चंट मौड़ा
परीक्षा मे एक सवाल पूंछा गया
कि निम्न श्लोक का भावार्थ और उदाहरण सहित व्याख्या अपनी भाषा मे करो:-
अज्ञः सुखमाराध्यः सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञः ।
ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्मापि
नरं न रञ्जयति ॥
(भर्तहरि नीतिशतकम श्लोक न॰ 3)
परीक्षा मे चंट बुंदेलखंडी मौड़ा ने
जबाब लिखा :- महोदय श्लोक का भावार्थ निम्न हैं:-
भावार्थ - "एक अज्ञानी, मुर्ख व्यक्ति को समझाना आसान है, एक बुद्धिमान व्यक्ति को समझाना उससे भी आसान है, लेकिन एक अधूरे ज्ञान से भरे व्यक्ति को भगवान ब्रम्हा भी नहीं समझा सकते।"
उदाहरण के रूप मे हमाये देश के एक युवा नेता हते अबई बे दुबई गये हते। उते उने
चंट बुंदेलखंडी मौड़ा मिलो, बोलो:-
"दद्दा" लेओ तुमओं मिठाई खाओं"
युवा
नेता बोले,
- "का खुशी मे बड्डे"॰
चंट
मौड़ा बोलो, - "इंडिया
मे घर से खबर आई,
घर बाली पेट से हैं"
युवा
नेता बोले - "तुम कब से घरे नई गए"
चंट
मौड़ा बोलो, - "साल एक खाड़ हो गई"
अब
तो युवा नेता लाल पीले,
- बोले मूरख हो,
"बगैर घर जाये घरवाली कऊं प्रगनेंट होउत का?
इतनोई नईं जानत"
चंट
मौड़ा बोलो, - "बोईं तो
हम इते दिन से तुमसे कैरएं पप्पू :- बगैर इंटरनेट के कऊं ईवीएम हैक होउत का?,
तुम इतनोई नईं जानत?
-विजय सहगल
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