"शाबाश!!
कैप्टन स्मित मच्छार..............!!"
30 सितंबर 2026,
बुधवार की प्रातः 8.35 बजे फ़्लाइ दुबई की फ्लाइट संख्या एफ़ज़ेड 1073 जब दुबई से
इस्राइल की राजधानी तेलावीव के लिए उड़ी तो
उसमे बैठे 174 यात्रियों जिनमे से अधिकतर इस्राइली नागरिक थे,
ने कभी नहीं सोचा होगा कि आज इस उड़ान पर संकट के बादल छाने वाले हैं। 35000 फुट की
ऊंचाई पर उड़ रहे इस प्लेन से 11.01 बजे अचानक सामान्य आपातकाल का संकेत कोड 7700
जारी हुआ जो इस बात का संकेत था कि हवाई जहाज में कहीं कुछ गड़बड़ है?
और अचानक कुछ ही सेकंड में विमान 35000 फुट की ऊंचाई से गोता लगा कर 17000 फुट की
ऊंचाई पर तेजी से नीचे की ओर आया, केबिन की लाइट
अचानक बुझ गई। यात्रियों के बीच भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यात्रियों ने
कॉकपिट से चीख-पुकार की आवाज़े सुनी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि अंतर्राष्ट्रीय
नागरिक उड्डयन संगठन द्वारा प्रत्येक प्लेन में अनिवार्य रूप से रक्खी जाने वाली जिस
सुरक्षा कुल्हाड़ी (क्रेश एक्स या फायर एक्स भी कहते हैं।) का उपयोग हवाई जहाज के पायलट
और कोपायलट द्वारा आपातकालीन परिस्थितियों
में आग बुझाने, रास्ता बनाने,
खिड़की तोड़ने, बिजली के तार काटने (बिधुत रोधी होने के कारण) कर सकते हैं
उसका दुर्पयोग ओमनी नागरिक, साथी कोपायलट
अपने मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के उपर जानलेवा आतंकी हमला करने में करेगा!!
इसी बीच 11.08 बजे फ़्लाइ दुबई के कैप्टन स्मित ने,
इस्लामी अतिवादी, आत्मघाती मानसिकता से ग्रसित अपने साथी कोपायलट द्वारा
9/11 जैसे हमले की पुनरावृत्ति करने के
लिए अपने उपर हुए घातक और जानलेवा हमले और लहूलुहान होने के बावजूद हवाईजहाज के
अपहरण का कोड संख्या 7500 का सिंगनल हवाई नियंत्रण कक्ष को भेजा।
फ़्लाइ दुबई की इस उड़ान के अपहरण की सूचना पर
जहां हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष का पूरा तंत्र
सक्रिय हो गया और वहाँ कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित,
हवाई जहाज के 174 यात्रियों की जान बचाने के लिए अपने ही सह पायलट ओमानी नागरिक
हमाम अल हमामी के द्वारा चाकू से लगातार किए जा रहे हमलों से जूझ रहे थे। अपने
अदम्य साहस और सूझ बूझ से कैप्टन स्मित ने पेट,
सिर, हाथों से बह रहे खून से लथपथ,
अपनी ज़िंदगी और मौत से लड़ रहा था,
इसके बावजूद पायलट स्मित के मन में चल रहे
अंतर्द्वंद कि आज अगर उसने हिम्मत नहीं दिखाई तो 174 यात्री अपनी जान गंवा देंगे।
कॉकपिट में गंभीर रूप से घायल पड़े कैप्टन
स्मित को 9750 घंटे से भी ज्यादा का प्लेन उड़ाने के अनुभव से मालूम था कि साथी सहपायलट ने विमान
की नोज़ को नीचे करने के कारण विमान नीचे जा रहा है अपने आराध्य बीर हनुमान को याद
कर उसने अपने अथक प्रयास से केबिन का दरबाजा खोल दिया ताकि दूसरे लोग कॉकपिट के
अंदर आ सके। ऐसा करते ही केबिन के बाहर के कुछ यात्री कॉकपिट में आ घुसे उन्हे खून
से लथपथ, पायलट स्मित को देख
मामला समझने में देर न लगी और पेशे से प्लम्बर एक इस्राइली यात्री यानिव हायून ने
प्लेन को नुकसान पहुंचा रहे सह पायलट को पीछे से गले को दबोच कर सीट से बाहर
हटाया। अन्य यात्रियों की मदद से हेडफोन
के तारों से बांधने की कार्यवाही को जिव्का मान्स एवं असफ रेगुआन नामक यात्रियों ने अंजाम दिया और तब तक अपने पैरों से उसे
दबोचे रहे जब तक प्लेन सकुशल नीचे नहीं उतार गया। चींखे सुनकर सबसे पहले पहुंचे एक
अन्य इकलौते डॉक्टर यात्री डेन्टिस्ट शोटा मुसाएव ने बेहद नाजुक हालात में पहुंचे
कैप्टन स्मित के सिर और हाथों से बह रहे खून को रोका और लेंडिंग तक कैप्टन के
स्वास्थ्य पर नज़र बनाएँ रखी। मौत से बेखौफ,
ये एक स्वतः स्फूर्त सामूहिक संकल्प था जिसमे आतंक और अतिवाद से लड़ने की दृढ़
इच्छाशक्ति स्पष्ट प्रण और प्रतिज्ञा
यात्रियों में दिखलाई दे रही थी। इस बेहद खौफनाक हवाई यात्रा का सौभाग्य था कि इस
यात्रा में दो हवाई पायलट यात्री के रूप में इस प्लेन में हवाई यात्रा कर रहे थे
जिन्होने पायलट स्मित के निर्देशानुसार कॉकपिट को सम्हाल लिया और सऊदी अरब के शहर
तबुक में 12.51 बजे सुरक्षित आपात लेंडिंग कराई। इस तरह मौत के भय,
अकाल और असमय मृत्यु के खौफनाक दरवाजे पर खड़े,
174 यात्रियों की 3 घंटे 53 मिनिट की आतंक के साये में उड़ी हवाई यात्रा का डरावना,
खौफनाक, भयानक दिल दहलाने वाले
मंजर का अंत बिना किसी जनहानि के अच्छा सुखांत हुआ।
इस घटना की खबर जंगल में आग की तरह सारी
दुनियाँ में फैल गयी। अमेरिका के
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और सूझ बूझ
की खुलकर तारीफ की। कॉकपिट का दरबाजा खोल मदद के लिए चिल्लाने पर उनकी प्रशंसा की
और उन्हे नायक बताया। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा: असाधारण
बहदुरी दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को मेरा सलाम!,
मै उनके स्वास्थ्य होने की कामना करता हूँ। वह सच्चे नायक हैं। भारतीय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के धैर्य,
साहस और सूझ बूझ की की सराहना करते हुए कहा कि,
कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनी जान की परवाह किए बिना 9/11 जैसे आतंकी हमले को नाकाम
कर दिया। घायल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और यात्रियों की मदद से एक बड़ा
विमान हादसा होने से बचा लिया। मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार के साहसिक
कृत्य से हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। 140 करोड़ भारतीय उन्हे सलाम कर
रहे हैं और उनके शीघ्र स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। एक विडियो संदेश में मोदी
ने कैप्टन स्मित मच्छार के माध्यम से ठीक ही
संदेश दिया कि हम भारतीय जान लेने वाले लोग नहीं है,
हम जान बचाने वाले लोग हैं। ये स्पष्ट संदेश उन आतंकवादियों और उनका पालन पोषण
करने वालों को एक खुला संदेश कि भारत की संस्कृति और सभ्यता "सर्वे भवन्तु सुखिन:....... की राह पर
चलने वाली है।
देश विदेश के सभी बड़े राजनैतिक दलों और उनके
नेताओं ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी,
साहस और सूझ बूझ की तारीफ की, जिसने 174 लोगों
की जान बचाकर आतंकी हमले को निष्फल कर दिया। देश में भी राष्ट्रपति,
प्रधान मंत्री सहित कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे,
रक्षा मंत्री, गृहा मंत्री सहित
प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने भी भारतीय पायलट,
स्मित की भूरि-भूरि प्रशंसा की। प्रायः
सभी राजनैतिक दलों और उनके नेताओं ने भारतीय पायलट के पराक्रम और शूर वीरता की
तारीफ की है। गाजा, फिलिस्तीन और मध्य
पूर्व देशों के छोटे बड़े मुद्दों पर अपनी राय देने वाले गांधी परिवार का भारतीय
पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी और साहस पर
कोई सार्वजनिक या व्यक्तिगत ब्यान न आना चिंता का विषय है। लेकिन बेहद दुःख
और अफसोस है कि जिस भारतीय पायलट के शौर्य और साहस की प्रशंसा पूरा विश्व कर रहा
है, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,
सांसद प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी का कोई भी सार्वजनिक या व्यक्तिगत ब्यान न
आना चौंका देने वाला है। ऐसी कौन सी मजबूरी है जो हमे देश के जांबाज सैनिकों,
नागरिकों और पायलट की बहादुरी की प्रशंसा के दो शब्द भी कहने से रोकती है?
इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी राजनीति हो रही है
जो कि स्वाभाविक ही है क्योंकि ये निश्चित ही एक खौफनाक आतंकी घटना हो सकती थी
क्योंकि इसका अंजाम, लगभग 170 इस्राइली
नागरिकों की मौत के रूप में एक हवाई दुर्घटना होती। लेकिन भला हो कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और शौर्य का,
जिसने आतंकी हमलों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जब इसके दूसरे पहलू पर गौर करें तो स्थिति बड़ी भयावह लगती है? यदि आतंकी इरादे सफल हो गए होते तो
अंतराष्ट्रीय स्तर पर कैप्टन स्मित मच्छार का एक भारतीय हिन्दू पायलट होने के कारण
भारतीय पायलटों की विश्वसनीयता पर एक बहुत
बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो जाता? देश के बाहर,
इस्राइल और भारत के बीच भ्रम और भ्रांति फैलाने की कहानियाँ गढ़ी जाने लगती और देश
के अंदर छद्म धर्मनिपेक्ष वादी और वामपंथियों के गिरोह एक बार फिर से हिन्दू आतंकवाद
जैसे शब्दों को गढ़ कर अपनी अधम सोच और नीच मानसिकता को खाद पानी दे रहे होते।
इस घटना के बाद के अभी अनेकों विषयों,
पाहुलुओं पर गंभीर जबाव आने बाकी है जिन्हे गहन जांच के बाद सार्वजनिक किया जाएगा
और ऐसी उम्मीद करनी चाहिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी।
विजय सहगल


1 टिप्पणी:
साहस और विवेक का अनुपम उदाहरण
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