"बुरान्सखंड - गणतन्त्र दिवस 2021"
26 जनवरी के एक दिन पूर्व ट्रैवल ग्रुप के
सभी सदस्यों को कह दिया गया था कि भारतीय गणतन्त्र दिवस के समारोह को मनाने हेतु
सभी सदस्य सुबह 7 बजे तैयार होकर अपने अपने कमरों से बाहर आकार होटल के नीचे
एकत्रित हों। सर्दीली सुबह के बावजूद सभी उपस्थित सदस्यों का प्रातः 6 बजे से ही
इकट्ठा होना शुरू हो गया था। मेरे साथ ये दूसरा मौका था जब 26 जनवरी के पावन
पवित्र पर्व पर मै अपने घर के बाहर था। इससे पूर्व सन 2011 मे मुझे अंडमान निकोबार
द्वीप समूह पर 26 जनवरी मे शामिल होने का सौभाग्य मिला था। आज गणतन्त्र दिवस 26
जनवरी 2021 को उत्तराखंड के खूबसूरत पर छोटे से गाँव बुरान्सखंड मे शामिल होने का
सौभाग्य ग्रुप के अन्य सदस्यों के साथ प्राप्त हुआ। मुझे नहीं लगता बुरान्सखंड
गाँव के इतिहास मे इसके पूर्व इतने उत्साह उमंग और इतनी संख्या मे लोगो का
गणतन्त्र दिवस पर पहले कभी शामिल होना हुआ हो।
ठीक सात बजे सारे सदस्यों ने एक जलूस के रूप मे होटल से एकत्रित होकर
प्राथमिक विध्यालय बुरान्सखंड के लिये प्रस्थान किया। अद्भुद माहौल था। सभी लोगो
ने सफ़ेद पृष्ठभूमि की तिरंगी कैप कैप लगाई हुई थी। 70-80 लोगो का समूह "भारत
माता की जय!", "26 जनवरी अमर
रहे!", "वंदे माँ
तरम!" के नारों से आसमान को गुंजायमान कर होटल से लगभग पौना किमी॰ दूर स्कूल
की तरफ प्रभातफेरी के रूप मे बढ़ रहा था। एक छोटे से गाँव मे बच्चे,
बड़े, नौजवान युवा,
पुरुष महिलाएं का एक साथ गणतन्त्र दिवस के मौके पर जलूस के रूप मे बढ्ने का दृश्य
सड़क पर आने जाने वाले वाहनों के लिये जिज्ञासा और विस्मय भरा था। कुछ होटलों और
थोड़े से मकानों वाले इस गाँव के लोग कौतूहल पूर्वक इस गणतन्त्र दिवस की परेड को
देख रहे थे। इससे पूर्व शायद ही उन लोगो ने ऐसे नज़ारे को पहले कभी अपने कस्बे मे ऐसा आयोजन देखा
होगा। प्रभातफेरी मे शामिल लगभग 30-40 लोगो के हाथ मे वृक्ष,
की पौधें थी जिनको भी स्कूल परिसर मे
रोपित किया जाना था। श्री रूपक जैन जी के तो सम्पूर्ण वस्त्र ही तिरंगे से बने थे।
लोगो की उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मची थी। कुछ युवा और किशोर बच्चियों ने
"बीर तुम बड़े चलो, धीर तुम बढ़े
चालों॥ सामने पहाड़ हो, सिंह की दहाड़॥
तुम कभी रुको नहीं, तुम कभी झुको
नहीं......। का गीत सुना सभी सदस्यों मे उत्साह और ऊर्जा का संचार कर दिया। पूरे
जोश-खरोश के साथ लोग स्कूल परिसर मे पहुंचे।
एकत्रित समूह ने झंडारोहण कर सस्वर
राष्ट्रिय गान का समूहिक गायन किया। एक बार फिर भारत माता की जय,
वंदे मातरम और 26 जनवरी के नारे चारों तरफ गूंजने लगे। वही पर ग्रुप एडमिन द्वारा
सूचना दी गई कि बुरान्सखंड प्राथमिक विध्यालय जो लगभग पाँच वर्षों से बंद पड़ा था
उसको ट्रैवल ग्रुप ने अंगीकार कर बच्चों की कक्षाओं का संचालन करने का संकल्प लिया
है। छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये तत्पश्चात बूंदी का वितरण
उपस्थित जनसमुदाय के बीच किया गया। साथ ही सदस्यों द्वारा लाये पौधों का रोपण भी
सदस्यों द्वारा किया गया और संकल्प लिया कि आने वाले सालों मे इन वृक्षों के देखने
के लिये बुरान्सखंड मे परिवार सहित आते रहेंगे।
स्कूल के उपर ही गायत्री मंदिर से हिमालय की
वर्फ़ीली चोटियों के दर्शन हेतु भी बहुत से सदस्य उपर की ओर चढ़ गए जहां से हिमालय
पर्वत की चोटियों के नयनभीराम दृश्य भी
देखने लायक थे।
शाम के भोजन उपरांत आज सभी कि बापसी थी। इस
अवसर पर श्रीमती शुभा पोरवाल और श्री विकास पोरवाल के निर्देशन और देखरेख मे
उत्तराखंड मे प्रचलित विशेष पहाड़ी भोजन की व्यवस्था की गई थी। मंडवे की रोटी,
झंगुरे की खीर, भांग की चटनी,
हर्षिल की राजमा सहित मिक्स दाल का अलग ही स्वाद था। हमे बताया गया कि पोरवाल
दंपत्ति ने इस आयोजन मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। वे एक महीने से इस आयोजन की
सफलता हेतु कार्यरत थे। वास्तव मे इस तथ्य से मेरे सहित अन्य सदस्य अनिभिज्ञ थे।
सभी ने पोरवाल परिवार का आभार ज्ञपित किया। उसके ठहरने से लेकर भोजन व्यवस्था,
सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
विदाई स्वरूप सभी सदस्यों को एक सुंदर बांस
की टोकरी मे उत्तराखंड के स्वादिष्ट व्यंजन भेंट किये गये। उस मिष्ठानों मे रोट,
अरसा, मंडवे के आटे के नमकीन और मालू के पत्ते मे
सिंगोरी का समावेशन था। इतनी सुंदर व्यवस्था के साथ ग्रुप एडमिन,
कटारिया जी, निरुपमा जी,
रावत जी ने संयुक्त रूप से एवं लोगो ने व्यक्तिगत
रूप से एक दूसरे का अभिवादन एवं पुनः शीघ्र मिलने की कामनाओं के साथ
अपने अपने घरों की ओर प्रस्थान किया।
ट्रैवल ग्रुप ऑफ इंडिया (घुम्मक्डयीओं का
समूह) की एक मुख्य विशेषता ने मुझे अति प्रभावित किया जो इस समूह को अन्य समूहों
से अलग रखता है वो ये कि टीजीआई के इस समूह ने न केवल भ्रमण के लिए उत्तराखंड के
पर्यटन स्थल बुरान्सखंड को चुना बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक,
सामाजिक, खान पान के व्यंजनों
सहित उत्तराखंड के कृषि उत्पाद का भी प्रचार प्रसार कर प्रमोट किया। प्रायः
घुम्मकड़ी समूह स्थल के भ्रमण तक ही सीमित रहते है। यही नहीं पर्यावरण के बढ़ावे के लिए
वृक्षा रोपड़ सहित बुरान्सखंड के पाँच साल से बंद पड़े एक प्राथमिक स्कूल को अंगीकार कर एक स्वयं सेवी संस्था के
सहयोग से समूह ने आर्थिक सहयोग का संकल्प भी लिया। इसके लिये टीजीआई ग्रुप के
प्रबंधन सहित सदस्यों की जितनी भी प्रशंसा
की जाये कम है।
विजय सहगल





1 टिप्पणी:
Ati sundar prastuti...
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