"चढ़ावे
की चोरी मे छाती पीटते कालनेमि"
इन दिनों राम मंदिर मे चढ़ावा की चोरी करने
पर स्यापा और छाती पीटने वाले झूठे,
छद्म और नक़ली भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। आज दिनांक 31 जुलाई 2026 को तो निर्दलीय
सांसद पप्पू यादव सहित समाजवादी पार्टी,
कॉंग्रेस के सांसदों ने संसद मे चढ़ावा चोरी की नाटक,
नौटंकी की आड़ मे जिस तरह से सनातन धर्म,
भगवा और साधु संतों उपहास, अनादर और अपमान
किया उसकी जितनी निंदा की जाय कम हैं। साधु संतों की इस मार पिटाई के इस ड्रामे के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम
करने के इस दुष्कर्म, कुकर्म और अधर्म
मे कॉंग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इस नाटक-नौटंकी
मे पप्पू यादव ने कालनेमि की तरह भगवा वस्त्र धारण कर माथे मे तिलक त्रिपुंड और
माला पहनी थी और राहुल गांधी इस छद्म साधु के सामने नतमस्तक हो खलनायक की तरह चढ़ावा चढ़ाते उस मायावी असुर का समर्थन करते नज़र
आए। बेशक चढ़ावा चोरी के पापकर्म मे मंदिर मे नियुक्त कर्मचारि शामिल थे और जिनको
गिरिफ़्तार कर समुचित कानूनी कार्यवाही की जा रही है। ऐसा तो हो नहीं सकता कि चढ़ावा
चोरी के इन अपराधियों को बर्बर, वहशी और पाशविक कानून
की तरह फांसी पर लटका दिया जाय या अंग भंग कर दिया जाय। हमारे देश का सक्षम कानून इस मामले मे अपना कार्य करेगा। कॉंग्रेस और
समाजवादी पार्टी के सांसदों ने चढ़ावा चोरी पर बड़े बड़े पोस्टर हाथों मे लिये
दहाड़-दहाड़ कर घड़ियाली आँसू बहाये और मसख़रों की तरह संसद भवन के बाहर नाटक नौटंकी
की और हिंदुओं को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया। राहुल गांधी ने जिस
निर्लज्जता से इस घिनौने खेल मे सहभागिता की वो नेता प्रतिपक्ष की प्रतिष्ठा,
गौरव और सम्मान के सर्वथा विपरीत था। विदित हो ये वही समाजवादी दल है जिसने
मुस्लिम तुष्टि करण के लिये बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय रामभक्तों पर गोली चलवाई
थी!! कॉंग्रेस भी समाजवादियों के स्वर मे
स्वर मिलाते हुए इन्ही कूट धर्मनिरपेक्ष वादी कालनेमियों के साथ खड़ी नज़र आयी,
जिन्होने हमेशा हिंदुओं के आराध्य भगवान
श्रीराम को काल्पनिक बतलाया और भगवान राम के अस्तित्व को नकारने का कुप्रयास किया।
जिन लोगों ने राम मंदिर के निर्माण मे फूटी कौड़ी भी नहीं दी आज वे राहुल गांधी,
अकीलेश यादव और उनके दलों सहित इंडि
गठबंधन के सभी दलों ने राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी पर ऐसी हायतौबा,
शोर शराबा और हुड़दंग किया मानो कोई बहुत बड़ी धनराशि इन दलों ने राम मदिर के निर्माण
मे दान स्वरूप चढ़ावे मे दी हो। चढ़ावा चोरी को अपनी धार्मिक आस्था मे आहत से जोड़ने वाले इन अखिलेश यादव और
राहुल गांधी तथा उनके दल के नेतृत्वकारी नेताओं का दो मुंहापन देखिये कि जिस राममन्दिर
के दर्शनार्थ देश विदेश से करोड़ो
श्रद्धालु अयोध्या पहुँच रहे हों वहाँ इन दोनों छद्म राम भक्तों को आज तक अयोध्या मे
रामलला के दर्शनों का समय नहीं मिला।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी एवं उनकी पार्टीयों
सहित इंडि गठबंधन के सभी समर्थक दलों ने सदा मुस्लिम तुष्टीकरण के सामने सनातन
धर्म पर दोयाम दर्जे का रुख रक्खा हैं,
आज यही लोग चीख पुकार, हल्ला गुल्ला और
चीख चीख कर कह रहे कि चढ़ावा चोरी के कारण उनकी आस्था विश्वास पर चोट पहुंची है! चढ़ावा
चोरी पर उनकी भावनाएं आहत हुई हैं!! जब इन्होने भगवान के चढ़ावे को नहीं छोड़ा तो ये
किसको छोड़ेंगे? इन विपक्षी दलों मे
अपने आप को राम भक्त जतलाने की ऐसी होड़ लगी है जैसे उनसे बड़ा कोई दूसरा रामभक्त इस
दुनियाँ मे पहले कभी हुआ ही नहीं!! आइये भगवान राम के मंदिर के चढ़ावा चोरी पर इनकी
आस्था, निष्ठा,
विश्वास, कितना आहत हुआ पर विचार
करें? क्या कभी इन दलों या नेताओं ने मुगल
आक्रांता औरंगज़ेब या बाबर के सेनापति मीर बाक़ी द्वारा राम जन्मभूमि को ध्वस्त करने
पर कभी अपनी राय या टिप्पड़ी जग जाहिर की?
रमजन्मभूमि निर्माण के लिये पाँच सौ साल के संघर्ष मे कभी राम मंदिर के पक्ष मे
खड़े हुए?? औरंगजेब जैसे क्रूर
शासक की निंदा के बोल भी कभी राहुल गांधी या अखिलेश के मुंह से निकले?
चढ़ावा चोरी मे जिन बगुला भक्तों की आस्था आहत हुई,
उनकी आस्था तब कहाँ चली गई थी जब पुरातत्व विभाग के तर्कों को स्वीकारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि राम मंदिर का
विध्वंस कर ही बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ?
तब उनकी आस्था और स्वाभिमान, क्या मर गया था?
और यकायक चढ़ावा चोरी पर मरी हुई आस्था राजनैतिक हित लाभ के लिए पुनः जाग गयी?
तब किस मुँह से वे राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर सवाल कर अपनी आस्था के आहत की बात
कर रहे हैं? घड़ी घड़ी अपनी आस्था को
जिंदा करने और मारने वाले ये लोग, दरअसल मरी हुई
जिंदा लाशे हैं जो अपने अपने वोट बैंक की खातिर सत्ता मे बने रहने के लिये राष्ट्रसम्मान
का सौदा करते हैं। इनके ये घड़ियाली आँसू
अब देश के लोग समझत रहे हैं। ये दोहरी सोच
और चरित्र के लोग सिर्फ हिंदुओं और उनके आराध्य भगवान को बदनाम करने की कुत्सित और अधम प्रयास कर रहे
हैं।
राम मंदिर मे चढ़ावा चोरी का मामला विशुद्ध
रूप से पैसे हड़पने, धनराशि के गबन करने
और रुपयों की धोखाधड़ी का मामला है,
जैसा बैंकों, वित्तीय संस्थानों,
केंद्र सरकार और राज्य सरकार के विभागों
मे कार्यरत कुछ बेईमान,
कपटी, कुटिल धोखेबाज अधिकारी और कर्मचारी करते
हैं। भ्रष्ट व्यक्ति की मानसिकता मुख्य रूप से लालच,
नैतिक पतन और व्यवस्था की खामियों का
मिश्रण होता है फिर वह चाहे केंद्र या राज्य सरकार,
निजी या वित्तीय संस्थानों या मंदिर मस्जिद जैसे संस्थानों मे कार्यरत स्टाफ हो। हमे
ऐसे लोगों की सराहना नहीं करना चाहिए जिन्होने अनीति पूर्वक संपत्ति कमाई या सफलता
पाई"। इसी लालची मानसिकता और भ्रष्टाचार का मनोविज्ञान के दर्शन राज्य
सरकारों के नगर निगमों, रेविन्यू,
आबकारी, राजिस्ट्रार,
परिवहन, बिजली और खनन जैसे अन्य
विभागों,
राजनैतिक दलों, वित्तीय संस्थानों मे कार्यरत कुछ बेईमान और चोर कर्मचारियों और
अधिकारियों मे भी देखने को मिलता है। पैसे
का लेनदेन,
रिश्वत, चोरी और भ्रष्टाचार समान रूप से सारे देश मे हर जगह व्याप्त
है। विपक्षी दलों ने चढ़ावा चोरी को हमारी
धार्मिक भावनाओं, संवेदनाओं से जोड़ कर हमारे
धर्म और का उपहास उड़ाया है। धर्म से ज्यादा राष्ट्र हित सर्वोपरि मानने वाली
कॉंग्रेस के कार्यकाल मे क्या बोफोर्स
जैसे रक्षा घोटाले नहीं हुए? क्या आज देश का
कोई राजनैतिक दल और नेता इस बात का दम भर
सकता है कि उसकी पार्टी या उसने स्वयं आर्थिक कदाचार और भ्रष्टाचार नहीं किया?
स्वतन्त्रता के बाद से अब तक देश मे सैकड़ों हजारों भ्रष्टाचार के मामले हुए,
जिसमे हर दल के नेता कहीं न कहीं और कभी
ने कभी शामिल न रहें हों? तब हमारी चोरी
छोटी और राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी बड़ी कैसे कही जा सकती है?
ये तो अच्छा हुआ भारतीय संविधान मे आर्थिक कदाचार और भ्रष्टाचार से निपटने के
कानून बने हैं फिर चाहे आर्थिक भ्रष्टाचार मंदिर मे चढ़ावे की चोरी से जुड़ा हो या
बैंक मे घोटाले या अन्य विभागों मे भ्रष्टाचार से जुड़ा हों। लेकिन वक्फ बोर्ड मे
लाखों करोड़ो के घोटाले मे कभी काँग्रेस या समाजवादी या इंडि गठबंधन के अन्य दलों
ने कभी अपनी जबान खोली? कभी नहीं!
क्योंकि ये ऐसा कर अपने वोट बैंक को खोने का साहस कभी नहीं कर सकते?
सनातन धर्म को बदनाम करने के लिये पप्पू यादव,
राहुल गांधी या अखिलेश यादव द्वारा नाटक नौटंकी कर हिंदुओं की आस्था और विश्वास को आहत करने वाले
ऐसे स्वार्थी और छद्म धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों के कालनेमियों को अब बाज आना चाहिये?
हाँ मंदिर के चढ़ावे मे चोरी हुई है!! जो
अन्य आर्थिक घोटालों, पैसे के गबन और
धोखाधड़ी, बेईमानी की तरह ही सिर्फ
और सिर्फ आर्थिक कदाचार है और मौजदा कानून इस चढ़ावा चोरी से निपटने मे समर्थ,
सक्षम और सुयोग्य है,
जैसे अन्य घोटालों और चोरी से निपटा जाता है। राममन्दिर चढ़ावे की चोरी मे अनेक
गिरफ्तारियाँ हुई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी का गठन किया है जो आने वाले
समय मे चढ़ावे मे हुई चोरी पर और कठोर कानूनी कार्यवाही का रास्ता सुनिश्चित करेगा
ताकि भविष्य मे ऐसे किसी अपराध करने की कोई कल्पना भी न कर सके।
विजय सहगल



