विज्ञापनों में पीएनबी प्रबंधन द्वारा बैंक कर्मियों को खलनायक के रूप मे निंदनीय प्रस्तुतिकरण
पिछले दिनों बैंक की
संयुक्त बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों की 28 सितमबर 2026 से 30 सितमबर 2026 तक
की प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल के आवाहन पर पंजाब नैशनल बैंक प्रबंधन ने
सोशल मीडिया पर जो विज्ञापन प्रचारित किए उसमें उच्च बैंक प्रबंधन का, जहाँ एक ओर
कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रति घिनौना, अमानवीय और अनैतिक चेहरा दिखाई दिया,
वहीं दूसरी ओर बैंक के अध्यक्ष और उच्च प्रबंधन, वित्त मंत्री और वित्त मंत्रालय
के सचिवों के सामने नतमस्तक हो चाटुकारिता और चापलूसी करते नज़र आए। प्रबंधन ने
अपने ही हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को खलनायक की तरह प्रस्तुत करने मे कोई
कोर कसर नहीं छोड़ी, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर दिए अपने विज्ञापन मे अग्निशमन, डॉक्टर और पुलिस के स्टाफ को बैंक
कर्मियों के विरुद्ध प्रातिस्पर्धी के रूप मे प्रस्तुत कर उन पर व्यंगयात्मक
टिप्पड़ी करते हुए दिखलाया, कि डॉक्टर, पुलिस
स्टाफ और अग्निशमन का स्टाफ 24 घंटे सेवा मे तत्पर रह काम करता हैं और हम पाँच दिवसीय हफ्ते की मांग नहीं कर रहे!!
इसमे कोई शक नहीं
डॉक्टर, अग्निशमन सेवकों, पुलिस या सुरक्षा बलों की सेवा देश और समाज मे इसलिए
सम्मान की दृष्टि से देखी जाती है क्योंकि वे निरंतर 24 घंटे अपनी सेवाओं से देश
और समाज की सेवा मे रत हैं, क्योंकि इन सेवाओं मे कार्यरत स्टाफ को कभी भी चिकित्सा,
अग्नि और कानून व्यवस्था के लिये कभी भी जाना पद सकता है। इन विभागों मे उसी तरह समुचित
मात्रा मे स्टाफ भी ऊपलब्ध कराया जाता है ताकि स्टाफ को समुचित आराम के साथ पारवारिक
जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन भी कर सकें। बैंक कर्मी
और चिकित्सा सेवा, अग्निशमन सेवा और सुरक्षा/पुलिस बल एक दूसरे के पूरक हैं
प्रातिस्पर्धी नहीं। लेकिन पीएनबी प्रबन्धन का बैंक कर्मियों को इन सेवाओं मे
कार्यरत कर्मियों के विरुद्ध प्रातिस्पर्धी के रूप मे खड़ा कर खलनायक के रूप मे
प्रस्तुत करना घोर आपत्तिजनक और निंदनीय
है।
दरअसल विज्ञापन देने के
लिये जिम्मेदार PNB बैंक प्रबंधन विज्ञापन के माध्यम से एक तीर से दो निशाने लगाना चाहता था। बैंक
प्रबंधन ने विज्ञापन के माध्यम से जहाँ बैंक कर्मियों को सदेश दिया कि एक ओर तो
बैंक कर्मी, कितने स्वार्थी, खुदगर्ज और मतलबी हैं कि अपने लिये आप 5 दिन के हफ्ते
की मांग कर रहे है और वही दूसरी ओर डॉक्टर, पुलिस के जवान और अग्निशमन सेवा के
कर्मी दिन-रात 24 घंटे सेवा देते हैं और वे हफ्ते मे 5 दिन कार्य दिवस की मांग
नहीं करते? ये बैंक प्रबंधन की अंग्रेजों की तरह बाँटों और राज करों नीति का
कुत्सित हिस्सा है। बैंक प्रबंधन यहीं नहीं रुका, उसने सोशल मीडिया एक्स पर दिए
अपने विभत्स और बैंक कर्मी विरोधी, अपने विज्ञापनों के माध्यम से वित्त मंत्री और
बैंकिंग विभाग के सचिवों की जी हज़ूरी, चापलूसी और खुशामद करने के लिए इन
विज्ञापनों की प्रतियां भी उनके एक्स एकाउंट @DFS_India (भारत सरकार के बैंक से जुड़े वित्त सेवा विभाग) एवं @FinMinIndia (भारत सरकार के वित्त मंत्री का विभाग) पर भी भेजीं। दूसरे अन्य बैंकों ने
भी लोगों और आम जनता में जागरूकता फैलाने के लिए अपने बैंक क्रियाकलापों को हड़ताल
के पूर्व करने की सलाह अवश्य दी जो एक जिम्मेदार संस्थानों के रूप मे उचित थी, पर
किसी भी अन्य सरकारी बैंक ने इस तरह की अशिष्ट, असभ्य और गैरजिम्मेदार भरा विज्ञापन
नहीं दिया। आम जनों को बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान करने और असुविधा से बचाने के
लिए इन्ही बैंक कर्मियों और अधिकारियों ने रविवार को भी बैंक खोलकर आम जनों को
बैंकिंग सेवायें उपलब्ध कराई और यही निर्लज्ज, PNB बैंक
प्रबंधन दुनियाँ के सामने अपने ही बैंक
कर्मियों की व्यंग्यात्मक तरह से खिल्ली उड़ा रहा था जो इनके दोहरे चरित्र को उजागर
करता है। जैसे ही उक्त विज्ञापन सोशल मीडिया पर आए मैंने तुरंत ही एक्स पर इन
विज्ञापनों के विरोध मे अपना तीखा विरोध दर्ज कराया। ऐसे ही अन्य लोगों के विरोध
के चलते उक्त तीनों विज्ञापन को 27 सितम्बर 2026 को प्रबंधन ने अपने सोशल मीडिया
एकाउंट से डिलीट कर हटा दिया जो इनके डरपोंक कायरतापूर्ण कुकृत्य और प्रबंधन
के मानसिक दिवालिया पन, नकारात्मक सोच और नैतिक पतन को दर्शाता है।
ऐसा नहीं था कि हफ्ते मे
5 दिवसिय कार्य दिवस की मांग अनोखी थी या पहली बार की गई थी। बैंक कर्मियों की ये
मांग 2015 से निरंतर चली आ रही है, बैंक कर्मी अपनी हर मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन और प्रदर्शन
करते हैं। यहाँ ये लिखना आवश्यक हैं कि बैंक कर्मी जब भी हड़ताल करते हैं तो No works,
No pay नीति के तहत प्रत्येक हड़ताल के दिनों का वेतन उनकी
तनखा से काट लिया जाता है, अन्य सरकारी विभागों की तरह नहीं कि चाहें जितनी हड़ताल
करो पर वेतन मे दिन तो छोड़िए घंटे भर की भी वेतन कटौती नहीं होती। ये बैंक
कर्मियों का दुर्भाग्य हैं कि हड़ताल के दूसरे दिन दुगना बैंकिंग कार्य भी उन्हे
देर रात तक बैठ कर निपटना पड़ता हैं, हर दिन का कार्य उसी दिन करना बैंक कर्मियों की नियति है अन्य विभागों की
तरह कार्य को आगे बढ़ाना या पेंडिंग रखना बैंक की कार्य प्रणाली मे संभव ही नहीं
हैं। बैंकिंग क्षेत्र मे हफ्ते मे 5 दिवसीय कार्य की मांग के अनुरूप ही
इन्श्योरेन्स सेक्टर और भारतीय रिजर्व बैंक मे 5 दिवसीय कार्यदिवस मई 2021 से लागू हो गया पर बैंक कर्मी अभी भी 5
दिवसीय हफ्ते की मांग के लिए धरना, प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे है। आज के सूचना प्रौधयोगिक
युग मे जहां, एटीएम, नेट बैंकिंग, फोन बैंकिंग, UPI के चलते
बैसे भी 24 घंटे की बैंकिंग लागू है, मोदी सरकार की सफलता का मूलमंत्र ही बैंकिंग
है, तब क्यों 5 डेज़ वीक घोषित नहीं किया जा सकता।
हर नीति और कार्यक्रम
पूर्णतः बैंकिंग से जुड़े हैं, जनधन खाते, पैसे सीधे लाभार्थी के खाते मे जमा होने
वाली सरकारी की योजनाओं का कार्यान्वयन ही बैंक कर्मियों द्वारा किया गया है फिर
भी पंजाब नेशनल बैंक उच्च प्रबंधन द्वारा बैंक कर्मियों को खलनायक के रूप मे
प्रस्तुत किए जाने और बैंक के अध्यक्ष सहित उच्च प्रबंधन द्वारा सरकार की गुड बुक मे आने के इस चापलूसी भरे
कृत्य की सरकार को भी निंदा करते हुए बैंक प्रबंधन के विरुद्ध अनुशासनात्मक निर्देश
जारी करना चाहिए ताकि स्टाफ के मोनबल को तोड़ने की किसी भी कोशिश पर अंकुश लगाया जा
सके।
विजय सहगल




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