शनिवार, 25 जुलाई 2026

पीएम आवास पर राहुल गांधी का धरना-प्रदर्शन मे "मेरी मर्जी"

 

पीएम आवास पर राहुल गांधी का धरना-प्रदर्शन मे "मेरी मर्जी"












जिस  इंडि गठबंधन के महत्वपूर्ण घटक कॉंग्रेस सहित अन्य दल अपने बलबूते अब तक सरकार के विरुद्ध देश मे, कोई बड़ा जन आंदोलन नहीं चला सके, वे देश के लिए एक अज्ञात, अपरिचित और अजनबी कॉकरोच जनता पार्टी के आवाहन पर कल 21 जुलाई 2026 को उनके आंदोलन के समर्थन मे शामिल हुए। राहुल गांधी ने तो अपने को अलग दिखलाने की चाह मे सारे नियम कानून और शिष्टाचार को ताक पर रख कर अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, जहां सामान्य तो क्या असाधारण स्थितियों या परिस्थितियों मे भी इस तरह के प्रदर्शन की किसी को अनुमति नहीं है। अपने पद और प्रतिष्ठा का दुर्पयोग और अनधिकृत राजनैतिक हित लाभ के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरे मे डाला।  प्रधानमंत्री आवास देश का एक अति संवेदनशील, सुरक्षित और महत्वपूर्ण स्थान है जो देश की प्रतिष्ठा, प्रभाव और प्रताप से जुड़ा है, जो देश की एक सौ चालीस करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करने का केंद्र है, भले ही प्रधानमंत्री किसी भी राजनैतिक दल का रहा हो। प्रधान मंत्री का आवास कोई धरना प्रदर्शन की जगह नहीं है जहां आप सभी लोगो को सार्वजनिक तौर  धरना-प्रदर्शन मे शामिल होने का आवाहन करें?  देश को पहले ही इस बड़ी सुरक्षा चूक की कीमत दो-दो  प्रधानमंत्रियों के  बलिदान  दे कर चुकनी पड़ी है। राहुल गांधी तो इससे भलीभाँति परिचित हैं।   प्रधानमंत्री आवास की  सुरक्षा को संकट मे डालने के, राहुल गांधी के  धरना प्रदर्शन के इस अपरिपक्व, अनैतिक और अदूरदर्शी निर्णय की जितनी भी निंदा और भर्त्सना की जाय कम है।

यही नहीं नेता प्रतिपक्ष के प्रति आदर और सम्मान का भाव प्रकट करते हुए सरकार ने अपने एक केंद्रीय मंत्रिमंडल के कैबिनेट मंत्री जितेंद्र सिंह को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात करने और  इस संवेदनशील स्थल से धरना समाप्त करने के लिए भेजा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से बातचीत मे राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन और नीट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) पर संसद मे चर्चा कराने की एक मात्र मांग की। मंत्री जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत कर इस संबंध मे सरकार की सहमति प्रदान कर दी। जब इस निर्णय से राहुल गांधी को अवगत कराया तो उन्होने अपनी बात से पलटते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जोड़ दी। जब राहुल गांधी से उनके अपनी बात से पलटने की याद दिलाई गयी तो उनका जबाव था कि "मेरी मर्जी"! मैंने पहले संसद मे चर्चा की मांग की थी अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी जोड़ दी।   कॉंग्रेस के एक सांसद और नेता प्रतिपक्ष जैसे जिम्मेदार व्यक्ति से ऐसे गैरजिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा कदापि नहीं की जा सकती। यही नहीं मंत्री महोदय और गृह मंत्रालय के सचिव ने जब राहुल गांधी का ध्यान प्रधानमंत्री आवास जैसे संवेदनशील स्थल पर धरना-प्रदर्शन के निषेध की याद दिलाई तो उन्होने बड़ी ही हठधर्मिता से वहीं पर धरना देने की "मेरी मर्जी" से अवगत कराया। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के  इस धरना  प्रदर्शन पर साथ देने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित बड़ी संख्या मे उनके कार्यकर्ता भी थे। जब कॉंग्रेस और समाजवादी सहित अन्य राजनैतिक दलों ने पीएम आवास पर आंदोलन समाप्त करने के सरकार के अनुरोध की  अवेहलना की, तो बाध्य होकर, आंदोलन समाप्त कराने के लिए पुलिस बल को बुलाना पड़ा। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने राजनैतिक शिष्टाचार दिखाते हुए पुलिस के आग्रह को स्वीकारते हुए अपनी गिरफ्तारी दे दी, पर राहुल गांधी ने अखिलेश यादव का अनुरोध ठुकराते हुए, धरना स्थल पर डटे रहकर धरना स्थल पर लेटने-लोटने का निर्णय लिया, ताकि ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हों कि पुलिस बलों को राहुल गांधी को बलपूर्वक घटना स्थल से हटाने के लिए बाध्य होना पड़े। अपने इस मकसद मे वे बहुत हद तक कामयाब भी हुए। राहुल गांधी का अनुसरण उनकी सांसद बहिन प्रियंका गांधी ने भी किया। पुलिस बल को असहज स्थिति का सामना करते हुए नेता प्रतिपक्ष के सम्मान का ध्यान रखते हुए  न्यूनतम बल का प्रयोग किया और उनको उठा कर बस मे जबर्दस्ती बैठा कर गिरफ्तार करना पड़ा। एक छुटभैये राजनैतिक कार्यकर्ता द्वारा लोगों की निगाह मे आने, गिरफ्तारी के पूर्व हाथ पैर पटक कर नाटक नौटंकी करना तो उचित प्रतीत लगता है पर कॉंग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद और नेता प्रतिपक्ष का ऐसा आचरण सामान्य शिष्टाचार और नैतिक मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत था। जिसने नेता प्रतिपक्ष जिसे गरिमा पूर्ण पद की प्रतिष्ठा को धूमिल ही किया। 

भारतीय राजनीति का खोखलापन इस आंदोलन मे स्पष्ट दिखलाई दिया। कॉंग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कॉंग्रेस, डीएमके, शिवसेना, आप और एनसीपी जैसी स्थापित पार्टियां भी मोदी सरकार के विरुद्ध पिछले बारह साल मे कोई बड़ा जन आंदोलन खड़ा नहीं कर सकी, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी जैसी नवजात पार्टी ने अपने अस्तित्व के बाद सभी विरोधी दलों को अपना पिछलग्गू बना दिया। अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए इंडि गठबंधन के धुरंधर नेतागण  भी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके जैसे अनजान, अपरिचित और अज्ञात  नेता के दरबार मे हाज़िरी लगाने को मजबूर हुए!    ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल गांधी एक के बाद एक मिली असफलताओं के कारण हीन  भावना से ग्रसित होकर एक अनाम, गुमनाम और बेनाम  कॉकरोच जनता पार्टी जैसे दल के मंच पर जाकर आंदोलन, धरना प्रदर्शन की सफलता  का श्रेय कॉकरोच पार्टी को न देकर इस आंदोलन का श्रेय स्वयं लेने के लोभ से वंचित नहीं रहना चाहते थे, इसलिए उन्होने जंतर मंतर के जगह प्रधाममंत्री आवास पर धरना देने के स्वार्थ पूर्ण निर्णय लेकर न केवल पीएम आवास की सुरक्षा को संकट मे डाला अपितु अपनी  अधम राजनैतिक स्वार्थपरता, अवसरवादिता और खुदगरजी का परिचय दिया जो निंदनीय है।

ऐसा नहीं था कि एनईईटी  पेपर लीक की घटना कोई पहली अनोखी घटना थी। कॉंग्रेस शासित राजस्थान मे अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल मे 17 पेपर लीक की घटनाएँ हुई जिनमे सब इंस्पेक्टर परीक्षा, जेईएन परीक्षा 2021, आरईईटी परीक्षा, कांस्टेबल भर्ती परीक्षा प्रमुख हैं। कॉंग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश मे भी जेओए-आईटी परीक्षा 2022, पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2022, सीपीएमटी परीक्षा 2006 के पेपर भी लीक हुए थे। तेलेंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडू राज्यों मे भी पेपर लीक की घटनाएँ देखने को मिली। उत्तर प्रदेश मे मुलायम सिंह की सपा सरकार के कार्यकाल मे भी  एक जाति विशेष के लोगों की बहुतायत मे पुलिस भर्ती की अनियमितताएँ हुई। लेकिन इन सरकारों ने भी अपने स्तर पर कड़ी कानूनी कार्यवाही कर अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही की गयी। एनईईटी परीक्षा लीक कांड  के भी 13 अपराधियों को गिरफ्तार कर सरकार ने कड़ी कार्यवाही की है। लीक परीक्षा को निरस्त कर दुबारा परीक्षा कराई गयी ताकि परीक्षार्थियों को न्याय मिल सके और ऐसा हुआ भी। हजारों सफल परीक्षार्थियों ने अपनी इस दुबारा हुई एनईईटी परीक्षा का जश्न मनाया। योग्य अभ्यर्थियों का चयन दुबारा से की गयी परीक्षा मे किया गया। कल प्रधानमंत्री ने भी दुबारा,  मंगलवार 21 जुलाई 2026 को  एनडीए संसदीय दल की बैठक मे पुनः अपनी इस प्रतिबद्धता को  दोहराया कि नीट पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध मिसाल कायम करने वाली सख्त कार्यवाही की जाएगी। छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो इसीलिए नीट को दुबारा कराया गया।

इसीलिए आवश्यकता इस बात की है कि सरकार सहित विपक्षी दलों को मिल बैठकर पेपर लीक की इस गंभीर समस्या पर संसद मे सार्थक चर्चा कर सर्वमान्य हल निकालना चाहिए और किसी कड़े नए कानून बनाने की पहल करना चाहिए  ताकि असामाजिक और अराजक तत्व देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ न कर सकें।

विजय सहगल                               

              

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