शनिवार, 12 जनवरी 2019

व्हाट्सपयेँ


"व्हाट्सपयें"

सूचना - कृपया इस लेख के विचारों को बिलकुल भी गंभीरता पूर्वक न ले, इस लेख को एक हल्के फुल्के हास-परिहास के रूप मे लिखा गया हैं।

पुराने जमाने मे सूचना का मुख्य स्रोत चिट्ठी हुआ करती थी पर आज सूचना तकनीक के इस दौर मे  नए नए माध्यम जैसे  व्हाट्सप, फ़ेस बुक, ट्विट्टर दुनियाँ के नक्शे पर आ गये। इनको प्रयोग करने बालों के अनुसार उनका नामकरण हुआ हैं जैसे फ़ेस बुक का प्रयोग करने बाले "फ़ेसबुकिये", ट्विट्टर का उपयोग करने बालें ट्विटरिये और व्हाट्सप का प्रयोग करने बाले "व्हाट्सपये"  कहे गये। इन सभी सोशल माध्यमों मे सबसे ज्यादा पोपुलर माध्यम व्हाट्सप हैं। जिस पर कुछ प्रकाश डालूँगा। व्हाट्सप मे सबसे ज्यादा संख्या हैं गुडमोर्निगयों की हैं। जो सुबह-सुबह ऐसे गुड मॉर्निंग करते हैं जैसे पुराने जमाने की  एक कहावत कही जाती थी कि गाँव मे यदि  मुर्गा बांग नहीं देगा तो क्या सबेरा नहीं होगा? लोग अपने मोबाइल की मेमोरी फुल हो जाने के डर से इन गुडमोर्निगयों से परहेज करने की कोशिश करते हैं।  इनमे कुछ सुबह 11-12 बजे सो कर उठेंगे और गुड्मोर्निंग की पोस्ट डालेंगे जबकि सारी दुनियाँ उठ चुकी होती हैं। एक मैसेज तो समझ मे आता हैं ये  गुडमोर्निगये कभी कभी   2-3 गुड्मोर्निंग मैसेज एक साथ डालते हैं। सोचो जब कोई आदमी आपको 2-3 बार गुड्मोर्निंग करे तो कैसा लगेगा। काश ये गुड्मोर्निंगये जो 10-12 से लेकर 50  हजार तक के स्मार्ट फोन अपने पास रखते हैं सिवाय नकल (कॉपी) मार कर चिपकाने (पेस्ट) के खुद अपना बनाया हुआ गुड्मोर्निंग मैसेज भेजे तो कितना अच्छा हो, वे अपने मोबाइल कैमरे से  कोई सुंदर फोटो जैसे उगते सूरज की, या किसी सुंदर फूल की या सुंदर पक्षी या किसी स्कूल जाते बच्चे की या उन्हे जो भी अच्छा लगे उसकी फोटो भेजे "सिवाय अपने चेहरे की सेलफ़ी" के।  "ये गुड्मोर्निंगयें कभी कभी बड़े सुंदर सुंदर उपदेश पूरक  वाक्य लिख कर ग्रुप मे डालते हैं जो इंटरनेट पर हजारों की तादाद मे पड़े होते हैं।  जब तक व्हाट्सप मे फॉरवर्ड मैसेज का निशान नहीं आता था तब तक हम यही समझते रहे कि यार फलां आदमी बड़ा विद्वान और पढ़ा लिखा हैं जो इतने  सुंदर-सुंदर  विचार लिखता हैं जैसे कभी  स्वामी विवेकानंद या कोई अन्य संत या साधु-महात्मा लिखा करते थे।  वो तो भला हो व्हाट्सप का जो अब "मुड़ा हुआ तीर" (फॉरवर्ड मैसेज) बता देता हैं कि "माल चोरी का हैं"।

एक अन्य प्रकार के "व्हाट्सपये" जो बड़े धार्मिक किस्म के होते हैं पुराने जमाने मे जैसे पहले पर्चे छपवा कर लोगो को बाँटते या बंटवाने का चलन था कि 50 पर्चे छपवा कर आगे लोगो को बांटो तो माता रानी  आपकी मानो कामना पूरी करेगी  और अगर पर्चे नहीं छपवाये तो इतना-इतना नुकसान होगा। आजकल इसी  तरह के मैसेज नये रूप मे  व्हाट्सप पर आ जाते हैं कि इस मैसेज को आगे दस लोगो को भेजों, माता रानी आपकी मनोकामनायें पूरी करेंगी। मैंने भी उनकी आज्ञा को सिरोधर्य कर उनके ही व्हाट्सप नंबर पर दस बार कॉपी पेस्ट कर दिया और ग्रुप के सदस्यों को  लिख दिया कि हमने तो 10 बार निवेदक को  फॉरवर्ड कर दिया आपलोगो ने किया क्या?  हमारी  मनोकना बेशक पूरी नहीं हुई  पर मैसेज को भेजने बालों कि तो हो ही गई, जब बही मैसेज उन्होने अपने मोबाइल पर  10 बार पढा।   

एक "व्हाट्सपये" बड़े दयालू किस्म के होते हैं, इन लोगो को फॉरवर्डये कहते हैं। ये फॉरवर्डये, आव न देखा ताव तुरंत ही मैसेज को  आगे दूसरे  ग्रुप मे बढ़ा देते हैं। ।   जैसे ये एक "आठ साल की लड़की खो गई हैं (फोटो के साथ) कृपया अपने सभी ग्रुप मे शेयर करे ताकि उसके बिछुड़े माँ-बाप से मिलाया जा सके। कोई छानवीन नहीं कोई जांच पड़ताल नहीं बस मैसेज लपका और आगे धकेल दिया, उन्हे कौन समझाये कि मैसेज तब का हैं  जब बह 8 साल की बच्ची थी, माँ-बाप से मिले उसे सालों हो गये अब तक तो उसकी शादी भी हो गई और बच्चे भी हो गये पर बह व्हाट्सप मे अभी भी "गुमशुदा बच्ची" की तरह ही चल रही हैं।

पुराने जमाने मे जैसे शादी विवाह मे लड़के या लड़की सज-सम्हर कर बारात मे जाते थे और सिर्फ अपने आप को ही निहारा करते। बारात मे और दूसरा कौन क्या पहने-ओढ़े हैं उन्हे कुछ नहीं पता बैसे ही ये "व्हाट्सपये" सिर्फ अपनी भेजी पोस्ट को निहारा करते हैं और ताकते हैं की उन की पोस्ट पर किन-किन लोगो के कमेंटस आये,    उन्हे नहीं मालूम कि ग्रुप मे इससे पहले तीन बार बही पोस्ट भेजी जा चुकी है उन्हे तो बस उठा (कॉपी) कर पटक (पेस्ट) देने से मतलब।

बेशक देश के प्रसिद्ध एवं सबसे अच्छे  डॉक्टर त्रेहन हो पर डॉक्टरी व्हाट्सपये हर मर्ज का इलाज जानते हैं। ये सिरदर्द, पीठ का दर्द, दांत का दर्द से लेकर  टी॰बी॰, कैंसर, का इलाज गर्म पानी, शहद, अमरूद के पत्ते, वेल के पत्ते, बारह मासी का फूल, गुड़हल के फूल से आपका शर्तियाँ इलाज करने के नुक्से भेजते हैं और आग्रह करते हैं कि अपने सारे ग्रुप मे फॉरवर्ड करे ताकि लोगो को बीमारियों से बचाया जा सके। सरकार बड़े-बड़े हॉस्पिटल खोलने की जगह  क्यों नहीं इन डॉक्टर व्हाट्सपयों को जगह जगह मुहल्ला क्लीनिक खोल कर इनकी सेवायें लेती?  

लाखों व्हाट्सपये आज हजारों ग्रुप के सदस्य हैं और इन ग्रुप के मालिक एडमिन कहे जाते हैं। कुछ मालिक तो कई-कई व्हाट्सप ग्रुप ऑफ कंपनीस के मालिक (एडमिन) हैं। ऐसे ही एक ग्रुप की मालकिन (एडमिन) को मैं जानता हूँ। जो कई व्हाट्सप ग्रुप को संचालित करती हैं और इन ग्रुप्स की मालकिन (एडमिन) हैं।  बड़े ही सुंदर-सुंदर उपदेश परक मैसेज डालती हैं। ऐसे ही एक दिन एक मैसेज पढ़ा,  लिखा था "माता-पिता की सेवा से बड़ कर कोई दूसरा  कार्य नहीं हैं", पर उनके पिताजी बिजली के बिल, टेलीफ़ोन का बिल, रेल्वे रिज़र्वेशन के लिए गर्मी, सर्दी, बरसात मे  लाइन लगाए खड़े रहते हैं।  मालकिन साहिबा को या तो कंपनी के कार्य  से फुर्सत नहीं या उन्हे नहीं मालूम कि इंटरनेट से खाली व्हाट्सप या फ़ेस बुक ही नहीं चलते बल्कि ऑनलाइन सेवाओं से बिजली, टेलीफ़ोन के बिल और रिज़र्वेशन के साथ अन्य सुविधाये भी मिलती हैं। ऐसे ही एक ग्रुप मे सदस्यों को मेडिकल इंसयोरेंस कार्ड के लिए  निवेदन करते देखा!  
  
आप माने या न माने पर ये सच हैं कि आपके दुवारा व्हाट्सप पर डाली गयी हर पोस्ट आपके भविष्य के बारे मे वेशक कुछ न बताए पर आपके भूत काल (past) के बारे मे अवश्य सबकुछ बताती हैं। ग्रुप के सदस्य वेशक एक दूसरे को नहीं जानते हों पर आपकी पोस्ट आपके दुवारा अपने संस्थान के प्रति और अपने अधीनस्थों के प्रति किये गये कार्य और व्यवहार को जरूर  दर्शाती  हैं। एक सुंदर कमेंट एक सेवानिवृत लोगो  के ग्रुप मे देखने को मिला जब एक उच्च पद से सेवानिव्रत्त अधिकारी ने अपने पद का कुछ रौव दिखाया तो एक अन्य सदस्य ने लिखा श्रीमान हम सभी अब शतरंज के पिटे हुए मोहरे हैं जो पिटने के बाद एक ही डिब्बे मे पड़े हैं। इन तमाम कमेंटस मे एक बहुत खूबसूरत कमेंट एक बार हमारे सम्मानीय मित्र श्री जोसफ साहब ने लिखा जिसका सार था कि "निरर्थक पोस्ट से बेहतर हैं कि बिना  कोई मैसेज का ग्रुप ज्यादा अच्छा हैं। काश ऐसा होता??   

विजय सहगल

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