शनिवार, 9 मई 2026

प॰ बंगाल चुनाव 2026- ममता बैनर्जी के किले मे भाजपा की सेंध

 

"प॰ बंगाल चुनाव 2026- ममता बैनर्जी के किले मे भाजपा की सेंध"









धर्म के आधार पर देश के विभाजन के कट्टर विरोधी, राष्ट्रवाद के प्रखर समर्थक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक स्व॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पश्चिमी बंगाल मे पहली बार    अंततः 4 मई 2026 को,  तृणमूल कॉंग्रेस के अभेद्य किले मे सेंध लगा कर भारतीय जनता पार्टी ने आज 11 दिसम्बर 2026 शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व मे अपनी सरकार का गठन कर ही लिया। पश्चिमी बंगाल राज्य मे शून्य से शिखर तक और गंगोत्री  से गंगा सागर तक  की इस यात्रा मे भाजपा की राह बहुत आसान नहीं रही। काँटों से भरी इस पथरीली राह मे चलते हुए भाजपा के अनेकों कार्यकर्ताओं की पिछले लोकसभा, विधान सभा और नगर पंचायतों के चुनावों मे नृशंस हत्या, आगजनी हिंसा की गयी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता राज्य मे मारे गए अपने 321 कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया और उनके बलिदानों से भाजपा को राज्य मे मिली आशातीत  सफलता के लिए याद किया। इस अवसर पर भाजपा ने  एक एक बगलादेशी घुसपैठियों को चुन चुन कर उनके देश बापस भेजने के संकल्प को भी दुहराया जो देश और राज्य के विकास मे सेंध मार्कर दीमक की तरह खा रहा है।   

जब तृणमूल कॉंग्रेस के पिछले 15 वर्ष के शासन काल पर दृष्टिपात करते हैं तो स्पष्ट होता है कि जिस प्रयोजन, लक्ष्य और उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तृणमूल कॉंग्रेस की मुखिया ममता बैनर्जी ने 20 मई 2011 को राज्य की बागडोर संभाली थी और  34 साल के वाम मोर्चा के कुशासन का अंत किया था, दुर्भाग्य से ममता बैनर्जी उन लक्ष्यों की  प्राप्ति मे असफल रहीं और उन  पर  खरी नहीं उतर पाईं। ये ममता बैनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा और सुनहरा  मौका था कि वे वाम मोर्चा सरकार के 34 सालों के  भय, भ्रष्टाचार, टोलाबाजी, कट मनी और संगठित अपराध गिरोह को समाप्त कर एक भय रहित स्वतंत्र और निष्पक्ष वातावरण निर्मित कर समाज के वंचित और दबे कुचले वर्ग के विकास और उन्नति के लिए कार्य करती, लेकिन दुर्भाग्य से जिन अपराधियों, गुंडों और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लड़ कर ममता बैनर्जी मई 2011 मे पश्चिमी बंगाल मे सत्ता मे आयीं और उन्ही कपटी, धूर्त चाटुकारों के चंगुल मे फंस कर कुशासन, कुप्रबंधन और अन्यायपूर्ण राज्य की एक ऐसी मिसाल बन गयी जिसका स्वतंत्र भारत मे कहीं कोई उदाहरण देखने और सुनने मे नहीं मिलता। पश्चिमी बंगाल मे चुनाव पश्चात हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा हैं। हाल ही मे 6 मई 2026 को शुभेन्दु अधिकारी के पीए चन्द्र नाथ रथ की हत्या उनके घर के पास कर दी गयी, भाजपा के नेताओं ने इस हत्या के आरोप टीएमसी के नेता और मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बैनर्जी पर लगाए गये। ये ममता बैनर्जी और तृणमूल कॉंग्रेस का अहंकार, अभिमान और घमंड ही था कि ममता बैनर्जी के भतीजे अभिषेक बैनर्जी जिन्हे  टीएमसी के लोग  भाइपो! के नाम से भी बुलाते हैं, ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बंगाल चुनाव नतीजों के बाद 4 मई को कोलकाता मे रहने का चैलेंज दिया था। यही नहीं भइपो! के, दुस्साहस, ढिठाई और धृष्टता देखिये कि अपने विरोधियों को ललकारते हुए वो कहता हैं कि 4 मई के बाद देख लूँगा!! दिल्ली से किसके बाप आएंगे बचाने!! ये तृणमूल के बड़बोले पन, दंभ हेकड़ी और अक्खड़पन की पराकाष्ठा थी जो तृणमूल कॉंग्रेस को चुनावों मे ले डूबी।  

तृणमूल कॉंग्रेस द्वारा सत्ता प्राप्ति हेतु अनुचित और अन्याय पूर्ण चुनावी पृक्रिया अपनाने के आरोप लगना चिंता और हैरानी पैदा करने वाला है। तृणमूल कॉंग्रेस द्वारा सत्ता प्राप्ति हेतु अपनाए गए चुनावी हथकंडे किसी भी लोकतान्त्रिक प्रणाली के लिए शर्मनाक और कलंकित करने वाले हैं। तृणमूल कॉंग्रेस के समर्थकों द्वारा  लोगो और आम मतदाताओं को मतदान केन्द्रों तक जाने से रोकने के लिए,  चुनाव पूर्व बमबाजी, हिंसा और आगजनी फैला कर दहशत और डर का माहौल निर्मित कर शांति प्रिय नागरिकों को वोट न करने देने जैसे चालबाजी, बेईमानी और फरेब को अपनाया गया। इस चुनावी पृक्रिया का सबसे स्याह,  काला और आपत्तिजनक पक्ष बंग्लादेशी घुसपैठियों और तृणमूल कॉंग्रेस के गुंडों, असामाजिक तत्वों द्वारा हिंदुओं विशेषकर अनुसूचित जाति, मतुआ समाज, नाम शूद्र समाज  और जनजाति के लोगों और ख़ासकर महिलाओं को हिंसा, बलात्कार और हत्या की धमकी देकर वोट न करने देने की नीति को अपनाया गया। समाज के जिन वंचित और कमजोर वर्ग ने तृणमूल कॉंग्रेस के इस तानाशाही रवैये की अवेहलना की उन लोगो की हत्या, आगजनी पिछले चुनावों मे की गयी। तृणमूल कॉंग्रेस के  मुस्लिम गुंडों और असामाजिक तत्वों द्वारा अपने धर्म की महिलाओं को छोड़कर अन्य धर्मों की महिलाओं के साथ बदसलूकी, अपमान जनक व्यवहार के उदाहरण चिंताजनक करने वाले थे। 24 परगना के संदेशखाली के तृणमूल के नेता और बाहुबली  शाहजहाँ शेख और फाल्टा विधान सभा का तृणमूल प्रत्याशी जहाँगीर खान उनमे से मुख्य हैं। ऐसे लोगों की जांच कर उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही भाजपा की प्राथमिकता होना चाहिए ताकि धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव करने और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा फैलाने वालों लोगों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हो और  लोगों को न्याय मिल सके ।        

पिछले दो बार से ममता बैनर्जी को उनके ही गढ़ मे हराने वाले शुभेन्दु अधिकारी ने जिस धैर्य, हिम्मत और बहादुरी  से तृणमूल कॉंग्रेस के कैडर बेस्ड असामाजिक तत्वों से लड़ते हुए सत्ता हांसिल की वो एक मिसाल हैं। पश्चिमी बंगाल के 2026 के इस चुनाव मे  शुभेन्दु अधिकारी की इस अप्रत्याशित और अनपेक्षित सफलता को अल्पमत मे आयी तृणमूल कॉंग्रेस और स्वयं भवानीपुर विधान सभा सीट से शुभेन्दु अधिकारी से पराजित हुई ममता बैनर्जी ने अपने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने से इंकार कर भारतीय संविधान को न मानने और झुठलाने की अधम और असफल  कोशिश की, मानों वे इस्तीफा नहीं देंगी तो नया मुख्यमंत्री शायद शपथ ही न ले सके? उन्हे शायद इस बात की गलतफहमी थी कि जिस गाँव मे मुर्गा नहीं होगा वहाँ सवेरा नहीं होगा? वे शायद 1975 मे श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगा कर 19 महीने गैरकानूनी तरह से सत्ता हथियाने के सबक को भूल  गयी। लेकिन उनकी इस भ्रांति और भ्रम को पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल श्री आर एन रवि ने 7 मई 2026 को विधान सभा को भंग कर 18वीं विधान सभा के गठन का मार्ग प्रशस्त कर दिया। एसआईआर के बाद पश्चिमी बंगाल मे  अब तक हुए चुनावों मे ये पहली बार चुनाव, बिना किसी चुनावी हिंसा और हत्या, आगजनी  के,  चुनाव आयोग द्वारा, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का इतिहासिक रेकॉर्ड बनाया। केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण लोगो का  निडर होकर अब तक का उच्चतम मतदान प्रतिशत इस बात का सबूत है कि पश्चिमी बंगाल मे इस बार बिना भय और पक्षपात के मतदान किया और देश के अन्य राज्यों के मतदाताओं को ये संदेश दिया कि प्रत्येक मतदान पृक्रिया मे अधिक से अधिक मतदान करना ही सच्चा लोकतन्त्र है। निश्चित ही चुनाव आयोग और केन्द्रीय सुरक्षा बल इस के लिए बधाई के पात्र हैं।

शुभेन्दु अधिकारी के आज मुख्यमंत्री के रूप मे पश्चिमी बंगाल राज्य के मुख्यमंत्री के रूप मे कार्यभार ग्रहण करने से स्वयं उन पर और भारतीय जनता पार्टी और एक नई एवं महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी आ गयी हैं कि अपनी नीतियों और कार्यक्रमों से राज्य मे व्याप्त अराजकता, हिंसा और भ्रष्टाचार को समाप्त कर राज्य के लोगों को कल्याण के लिए, महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सही ढंग लागू  करे और सोनार बंगला के अनुरूप एक स्वर्णिम बंगाल का निर्माण करें।  

विजय सहगल   

 

         


कोई टिप्पणी नहीं: