शनिवार, 9 अप्रैल 2022

एक युवा-श्री ओम प्रकाश शर्मा

 

"एक युवा-श्री ओम प्रकाश शर्मा"










मैंने अपने पूर्व के कुछ ब्लॉगस  मे ग्वालियर स्थित शारदा बाल ग्राम की पहाड़ी का जिक्र किया था (https://sahgalvk.blogspot.com/2020/11/blog-post_10.html)  प्रातः या संध्या  भ्रमण पर जाने वालों के लिए ये पहाड़ी श्री रामकृष्ण आश्रम प्रबंधन के सौजन्य  एवं प्रकृति द्वारा प्रदत्त अनमोल उपहार है। पहाड़, पगडंडी, जंगल के प्राकृतिक माहौल एवं मोर, तीतर, कोयल तोतो एवं अन्य अनेक  पक्षियों के कलरव के बीच अनाथ एवं निर्बल आदिवासी बच्चों को शिक्षित करने के लिए आवास की व्यवस्था भी संस्थान द्वारा इस बाल ग्राम मे की गयी है।  बाल ग्राम के आसपास रहने वालों एवं यहाँ भ्रमण के लिये आने वालों के लिये ये पहाड़ी अनमोल रत्न की तरह कोहनूर हीरा है।

इस प्राकृतिक गुणों से समृद्ध भ्रमण स्थल पर आप देवासुर संग्राम को एक साथ स्पष्ट रूप से  देख सकते है। देव और असुर दोनों ही स्वभाव के लोग नित्य इस स्थल पर आपको देखने मिल जायेंगे। जहां एक ओर असुर स्वभाव के कुछ घुमक्कड़ 2-3 फुट की नीम के बाल वृक्ष से उसकी हत्या कर दातुन तोड़, अपने कुरूप चेहरे की बत्तीसी साफ करते, चोरी के फूलों को तोड़ अपनी जेब या प्लास्टिक थैली मे भरते नज़र आएंगे, यही नहीं ये दानव प्रकृति के लोग अपने दुर्व्यसनों के पान मसाले, तंबाकू, चिप्स, चॉकलेट बिस्कुट के पाउच पूरे भ्रमण स्थल पर फेंकते मिल जायेंगे जिनको रास्ते के दोनों तरफ गंदगी फैलाते देखा जा सकता है। वही ठीक इस के विपरीत "देव" स्वभाव के श्रीमान पुरुष अप्रैल-मई के भयंकर गर्मी मे छोटे छोटे प्लास्टिक के पीपों से पेड़-पौधों को पानी देते या पक्षियों को दाना देते मिल जायेंगे।

इन आशा और निराशाओं की इन फुंसियों के बीच एक 90 बर्षीय सज्जन को देख उत्साह उमंग की प्रेरणा मिलती है, जिन्हे  मै पिछले सात-आठ माह से भ्रमण करते देख रहा हूँ। आज के अर्थप्रधान युग मे जब मनुष्य येन, केन, प्रकारेण धन प्राप्ति की अतृप्त लालसा मे निराशा और हताशा के बीच दुःख और शोक मे मग्न रहता हो, तो इन महानुभाव को सांसरिक माया मोह से दूर एक सच्चे निष्काम कर्मयोगी की तरह  भगवान की भक्ति मे रत् भ्रमण करते देखा जा सकता है। उम्र के इस पड़ाव मे प्रायः व्यक्ति बीमारियों और शारीरिक अक्षमताओं के चलते  हताश और निराश होकर अपने परिवारों पर आश्रित हो अपने भाग्य को नियति मान घर के दालान या पौर मे अपना जीवन व्यतीत करने लगता है। नब्बे वर्षीय इन साधारण और सरल प्रौढ़ सज्जन श्री ओम प्रकाश शर्मा  को शारदा बाल ग्राम मे सर्दी, गर्मी या बरसात के मौसम के परे, समाज या शासन से बिना किसी शिकवे-शिकायत या उलाहने के नित्य भ्रमण करते देखा जा सकता है। इस दौरान जैसे जैसे मैंने इन माननीय शर्मा जी के बारे मे जानने की कोशिश की बैसे बैसे  इनके उत्साह और उमंग के सामने मे नतमस्तक होता चला गया। ये बुजुर्ग सज्जन वास्तव न केवल मेरी अपितु प्रातः भ्रमण को आने वाले हर उस व्यक्ति की प्रेरणा के स्त्रोत है जो उन्हे अपनी धुन मे रत् मंथर गति से सैर करते देखता है।    

इस उम्र मे भी ईश्वर द्वारा प्रदत्त इस मानव काया को उम्र के इस पढ़ाव पर भी अनासक्त भाव से, जीवन रूपी इस चादर मे बिना किसी दाग-धब्बे  के  साफ सुथरी और स्वस्थ रक्ख  कबीर दास जी के उन पंक्तियों को चरितार्थ किया है कि:- "चदरिया झीनी रे झीनी......  ..........ज्यों की त्यों रख दीनी! ....चदरिया झीनी रे झीनी..........!

प्रातः पाँच साढ़े पाँच बजे भगवान कृष्ण और राधा के नाम का स्मरण करते हुए वे शारदा बाल ग्राम मे मिल जायेंगे। एक दिन जब सर्दियों की सुबह वे लंबा चौड़ा ओवर कोट, जिसका बजन 3-4 किलो से कम नहीं रहा होगा अपनी दुबली पतली काया पर ओढ़ भ्रमण पर मिले।  जिज्ञासा बस मैंने उनको प्रणाम कर उनके बारे मे जानने की उत्सुकता प्रकट की तो उन्होने बताया कि युवा अवस्था मे लगभग 35-40 साल उन्होने दिल्ली के करोल बाग मे अपने ऑटो पार्ट्स के व्यवसाय को चलाया। चार बेटियों की शादी कर अपने सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के बाद भगवान कृष्ण की जन्म एवं कर्म स्थली  मे अपना  शेष जीवन भगवान कृष्ण और राधा की भक्ति मे बिताने के उद्देश्य से मथुरा के बरसाने गाँव मे अपना डेरा डाल दिया। इस तरह अपना जमा जमाया कारोबार समाप्त कर भगवान भक्ति मे रमा कर  वान प्रस्थ जीवन व्यतीत किया। पिछले कुछ समय से ग्वालियर मे अकेले एक किराये के मकान मे रह रहे है। जीवन यापन हेतु सारे कार्य वे स्वयं ही करते है। हर रोज लगभग 3-4 किमी के भ्रमण से ही उन्हे संतोष नहीं है वे अपने साथ लाये दाने को बाल ग्राम मे स्थित मोर, नीलकंठ चकोर, कोयल पक्षियों के साथ सांझा कर शायद हरिओम शरण के इस भजन की यादे ताजा करते है:- "नाचेंगे मोर बनकर हे श्याम तेरे द्वारे"।  "घनश्याम छाये रहना, बनकर के मेघ कारे"॥

इतना सब करने के बाद भी ऐसा लगता है कि अति वरिष्ठ ओम  प्रकाश जी जैसे युवा का मन नहीं भरा। किसी विद्वान ने सही ही कहा है कि उम्र महज एक संख्या है!! जिसे उम्र के किसी भी पढ़ाव पर ठीक उसी तरह उत्साह और उमंग के साथ जिया जा सकता है जैसे आप बचपन या किशोर अवस्था मे जीते थे। प्रातः घूमने के दौरान व्यायाम हेतु जिम के इस क्षेत्र मे प्रायः बच्चे और नौजवान किशोरों को ही कसरत करते हुए देखता था पर एक दिन बालग्राम मे लगे अनेक प्रकार के कसरत करने के यंत्रों के बीच मे ओम प्रकाश जी को जिम की मशीन के पास खड़े अपनी बारी की प्रतीक्षा करते देख मै चौंक गया। मुझे तो उम्मीद भी नहीं थी कि 90 वर्षीय कोई प्रौढ़ जिम के यंत्रों के साथ भी दो-दो हाथ कर सकता है। लेकिन मै गलत था। अपनी बारी आने पर ओम प्रकाश जी ने हाथों और पैरों की कसरत का जो नमूना पेश किया वो बेमिशाल था। पूरी ताकत से हाथों और पैरों को विपरीत दिशा मे शक्ति लगा अपने श्रम से जो गति पैदा की वो गति के नियम का एक आदर्श नमूना थी। इन्हे वीडियो मे देख आप भी रोमांच और आश्चर्य का अनुभव किए बिना नहीं रह सकेंगे।

मेरे सहित अनेक लोगो के प्रेरणा के स्रोत एक अजनबी श्री ओम प्रकाश शर्मा जी के स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना करते है ताकि वे अनेक हताश और निराश लोगो को एक दीपक की तरह  अपनी आदर्श जिजीविषा से  प्रेरणा के स्रोत बन जीवन के प्रति प्यार के पथ को प्रकाशित करते रहे।    

विजय सहगल                  

1 टिप्पणी:

Deepti Datta ने कहा…

बहुत सुन्दर..