बुधवार, 20 अप्रैल 2022

धार्मिक जलूसों पर हमले

 

"धार्मिक जलूसों पर हमले"





नव संबत्सर 2 अप्रैल 2022 से देश के विभिन्न शहरों मे पूर्व नियोजित तरीक़े से देश द्रोही और असामाजिक तत्वों द्वारा अचानक ही हिन्दू धार्मिक जलूस-जलसों पर आक्रमण किए गये। जिसमे राजस्थान के करौली कस्बे एवं मध्य प्रदेश मे खरगौन का शहर मुख्य तौर पर निशाने पर रहा। ब्लॉग लिखे जाने के दौरान दिल्ली के जहांगीरपुरी मे भी हनुमान जन्मोत्सव वाले दिन ऐसी ही घटना घाटी।  इन शहरों मे मुस्लिम बाहुल इलाकों मे कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सुनोयोजित तरीक़े  से अशांति और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की गयी जिसमे कुछ हद तक ऐसे तत्व सफल भी रहे। दुर्भाग्य और शर्म की बात ये रही कि अधम सोच के अगुआ और रहनुमा श्री  असुद्दीन औवेसी एवं श्री दिग्विजय सिंह जैसे उम्रदराज और परिपक्व नेताओं के गैर जिम्मेदारन ब्यान आश्चर्यचकित और वेदना देने वाले थे। इन नेता द्व्य द्वारा  रामनौमी, संवत्सर, हनुमान जन्मोत्सव  के जलूस पर मुस्लिम बहुल इलाकों मे रह रहे चंद  असामाजिक कट्टरवादी तत्वों की अगुआई मे पत्थरबाजी की शुरुआत के बावजूद इन तत्वों को घटनाओं का पीड़ित और शोषित बताने का नीच निर्लज्ज प्रयास किया गया। दिग्विजय सिंह ने तो अपने ट्विटर अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट कर लिखा था कि क्या तलवार-लाठी लेकर धार्मिक स्थल पर झंडा लगाना उचित है? क्या खरगोन प्रशासन ने इजाजत दी थी? लेकिन वो तस्वीर खरगोन या एमपी की न होकर मुजफ्फरपुर (बिहार) की थी!! इससे बड़ा झूठ कोई साधारण व्यक्ति ट्वीट करे तो उसकी बुद्धि और ज्ञान पर तो तरस खाया जा सकता है पर श्री दिग्विजय सिंह जो दशकों तक मध्य प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री रहे के बारे मे क्या कहा जाये विचारणीय प्रश्न है? पूर्व भारतीय रियासतों के राजाओं और राजकुमारों द्वारा अपनी त्रुटि को स्वीकार करना तो शायद उनके स्वभाव और संस्कृति मे ही नहीं और हम साधारण नागरिकों को इनसे इस बात की अपेक्षा भी नहीं करनी चाहिये?

श्री  असुद्दीन औवेसी द्वारा इन विघटन कारी तत्वों के निवास और संपातियों पर बुलडोजर चला ध्वस्त करने की  सरकारी मुहिम पर सवाल खड़े कर पूंछा कि किस कानून के तहत इन असामाजिक तत्वों की इमारतों को बुलडोजर द्वारा धरशाही किया जा रहा है? औवेसी जी ने विधि विषय मे वैरिस्टर की उपाधि जरूर हांसिल की है,  कानून के अच्छे ज्ञाता भी है, क्या इन गुंडा और समाज विरोधी तत्वों से भी वे  पूंछने की हिमाक़त  करेंगे कि किस कानून के तहत इन तत्वों ने शांतिप्रिय, बेकसूर नागरिकों के ऊपर पत्थरबाजी, हिंसा, आक्रमण और इनके घरों मे लूटपाट और आगजनी की है? जब इन उपद्रवी और बर्बर तत्वों को सामान्य नागरिकों के लिए शांति प्रिय जीवन जीने के विधि सम्मत  अधिकारों की चिंता नहीं तब कैसे इन हिंसक नरपिशाच  अपराधियों के मानव अधिकारों की पैरवी की जा सकती है? अनैतिक और अवैधानिक संसाधनों से अर्जित, अवैध संपतियों को धूलधूसरित कर नष्ट करने मे आपत्ति क्यों होना  चाहिये? अपराधी और द्रोहीयों का कोई धर्म ईमान नहीं होता, इनके विरुद्ध सख्त आपराधिक कार्यवाही ही एक मात्र उपाय है फिर वे किसी भी धर्म और संप्रदाय के हों। विकास दुबे "कानपुर वाला" इस बात का जीता जागता उदाहरण है। लेकिन इन दोनों राजनैतिक "श्रीमान पुरुषों" को अपने किए पर शायद ही कोई संकोंच या लज्जा हो?

करौली मे भी हुई सांप्रदायिक हिंसा मे राजस्थान सरकार के निष्ठुर मुख्य मंत्री श्री  अशोक गहलोत द्वारा  बगैर किसी जांच पड़ताल के हिंदुवादी संघटनों को दोषी एवं कुछ हिंसक मुस्लिम तत्वों को क्लीन चिट ठहरा कुकृत्य को समझा जा सकता है क्योंकि कॉंग्रेस के सत्तर दशकों से चली आ रही तुष्टीकरण की नीति का ही परिणाम है कि काँग्रेस की ये  दुर्गति  हुई है कि कभी सारे देश मे राज्य करने वाली काँग्रेस आज चंद राज्यों मे सिमट कर रह गयी है। ऐसी आशंका है कि आवश्यक सुधारात्मक बदलाव या उपाय नहीं किए गये तो शायद काँग्रेस सिर्फ इतिहास के पन्नों मे सिमट कर न रह जाय?  

लेकिन भा॰जा॰पा॰ को क्या कहा जाये जो बंगाल या अन्य राज्यों मे हुई हिंसा पर उनके मुख्य मंत्री सुश्री ममता बैनर्जी या श्री गहलोत को पानी पी-पी कर कोसने मे कोई कसर नहीं छोड़ती। उनके मुख्य मंत्रियों पर तुष्टीकरण का आरोप लगा इस्तीफे की मांग की जाती है। तो मध्य प्रदेश सरकार ने कैसे अतिवादियों द्वारा राज्य मे हिंसा को होने दिया? क्यों नहीं खुफिया विभाग द्वारा समय रहते सरकार को सचेत नहीं किया? यूपी मे योगी जी का अपराधियों के विरुद्ध सख्त संदेश और कार्यवाही के चलते कहीं कोई दंगे या झगड़े नहीं हुए, तब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज जी अपराधियों के दिल मे बैसा भय या डर उत्पन्न क्यों नहीं कर सके जो यूपी मे श्री योगी सरकार ने अपराधियों के विरुद्ध कर दिखाया? खरगौन मे लूटपाट, नागरिकों के घरों मे आगजनी, दंगे की स्थिति  कैसे उत्पन्न होने दी  और राज्य के शांतिप्रिय नागरिकों को हिंसा, आगजनी लूटपाट के कोप का भाजन क्यों होने दिया? इसका एक मात्र कारण मध्य प्रदेश शासन के प्रशासनिक अधिकारियों  का ढीला-ढाला एवं लचर रवैया ही एक मात्र कारण नज़र आता है, अन्यथा राज्य मे चाहे सुनोयोजित दंगे हों या  व्यापम जैसा घोटाले होते रहे सरकार को कोई खबर ही नहीं होती? हजारों-हजार  पढे-लिखे युवाओं का भविष्य व्यापम कांड मे चौपट न होता? ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के अधिसंख्य  प्रशासनिक  अधिकारियों की निष्ठा और समर्पण राज्य मे सुशासन परस्त न होकर स्वार्थ परस्त प्रतीत होता है?

जब बंगाल और राजस्थान सरकार द्वारा दंगे रोकने मे कोताही के लिए निंदा और आलोचना की जाती हो, तो खरगौन मे साधारण लोगो के घरों मे लूटपाट और आगजनी रोकने मे असफल मध्य प्रदेश शासन  की आलोचना भी क्यों नहीं होना चाहिये? माननीय शिवराज जी को आम नागरिकों के धन संपत्ति के रक्षार्थ एवं राज्य मे सुशासन की अच्छी तरह स्थापना हेतु अपनी नीतियाँ, योजनाएँ और कार्यक्रम  भी बनाने पड़ेंगे? श्री मोदी जी कब तक आपके सत्ता और   शासन का "योग क्षेम" ("योगक्षेमं वहाम्यहम्") करते रहेंगे?  

इन सुनोयोजित दंगों पीएफ़आई एवं सीएफ़आई जैसे कततारपंथी संगठनों एवं मे षड्यंत्री कारी  विदेशी शक्तियों  और विदेशी फंडिंग की आशंका प्रकट की जा रही है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता?  बंगला देशी और रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों का भी इन दंगों को फैलाने की साजिश मे  शामिल होने की शंकाएँ प्रकट की जा रही है। इन अपराधी तत्वों को विदेशी और विघटन करी तत्वों द्वारा धनापूर्ति की भी पूरी संभावना है।  अब वक्त आ गया इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और आम जनों को इन शरणार्थी हितों  से ऊपर उठ  देश हित मे संगठित हो आवाज उठानी होगी और इन अवैध घुसपैठियों को शक्ति पूर्वक देश के बाहर खदेड़ना होगा। स्वार्थ और धन  लोलुप राजनैतिक दलों से तो अब ऐसी उम्मीद व्यर्थ है?  

विजय सहगल

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