटीएम, नेट बैंकिंग, फोन बैंकिंग, UPI के चलते बैसे भी 24 घंटे की बैंकिंग लागू है, मोदी सरकार की सफलता का मूलमंत्र ही बैंकिंग है, तब क्यों 5 डेज़ वीक घोषित नहीं किया जा सकता।

हर नीति और कार्यक्रम पूर्णतः बैंकिंग से जुड़े हैं, जनधन खाते, पैसे सीधे लाभार्थी के खाते मे जमा होने वाली सरकारी की योजनाओं का कार्यान्वयन ही बैंक कर्मियों द्वारा किया गया है फिर भी पंजाब नेशनल बैंक उच्च प्रबंधन द्वारा बैंक कर्मियों को खलनायक के रूप मे प्रस्तुत किए जाने और बैंक के अध्यक्ष सहित उच्च प्रबंधन द्वारा  सरकार की गुड बुक मे आने के इस चापलूसी भरे कृत्य की सरकार को भी निंदा करते हुए बैंक प्रबंधन के विरुद्ध अनुशासनात्मक निर्देश जारी करना चाहिए ताकि स्टाफ के मोनबल को तोड़ने की किसी भी कोशिश पर अंकुश लगाया जा सके।      

विजय सहगल    

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

हे! त्रेता के राम! सुनो

हे! त्रेता के राम! सुनो 



हे! त्रेता के राम! सुनो 
कष्ट कठिन, अविराम,सुनो 
दशमुख फिर से आन खड़ा.
संकट में फिर जनकसुता 
पहले थे दस शीश, 
भुजाएं बीस, 
नाभि में अमृत थोड़ा था 
वरदान मृत्यु का तोड़ा था 
वेद ऋचा फिर से गूंजे 
ऐसा कुछ वरदान बुनो
हे! त्रेता के राम! सुनो!!

कलियुग के ये सिर विहीन
लंकेश हुआ है आत्म हीन 
देश का करते मर्दन मान 
तौहीन देश की, समझें शान 
मन-वाणी, विष से सराबोर!!
सत्ता पाने का निषिद्ध शोर 
आँखों में इनकी कौंध रहा.
प्रजातंत्र को रौंद रहा 
राम दूत हनुमान गुनो
हे! त्रेता के राम! सुनो!!

त्रेता रण की जो ठगनी थी 
जड़ मूल, दशानन भगिनी थी 
लक्ष्मण रेखा, फिर टूटी है 
फिर शूर्पनखा जो रूठी है 
राम अनुज तुम से है आस
इस दुष्टा का करो विनाश
मातृभूमि गुण गान चुनो
हे! त्रेता के राम! सुनो!!

फिर आज, बिछी  शकुनि बिसात 
गोरे राजा की शह औ मात
द्रोणा चुप, पितामह मौन 
दुष्ट दु:शासन, बोले कौन 
हाथी, घोड़े और ऊंट पिटे 
पैदल, कदम दर कदम मिटे 
धृतराष्ट्र राजा थे तब थे,
अभी राज गांधारी है 
लोक लाज सब पीछे छूटी 
पुत्र मोह, की मारी है 
हे! राधा के श्याम सुनो!
हे! त्रेता के राम! सुनो!!

विजय सहगल 

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

लेख का प्रकाशन

लेख का प्रकाशन  "शाबाश!! कैप्टन स्मित मच्छार..............!!"


उक्त लेख का प्रकाशन निम्न साचर पत्रों मे हुआ अवलोकनार्थ प्रस्तुत । 


  1. दैनिक अखंड दूत भोपाल के दिनांक 06 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित। 
  2. दैनिक लोकदेश भोपाल के अंक दिनांक 06   अक्टूबर 2026 को प्रकाशित 
  3. दैनिक सरिता प्रवाह लखनऊ के अंक दिनांक 05 अक्टूबर 2026 में प्रकाशित। 
  4. हिन्दी दैनिक श्री जी एक्स्प्रेस के दिनांक 05 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित । 






-विजय सहगल 


शाबाश!! कैप्टन स्मित मच्छार..............!!

 

"शाबाश!! कैप्टन स्मित मच्छार..............!!"




30 सितंबर 2026, बुधवार की प्रातः 8.35 बजे फ़्लाइ दुबई की फ्लाइट संख्या एफ़ज़ेड 1073 जब दुबई से इस्राइल की राजधानी तेलावीव के लिए उड़ी  तो उसमे बैठे 174 यात्रियों जिनमे से अधिकतर इस्राइली नागरिक थे, ने कभी नहीं सोचा होगा कि आज इस उड़ान पर संकट के बादल छाने वाले हैं। 35000 फुट की ऊंचाई पर उड़ रहे इस प्लेन से 11.01 बजे अचानक सामान्य आपातकाल का संकेत कोड 7700 जारी हुआ जो इस बात का संकेत था कि हवाई जहाज में कहीं कुछ गड़बड़ है? और अचानक कुछ ही सेकंड में विमान 35000 फुट की ऊंचाई से गोता लगा कर 17000 फुट की ऊंचाई पर तेजी से नीचे की ओर आया, केबिन की लाइट अचानक बुझ गई। यात्रियों के बीच भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यात्रियों ने कॉकपिट से चीख-पुकार की आवाज़े सुनी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन द्वारा प्रत्येक प्लेन में अनिवार्य रूप से रक्खी जाने वाली जिस सुरक्षा कुल्हाड़ी (क्रेश एक्स या फायर एक्स भी कहते हैं।) का उपयोग हवाई जहाज के पायलट और कोपायलट द्वारा  आपातकालीन परिस्थितियों में आग बुझाने, रास्ता बनाने, खिड़की तोड़ने, बिजली के तार  काटने (बिधुत रोधी होने के कारण) कर सकते हैं उसका दुर्पयोग ओमनी नागरिक, साथी कोपायलट अपने मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के उपर जानलेवा आतंकी हमला करने में करेगा!! इसी बीच 11.08 बजे फ़्लाइ दुबई के कैप्टन स्मित ने, इस्लामी अतिवादी, आत्मघाती  मानसिकता से ग्रसित अपने साथी कोपायलट द्वारा 9/11 जैसे  हमले की पुनरावृत्ति करने के लिए अपने उपर हुए घातक और जानलेवा हमले और लहूलुहान होने के बावजूद हवाईजहाज के अपहरण का कोड संख्या 7500 का सिंगनल हवाई नियंत्रण कक्ष को भेजा।

फ़्लाइ दुबई की इस उड़ान के अपहरण की सूचना पर जहां हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष का पूरा तंत्र  सक्रिय हो गया और वहाँ कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित, हवाई जहाज के 174 यात्रियों की जान बचाने के लिए अपने ही सह पायलट ओमानी नागरिक हमाम अल हमामी के द्वारा चाकू से लगातार किए जा रहे हमलों से जूझ रहे थे। अपने अदम्य साहस और सूझ बूझ से कैप्टन स्मित ने पेट, सिर, हाथों से बह रहे खून से लथपथ, अपनी ज़िंदगी और मौत  से लड़ रहा था, इसके बावजूद पायलट स्मित के  मन में चल रहे अंतर्द्वंद कि आज अगर उसने हिम्मत नहीं दिखाई तो 174 यात्री अपनी जान गंवा देंगे। कॉकपिट में गंभीर रूप से घायल पड़े  कैप्टन स्मित को 9750 घंटे से भी ज्यादा का प्लेन उड़ाने  के अनुभव से मालूम था कि साथी सहपायलट ने विमान की नोज़ को नीचे करने के कारण विमान नीचे जा रहा है अपने आराध्य बीर हनुमान को याद कर उसने अपने अथक प्रयास से केबिन का दरबाजा खोल दिया ताकि दूसरे लोग कॉकपिट के अंदर आ सके। ऐसा करते ही केबिन के बाहर के कुछ यात्री कॉकपिट में आ घुसे उन्हे खून से लथपथ, पायलट स्मित को देख मामला समझने में देर न लगी और पेशे से प्लम्बर एक इस्राइली यात्री यानिव हायून ने प्लेन को नुकसान पहुंचा रहे सह पायलट को पीछे से गले को दबोच कर सीट से बाहर हटाया। अन्य यात्रियों की मदद से  हेडफोन के तारों से बांधने की कार्यवाही को जिव्का मान्स एवं असफ रेगुआन   नामक यात्रियों  ने अंजाम दिया और तब तक अपने पैरों से उसे दबोचे रहे जब तक प्लेन सकुशल नीचे नहीं उतार गया। चींखे सुनकर सबसे पहले पहुंचे एक अन्य इकलौते डॉक्टर यात्री डेन्टिस्ट शोटा मुसाएव ने बेहद नाजुक हालात में पहुंचे कैप्टन स्मित के सिर और हाथों से बह रहे खून को रोका और लेंडिंग तक कैप्टन के स्वास्थ्य  पर नज़र बनाएँ रखी। मौत से बेखौफ, ये एक स्वतः स्फूर्त सामूहिक संकल्प था जिसमे आतंक और अतिवाद से लड़ने की दृढ़ इच्छाशक्ति   स्पष्ट प्रण और प्रतिज्ञा यात्रियों में दिखलाई दे रही थी। इस बेहद खौफनाक हवाई यात्रा का सौभाग्य था कि इस यात्रा में दो हवाई पायलट यात्री के रूप में इस प्लेन में हवाई यात्रा कर रहे थे जिन्होने पायलट स्मित के निर्देशानुसार कॉकपिट को सम्हाल लिया और सऊदी अरब के शहर तबुक में 12.51 बजे सुरक्षित आपात लेंडिंग कराई। इस तरह मौत के भय, अकाल और असमय मृत्यु के खौफनाक दरवाजे पर खड़े, 174 यात्रियों की 3 घंटे 53 मिनिट की आतंक के साये में उड़ी  हवाई यात्रा का डरावना, खौफनाक, भयानक दिल दहलाने वाले मंजर का अंत बिना किसी जनहानि के अच्छा  सुखांत हुआ।    

इस घटना की खबर जंगल में आग की तरह सारी दुनियाँ में फैल  गयी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और सूझ बूझ की खुलकर तारीफ की। कॉकपिट का दरबाजा खोल मदद के लिए चिल्लाने पर उनकी प्रशंसा की और उन्हे नायक बताया। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा: असाधारण बहदुरी दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को मेरा सलाम!, मै उनके स्वास्थ्य होने की कामना करता हूँ। वह सच्चे नायक हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के धैर्य, साहस और सूझ बूझ की की सराहना करते हुए कहा कि, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनी जान की परवाह किए बिना 9/11 जैसे आतंकी हमले को नाकाम कर दिया। घायल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और यात्रियों की मदद से एक बड़ा विमान हादसा होने से बचा लिया। मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार के साहसिक कृत्य से हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। 140 करोड़ भारतीय उन्हे सलाम कर रहे हैं और उनके शीघ्र स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। एक विडियो संदेश में मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार के माध्यम से ठीक ही   संदेश दिया कि हम भारतीय जान लेने वाले लोग नहीं है, हम जान बचाने वाले लोग हैं। ये स्पष्ट संदेश उन आतंकवादियों और उनका पालन पोषण करने वालों को एक खुला संदेश कि भारत की संस्कृति और सभ्यता  "सर्वे भवन्तु सुखिन:....... की राह पर चलने वाली है।

देश विदेश के सभी बड़े राजनैतिक दलों और उनके नेताओं ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी, साहस और सूझ बूझ की तारीफ की, जिसने 174 लोगों की जान बचाकर आतंकी हमले को निष्फल कर दिया। देश में भी राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री सहित कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे, रक्षा मंत्री, गृहा मंत्री सहित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने भी भारतीय पायलट, स्मित की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  प्रायः सभी राजनैतिक दलों और उनके नेताओं ने भारतीय पायलट के पराक्रम और शूर वीरता की तारीफ की है। गाजा, फिलिस्तीन और मध्य पूर्व देशों के छोटे बड़े मुद्दों पर अपनी राय देने वाले गांधी परिवार का भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी और साहस पर  कोई सार्वजनिक या व्यक्तिगत ब्यान न आना चिंता का विषय है। लेकिन बेहद दुःख और अफसोस है कि जिस भारतीय पायलट के शौर्य और साहस की प्रशंसा पूरा विश्व कर रहा है, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी का कोई भी सार्वजनिक या व्यक्तिगत ब्यान न आना चौंका देने वाला है। ऐसी कौन सी मजबूरी है जो हमे देश के जांबाज सैनिकों, नागरिकों और पायलट की बहादुरी की प्रशंसा के  दो शब्द भी कहने से रोकती है?  

इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी राजनीति हो रही है जो कि स्वाभाविक ही है क्योंकि ये निश्चित ही एक खौफनाक आतंकी घटना हो सकती थी क्योंकि इसका अंजाम, लगभग 170 इस्राइली नागरिकों की मौत के रूप में एक हवाई दुर्घटना होती। लेकिन भला हो  कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और शौर्य का, जिसने आतंकी हमलों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जब इसके दूसरे पहलू पर गौर करें  तो स्थिति बड़ी भयावह लगती है?  यदि आतंकी इरादे सफल हो गए होते तो अंतराष्ट्रीय स्तर पर कैप्टन स्मित मच्छार का एक भारतीय हिन्दू पायलट होने के कारण भारतीय  पायलटों की विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो जाता? देश के बाहर, इस्राइल और भारत के बीच भ्रम और भ्रांति फैलाने की कहानियाँ गढ़ी जाने लगती और देश के अंदर छद्म धर्मनिपेक्ष वादी और वामपंथियों के गिरोह एक बार फिर से हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों को गढ़ कर अपनी अधम सोच और नीच मानसिकता को खाद पानी दे रहे होते।       

इस घटना के बाद के अभी अनेकों विषयों, पाहुलुओं पर गंभीर जबाव आने बाकी है जिन्हे गहन जांच के बाद सार्वजनिक किया जाएगा और ऐसी उम्मीद करनी  चाहिए कि ऐसी  घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी।            

विजय सहगल

       

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

"मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध इंडि गठबंधन का युद्धघोष"

 

     "मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध इंडि गठबंधन का युद्धघोष"




23 सितंबर 2026 को राजधानी के एक प्रमुख अँग्रेजी दैनिक मे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध अपने ही दो चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधु की असहमति और मतांतर की अनदेखी करने के आरोपों ने देश के राजनैतिक हलक़ों मे हँगामा और कोहराम की स्थिति पैदा कर दी। रितिका चोपड़ा द्वारा लिखित इस लेख मे पिछले दस महीनों मे दोनों चुनाव आयुक्तों ने ऐसे 14 अवसरों का उल्लेख किया जिसमे उन्होने चुनाव आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों मे अपने असहमति और अस्वीकृति दर्ज़ कराई। चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था मे मत-अभिमत मे मतांतर होना स्वाभाविक है पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोनों चुनाव आयुक्तों के बहुमत के निर्णयों की अवेहलना के गंभीर आरोप लगाना चिंता का विषय था। मृतप्राय: पड़े  विपक्षी इंडि गठबंधन के घटक दलों को इस मुद्दे ने संजीवनी का कार्य करते हुए एक बड़ा मुद्दा उनकी झोली मे स्वतः ही डाल दिया।

अँग्रेजी अखबार मे प्रकाशित रिपोर्ट की लेखिका रीतिका चोपड़ा ने, चुनाव आयोग मे चुनाव आयुक्तों के बीच चल रहे विवादों पर अपनी गहन रिपोर्ट मे बिन्दुवार उल्लेख कर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दोनों आयुक्तों के बीच अहं, दंभ और अहंकार के साथ आयोग के निर्णयों मे सर्वानुमति के आभाव और बहुमत के निर्णयों की अनदेखी के मुद्दों का उल्लेख किया। सरकारी संस्थाओं मे किन्ही मुद्दों पर असहमति होना स्वाभाविक है लेकिन रिपोर्ट मे नई मतदाता सूची तैयार करना, मतदाताओं का पंजीकरण और उन्हें हटाना, मतदाता सूचियों के संशोधन के खिलाफ अपील दायर करने की प्रक्रिया, तथा मतदाता सूचियों के SIR की प्रक्रिया की निगरानी और अभिरक्षा, फोरम संख्या 06, गोवा राज्य के 97 मतदाताओं जैसे विषयों मे बहुमत की अनदेखी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े किये है? निश्चित ही रिपोर्ट को लंबे समय मे गहन जांच और चुनाव आयोग के अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत के बिना, बना पाना असंभव रहा होगा। आज रिपोर्ट के चार दिन बाद भी, न तो रिपोर्टर अपने आरोपों के सबूत दे सकी और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त ने  उन आरोपित और विवादस्पद मुद्दों को नकारा और न ही उप चुनाव आयुक्तों ने अपनी असहमति या बहुमत के मुद्दों की अवेहलना  को सार्वजनिक रूप से स्वीकार  किया। इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि यह विषय यूं ही ब्रह्मांड मे विचरण करता हुए एक दिन समाप्त हो जाएगा। हर व्यक्ति, संस्था या राजनैतिक दल इसे अपनी स्वार्थ, सुविधा और उससे मिलने वाले राजनैतिक हित, लाभ की कसौटी पर कस कर उपयोग करेंगे।

इंडि गठबंधन के प्रमुख घटक दल कॉंग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ममता ऑल इंडिया तृणमूल  कॉंग्रेस की प्रमुख ममता बैनर्जी, समाजवादी के अखिलेश गांधी, शिव सेना उद्धव गुट के उद्धव ठाकरे, संजय राऊत, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव ने तो रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट को ब्रहम वाक्य मानते हुए चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार  को पद से हटाने और देश के साथ गद्दारी और उसके विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र रचने के लिए गिरफ्तार कर, जेल भेजने की मांग तक कर डाली! इन सभी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी के आरोप लगा कर, उन पर भाजपा का पक्ष ले, उन्हे अवैध और असंवैधानिक तरीके से बिहार, पश्चिमी बंगाल मे सरकार बनाने और जिताने जैसे संगीन आरोप लगाये। आप पार्टी  प्रमुख सहित अन्य इंडि गठबंधन दलों ने भी पिछले दिनों विधान सभाओं के गठन  को भंग कर ईवीएम की बजाय दुबारा मत पत्रों से चुनाव करने की मांग की। हर बार की तरह राहुल गांधी लंबी चौड़ी प्रैस कॉन्फ्रेंस मे वोट चोरी के आरोप तो लगाते नज़र आए पर वोट चोरी के  कोई भी सबूत देने मे नाकामयाब रहे? इन दलों के, ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी के आरोपों को जब सबूतों की कसौटी पर कस कर देखते हैं तो इंडि गठबंधन की तर्कहीनता स्पष्ट नज़र आती है जो उनकी सोच और समझ पर सवालिया निशान खड़े करती है? यदि बिहार, पश्चिमी बंगाल, पांडिचेरी, और  असम  मे भाजपा मुख्य चुनाव आयुक्त के पक्षपात या वोट चोरी के कारण जीती तो केरल मे कॉंग्रेस तमिलनाडू मे सी॰ जोसफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके कैसे विजयी रही? क्या यहाँ वोट चोरी नहीं हुई? इस बात का कोई तर्क इनके पास नहीं है? दरअसल रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट ने तो  इंडि गठबंधन के सभी प्रमुख राजनैतिक दलों को, अपनी नकामयाबी, पराजय असफलता और शिकस्त का ठीकरा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सिर फोड़ने का मानो सुनहरा  मौका मिल गया? अन्यथा क्या कारण थे कि बिहार और अन्य राज्यों मे एसआईआर के लागू होने को तो देश के  उच्चतम न्यायालय ने भी उचित ठहराते हुए इसे चुनाव आयोग का संवैधानिक  अधिकार बतलाकर किन्ही  भी खामियों से परे बतलाया, और फिर पश्चिमी बंगाल की एसआईआर प्रिक्रिया तो सुप्रीम कोर्ट की देखरेख मे हुई, जिसमे 500 से 530 न्यायिक अधिकारी (जज) तैनात किए गए थे।

इंडि गठबंधन और कॉंग्रेस ने तो पूरे देश के जिला मुख्यालयों मे विरोध प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग की। उन्हे देश द्रोही और गद्दार तक ठहरा दिया। उनसे इस्तीफा देकर, राहुल गांधी ने बड़े सख्त लहजे और अशिष्ट भाषा मे ज्ञानेश कुमार को धमकी भरे लहजे मे अपने पद से इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनने की सलाह दी!! इस सलाह की पीछे राहुल गांधी की मंशा और मकसद समझ से परे है? अँग्रेजी दैनिक मे छपी रिपोर्ट मे, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधु की असहमति के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाले ये वही राहुल गांधी हैं, जिन्होने चुनाव आयोग मे विवेक जोशी और सुखबीर संधु की  नियुक्ति पर, चयन समिति के एक सदस्य के रूप मे अपनी  असहमति जताई थी, लेकिन दोनों चुनाव  आयुक्त (जोशी और संधु), आज उनके (राहुल गांधी के) के प्रिय पात्र बने हुए हैं।

यहाँ भी इंडि गठबंधन के नेताओं विशेषकर राहुल गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगे।  जिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी दलों के नेताओं पर, सन 2016 और 2019 मे, भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध की गयी सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के विडियो, फोटो आदि सबूत मांगने के अनेकों बार आरोप लगाए गए हैं वही लोग आज बिना किसी सबूत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी और देश के साथ गद्दारी के आरोप लगा कर गिरफ्तारी की मांग कर रहे है!! जो हाल के दिनों मे भारतीय राजनीति के नैतिक अधोपतन और मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक  दिवालियापन को दर्शाता है।

इस विषय मे एक सकारात्मक परिणाम, शनिवार दिनांक 6 सितंबर 2026 को मध्यान्ह 3.00  देखने को मिले,  जब मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की चाय पीते तस्वीर देखने को मिली। शाम तक चुनाव आयुक्तों की मीटिंग मे लिए निर्णयों ने काफी कुछ हद तक तीनों आयुक्तों के बीच चल रही कड़वाहट कम होने के सबूत दिखलाई पड़े। आयोग की 9 मुद्दों पर सफाई मे विशेष मुद्दे जैसे एसआईआर के दौरान नोटिस प्राप्त मतदाताओं के घर स्वयं बीएलओ के आने, गरीब बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क, चुनाव आयोग के डिजिटल नेट वर्क तक अधिकारियों की सहज पहुँच, दावे और आपत्तियों दाखिल करने की समय सीमा मे बढ़ोतरी तथा चुनाव आयोग की नियमित बैठकों पर सहमति जैसे मुद्दे शामिल हैं। आशा की जानी चाहिये चुनाव आयोग के बीच चल रहे इस संग्राम का अब शुभ पटाक्षेप हो जाएगा?  लेकिन पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही वोट चोरी के मुद्दे के पटाक्षेप मे कितने और चुनाव कराने पड़ेंगे कहना मुश्किल है।

विजय सहगल

           

 

      

              

लेख का समाचार पत्रों मे प्रकाशन



लेख,  "मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध इंडि गठबंधन का युद्धघोष" विभिन्न शहरों के निम्न दैनिक समाचार पत्रों मे दिनांक 30 सितम्बर 2026 को  प्रकाशित हुआ। 
  1. दैनिक अखंड  दूत, भोपाल
  2. बालाजी हिन्दी दैनिक, लखनऊ   
  3. दैनिक देश प्राण, रांची 
  4. मयूर संवाद, नई दिल्ली। 
  5. दैनिक प्रातः आवाज, हजारीबाग ।
  6. सरिता प्रवाह ब्यूरो उन्नाव/वाराणसी 
  7. हिन्दी दैनिक तमसा संकेत, अंबेडकर नगर 
  8. विश्व वार्ता, लखनऊ 
  9. हिन्दी दैनिक यंग लीडर, अहमदाबाद ।                                                                                        अवलोकनार्थ प्रस्तुत