"हमास
हैड,
हानिया की हत्या"
बुधवार तड़के 31 जुलाई 2024 को दुनियाँ के खतरनाक आतंकवादी संगठन मे से एक,
फ्लिस्तीन स्थित हमास के प्रमुख एवं 7 अक्टूबर 2023 की घटना मे 1139 निर्दोष इजराइली
नागरिकों की हत्या का दोषी,
क्रूर आतंकवादी इस्माइल हानिया को,
इसराइल की सेना मोसाद द्वारा, एक मिसाइल हमले
मे तेहरान स्थित एक घर मे मार गिराया।
हमले मे उसका एक बॉडीगार्ड भी मारा गया। ये हमला उस समय किया गया जब हमास प्रमुख
इस्माइल हानिया ईरान के नवनिर्वाचित
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथ ग्रहण समारोह मे शामिल होने के लिए तेहरान आया हुआ था। यध्यपि
इज़राइल ने इस हमले पर कोई प्रतिक्रिया न
देते हुए चुप्पी साध ली, लेकिन हमास और ईरान ने इस्माइल हानिया की हत्या
के लिए इज़राइल को सीधे, जिम्मेदार ठहराया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर
रूस, चीन,
लेबनान और तुर्की द्वारा इज़राइल के इस
दुस्साहसिक हमले की कड़ी निंदा कर इसे एक कायराना हमला बताया। ईरान के सर्वोच्च
नेता अयातुल्ला खामेनेई ने अपने मेहमान इस्माइल हानिया की उनके ही देश मे इज़राइल
द्वारा हत्या का बदला लेने की कसमें खाई
है, साथ ही हानिया की मौत पर ईरान मे तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा
की है। यह घटना ऐसे समय हुई जब अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडन हमास और इज़राइल के बीच
संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के लिए प्रयासरत थे। इस घटना से हमास और इज़राइल
के बीच युद्ध रोकने की संभावनाओं पर फिलहाल पूर्ण विराम लग गया? लेकिन ईरान द्वारा इज़राइल पर युद्ध की स्थिति पर अमेरिका ने
इज़राइल का साथ देने की घोषणा की है।
विदित हो कि
आतंकवादी संगठन हमास ने, 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर अचानक,
अकारण हमला कर,
दुनियाँ के इतिहास मे इंसान की हैवानियत और अमानवीयता की पराकाष्ठा का नंगा नाच करते हुए, हमास के उग्रवादियों ने इज़राइल के निहत्थे नागरिकों, महिलाओं और युवाओं के साथ-साथ वहाँ के निरीह और नन्हें अबोध
बालकों तक पर अंधाधुंध फायर कर सदा-सदा के लिए मौत की नींद सुला दिया था। यही नहीं इन निर्दयी
आतंकियों ने महिलाओं के शव के साथ सार्वजनिक रूप से अपमान, दरिंदगी की घिनौना हरकतें कर जिस हैवानियत का परिचय दिया वह पाशविकता और
वहशीपन की हदों से भी क्रूर थी। इन उग्रवादियों ने इज़राइल के ऊपर समुद्र, आकाश और जमीन से हमले किए जो अप्रत्याशित और
अनपेक्षित थे जिनके पीछे हमास के
इस्माइल हानिया का हाथ था। पिछले अनेक दशकों मे ऐसा भीषण और विभत्स हमला कभी नहीं हुआ था। इस
आतंकी हमले लगभग 250 नागरिकों को बंदी भी बना लिया था, इनमे कुछ को इज़राइली सेना ने छुड़ा
लिया और कुछ अभी भी हमास के कब्जे मे हैं। तभी से इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन
नेतन्याहु सहित इज़राइल के लोगों ने हमास के खातमे तक चुप न बैठने की सौगंध ली थी।
इस्माइल हानिया की ईरान मे हत्या के साथ इज़राइल ने अपने लक्ष्य की प्राप्ति मे एक
महत्वपूर्ण उपलब्धि हांसिल कर ली।
इस्माइल हानिया, 2006 मे फिलिस्तीन संसदीय चुनाव
मे ज्यादा सीटे जीतने के कारण, फिलिस्तीन का प्रधानमंत्री
बना। 2007 मे फिलिस्तीन के राष्ट्रपति द्वारा उसे प्रधानमंत्री पद से हटाने के
बावजूद उसने अपनी हिंसक गतिविधियों के चलते, गजपट्टी पर बलात नियंत्रण कर लिया। 2018 मे अमेरिका ने हानिया को
अंतंकवादी घोषित कर उस पर इनाम भी घोषित किया था और अमेरिका को उसकी तलाश भी थी।
इस सारे घटना क्रम पर एक बात तो निश्चित है कि यदि देश का नेतृत्व, किसी अस्थिरचित्त और अदूरदर्शी
नेता के हाथ मे हो तो उसके अपरिपक्व और संकुचित सोच की सजा देश सहित, देश के जनमानस को भुगतनी पड़ती
है। इस्माइल हानिया की विध्वंसकारि सोच, ईर्ष्यालु मानसिकता
और आतंकवादी कुकृत्यों की कीमत फिलिस्तीन की गाजा पट्टी पर निवासरत लगभग 23 लाख की
आबादी को भुगतना पड़ रही है। अस्थिरचित्त
इस्माइल हानिया की एक मूर्खता पूर्ण निर्णय के कारण हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर किये गये आतंकवादी
हमले मे मारे गये 1139 इज़राइली नागरिकों की मौत की कीमत, अबतक
गाजापट्टी स्थित सैकड़ों हमास आतंकवादियों सहित लगभग 38 हजार फिलिस्तीनी नागरिकों
की अकाल मौत से चुकानी पड़ी। लगभग 360 वर्ग किमी क्षेत्र की भूमध्य सागर की तटीय गजपट्टी की पूरी आधारभूत
संरचना जिसमे, अस्पताल, स्कूल, घर, ऑफिस एवं अन्य व्यापारिक संस्थान शामिल हैं, इज़राइल के आक्रमण से पूरी तरह बर्बाद हो कर खंडहरों मे तब्दील हो गये।
यध्यपि इज़राइल को भी इस युद्ध मे बड़ी कीमत अदा करनी पड़ी लेकिन हमास द्वारा बलात थोपे गये युद्ध मे, एक
ओर जहाँ, इज़राइल ने
अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान, अपने 1139 नागरिकों के बलिदान और
अपने नागरिकों के आत्मसम्मान की रक्षा करने के लक्ष्य को सफलता पूर्वक हांसिल कर
लिया वहीं दूसरी ओर एक विक्षिप्त उन्मादी इस्माइल हानिया की मूर्खतापूर्ण कुकृत्य की
कीमत पूरी गाजा पट्टी को भूत: कब्रिस्तान मे बदलने के रूप मे चुकानी पड़ी।
अब प्रश्न ये हैं कि ईरान
के अंदर घुस कर उसके ही मेहमान की हत्या के आगे क्या होगा? इस हत्या की विवेचना दुनियाँ के
देश अपनी अपनी तरह से कर रहे हैं। पहले भी आतंकी संगठन हमास के लोग इस तरह मारे
गये हैं। चूंकि यह एक कट्टरवादी इस्लामी सोच का जमघट है, तब
शायद ही मध्य एशिया के सारे मुस्लिम देश खुलकर हमास के पक्ष मे खड़े होंगे? पहले तो इस हत्या की ज़िम्मेदारी इज़राइल ने नहीं स्वीकारी, यदि उसको इस हत्या के लिए कटघरे मे खड़ा भी किया जायेगा, तब भी वह अपने देश की सुरक्षा का मसला बताकर इस हत्या को जायज ठहरायेगा, जो उचित भी है। स्वयं इस्माइल हानिया भी पिछले सात साल से गाजा पट्टी को
छोड़ कर मध्य एशिया के देशों मे छुपता फिर रहा था। हमास के नेता भी पिछले दस महीने
से गाजा पट्टी की जनता को उसके रहमोकरम पर
छोड़कर चूहे के बिलों मे छुपते फिर रहे थे।
छोटे छोटे बच्चे खाना और दवाओं के अभाव मे दम तोड़ रहे हैं,
इस कारण हमास का जनसमर्थन भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा हैं। ईरान और तुर्किए भी
सीधी कार्यवाही से बचने की कोशिश करेंगे क्योंकि इन देशों की आर्थिक हालात अच्छे
नहीं हैं। ईरान भी हिजाब के विरुद्ध आंदोलन के कारण अपने आंतरिक उथल पुथल और
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से परेशान हैं। अभी हाल ही मे ईरान के राष्ट्रपति
इब्रहीम रईसी की संदिग्ध परिस्थितियों मे हेलिकोप्टर दुर्घटना मे मारा जाना भी, इस बात का सबूत है। इसलिये इस बात की संभावना कम है कि निकट भविष्य मे
इज़राइल के विरुद्ध कोई बड़ी प्रतिक्रीया हो!!
पहले लेबनान स्थित हिज्बुल्लाह कमांडर फ़ाउद
शुकर की हत्या और फिर इज़राइल ने जिस तरह और जिस सटीक और अचूक मिसाइल हमले से ईरान
की राजधानी तेहरान के अतिसुरक्षित,
अवेध सुरक्षा को बेधते हुए, बिना किसी अन्य
जनहानि के सिर्फ और सिर्फ हमास प्रमुख इस्माइल
हानिया को निशाना बना कर हत्या की है,
यह न केवल आतंकवादियों के लिये स्पष्ट
चेतावनी हैं अपितु दुनियाँ के उन देशों को
एक खुला संदेश भी है,
जो आतंकवादियों और अतिवादियों को पराश्रय देते या पोषित करते हैं। दुनियाँ अब उन
देशों के पक्ष मे खड़ी नज़र आ रही है जो किसी भी तरह के आतंकवाद से पीढ़ित हैं।
इज़राइल ने, इस्माइल हानिया की हत्या के माध्यम से,
हमास सहित, दुनियाँ के आतंकवादियों
को स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि इज़राइल
का दुश्मन दुनियाँ के किसी भी कोने मे क्यों न छुपा हो,
उसकी जद मे हैं,
उनकी पहुँच मे है और उसे जिंदा नहीं छोड़ा जायेगा!! उसकी मौत निश्चित है!!
विजय सहगल


2 टिप्पणियां:
बहुत सुंदर और सटीक विश्लेषण । इस्माइल हानियाँ जैसे दुर्दांत आतंकवादियों का सफ़ाया इसी प्रकार होना चाहिए। वैसे आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि इसकी मौत में ईरान के ही एक ग्रुप का हाथ है । सबसे बड़े अफ़सोस की बात यह है कि भारत में भी एक गुट तुष्टिकरण के लिए हानिया की मौत पर विलाप कर रहा है ।
आदरणीय सहगल जी,
आपकी टिप्पड़ी विदेश मामलों के परिदृश्य में सम सामयिक व सटीक जानकारी देने वाली है।
आतंकवादियों का इस धरती से जितनी जल्दी खात्मा हो,तभी विश्वशांति की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है।
राजेंद्र सिंह
एक टिप्पणी भेजें