रविवार, 12 अप्रैल 2026

"तत्तापनी (हिमाचल प्रदेश)"

"तत्तापनी (हिमाचल प्रदेश)"









6 जून 2022 को अपने हिमाचल प्रवास के दौरान तत्तापानी जाने का सुयोग बना। जहां एक ओर शिमला मे भीड़-भाड़, ट्राफिक जाम, पार्किंग की समस्या से दो चार होना पड़ा वही शिमला से लगभग 50 किमी॰ दूर सतलज नदी के किनारे पर बसा तत्तापानी एक शांत, प्राकृतिक रुप से मनोहारी सुंदर और साफ सुथरा था। यह छोटा सा गाँव हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले मे स्थित है एवं अपने पारंपरिक धार्मिक, पौराणिक महत्व के  अतिरिक्त इन दिनों साहसिक खेलों के लिये प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप मे भी प्रसिद्ध होता जा रहा है। तत्तापानी की एक विशेषता है जो इसके नाम के अनुरूप ही है। तत्ता का अर्थ है गर्म और पानी का अर्थ है जल अर्थात गरम पानी का चश्मा या कुंड। सतलज नदी के तट पर ऐसे अनेकों कुंड हैं जहां से पूरे साल गंधक युक्त गरम पानी के झरने बहते रहते हैं। ऐसी प्रथा हैं कि इन कुंडों मे चर्म रोगी के स्नान करने से बड़ा फायदा मिलता है। बैसे तो मई जून मे भी पहाड़ो पर सर्दी होती है लेकिन दिन मे आग बरसाती गर्मी ने दिल्ली, आगरा की गर्मी की याद दिला दी लेकिन हवा मे उपस्थित नमी उत्तर मध्य भारत की लू लपट के विपरीत थी। पेड़ की छाया या छप्पर के नीचे अच्छा महसूस हो रहा था।   तत्तापानी मे सतलज नदी के पश्चिमी तट पर पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर एक विशाल मेला लगता हैं जहां पर हिमाचल प्रदेश के दूर दूर से आए श्रद्धालु स्नान के लिये यहाँ आते हैं। स्नान के बाद अन्न, वस्त्र आदि दान कर्म करने की प्रथा के अनुसार यहाँ तुलादान करने की परंपरा है। इसलिए जगह जगह बड़े बड़े तुला (तराजू) देखने को मिलते हैं जहां पर तीर्थ पुरोहित पूरे साल ही इस तरह के संस्कार श्रद्धालुओं के लिए कराते रहते हैं। तराजू के एक ओर दान दाता को बैठा कर दूसरी ओर अन्न/वस्त्र या ऐसी वस्तु को समान मात्रा मे रख जाता है जिसके दान देने की प्रतिबद्धता, कौल या वचन जजमान ने लिया था। ऐसा  मानना है कि यहाँ स्नान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा  कुम्भ स्नान का फल प्राप्त होता है।      

एक अन्य मान्यता के अनुसार सप्त ऋषियों मे से एक ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि भी हैं। सतलज नदी के गंधक युक्त औयषधीय गुणों के कुंड और झील के  कारण जलक्रीड़ा युक्त गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। मनोरम पहाड़ियों की तलहटी मे बहती सतलज की धाराओं मे मोटर वोट, जेट स्की, रिवर राफ्टिंग और हॉट एयर बलून जैसी गतिविधियों का आयोजन पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है।  हवा मे उपस्थित शत प्रतिशत नमी के कारण नदी मे अठखेलियों के पश्चात हम लोग भोजन के लिए नदी के तट पर बने होटल हॉट स्प्रिंग की ओर बढ़ लिए। तेज धूप और नदी से दूर चल रही गरम हवाओं के बीच ठंडी एसी की हवाओं मे बड़ा सुकून और  ठंडक प्रदान की। शाकाहारी भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कारण इस बतानुकूलित वातावरण मे मे खाना खाने का उल्लास अलग ही था। हिमाचल के इस भ्रमण मे जगह जगह एसी की आवश्यकता को देखते हुए मुझे मई-जून की इन गर्मियों मे पहाड़ों और यूपी, राजस्थान दिल्ली और मध्य प्रदेश के लपट भरे मैदानों मे कोई बहुत ज्यादा अंतर नहीं दिखाई पड़ा।

भोजन पश्चात नदी के तट से दूर भगवान लक्ष्मी नारायण और नरसिंह मंदिर के दर्शन किए। जहां नरसिंह भगवान का मंदिर अपने हिमाचल के पारंपरिक मंदिरों की तरह लकड़ी से बना था और जिसमे भगवान नरसिंह की प्रतिमा विराजित थी और भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर मे तीन देव ब्रहमा विष्णु महेश अपनी अपनी अर्धांगनियों देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी और देवी पार्वती के साथ विराजित थे साथ ही प्रवेश हाल के एक सिरे पर श्री हनुमान की प्रतिमा भी थी।  इन साफ सुथरे मंदिरों के प्रार्थना कक्ष मे बैठना बड़ा सुखदायक अनुभव था।

इस तरह एक अनुछुए स्थल तत्तापनी का भ्रमण एक यादगार यात्रा बन गया जो हमेशा तुला दान की तराजू की स्मृति मन मस्तिष्क पर अंकित कर गया।

 

विजय सहगल