शुक्रवार, 9 अगस्त 2024

समाजवाद का डीएनए

 

"समाजवादियों की  डीएनए नीति पर सवाल??"






कोई व्यक्ति रंग, रूप, शक्ल और सूरत से सुंदर या असुंदर नहीं होता अपितु उसके  सोच, विचार और मानसिकता से उपजे ओज से आलोकित प्रकाश, उसके रूप का निर्धारण करता हैं। पिछले दिनों अयोध्या समाजवादी पार्टी के नगराध्यक्ष एवं सांसद फैजाबाद, अवधेश प्रसाद  के करीबी रहे मोईद खान और उसके नौकर राजू खान पर एक 12 साल की अवयस्क लड़की के साथ समूहिक दुष्कर्म के आरोप मे गिरफ्तार किया गया हैं। बलात्कार की ये घटना अयोध्या के पूरा कलंदर थाना क्षेत्र की है। यूपी की योगी सरकार ने त्वरित कार्यवाही कर मोईद खान के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही की है और इस संबंध मे कठोर कार्यवाही करने का विश्वास दिलाया है। राजनैतिक स्वार्थ और अधमता की पराकाष्ठा देखिये कि एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार की इस घिनौनी हरकत के बावजूद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने नगराध्यक्ष मोईद खान के विरुद्ध कोई कार्यवाही तो दूर उसके बचाव मे जो ब्यान दिया वह अनैतिकता, दुष्टता और क्षुद्रता की चरम सीमा थी। उन्होने कहा कि, "बिना डीएनए टेस्ट, भाजपा का आरोप दुराग्रह पूर्ण हैं!!, आरोपी का डीएनए टेस्ट कराकर, इंसाफ का रास्ता निकाला जाय? क्या स्वयं बलात्कार  पीड़िता का ब्यान इस घिनौनी, नीच हरकत के लिये न काफी है? क्या श्रीमान अखिलेश यादव, बतलाएंगे कि अब तक, उत्तर प्रदेश मे अपने  शासनकाल के दौरान  कितनी  रेप पीढ़िताओं के डीएनए टेस्ट,  पुलिस कार्यवाही के पूर्व करवाए गये थे? मोईन खान कोई सरकार के ऊंचे ओहदे पर बैठा अधिकारी या कर्मचारी नहीं था जिसे पदच्युत करने मे कोई भारी अड़चन  थी, फिर भी अखिलेश यादव ने एक अदने से नगराध्यक्ष को अपने पद से सिर्फ इसलिये नहीं हटा रही ताकि उन्हे मुसलमानों का बफादार और निष्ठावान निरूपित किया जा सके।

उत्तर प्रदेश मे योगी आदित्य नाथ जी का शासन के बावजूद शासन मे समाजवादी पार्टी के वफादार और आज्ञाकारी अधिकारी और कर्मचारियों की पैठ कितनी गहरी है, ये इस बात से प्रमाणित होता है  कि बलात्कार पीड़िता और उसकी माँ पिछले दो माह से उसकी बेटी के साथ हुई अन्याय और ज्यादती की शिकायत पुलिस चौकी के  स्टाफ से अनेकों बार करने के बावजूद,  उसकी बात नहीं सुनी गयी। यदि मामला पुलिस के उच्च अधिकारियों के संज्ञान मे न आता तो ऐसे ही दफन हो गया होता।  समाजवादी पार्टी के  मोईद खान के  रसूख को इस बात से भी समझा जा सकता है कि अखिलेश यादव ने अपने सत्ता शासन के दौरान ऐसे  आसमाजिक व्यक्ति के मकान के एक हिस्से मे किराये से पुलिस चौकि संचालित कर, क्या किराये के रूप मे अपरोक्ष रूप से उसे आर्थिक लाभ पहुंचाने के प्रयास के रूप मे नहीं देखा जाना चाहिये? पिछले दो माह से अनुसूचित जाति की उस नाबालिग बच्ची के साथ मोईद खान और उसके नौकर राजू खान द्वारा लगातार शारीरिक शोषण और बलात्कार किया जाता रहा। पाशविकता की इंतहा देखिये इन नरपिशाचों ने इस घृणित काम का विडियो भी बनाया और उसके सार्वजनिक करने की धमकी देकर लगातार यौन दुराचार करते रहे!! समाजवादी पार्टी के फैजाबाद से  सांसद अवधेश प्रसाद की निकटता, मोईद खान और उनके नौकर राजू खान के ऐसे  कुकृत्य को लगातार छुपाए रखना उनके संरक्षण और सहायता के बिना संभव नहीं, जिसकी गंभीरता पूर्वक पुलिस जांच होना चाहिये?              

हमारे देश के राजनैतिज्ञों के नैतिक चरित्र और संकुचित सोच का का पैमाना  नीचता के निम्नतम स्तर पर पहुँच गया है। हर राजनैतिक दल अपने-अपने वोट बैंक के हिसाब से महिलाओं और बच्चियों पर हो रहे अत्याचार के मामले को प्रचारित और प्रसारित करती हैं। 4 जून 2017 के चर्चित उन्नाव रेप कांड मे, उन्नाव के बांगर मऊ से भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की संलिप्तता के मुद्दे को कॉंग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने बड़े ज़ोर शोर से उठाया था, जिसने युवा नेत्री प्रियंका गांधी के "लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ" अभियान की प्रशंसा सारे देश मे की गयी थी। लेकिन दुर्भाग्य इन दोनों नेता द्वय ने अयोध्या मे एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए इस घिनौनी दुष्कर्म से इसलिये मुँह फेर लिया क्योंकि बलात्कार का आरोप उनके इंडि गठबंधन के सहयोगी समाजवादी पार्टी के अयोध्या से नगर अध्यक्ष एक मुस्लिम मोईद खान पर हैं। ऐसे दोहरे चरित्र के राजनैतिक दलों ने देश की राजनीति को बुरी तरह प्रदूषित और कलुषित किया हैं जिसकी सख्त निंदा होना चाहिये।     

मुंबई के शक्तिमिल गेंग रेप कांड के जिन दोषियों को 4 अप्रैल 2014 को  न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाये जाने पर, स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार के आरोपियों की सजा को अनुचित बतलाते हुए उनका  बचाव करते हुए मुरादाबाद की एक रैली मे कहा था, "लड़के हैं उनसे अक्सर गलतियाँ हो जाती है!! उन तीनों आरोपियों की फांसी की सजा नहीं होनी चाहिये, उन्होने कहा था कि, ऐसे क़ानूनों को बदलने की जरूरत हैं!! अयोध्या के सपा नगर अध्यक्ष मोईद खान के बचाव मे अखिलेश यादव का यह ब्यान, स्व॰ मुलायम सिंह के उक्त ब्यान से   मेल खाना, इस बात को दर्शाता हैं कि समाजवादि पार्टी के दिल मे, बलात्कारियों, गुंडों और असामाजिक तत्वों के लिये कितना प्यार, कितनी मुहब्बत और कितनी हमदर्दी है!!    

विदेशों के उच्च स्कूलों मे सम्पूर्ण  सुख सुविधाओं के बीच शिक्षित, आधुनिक और विकासशील सोच और कम्प्युटरीकृत, वैज्ञानिक  विचारों (ईवीएम {इलैक्ट्रिक वोटिंग मशीन को छोड़कर}) से ओतप्रोत, अर्थ और समाज शास्त्र विषयों (महिलाओं से बलात्कार के विषय को छोड़कर) मे पारंगत, खेलों (विशेषकर क्रिकेट) और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों मे निपुण, श्रीमान श्री अखिलेश यादव जी ने अयोध्या के अपने नगर अध्यक्ष, मोईन खान के डीएनए टेस्ट की मांग  यूं ही नहीं की? मोईद खान के परिवार की महिलाओं ने मोईद खान की प्रौढ़ता को दृष्टिगत रख उनके यौन क्रिया मे संलिप्त होने पर सवाल उठाये हैं और शंका प्रकट की? अखिलेश जी  मानव शरीर के चिकित्सकीय विज्ञान, मानव मनोविज्ञान और मानवीय समाज विज्ञान की भी उतनी ही जानकारी है जितनी की उक्त अलंकृत विषयों की। ऐसा प्रतीत होता हैं कि समाजवादी पार्टी ने समूहिक बलात्कार के आरोपियों मे से एक लगभग सत्तर वर्षीय मोईद खान की उम्र को देखते हुए उसके पौरुष और पुरुषत्व पर दाँव लगा कर डीएनए टेस्ट की मांग कर, जुआ खेलने की घिनौनी हरकत की  है? ताकि उम्र के इस पढ़ाव पर चल रहे मोईद खान का बचाव कर, सारा दोष उसके नौकर राजू खान पर मड़ कर मोईद को बचाया जा सके?

दुर्भाग्य हैं, कि सपा प्रमुख को भारतीय कानून, बलात्कार पीड़िता के ब्यान, उसके दर्द, उसके मानसिक संताप, उनके माँ-परिवार की मनः स्थित और क्लेश से कोई सरोकार नहीं? क्या किसी बड़े राजनैतिक हस्ती की माँ, बहिन और बेटी के साथ ऐसी नीच और घिनौनी हरकत होती, क्या तब भी उनकी सोच या विचार ऐसे ही होते? आवश्यकता इस बात की हैं कि समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव सहित देश के सभी प्रभुद्ध जनों और राजनैतिक दलों  को अपने निजी स्वार्थ, तुष्टीकरण और वोट बैंक की  गंदी राजनीति से उपर उठकर  समाज के दबे, कुचले और वंचित  वर्ग की  पीड़िता के दुःख, दर्द को महसूस कर उसके और उसके परिवार के साथ खड़े होकर बलात्कारियों को शीघ्र कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के यतन करना चाहिये।               

विजय सहगल

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

न्याय दिलाना ही उचित है