रविवार, 3 मई 2026

चुनाव 2026-शाबाश!! भालो करा, प॰ बंगा

 

"चुनाव 2026-शाबाश!! भालो करा, प॰ बंगा"







पश्चिमी बंगाल राज्य की बांग्लादेश से 2217 किमी लंबी सीमा लगी होने के कारण,    स्वतन्त्रता के बाद से पश्चिमी बंगाल राज्य के चुनाव सदैव से ही बंगलादेशी घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय पर एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। 1977 से 2011 तक लगभग 34 साल के मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट सरकार और 2011 से 2026 तक पिछले 15 वर्षों से तृणमूल कॉंग्रेस की सरकारों पर अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों को आश्रय देकर चुनाव धांधली के आरोप लगते रहे हैं। इन दलों पर समय समय पर ये भी आरोप लगे हैं कि एक संगठित अपराध व्यवस्था स्थापित कर लोगों को मताधिकार से वंचित कर सरकार के हर स्तर पर कट मनी, कमीशन  के माध्यम से भय और भ्रष्टाचार स्थापित कर चुनावों को जीता नहीं अपितु लूटा गया है। ये पहली बार हुआ हैं कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों और शक्तियों  का उपयोग कर इन संगठित अपराधियों की इस व्यवस्था को ध्वस्त कर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराएं गए है जिसका नतीजा पश्चिमी बंगाल मे अब तक का उच्चतम मतदान प्रतिशत से दिखलाई दे रहा है।                                    

पाँच राज्यों मे हुए 2026 के मतदान का परिणाम कुछ भी हो लेकिन जिस तरह पश्चिमी बंगाल के मतदाताओं ने चुनाव मे देश की स्वतन्त्रता के बाद से, दोनों चरणों मे अब तक हुए  92.47% से अधिक मतदान कर, देश मे अब तक के सर्वाधिक मतदान का  रिकॉर्ड तोड़ दिया, इसके लिये पश्चिमी बंगाल के मतदाता बाकई मे बधाई के पात्र हैं। इस मतदान की एक और खूबी ये रही कि इस मतदान प्रतिशत मे पुरुषों का मत प्रतिशत 91.74 के मुक़ाबले महिलाओं का मत प्रतिशत 93.24% रहा है जो जो पुरुषों की तुलना मेन  1.5 प्रतिशत अधिक रहा, जो  भी एक रिकॉर्ड है। जिस प॰ बंगाल मे कोई भी इलैक्शन, चुनाव पूर्व, चुनाव के दौरान और चुनाव के पश्चात  हिंसा, हत्या और आगजनी के बिना  कभी संभव न हुआ हो उस बंगाल मे चुनाव 2026 का चुनाव छुट-पुट हिंसा को छोड़कर बिना किसी बड़ी हिंसा और हत्या के पश्चिमी बंगाल मे चुनाव संपादित होना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिये। बिना भय, पक्षपात और हिंसा के स्वतंत्र  चुनाव संपादित कराने मे केंद्रीय चुनाव आयोग और पश्चिमी बंगाल राज्य चुनाव आयोग की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत  ने भी एक नागरिक के तौर पर पश्चिमी बंगाल के पहले चरण मे हुए सर्वाधिक चुनाव मतदान के लिए राज्य की  जागरूक जनता   की प्रशंसा और बड़ाई की है। उन्होने कहा कि एक नागरिक के रूप मे हुए इतने अधिक मतदान के लिए उन्हे गर्व महसूस हुआ है। केंद्रीय और राज्य चुनाव आयोग ने पश्चिमी बंगाल के चुनावी हिंसा के इतिहास को देखते हुए, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या मे केन्द्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की  भी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पश्चिमी बंगाल चुनाव 2026 के पूर्व चुनाव सूची का विशेष गहन पुनिरीक्षण (SIR) के दौरान  लगभग 92 लाख मतदाताओं का नाम काटे जाने से उपजे  संभावित टीएमसी के असंतोष को  देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती करना और भी आवश्यक हो गया था।

चुनाव 2026  की घोषणा के बाद जिस तरह से चुनाव आयोग ने सक्रिय होकर उन राज्य पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के विरुद्ध  सख्त रुख अपनाया और केंद्रीय बलों के साथ राज्य पुलिस की संयुक्त तैनाती कर एक कठोर संदेश राज्य के राजनैतिक दलों के बाहुबलियों, गुंडों और असामाजिक तत्वों को दिया गया कि राज्य मे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों मे किसी भी गड़बड़ी, हिंसा और अराजकता को सख्ती से निपटा जाएगा। जिसका असर ये हुआ कि एक ओर तो टीएमसी के इन संगठित छुट भैये अपराधियों, गुंडों  और अराजक तत्वों को समय रहते चुनाव पूर्व हिंसा फैलाने से रोका गया वहीं दूसरी ओर  राज्य के मतदाताओं द्वारा  बिना भय, पक्षपात के निडर होकर अब तक के सर्वाधिक मतदान को इस सुखद परिणाम के रूप मे देखा जा सकता है, इसलिए तृणमूल कॉंग्रेस सरकार का  चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाना कि केंद्रीय बलों की तैनाती राज्य की जनता को डराने के लिए की गयी हैं,  सच से परे मिथ्या  है। ये कहना अतिसन्योक्ति न होगी कि यदि केंद्रीय सुरक्षा  बलों, राष्ट्रीय जांच एजन्सि सहित अन्य राज्य पुलिस बलों  की तैनाती नहीं की गयी होती तो राज्य के टीएमसी द्वारा पोषित संगठित अपराधियों द्वारा पिछले चुनावों की तरह चुनावी  हिंसा, आगजनी, बमबाजी, हत्या को उसी तरह अंजाम देकर भय के माहौल को बनाया जाता जिससे शांति पसंद मतदाता कदाचित ही मतदान के लिए मतदान केन्द्रों तक निकलते।

जहां एक ओर राज्य मे हुए सर्वोच्च मत प्रतिशत देखने को मिला वही टीवी मीडिया पर आम मतदाताओं के विरोधाभाषी ब्यान चिंतित, हैरान और परेशान करने वाले है। विभिन्न टीवी चैनलों पर जहां मुस्लिम बाहुल विधान सभा क्षेत्रों मे महिला सुरक्षा, बेरोजगारी और टीएमसी के  भ्रष्टाचार कट मनी जैसे विषयों के बावजूद  खुल कर ममता के प्रति समर्थन व्यक्त किया इसके विपरीत अन्य विधान सभा क्षेत्रों मे हिन्दू  मतदाताओं ने महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर चर्चा तो की लेकिन खुल कर किसी भी राजनैतिक दल के पक्ष मे समर्थन व्यक्त नहीं किया। इन मतदाताओं के चेहरे पर टीएमसी के बदलाब या भाजपा के समर्थन का सुनते ही एक अदृश्य भय देखने को मिल जाता जिसको उनके चेहरों पर उभरे भावों को देख कर स्पष्ट रूप से देखा और पढ़ा जा सकता था। इसका एक बड़ा कारण टीएमसी के मुस्लिम नेताओं औग गुंडों द्वारा सिर्फ हिन्दू समुदाय और उनकी महिलाओं के साथ अभद्रता, दुर्व्यवहार और धमकी देकर वोट देने से रोकने की घटनाएँ देखने को मिली ऐसी अधिकतर घटनाएँ 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र मे दिखाई पड़ी जहां से टीएमसी के विधायक जहांगीर द्वारा डराने, धमकाने की घटनाएँ सुनाई दी।  पूरे देश मे सड़क, रेल और हवाई  परिवहन जैसी आधारभूत संरचना, निर्बल और कमजोर वर्ग की महिलाओं और किसानों की हितैषी योजनाओं को नज़रअंदाज़ कर सिर्फ एक दल विशेष का समर्थन और दूसरे दल के प्रति लगभग ज़ीरो सहमति, सहनशक्ति और सहिष्णुता रखने वाले ऐसे मतदाताओं के मनोविज्ञान  पर विश्वविध्यालय के शोधर्थियों, विध्यार्थियों  और समाज विज्ञानियों को शोध करना चाहिये।

जहां एक ओर केंद्रीय चुनाव आयोग और प॰ बंगाल राज्य चुनाव आयोग और उसकी संबन्धित एजेंसियाँ, केंद्रीय और राज्य  सुरक्षा बल और संबन्धित विभाग  राज्य मे सफल चुनाव सम्पन्न कराने के लिए बधाई का पात्र है। पश्चिमी बंगाल के चुनाव 2026 का नतीजा कुछ भी हो लेकिन एक बात तो निश्चित हैं कि पश्चिमी बंगाल के मतदाताओं ने जिस निडरता से अब तक का सर्वाधिक मतदान कर सारे देश की जनता को एक स्पष्ट संदेश तो दिया ही है कि लोकतन्त्र के प्रति सच्चा समर्थन और समर्पण निडर होकर मतदान से ही संभव किया जा सकता है।           

विजय सहगल

कोई टिप्पणी नहीं: