"अग्रवाल
पैकर्स एंड मूवर्स-ऊंची दुकान फीके पकवान"
"चंद गत्ते
के डिब्बों के लिये ग्राहक को FIR की
धमकी"
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जून 2025 को जब मेरे छोटे बेटे ने हैदराबाद से बेंगुलुरु मूव किया तो घरेलू सामान
को शिफ्ट करने के लिये अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स का नाम स्वतः ही मस्तिष्क मे था
क्योंकि इस कंपनी की सेवाएँ मै पहले भी चार-पाँच बार ले चुका था। अनुभव ठीक था,
सेवा की उत्तम गुणवत्ता अच्छी थी यध्यपि किराया भाड़ा अन्य ट्रांसपोर्ट कंपनियों से
सर्वाधिक था। लेकिन सामान की सुरक्षा को प्राथमिकता ने हमे इस महंगी कंपनी की
सेवाए लेना उचित प्रतीत हुआ। इस तरह 16 जून 2025 को अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स
कंपनी ने मामूली क्षति के साथ सामान को बेंगुलुरु
स्थित के आर पुरम क्षेत्र मे अनलोड करा दिया।
जैसे ही जुलाई माह 2026 के आखिरी दिनों मे मुझे मालूम हुआ कि मेरे बड़े बेटे की पदस्थपना भी गुड़गाँव से बेंगलुरु हो गया, तो मै खुश था कि चलो दोनों बच्चे एक ही शहर मे साथ साथ रहेंगे तो एक दूसरे का सहारा भी रहेगा और मुझे भी बच्चों के पास एक ही समय मे साथ रहने का सुख प्राप्त होगा अन्यथा बच्चों के पास अलग अलग शहरों मे जाने-आने मे होने वाले व्यय और समय के अपव्यय से छुटकारा तो मिलेगा ही समय का सही सदुपयोग भी हो सकेगा। सौभाग्य से बड़े बेटे को भी घर के॰आर॰ पुरम की उसी सोसाइटी के सामने मिल गया जिसमे छोटा बेटा रहता था। यूं भी लोग बेंगलुरु के मौसम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते नहीं अघाते और जो बहुत कुछ हद तक सच भी था। इससे पहले मै, 2023 मे बेंगुलुरु के सरजापुर के पास स्थित थिंडलू गाँव के प्रवास का सुखद अनुभव लिये था। थिंडलू गाँव के समृद्ध ग्रामीण जीवन, वहाँ के निश्छल ग्रामीण जनों, सांस्कृति के बारे मे मैंने कई अनुभव भी समय समय पर अपने ब्लॉग मे आप सबसे सांझा किए थे, जिसकी सुंदर, सुखद और स्वर्णिम यादों मे प्रायः आज भी मै, खो जाता हूँ।
यध्यपि मै हाल ही मे 21 जुलाई 2026 को सड़क मार्ग से बेंगलुरु पहुंचा था पर बड़े बेटे के घरेलू सामान को गुड़गाँव से बेंगलुरु शिफ्ट कराने 11-12 अगस्त 2026 को पुनः गुड़गाँव पहुँच गया। निश्चित ही जब एक बार फिर से सामान शिफ्ट कराने की बात आयी तो अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी का नाम आना स्वाभाविक था। सामान की सुरक्षा और सकुशलता ने पुनः एक बार रु॰92000 का मेंहगा भाड़ा स्वीकार कर 14 अगस्त 2026 को गुड़गाँव को नमस्कार कर अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के ट्रक से बेंगलुरु के लिए रवानगी डाली। सामान लोडिंग की आपाधापी मे ट्रक रवाना होने के बाद जब दरबाजे के पीछे रखे, छह फुट चौड़े कालीन पर नज़र पड़ी तो माथा ठनका, ये तो भला हो उस ट्रक ड्राईवर शिव का जो घर से 20-30 किमी॰ ही निकला था उसको फोन कर जैसे तैसे कालीन को पुनः ट्रक मे चढ़ाया। अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी का ट्रक 18 अगस्त 2026 को सकुशल बेंगलुरु पहुँच गया। इनके कर्मचारियों ने यहाँ भी सामान को अच्छी तरह अनलोड कर घर मे रखवा दिया। लेकिन आज 18 अगस्त 2026 को सामान अनलोडिंग के दौरान अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के उस दुष्ट, कपटी और अमानवीय सुपरवाइज़र संतोष के कटु, निंदनीय अनुभव और दुर्व्यवहार को सांझा करूंगा जिसे हमलोगो ने पिछले साल 16 जून 2025 को भी महसूस किया था जब मेरे छोटे बेटे का सामान हैदराबाद से बेंगलुरु के समय किया था और जिसकी शिकायत भी तब हम लोगो ने अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के उच्च अधिकारियों को की थी।
18 अगस्त 2026 को सामान को ट्रक से उतार कर
कुछ सामान को अनपैक कर उसके बारदाने को कंपनी के कर्मचारी तुरंत बापस ले जाते है
जैसे टीवी को रखने का विशेष स्टील बॉक्स,
किचिन के काँच के बर्तनों को रखने के उपयोग
की विशेष प्लास्टिक ट्रे, फ्रिज,
डायनिंग टेबल के शीशे को पैक करने की विशेष शीट आदि। जो बापस लेना स्वाभाविक होता
है क्योंकि इनका बारंबार उपयोग जो होता है और जिनकी लागत भी ज्यादा रहती होगी। इन
सबके साथ किताबे, पर्दे,
कपड़े, जूते-चप्पल,
अन्य सजाबटी सामान जिनको कागज के गत्तों के कार्टून मे पैक किया जाता है और जिनको
तुरंत अनपैक कर लगाना/रखना संभव नहीं हो
पता है और ऐसे ही 10-15 गत्ते के कार्टून खाली न कर पाने या एक-डेढ़ रुपए किलों के
इन गत्ते के कार्टून के बाद मे ले जाने के आग्रह को नकारते हुए अग्रवाल पैकर्स एंड
मूवर्स कंपनी के इस बेशर्म,
निर्लज्ज सुपरवाइजर संतोष ने हमारे बेटे व वरिष्ठ नागरिक पत्नी की एफ़आईआर पुलिस मे
करवाने की धमकी दी और परिवार से
दुर्व्यवहार किया। आप स्थिति की सहज ही कल्पना की जा सकती है कि 92000 भाड़ा देने
के बावजूद कंपनी का दो कौड़ी का सुपर वाइजर संतोष कुमार, 2-4 सौ रुपए के गत्ते के लिए पुलिस मे एफ़आईआर की
धमकी देता है? क्या अग्रवाल पैकर्स
एंड मूवर्स कंपनी जो अपने ग्राहकों
की संतुष्टि और उत्तम ग्राहक सेवा का दम भरती है का सुपरवाइजर इस तरह का अमानवीय
व्यवहार करे? यूं भी गत्ते के
कार्टून, उपयोग के बाद अनुपयुक्त
हो जाते हैं और जिन्हे कबाड़े मे बेच दिया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि ये
कर्मचारी गत्तों को कबाड़ी को बेचने और चंद पैसों की लालच मे ग्राहकों से गत्ते के
कार्टून जबर्दस्ती खाली करा कर निजी लाभ कमाने की लालच मे,
ग्राहकों के लिए समस्या उत्पन्न करते है और गत्ते के कार्टून न मिलने पर ग्राहकों
से दुर्व्यवहार करते हैं। अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स
कंपनी के
इस सुपर वाइजर संतोष का व्यवहार हू-ब-हू बैसा ही था जैसा पिछले वर्ष 2025 मे इसने
हमारे छोटे बेटे का सामान हैदराबाद से बेंगलुरु भेजने के दौरान किया था और जिसकी
शिकायत कंपनी के उच्चा अधिकारियों से की थी। यदि कंपनी ने इस गैरजिम्मेदार सुपर
वाइजर के विरुद्ध पिछले वर्ष 2025 मे चलताऊ कार्यवाही से अलग,
कठोर कार्यवाही की होती तो इस संतोष की ग्राहकों से दुबारा ऐसा व्यवहार करने की
हिम्मत न पड़ती? बेंगलुरु जैसे आईटी शहर
मे हर दिन अनेकों इंजीनियर और विशेषज्ञ प्रति दिन स्थानांतरित होकर आते व जाते
होंगे इस लालची और असभ्य सुपर वाइजर संतोष ने अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स
कंपनी के अनेकों ग्राहकों के साथ निश्चित ही ऐसा दुर्व्यवहार करने का आदि रहा होगा,
जिसकी जांच कंपनी को करवानी चाहिए?
यहाँ यह लिखना उचित प्रतीत नहीं लगता
लेकिन सूचना के लिए आवश्यक हो गया है कि अग्रवाल
पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के भाड़े
रुपए 92000/-के अतिरिक्त, हमारे बेटे
ने लोडिंग-अन लोडिंग करने वाले मजदूरों और
कर्मियों को मानवीयता के आधार पर रुपए 3000/- रुपए टिप्स के रूप मे दिये लेकिन
कंपनी के इस ढीठ, धृष्ट और गुस्ताख़
कर्मचारी, संतोष ने मूवर और
पैकर्स जैसे व्यवसाय मे ग्राहक की संतुष्टि के लक्ष्य के विपरीत कोई सद्व्यवहार नहीं दिखाया जो घोर निंदनीय और
आपत्ति जनक है।
बेंगलुरु जैसे विश्व प्रसिद्ध शहर मे एक
अदने से सुपर वाइजर संतोष का लगातार अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स
कंपनी के
ग्राहकों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करना विश्व प्रसिद्ध अग्रवाल पैकर्स एंड
मूवर्स कंपनी के गुड गवर्नेंस
पर बहुत बढ़ा सवालिया निशान है?? ग्राहकों को अग्रवाल
पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के
ग्राहकों को इनकी महंगी सेवा, इस कहावत को
चरितार्थ करती है कि "ऊंची दुकान फीके पकवान!!"। कंपनी को इस अमानवीय व्यक्ति के विरुद्ध सख्त और
कठोर कार्यवाही करना चाहिए और अपनी छवि को बनाए रखने के लिए कृत कार्यवावाही से
लोगों को अवगत करना चाहिए।
विजय सहगल





