शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

Golden of Caves Park चेरापूँजी (मेघालय)



 

गुफाओं का पार्क (Golden of Caves), चेरापूँजी (मेघालय)














काफी दिनों पूर्व मैंने अपने ब्लॉग में एशिया के सबसे साफ सुथरे गाँव मावलिननाँग, का उल्लेख किया था। उसी संदर्भ में  आज पुनः सोहरा (चेरपूँजी) की सबसे साफ सुथरे भ्रमण स्थान का खासी भाषा में ब्री सीनराङ्ग पार्क अर्थात गोल्डन ऑफ केव्स का उल्लेख करूंगा। 2 नवंबर 2022 को   अपने पारवारिक मित्रों के साथ उक्त स्थान का भ्रमण करने गया जो बड़ा ही अद्भुत पार्क ही नहीं प्राकृतिक गुफाओं, जलकुंड, प्राकृतिक पुल, झरनों, घने जंगल और चट्टानों से बना एक खूबसूरत पार्क है। इस पार्क को घूमने की दृष्टि से मुख्यतः 6 स्थानों में  विभक्त किया जा सकता है। इस पार्क की खासियत है कि यहाँ प्रकृति के साथ साथ खासी जनजाति के इतिहास और लोक सांस्कृति की झलक भी मिलती है। पूर्वी खासी हिल्स जिले के लैतमावसियांग गाँव में  स्थित है जो शिलांग से लगभग 50-55 किमी और चेरापूँजी से 20-25 किमी दूर है। 2.5 हेक्टेयर के परिक्रमा पथ में  फैली ये गुफ़ाएं कहीं हल्की छोटी पहाड़ियों, कहीं झरनों और जंगलों से होकर जाती है। कहीं खाईं, कहीं चट्टानों पर लगातार  गिर रहे पानी से  प्राकृतिक रूप से बनी चट्टानों की विशेष आकार प्रकार की आकृति देखने को मिलती है, जो प्रकृति की अद्भुत रचना को देख कर ईश्वरीय चमत्कार के सामने नतमस्तक होने को मजबूर करता है। खासी जनजाति और और उनके शासकों ने इन प्राकृतिक गुफाओं में  आश्रय स्थल और शरण लेने में  किया था। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भी खासी लोगों के लिए आश्रय और पानी के प्राकृतिक बनावट के कारण इसका रणनीतिक महत्व रहा।

यहाँ स्थित एक झरने को राजा की गुफा जिसे खासी भाषा में  सीनराङ्ग सईएम कहते अद्भुत है। ऊपर गोलाकार आकृति से चारों ओर से गिर रहे झरने के बीच झरने के चारों तरफ प्राकृतिक रूप से बनी चट्टानों से  बने प्राकृतिक गलियारे में  कुर्सी और विस्तर के आकर के कारण यहाँ राजा विश्राम करते थे इसलिए इस शानदार गुफा को राजा की गुफा कहा जाता है। लगातार गिरते पानी के कारण कुछ चट्टानों में  बड़ी सुन्दर आकृतियाँ बन गई हैं। इनमे एक दिल के आकार के आकृति और उसमे भरे पारदर्शी पानी के कारण इसको खासी भाषा में  मावदोहनूड माव का अर्थ है पत्थर और डोहनूड का अर्थ दिल होता है इसलिए इसे दिल कहा जाता है यहाँ के लोग इसे अपनी मनौती या मनोकामना से जोड़कर देखते हैं इसी कारण श्रद्धा के वशीभूत मनौती पूरी होने के लिए पैसे चढ़ाते हैं।

एक गुफा में  फ़ब्बारे की तरह से गिर रहे झरने को राजा का स्नान गृह कहा जाता है। हम सभी लोग कभी सीढ़ियाँ चढ़कर पहाड़ी पर पहुंचे और कभी जलधाराओं के ऊपर बने  लकड़ी और बांस से बने पुल से गुजर कर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते रहे। हर जगह बहते पानी और झरने से गिर रहे पानी का रंग बदलते दिखलाई दे रहा था कहीं तो पानी हरा, कहीं पारदर्शी और कहीं आसमानी रंग का था जो मौसम और प्रकाश की तीव्रता से अपना रंग रूप बदलता  दिखलाई देता है, लेकिन हर पानी का स्रोत साफ और पारदर्शी था। कहीं भी प्रदूषण, दूर दूर दिखलाई नहीं दिया शायद इसी लिए मेघालय को बादलों का घर उचित ही कहा गया। एक और झरने के सामने चट्टान से बनी ढाल की तरह बनी आकृति के कारण प्रकृति का एक और अजूबा देखने को मिला जो अद्भुत ही था। गिरते झरनों के पीछे बने गलियारे से निकलना भी रोमांचकारी अनुभव था जब गिरते झरनों की कुछ फुहारे आपके शरीर को तरोताजगी का एक मीठा और ठंडा हवा का झोंका देती हैं और मन सहित आपके पूरे शरीर मे ताजगी का संचार कर देती हैं।  एक अन्य चट्टान में  एक शिशु की आकृति को देखा तो मानों प्रकृति ने अपनी कोख में  उसे पूरे प्यार और जतन से छुपा रक्खा हो। लगभग एक-डेढ़ किमी की चढ़ाई, उतराई और चलाई के बाद हम लोगों ने इस गोल्डन केव्स के अविस्मरणीय भ्रमण और गुफाओं की सुनहरी यादों को दिल मे सँजोये, ग्रुप के सदस्य, मेघालय के अगले पढ़ाव के लिए प्रस्थान कर गए।

विजय सहगल