शुक्रवार, 29 मार्च 2019

योगक्षेमं


योगक्षेमं 

सांझ के अवसान मे हे प्रभु, डर से निडर बना देना। 

पग  मे आये हर कांटे को हे प्रभु, शूल से फूल बना देना॥    
जब ध्यान करें परमेश्वर का, प्रभु काम क्रोध से दूर रहें।                
चित शांत रहे, मन चरणों मे प्रभु नाम-शोध से पूर्ण  रहे॥
अनासक्त भक्ति से कर्म करे, फल प्रभु-चरणों मे समर्पित हो।
बिना मान-अपमान, दु:ख-सुख,  हरि सुमरिन से गर्वित हो॥
सत्य मार्ग से डिगे बिना प्रभु, भय से अभय बना देना।
सांझ के अवसान मे हे प्रभु, डर से निडर बना देना॥
पग मे आये हर कांटे को प्रभु, ......................... ॥ 


शास्त्र विहित सब कर्म करे, जन कल्याण की  आहुति हो।


कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े, तामस वृत्ति से न मोहित हो॥
मात-पिता गुरु सेवा के जो, प्रभु ने आदेश कहे।
यज्ञ दान तप रूप कर्म, प्रभु गीता के संदेश बहे॥
उस देश काल मे रहे-चले, प्रभु ऐसी डगर बना देना।
सांझ के अवसान मे हे प्रभु, डर से निडर बना देना।
पग मे आये हर कांटे को  प्रभु............................ ॥
 
जीवन-मरण का जो चक्र चले, इस चक्र से हे प्रभु मुक्ति मिले॥
हर पल हर क्षण प्रभु सुमरिन हो,  "श्री-चरणों" से शक्ति मिले।
अमर आत्मा, देह क्षण भंगुर, अशांत को सुख चैन कहाँ।  
श्री विजय, विभूति, अचल नीति, योगेश्वर श्री कृष्ण जहाँ ॥
गीता रूपी महाकाव्य,  श्री हरि रूपम  अद्भुतम।    
निसकंटक राह बना ऐसी, कर योगक्षेमं वहाम्यहम्      
रहे समर्पित, त्याग हर इच्छा, जीवन सफल बना देना।
सांझ के अवसान मे हे प्रभु, डर से निडर बना देना॥  
पग मे आये हर कांटे को हे प्रभु, शूल से फूल  बना देना ॥

-विजय सहगल  


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