"एलन
मस्क की वोटिंग मशीन पर इंडिया का
तंज़"
4 जून को एक्ज़िट पोल के
परिणामों को नकारते हुए कॉंग्रेस सहित जिस
इंडि गठबंधन के पक्ष मे जो थोड़ा बहुत जनादेश आया था उसने इंडि गठबंधन के घटक दलों को
वोटिंग मशीन पर
सत्यता और संदेह का कोई मौका नहीं दिया। जब ये सुनिश्चित हो गया कि चुनावी
जनादेश 2024 इंडि गठबंधन के पक्ष मे न हो कर एनडीए के पक्ष मे रहा,
तो इंडि गठबंधन अपनी असफलता का ठीकरा किसी के सिर पर फोड़ने की तलाश मे था। इंडि गठबंधन की ये तलाश शनिवार 15 जून 2024 को तब पूरी हो गयी जब टेस्ला और एक्स
(पूर्व ट्वीटर) कंपनी के प्रमुख एलन मस्क ने ट्वीट के माध्यम से एक बार फिर ईवीएम
के भूत को जिंदा करते हुए लिखा, "हमे ईवीएम
को खत्म कर देना चाहिए। इन्सानों या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस द्वारा हैक किये जाने
का जोखिम हालांकि छोटा है, फिर भी बहुत
अधिक है।" उनका कहना था कुछ भी हैक किया जा सकता हैं।
कॉंग्रेस सहित इंडि गठबंधन की तो मानो मन की
मुराद पूरी हो गयी। उन्हे एक बार फिर डूबते हुए ईवीएम मुद्दे को एलन मस्क रूपी
तिनके का सहारा मिल गया। जिसके माध्यम से अब वे अपने पराजय की भड़ास का घड़ा एनडीए
गठबंधन और ईवीएम के सिर पर फोड़ने का प्रयास करेंगे। एलन मस्क ने शायद ईवीएम पर
सवाल अमेरिका के संदर्भ मे कहा था जहां वोटिंग मशीन को इंटरनेट,
किसी कनेक्टिविटी, किसी ब्लुटूथ या वाईफ़ाई
के माध्यम से जोड़ कर चलाया जाता हैं। भारत की वोटिंग मशीन मे इसलिये छेड़छाड़ संभव
नहीं क्योंकि यहाँ की मशीन मात्र एक कैल्कुलेटर की तरह होती हैं जिसका कार्य
विभिन्न उम्मीदवारों को मिले मतों की गणना कर,
कुल डाले गये मत पत्रों से मिलान करना मात्र हैं। ईवीएम की कार्यपद्धति एक साधारण कैल्कुलेटर की तरह होती है। इसके
अतिरिक्त कुछ निश्चित प्रतिशत मशीनों का मिलान वीवीपीईट पर्ची के माध्यम से भी
क्रॉस चेक कर, कराया जाता है तब गड़बड़ी
की संभवना नगण्य रह जाती हैं। इंडि गठबंधन के घटक दलों द्वारा 4 जून को ईवीएम पर
इसलिये प्रश्न खड़े नहीं किये क्योंकि शुरुआती नतीजे एक्ज़िट पोल को नकारते हुए इंडि
गठबंधन के पक्ष मे आने की संभवना थी,
लेकिन एनडीए गठबंधन द्वारा निर्धारित लक्ष्य हांसिल न करने की खुशी मे वे अपनी
चुनावी असफलता को ही भुला बैठे और अंततः एनडीए गठबंधन के बहुमत मे आते ही जनादेश
की व्याख्या अपनी अपनी तरह करके खुश होते रहे। जब अन्ततोगत्वा स्पष्ट बहुमत के साथ
एनडीए की सरकार बन गयी तो सिवाय हाथ मलने के उनके पास कोई कारण नहीं रहा और वे ऐसे
किसी मुद्दे की तलाश करने लगे, जैसे कि हमारे यहाँ कहावत हैं कि "बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा" ठीक
उसी तरह एलन मस्क के ईवीएम पर ब्यान ने इंडि गठबंधन को चुनावी हार पर अपनी झेंप और शर्मिंदगी से बचा लिया।
कॉंग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी ने तो
हमेशा की तरह ईवीएम पर मनगढ़ंत आरोप लगते
हुए उत्तर पश्चिम, मुंबई लोकसभा सीट से
मात्र 48 मतों से जीतने वाले शिवसेना उम्मीदवार के एक रिश्तेदार का उदाहरण दिया
जिसके पास ईवीएम हैक करने का मोबाइल फोन होने सुनिश्चित बताया जिससे ईवीएम मे छेड़
छाड़ संभव हुई। यध्यपि चुनाव आयोग ने उस रिश्तेदार के विरुद्ध मानहानि और झूठी अफवाह और भ्रम फैलाने का नोटिस दिया हैं। अदालत मे हारने और जीतने का निर्णय तो जब होगा-तब होगा,
पर फौरी तौर पर तो राहुल गांधी भ्रम और कपट फैला कर तो जीत ही गये?
वे यहीं नहीं रुके, एक कदम और बढा कर राहुल
गांधी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल और ईवीएम को ब्लैक
बॉक्स बताते हुए आरोप लगाया कि ईवीएम की जांच की इजाज़त ही नहीं है?
जबकि चुनाव आयोग समय समय पर सभी राजनैतिक दलों सहित लोगो और संस्थाओं को,
ईवीएम मशीन मे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हैक करके दिखाने की खुली चुनौती अनेकों
बार दे चुका हैं, तब माननीय राहुल गांधी
और कॉंग्रेस का तकनीकी ज्ञान, विध्या बोध और
बुद्धि कौशल न जाने कहाँ गायब हो जाता हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जो
विदेशो के उच्च शिक्षा संस्थाओं से
शिक्षित योग्य और प्रवीण विध्यार्थी रहें हैं। इनका ज्ञान और कौशल किसी सामान्य व्यक्ति
से उच्च और स्तरीय हैं। अनेक विषयों के
विशेषज्ञ श्री अखिलेश यादव महोदय ने ईवीएम
पर एक बार फिर सवाल उठाये। सोश्ल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट मे उन्होने कहा,
टेक्नोलोजी समस्याओं को दूर करने के लिये होती हैं,
अगर वही मुश्किलों की बजह बन जाए तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। हमारी उम्मीद के विपरीत,
अखिलेश यादव का अपने विदेशी ज्ञान के आधार पर ईवीएम के पक्ष मे खड़े होना तो दूर
टेक्नोलोजी पर ही सवाल खड़ा करने पर घोर आश्चर्य हुआ?
इंडि गठबंधन के इन नेता द्व्य राहुल गांधी और अखिलेश यादव का मानना हैं कि देश मे चुनाव ईवीएम के माध्यम से
न करा कर, कागज के मतपत्रों से कराये
जाने चाहिये जैसा कि पूर्व मे होता था। वे
कम्प्यूटर टेक्नोलोजी का परित्याग कर देश
को किस आदम युग मे ले जाना चाहते हैं?
क्या आज के सोश्ल माध्यम के प्रमुख प्लेटेफ़ोर्म जैसे फ़ेस बुक,
व्हाट्सप्प, एक्स (पूर्व ट्वीट्टर),
इंस्टाग्राम, यूट्यूब,
वी चेट, टेलीग्राम,
मेस्सिंजर टिकटाल्क आज के समय के प्रमुख मंच हैं जिनका स्वयं अखिलेश यादव जी सहित करोड़ो लोग सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं। अफसोस और दुःख तो तब होता
हैं कि इन मंचों का उपयोग राजनैतिक दलों के शीर्ष नेता गण देश और समाज मे लोगो के
बीच झूठ,
भ्रम, अंधविश्वास फैला कर समस्याओं को दूर तो
क्या समस्याएँ उत्पन्न कर रहे हैं तब क्या इन सोश्ल मीडिया मंचों को भी बंद कर देना
चाहिए? क्या हमे अपनी नकारात्मक सोच मे बदलाव ला
कर विकसित और सकारात्मक सोच को स्थान नहीं
देना चाहिये?
इंडि गठबंधन के इन नेताओं को देश के विभिन्न
राज्यों यथा कर्नाटक, तेलंगाना,
पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडू,
पंजाब, केरल और हिमाचल प्रदेश मे इनके घटक दलों को इसी ईवीएम के कारण मिले
बहुमत पर आत्ममंथन और तर्क वितर्क नहीं करना चाहिये?
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को समझाना उसी
तरह कठिन और असंभव है जैसे जागते हुए व्यक्ति को जगाने के निरर्थक प्रयास।
यहाँ ये कहना युक्तिसंगत न होगा कि जब कॉंग्रेस और उनके गठबंधन के लोग,
लंबे समय से सत्ता और शासन से वंचित रहेते हैं तो इनकी सोच,
सभ्यता और आचरण मे तर्क-वितर्क के स्थान
पर कुतर्क, भ्रांति और भ्रम की भरमार हो जाती हैं अर्थात चुनावों मे जब,
जिस जगह जीत जाएँ तो ईवीएम से कोई शिकायत नहीं होती लेकिन जब जहां पराजय का मुँह
देखना पड़े, वहाँ ईवीएम पर शक,
शंका और शिकायत ही शिकायत होना स्वाभाविक हैं।
यदि चुनाव आयोग इन कुल श्रेष्ठ नरपुङ्गवः युति
राहुल और अखिलेश को ये आश्वासन दे,
दे, कि ये दोनों जिस रायबरेली और कन्नौज संसदीय
क्षेत्र से ईवीएम की मतदान प्रक्रिया के माध्यम
विजयी हुए हैं, उस सीट से,
यदि वे त्याग पत्र के पश्चात दुबारा चुनावी रण मे मत पत्रों के माध्यम से यदि उनका परिणाम वर्तमान
परिणाम के विपरीत आता हैं अर्थात यदि ये दोनों उम्मीदवार अपने अपने चुनावी क्षेत्र
से पराजित हो जाते हैं या चुनावी अंतर की संख्या का अंतर बहुत बड़ा हो जाता है,
तो पूरे देश मे ईवीएम की जगह मत पत्रों के
माध्यम से चुनाव कराएं जाएंगे और ये मान लिया जायेगा कि ईवीएम के बारे एलन मस्क और इंडि गठबंधन के विचारों से देश
सहमत है? आप विश्वास मानिये ये दुबारा चुनावी मतदान की
प्रक्रिया मे अपनी नकारात्मक और निष्क्रिय सोच के चलते स्वयं अपने आप को हरवाने मे
कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे!! ताकि देश मे चुनाव मत पत्रों के माध्यम से कराये जा
सकें और चुनाव मे पुनः बूथों पर कब्जा,
बाहुबल, धनबल की बदौलत
धांधलबाजी कराई जा सके। अब देश के नागरिकों को सोचना हैं कि वे तकनीकी और विकास के
साथ खड़े हो कर प्रगतिशील सोच के पक्ष मे
हैं या पुरातन, पिछड़ी और मति-मंद सोच
के पक्ष मे। निर्णय देश के मतदाताओं को करना है?
विजय सहगल
2 टिप्पणियां:
इस देश के लोग नीम के कीड़े हैं उनको कड़वा ही पसंद है
आदरणीय सहगल जी,
ये घटिया स्तर के लोग नरपुंगव कैसे हो सकते है ? राहुल और अखिलेश जैसे लोग नराधमों के ही श्रेणी में आते हैं।
देश की लालची जनता को खटाखट का असली स्वप्न दिखाकर ,उनसे वोट ऐंठ लिए,उसी पर ये लोग इतना इतरा रहे हैं।
जल्दी ही ऐसे लोगों की सदस्यता रद्द हो ,ऐसी आशा कर सकते हैं।
अपने देश के संदर्भ में एलनमस्क के वक्तव्य को क्रिकेटर की तरह लपकना इन लोगों के डीएनए में है।
शुभ रात्रि
राजेन्द्र सिंह, ग्वालियर
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