"श्री
राम शरण सहगल"
बचपन मे मै तीसरी,
चौथी कक्षा मे अपने स्कूल से अलग उनके घर ट्यूशन पढ़ने जाया करता था। वे उन दिनों झाँसी
के व्यख्यात "लक्ष्मी व्यायामशाला" रूपी आश्रम मे गुरु-शिष्य परंपरा के परिचायक
मलखम के प्रशिक्षु थे। जिम्नास्ट मे भी पारंगत थे। एसपीआई इंटर कॉलेज जिसके वे छात्र
थे, कॉलेज की वार्षिक पत्रिका मे मैंने काँच की बोतलों पर
संतुलित मलखम पर उनकी व्यायाम करते फोटो देखी थी। छात्र के रूप मे अध्यन के साथ वे
हम जैसे बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाते थे। संयुक्त परिवार मे बड़े बेटे होने की भूमिका
उन्होने बड़ी जिम्मेदारी पूर्वक निभाई। उनके संघर्ष की बानगी का मै अवश्य उल्लेख करूंगा
कि तीन चार साल ट्यूशन पड़ने के दौरान मैंने उनको 7-8 किराये के मकान बदलते देखा,
जहां पर बच्चों को ट्यूशन के साथ वे स्वयं अपने स्नातक आदि की सतत पढ़ाई अपने छोटे भाई
बहिनों के साथ करते रहे। बाद मे झाँसी के ही
गिने चुने कॉलेज मे से एक एसपीआई इंटर कॉलेज मे अध्यापक के रूप मे अपने कैरियर की शुरुआत
की।
वे जीवनपर्यंत अध्यापन के कार्य को करते हुए
झाँसी शहर मे शिक्षा की रोशनी को अपने हजारों छात्रों के माध्यम से समाज को आलोकित
करते रहे। जीवन के अंतिम पहर मे लगभग दस वर्ष पूर्व धर्मपत्नी श्रीमती नीरू के आकस्मिक
निधन किसी भी व्यक्ति के खुशहाल जीवन मे एकाकीपन होना स्वाभाविक होता है पर उन्होने
कभी इसको अपने मिलने वाले मित्रों और शुभ चिंतकों को आभास नहीं होने दिया।
दिनांक 24 फरवरी को उनके निधन का दुःखद समाचार
सुन मन व्यथित हो उठा। मै एक शिष्य और छोटे भाई के नाते उन्हे अपनी अश्रुपूरित,
विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन जैसे नेक,
सच्चे कर्मयोगी व्यक्ति को अपने श्री चरणों
मे स्थान दे।
ॐ शांति।
विजय
सहगल

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