गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

सौ करोड़ का "टीका करण अभियान

 

"सौ करोड़ का "टीका करण अभियान"










जब पहले चरण मे 16 जनवरी 2021 को स्वास्थय कर्मियों से जब कोरोना टीकारण की शुरुआत हुई तो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इतनी विशाल जनसंख्या के बीच कोरोना टीकाकरण को कैसे सम्हाला जाएगा या कैसे इसको सुचारु रूप से संचालन किया जाएगा। लोगो मे अनेक भ्रांतियाँ और शंकाएँ थी जो स्वाभाविक थी। 130 करोड़ की आबादी मे 100 करोड़ की आबादी  को इस महामारी के विरुद्ध कोरोना टीकारण अभियान कोई आसान कम नहीं था। कैसे इतनी बड़ी संख्या मे टीकों का उत्पादन होगा? और हो भी गया तो लोगो के बीच वितरण और टीकारण कोई साधारण काम न था। पर जैसे तैसे एक शुरुआत स्वास्थ्य कर्मियों के बीच हो चुकी थी। लोगो को भरोसा नहीं था कि अभियान इतनी ईमानदारी पूर्वक चल भी पाएगा या नहीं। टीका करण की इस धारणा मे आग लगाने का काम सपा के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने ये ब्यान देकर किया कि "वे कोरोना का टीका नहीं लेंगे, क्योंकि ये भाजपा का टीका है"। देश के सबसे बड़े सूबे का मुख्य मंत्री इतना गैर ज़िम्मेदारी पूर्ण ब्यान  कैसे दे सकता है?

2 फरवरी को जब कोरोना योद्धाओं को टीकाकरण शुरू हुआ तब तक टीका करण अभियान की बुनियाद रक्खी जा चुकी थी। पर शंकाओं-कुशंकाओं का बाज़ार गर्म था। भारत की आबादी को देखते हुए ये इतना बड़ा अभियान था कि कई छोटे देश की आबादी हमारे उत्तर प्रदेश से भी कम थी। लेकिंन  प्रशंसा करनी होगी कोविन/आरोग्य एप्प की जिसने देश की 130 करोड़ की आबादी को लक्ष्य कर बनाये इस सूचना तकनीकि एप्प का निर्माण किया। इस एप्प के निर्माण मे जुड़ी संस्थाएं एवं उनके इंजीनियर भी बधाई के पात्र है जिनके बिना इस कार्यक्रम को सुचारु रूप से लागू करना संभव न हो पाता।  सरकारी योजनाओं मे बेईमानी भ्रष्टाचार की घटनाएँ आम होती है लेकिन कुछ छोटी मोटी कमियों को छोड़ कर टीका करण अभियान बिना किसी गड़बड़ी, भेदभाव या पक्षपात के पूरी ईमानदारी से आज भी जारी है जो काबिले तारीफ है।  प्राइवेट हॉस्पिटल मे जहां टीके की कीमत 790 रुपए है और जो सरकारी अस्पतालों मे निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे है अतः सहज ही टीका करण पर होने वाले व्यय का अनुमान  लगाया जा सकता है। बीबीसी लंदन द्वारा कोरोना टीका करण की धीमी गति पर सवाल किए गए थे। काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने कहा था कि जिस गति टीका करण की चल रहा है उसको देखते हुए देश की कुल आबादी को सन  2024 तक भी टीके नहीं लगाये जा सकेंगे।

विपक्षी दलों के कुछ गणमान्य नेताओं का अल्प सोच तुच्छ  मानसिकता  भी इस अभियान मे देखने को मिली। इस अभियान मे कुछ राजनैतिक नेताओं और धार्मिक नेताओं ने अपने फौरी लाभ के लिये हर धर्म और संप्रदाय के लोगो को कोरोना टीकारण के खिलाफ भड़काकर अभियान को पटरी से नीचे उतारने की कोशिश की। आम जनों के बीच टीकाकरण के विरुद्ध अफवाहों को फैलाने मे कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। कई राज्यों के मंत्रियों ने अपने बाहुबल का हवाला दे टीका उत्पादन कंपनी के मुखिया श्री पूनवाला को टीकों का ज्यादा कोटा  मांग करते हुए धमकियाँ भी दी, ये इन राज्यों के मंत्रियों की शिक्षा और संस्कारों को दर्शाता है कि वे किस माहौल मे रह कर राजनीति की शिक्षा ग्रहण किए है।  गैर भाजपाई राज्यों के मुख्य मंत्री चिल्ला-चिल्ला कर जमीन आसमान एक कर अभियान को केंद्र से राज्यों को देने का आग्रह किया। टीकों के वितरण मे गैरभजपाई राज्यों से पक्षपात के भी आरोप लगाये जिनमे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल एवं पश्चिमी बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बैनर्जी प्रमुख थी। जब ज़िम्मेदारी ठीक से सम्हाली न जा सकी तो टीका की कमी का ठीकरा केंद्र के माथे पर फोड़ आगे ज्यादा दिन टीकाकरण अभियान न चला सके और अन्तोतगत्वा अपना पल्ला झाड़ कर खड़े हो गए। ये देश का दुर्भाग्य है कि विपक्षी दल सिर्फ विरोध के लिए विरोध कर रहे थे। हर रोज हजारों की संख्या मे हो रही मौतों के बावजूद देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल काँग्रेस ने सार्वजनिक मंच से एक दिन भी आम जनों से कोरोना की वैक्सीन लेने का आग्रह नहीं किया? विपक्ष के सभी कद्दावर नेताओं ने चोरी-छुपे वैक्सीन लेने के बावजूद इस सूचना या फोटो को  समाचार पत्रों मे आम नहीं किया ताकि ये संदेश न जाए कि सरकार की कोरोना के विरुद्ध प्रयासों मे इन नेताओं का  भी सहयोग है? आज 21 अक्टूबर 2021 को 100 करोड़ के टीका करण के अवसर पर इस कार्यक्रम मे शामिल चिकित्सा कर्मियों का आभार और जनता को बधाई एवं अभियान की प्रशंसा के विपरीत कॉंग्रेस का ट्वीट शर्मसार और लज्जित करने वाला है जिसमे मोदी सरकार को निक्कमेपन और टीका करण मे आपराधिक लापरवाही का दोषी करार दिया!!

सारी दुनियाँ के रजनीतिज्ञों ने अपने अपने देश मे एक राय होकर इस महामारी से लोहा ले जब  एक जुट नज़र आये  पर कोरोना टीका करण के इस अभियान मे भारत के अधिकतर विरोधी राजनैतिज्ञ दल  टांग खींचू नीति के फलस्वरूप अपवाद थे।

कुछ जगहों मे टीके के तापमान को बनाए रखते हुए सुदूर गाँव मे पहुँचना कठिन राह थी। इन बाधाओं को भी इन स्वास्थ कर्मियों ने अरुणाचल, लेह लद्धाख, जम्मू-कश्मीर, झारखंड बिहार जैसे क्षेत्रों मे जहां रास्ते मे नदियां और पहाड़ बाधा थे वहाँ भी पैदल चलकर अभियान को सफल बनाने के प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।

अभियान की रफ्तार मे जब कभी ये समाचार मिलता कि एक दिन मे एक करोड़ से भी ज्यादा टीके सफलता पूर्वक लगाए गए तो भारत की क्षमताओं के नए आयाम देख अत्यंत खुशी का अनुभव होता था कि भारत आत्मनिर्भरता और आपदा मे अवसर खोजने की क्षमताओं के दोहन मे भी अग्रणी कदम बढ़ा रहा है।

कोरोना की द्व्तिय लहर मे जब सारे देश मे ये  महामारी चरम पर थी। ओक्सिजन के अभाव मे लोग कालकावलित हो रहे थे तब कुछ धन लोलुप समाज एवं देश द्रोही  लोगो ने अव्यवस्था फैलाने के कुत्सित प्रयास किए। इन लोगो ने रेमडेसिविर इंजेक्शन  की काला बाजारी मे भी अपने हाथों मे कालिख पोती पर सरकार के निरंतर प्रयास ने ऑक्सीजन  की कमी को दूर तो किया लेकिन अफसोस अनेकों नागरिकों की जान की कीमत पर। तमाम घरों,  लोगो ने अपने स्वजनों को सदा-सदा के लिए खो दिया। घरों के इकलौते चिराग बुझ गये पर यहाँ भी राजनैतिक रोटियाँ सेकने मे इन निर्लज्ज लोगो ने कोई कसर नहीं छोड़ी।       

आज दिनांक 21 अक्टूबर 2021 का दिन वास्तव मे जश्न मनाने का दिन है, हर्ष उल्लास का दिन है जब देश के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टर, नर्स और टीका करण से जुड़े सभी  कर्मियों ने  कोरोना के विरुद्ध लड़ाई मे 100 करोड़ लोगो का टीकाकरण करके एक बहुत बड़ी  एवं अति महत्वपूर्ण उपलब्धि हांसिल की। आइये इस अवसर देश के सामान्य जनों के अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े चिकित्सकों, नर्सों, एवं अन्य प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुड़े स्वास्थ्य, सुरक्षा मे लगे कर्मियों का अभिनंदन और धन्यवाद ज्ञपित करें।

विजय सहगल     

 

3 टिप्‍पणियां:

N K Dhawan ने कहा…

सहगल साहब आपने बहुत सुंदर शब्दों में टीकाकरण की सफलता का वर्णन किया और साथ ही विश्व के सबसे निकृष्ट विपक्ष के कमीनेपन जो उन्होंने टीकाकरण के विरुद्ध दिखाया उजागर किया । बधाइयाँ । मोदी है तो मुमकिन है ।

Unknown ने कहा…

सहगल जी बहुत बहुत धन्यवाद टीकाकरण की अभूतपूर्व सफलता के संबध मे सही चित्रांकन के लिए औऱ दोगले कुछ बुझते चिराग किस्म के नेताओं की घृणित मानसिकता को आइना दिखाने के लिए ईश्वर आपकी लेखनी को धार दें

P.c.saxena ने कहा…

आपने वस्तुस्थिति से अवगत कराया है सभी जानते हैं कि देश की राजनीति में कितनी गंदगी आ चुकी है सुधार की अत्यंत आवश्यकता है जब तक जनता जागरूक नहीं होगी तब तक सुधार होना मुश्किल है कुल मिलाकर सभी लोग बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इस पुनीत कार्य को पूर्ण करने में सहयोग प्रदान किया