निःशुल्क शीतल जल सेवा-
पंजाबी परिषद समिति, रेल्वे स्टेशन ग्वालियर
वर्ष
1994 के 18 अप्रैल मे पाँच युवा अपने नागपुर यात्रा के लिए जब ग्वालियर से
रेल द्वारा निकले तब उत्तर भारत की गरमियाँ शुरू हो चुकी थी। गर्मी के इस मौसम मे
इन युवाओं को नागपुर यात्रा तक ठंडे पानी
की उपलब्धता से वंचित होना पड़ा। पूरी यात्रा के दौरान उन्हे हर जतन के बावजूद ठंडा पानी नसीब नहीं हुआ। गर्मियों की शुरुआत मे
जब ये हाल था तो प्रचंड गर्मियों के दिनों मे ठंडे पानी की उपलब्धता के आभाव की कल्पना ने इन
युवाओं को झकझोर दिया। इन पांचों पंजाबी
युवाओं के दिलों मे उनके माता-पिता और परिवार ने 1947 के भारत विभाजन से उबरी टीस
को झेला था लोगो के दुःख दर्द को करीब से देखा और महसूस किया था। फिर क्या था, इन लड़कों
के दिल मे ठंडे पानी को साधारण रेल यात्रियों को निःशुल्क सेवा प्रदान करने के दृढ़
संकलप के बीज का रोपड़ शुरू हुआ और नागपुर यात्रा के बापसी पर इन युवाओं ने
ग्वालियर आते ही 24 अप्रैल 1994 को चार
मिट्टी के बड़े घड़े/मटके ग्वालियर के
जीआरपी थाने मे आम यात्रियों के सुविधा हेतु ग्वालियर रेल स्टेशन पर रखवा कर रेल यात्रियों
को निःशुल्क शीतल जल सेवा की शुरुआत कर दी।
1994
मे जिन श्री अशोक मारवाह, श्री राम
लुभाया, श्री जगजीत चावला, सत्य प्रकाश
मेहरा, पी के आनंद के इस समर्पित सेवा भाव से ओतप्रोत युवाओं
के संयुक्त प्रयास से ग्वालियर पंजाबी परिषद समिति शुरू हुई निःशुल्क ठंडे पानी की
जल सेवा आज 70 से भी ज्यादा तापमान रोधी टंकियों जिनमे साफ शुद्ध वर्फ का ठंडा
पानी संग्रह कर रेल्वे स्टेशन पर आने-जाने
वाली 50 जोड़ी
रेल गाड़ियों के यात्रियों को निःशुल्क जल सेवा प्रदान करते हुए आज एक वट वृक्ष का रूप ले चुकी है। पंजाबी
परिषद समिति बैसे तो ट्रेन के हर क्लास सहित सभी वर्गों को निःशुल्क सेवा प्रदान
करती है परंतु समिति का ज़ोर ट्रेन के
सामान्य, अनारक्षित बोगियों मे यात्रा कर रहे यात्रियों को
प्राथमिकता से ठंडा जल प्रदाय करने पर है, जिन तक शीतल जल की
पहुँच सामान्यतः समय और परिस्थिति के कारण संभव नहीं हो पाती। कभी कभी तो ट्रेन मे
इतनी भीड़ होती है कि सामान्य श्रेणी के यात्रियों को अपनी सीट से हिलना तक मुश्किल
हो जाता है तब तपती गर्मी मे ट्रेन से उतरकर पानी की तलाश मुश्किल ही नहीं असंभव है
और यदि यात्री महिला या बच्चे हो तो यह कार्य बड़ा दुरूह, जटिल
और कठिन हो जाता है। जब ऐसे यात्रियों की ठंडे पानी तक पहुँच, उनकी खिड़की के सामने हो जाती है तो गर्मी की लपट मे ठंडा पानी सहजता
से प्राप्त हो जाए तो क्या कहना। ट्रेन के आगे और पीछे की ओर लगे सामान्य
अनारक्षित डिब्बों के सामने ठंडे पानी की टंकियों को रक्खा जाता है। इन ठंडे पानी
की ट्रॉलियों पर ट्रेन के आते है अपना समय दान दे रहे अनेकों सेवक, जग और कीप (फ़नेल)/कुप्पी से
यात्रियों की खाली बोतलों को ठंडे जल से भर देते हैं। बमुश्किल 1 या दो मिनिट के
ट्रेन के ठहराव के दौरान ही सैकड़ों सेवक अपने अपने जग की सहायता से जल की पूर्ति प्रायः
सामान्य श्रेणी और स्लीपर क्लास के यात्रियों को कर ही देते है। यात्रियों के चेहरे पर ठंडे पानी पीने
के बाद उभरे संतुष्टि के भावों को स्पष्ट रूप से देखा और पढ़ा जा सकता है। छोटे
छोटे बच्चों, महिलाओं और बृद्ध जनो के साथ सभी यात्रियों को प्लेटफार्म
पर दौड़ भाग के बिना उनकी ही सीट पर खिड़की
से ही जब ठंडा जल निःशुल्क उपलब्ध हो जाय तो दौड़ कर ट्रेन पकड़ने के तनाव पूर्ण
क्षणों से मुक्ति मिल जाती है। छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को ठंडे जल से मिली
तृप्ति के आत्म संतुष्टि के भावों को महसूस किया जा सकता है। दिव्यांग जनों के लिए
आरक्षित डिब्बे मे भी यही अनुभव महसूस किया जा सकता है।
पंजाबी
परिषद समिति के अध्यक्ष श्री अशोक मारवाह का यात्रियों को निःशुल्क सेवा प्रदाय
हेतु सेवा, समर्पण और निष्ठा तो देखते
ही बनती है। 69 साल की उम्र मे भी मारवाह जी द्वारा पूरे प्लेटफार्म पर ट्रॉलियों
मे ठंडे जल की सुचारु व्यवस्था कराना, सेवकों को हर ट्रॉली
पर नियुक्त करना, बीच बीच मे सेवा प्रदान करने वाले लोगो को
आराम करने और बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था करना और सेवादारों को गाहे बगाहे
स्वल्पाहार और शीतल शर्बत, छांछ उपलब्ध कराना और व्यक्तिगत
संपर्क रखना उनके स्वभाव मे है। पंजाबी परिषद ग्वालियर प्रति वर्ष अप्रैल से अगस्त
तक इस सेवा को रेल्वे स्टेशन ग्वालियर पर उपलब्ध कराती है। उनके इस कार्य की भूरि भूरि
प्रशंसा अनेक व्यक्तियों, संस्थाओं और वर्गों ने समय समय पर की
है। इस बात से ज्यादा सुखद संजोग क्या होगा कि पंजाबी परिषद ग्वालियर के इस सामाजिक
कार्य की प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री श्री
नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात के कार्यक्रम मे की है। श्री मारवाह जी ने बताया उनकी
यी संस्था समाज के वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बेटियों की शादियों तथा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन भी समय समय पर करती है।
इस वृहद सेवा संकल्प मे श्री मरवाह जी को श्री आत्म प्रकाश मोंगिया जी (समिति कोषाध्यक्ष), श्री गंभीर जी के आत्मीय सहयोग का उल्लेख करना आवश्यक है जो रेल प्रशासन से
समिति के समन्वय, सामंजस्य तालमेल बैठाते है। इस सेवभावी कार्यक्रम
मे समय दान देने वाले कार्यकर्ताओं और सेवकों को रेल प्रशासन स्टेशन पर निःशुल्क वाहन
पार्किंग और प्लेटफार्म पर बिना प्लेटफार्म टिकिट के सेवा भाव करने के दौरान स्टेशन
पर आधिकारिक रूप से रुकने हेतु पहचान पत्र
देती है।
ये
बात बिलकुल सही है कि मई-जून की इस आग बरसते मौसम मे अलग अलग समय मे सिर्फ समर्पित
और सेवभावी लोग ही ईश्वरीय प्रेरणा, प्रोत्साहन, सेवा
और समर्पण इस कार्य को कर सकते है अन्यथा समाज मे बहुतायत छद्म और झूठे नकाब ओढ़े और पहने लोग कदाचित ही ऐसी
निस्वार्थ सेवा के लिए समय दे पाते। ऐसा नहीं है कि पंजाबी परिषद के इस कार्यक्रम मे
सिर्फ पंजाबी भाषी लोग ही है समिति के इस जन सेवा के कार्यक्रम मे ग्वालियर की हर समाज, वर्ग और संस्था के समर्पित सेवा भावी लोग स्व॰ प्रेरणा और समर्पित भाव से
अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। सेना से सेवानिवृत्त लोग, विभिन्न राज्य
और केंद्रीय कार्यालयों के सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी, अधिवक्ता व्यापारी और विध्यार्थी पानी पिलाने की इस मुहिम मे शामिल हैं। बड़ी संख्या
मे महिलाएं, गृहणियाँ भी अपने घर के कामों मे और समाज सेवा के
बीच संतुलन बना कर सेवा के इस परोपकार मे शामिल है। मुझे भी इस संस्था से जुडने का सौभाग्य 10 अप्रैल
को मिला, यध्यपि मुझे भी इस संस्था से जुड़े बमुश्किल 10-12 दिन
ही हुए है लेकिन इन सेवभावी लोगो कि अनासक्त भाव से सेवा निस्वार्थ सेवा ने मुझे स्व्प्रेरित
किया एवं भगवान श्री कृष्ण के श्रीमद्भगवत मे उस श्लोक और संदेश को पुष्ट किया है जिसमे वे कहते हैं:-
कर्मण्येवाधिकारस्ते
मा फलेषु कदाचन।
मा
कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। अध्याय 2 श्लोक 47।। अर्थात
कर्तव्य-कर्म
करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें
कभी नहीं। अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो।
लगातार 32 वर्षों से रेल यात्रियों को रेल्वे स्टेशन पर
गर्मियों की मौसम मे निःशुल्क शीतल जल सेवा प्रदान करने वाली संस्था को प्रोत्साहित
करें। आइये यदि आप ग्वालियर मे हैं तो पंजाबी परिषद समिति
के नेक कार्य मे अपना समय और सहयोग दे यदि आप रेल यात्रा के दौरान कभी ग्वालियर से
गुजरे तो संस्था के प्रमुख श्री अशोक मरवाह और उनकी टीम को व्यक्तिगत तौर पर मिलकर
प्रोत्साहित जरूर करें।
विजय सहगल





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