"आमिर खान का असली चेहरा"
जिस
आमिर खान ने 24 नवम्बर 2015 को ये कह कर देश मे सनसनी फैला, देश को बदनाम
करने की कोशिश की थी कि "मेरे परिवार को देश मे डर लगता है"! "मेरी
पत्नी ने मुझसे देश छोड़ने की बात कही"!! "उन्हे अपने बच्चों के लिये डर लगता
है"!! आज जब पत्नि से तलाक की बात मीडिया से कही तब एक क्षण के लिये भी अपनी पत्नि
और बच्चों का ख्याल नहीं आया इस शैतान को? छूटे ढखोसला दिखाने
वाला आमिर खान! अपनी पत्नि और बच्चों के लिये अब कहाँ गया तेरा डर? अरे कृतघ्न जिस पत्नि के देश छोड़ने के लिये तू चिंतातुर था आज उसे सड़क पर
छोड़ते, तुझे लज्जा नहीं आयी? कहाँ गयी उसके
डर के लिये तेरी अकुलाहट, बेचैनी और डर??? काश!! वो भोली-भाली महिला समझ पाती कि उसका और उसके बच्चों को डर देश के लोगो से नहीं था, डर था तो तेरे जैसे आस्तीन के साँप
से, जिसे वो समझ नहीं पायी!!
अभी जब 100 रुपए मे तीन घंटे का ड्रामा
दिखाने वाले फिल्मी नचैइए आमिर खान का अपनी
पत्नी के साथ तलाक का समाचार पढ़ा। ये कोई साधारण पंचर वाले या साइकल वाले का
समाचार होता तो मै प्रीतिक्रिय न देता लेकिन समाचार एक ऐसे व्यक्ति की तरफ से था
जिसने "सत्यमेव जयते" जैसे धारावाहिक के माध्यम से समाज मे फैली दहेज,
तलाक़शुदा महिलाओं पर अत्याचार, बच्चों के शोषण
जैसी बुराइयों पर प्रहार किया था और आज अपनी
पत्नी को तलाक देकर अपने घिनौने रूप का दर्शन निर्लज्ज तरीके से मीडिया के सामने करा
रहा था। धूर्तता की पराकाष्ठा तब और हो गयी जब अपनी गंदी जवान से अपने कुत्सित कृत को देश
के लोगो को सम्बोधित कर कहा कि "आपने हमारे बारे सुना होगा। "आपको दुःख
हुआ होगा", "शॉक लगा
होगा"। "लेकिन हम दोनों खुश है"।
अरे निर्लज्ज, नाशुक्रे,
कृतघ्न, नमक हराम,
हम क्यों दुःखी होने लगे रे!!,
हमे "शॉक" क्यों लगेगा वे,
हमे तुमसे क्या लेना-देना। न हम तुम्हारे प्रशंसक है न तेरे "नचईएपन" मे
हमे कोई दिलचस्वी है!! अगर थोड़ी बहुत दिलचस्वी हुई भी होगी तो तेरे नाच गाने का
आनंद ले निर्धारित फीस का भुगतान कर दिया होगा। दुःखी तो तुझे
होना चाहिये, जो दोगली ज़िंदगी जी रहा
है। "पर उपदेश कुशल बहुतेरे" वाली कहावत को चरितार्थ करते,
तेरे खोखले, दंभ भरे और थोथले उपदेश
की असलियत लोगो के सामने आ गयी। एक ओर तो "सत्यमेव जयते" जैसे सीरियल
बना कर तमाम सामाजिक बुराइयों जैसे,
महिलाओं पर अत्याचार, दहेज,
तलाक़शुदा औरतों के दुःखद ज़िंदगी और बच्चों के शोषण का चित्रण करता है और खुद ही अपनी घरवाली को
तलाक देकर दोमुंही बाते कर आम लोगो को
बरगलाने का प्रयास करता है कि, "हम एक
है"? अगर एक है तो फिर
"तलाक" का नाटक क्यों? तूँ चाहता तो इन
दोनों के रहते तीसरी शादी भी कर सकता था पर कोई भी स्वाभिमानी महिला ऐसा करने की
आज़ादी तुझे तलाक देकर तेरे से छुटकारा पा
कर ही अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर सकती थी। सार्वजनिक जीवन मे अभिनेताओं के रूप
मे जनसमुदायिक मंचों पर महात्माओं के से
उपदेश देकर ढौंग करते तेरे को तनिक भी
लाज-शर्म नहीं आयी। "छद्म मुखैटा"
लगा कर जीते हुए, तुझे अपनी ज़िंदगी से
घिन नहीं हुई"? लोगो को कहता है कि "आपको दुःख हुआ होगा"?
"शॉक लगा होगा"? अरे हम तो
"लल्ला के पाँव पल्ला मे" देख ही समझ गये थे कि तेरा टीवी धारावाहिक (टॉक शो) "सत्यमेव
जयते" तेरी वास्तविक ज़िंदगी के एकदम विपरीत,
एक ढखोसला और छल-प्रपंच होगा जो कालांतर के बाद आज सच साबित हो गया।
हर माँ-बाप,
अपने युवा बच्चों के लिए समुचित शिक्षा और
उसके भविष्य निर्माण की योजना बना उनकी गृहस्थी बसाने हेतु विवाह योग्य बधू की तलाश
करने की योजना बनाते है और स्वयं "वानप्रस्थ आश्रम मे प्रवेश कर समाज सेवा की
तैयारी करते है पर तुम जैसा पतित, अधम,
पथभ्रष्ट, घिनौने और गिरे हुए
चरित्र का आदमी अपने लिये एक कामुक दुल्हन की तलाश कर रहा है?
जिस "सत्यमेव जयते" धारावाहिक मे तेज़ाब,
दहेज और बाल यौन अपराध जैसी सामाजिक बुराइयों के विषयों को उठा उन पीढ़ित बच्चों के
दुःख-दर्द को आम जनता के बीच सांझा किया था कभी वक्त निकाल कर अपने किशोर वय बेटे
और बेटी से भी अपनी उस "दूसरे तलाक"
और "तीसरी शादी" की "भावी योजना" पर भी बात कर लेता,
उनके दिलों मे अपनी छवि के बारे मे बात कर लेता?
मै दावे के साथ कह सकता हूँ शायद तुम्हारे बेटा/बेटी भी तुम्हें उन बाल शोषण अपराधियों की ही श्रेणी
मे रखेंगे, जिनका दुःख दर्द तुमने
अपने टॉक शो मे "सत्यमेव जयते" मे किया था?
काश तुम जैसे निर्लज्ज बेहया लोग किशोर वय बच्चों के जज़्बात समझ सकते और उनका
समाधान कर सकते?
दुनियाँ को फिल्मों और धारावाहिकों के
माध्यम से सदाचार और नैतिकता की शिक्षा और संस्कार देने वाले आमिर खान की थोथी,
दोगली और दोहरे चरित्र वाली सोच और संदेश कितने खोखले,
दम्भी और नैतिकता विहीन थे!! ये आज सारा देश देख रहा है। "सत्यमेव जयते"
जैसे पावन पवित्र वाक्य के उपयोग अपने धारावाहिक
मे कर जितना घिनौना अपराध तुमने किया है उसके लिये समाज और देश तुझे कभी माफ नहीं
करेगा।
अरे इस उम्र मे तो तुझे अपनी बेटी के लिए वर
की तलाश करनी चाहिए थी और तू "अनथे बैल" की तरह घूम फिर कर,
यहाँ वहाँ मुंह मारने की जुगाड़ मे फिर किसी महिला का जीवन बर्बाद करने की फिराक मे
है? क्या अंतर है तुझ मे और "बुद्धिहीन चौपायों"
मे??
होता
है बड़ा आश्चर्य, पल-पल ये सोच कर।
कैसे
जी लेता है तूँ, दोहरे नकाब ओढ़ कर॥
विजय सहगल




1 टिप्पणी:
सही चित्रण किया है आपने
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