"अंधेर नागरी चौपट मामा"
16 फरवरी को प्रातः अपने संक्षिप्त भोपाल प्रवास पर एक हृदय बिदारक बस दुर्घटना का सुन मन उद्वेलित हो उठा जब समाचार सुना कि बसंत पंचमी के दिन मध्य प्रदेश के नगर "सीधी" से "सतना" जा रही बस ने ड्राईवर की लापरवाही के कारण जल समाधि ले ली। इस दुःखद दुर्घटना मे अनेकों यात्री असमय काल कवलित हो गये। अगले दिन समाचार पत्रों की सुर्खियों मे दुर्घटना की भयावहता, विकरालता रोंगटे खड़े करने वाली थी। समाचार पत्रों मे 47 यात्रियों के काल के ग्रास के समाचार ने मन को व्यथित कर दिया। 30 सवारियों की क्षमता वाली इस बस मे 62 से अधिक यात्रियों को ठूंस ठूंस कर बैठाया गया था। 23 महिलाओं एवं 22 पुरुष सहित 2 छोटे मासूम इस दुर्घटना की भेंट चढ़ गये। 2 साल के अथर्व की फोटो दिल दहलाने वाली थी। मृतकों मे अधिकतर वे बेरोजगार युवक, युवतियाँ थे जो बैंक, रेल्वे एवं एएनएम की परीक्षा मे शामिल होने आये थे। वे अपने ज्ञान और कौशल से परीक्षा मे सफल भी हो जाते किन्तु खेद और अफसोस है कि वे सारे मृतक शासन प्रशासन की भ्रष्टाचार एवं निरंकुशता की परीक्षा को उत्तीर्ण न कर सके और असमय काल के गाल मे समा गये।
इससे
ज्यादा घोर लापरवाही क्या होगी कि दुर्घटनाग्रस्त बस पिछले पाँच साल से बिना बीमा
के चल रही थी। जो बस त्रुटि पूर्ण ब्रेक प्रणाली,
घिसे टायरों सहित चलने के लिये अनपयुक्त थी उसे फ़िटनेस प्रमाणन आरटीओ द्वारा
प्रदान किया गया था। मुख्य मार्ग पर अवैध उत्खनन और ओवरलोड डंपरों से क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण बस अपने तयशुदा
मार्ग को छोड़ नहर किनारे सँकरे मार्ग पर वेलगम दौड़ रही थी। यात्रियों के बारबार कहने के वावजूद ड्राईवर ने
बस की गति को धीमे नहीं किया। लापरवाही और गैरजिम्मेदार ड्राइविंग एवं सँकरे
रास्ते के कारण बस पानी से लबालव भरी 20 फुट गहरी नहर मे समा गयी जिसकी कीमत 47
निरीह, निरपराध यात्रियों को मौत के रूप मे चुकानी
पड़ी।
आपको
जानकार आश्चर्य होगा कि दिल दहला देने वाली इस दुर्घटना पर मध्य प्रदेश के कर्तव्य
पारायण, ईमानदार,
जनसेवक आरटीओ अधिकारी श्री संजय श्रीवास्तव
ने बगैर एक क्षण गवाएं इस बस का फिटनेस
प्रमाण पत्र, परमिट एवं लापरवाह
ड्राईवर का लाइसेंस निरस्त कर दिया। इतनी गंभीर,
शोकाकुल दुर्घटना पर ऐसे सेवभावी जन सेवक की बस के परमिट,
फ़िटनेस, और ड्राईवर के लाईसेंस
के निरस्तीकरण की त्वरित एवं त्रुटि रहित कार्यवाही की मिशाल दुनियाँ मे शायद ही
देखने को मिले!! शासकीय अधिकारियों की राकेट जैसी गति से कार्यवाही आपको सिर्फ मध्य प्रदेश मे ही देखने को मिलेगी। मेरा दृढ़ मत है कि माननीय
आरटीओ महोदय ने अपनी सेवाभावना एवं कर्तव्य परायणता का एकांश भी दुर्घटना घटने के पूर्व वाहनों के
परमिट, फ़िटनेस,
इनश्योरेंस की जांच पढ़ताल मे लगाया होता तो ये निरीह 47 व्यक्ति अकाल मृत्यु को न प्राप्त
होते। मेरा निश्चित कठोर एवं अप्रिय मत ये भी है कि कि इन 47 निरपराध लोगो की मौत दुर्घटना
मे नहीं बल्कि शासन/प्रशासन के इन गैर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बनाई कुव्यवस्था
के इन भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा की गयी "हत्या" है!! कदाचित समय रहते
इन्होने अपने कर्तव्यों को ईमानदारी और जनसेवा की भावना से निभाया होता तो ऐसी
अनहोनी न होती। ऐसा नहीं है कि आरटीओ महोदय द्वारा त्वरित और शीघ्र कार्यवाही से
व्यवस्था के परमिट, फ़िटनेस,
लाईसेंस अब चाक चौबन्द हो गयी हों और अब
सड़कों पर वाहन चालकों की निरंकुशता समाप्त हो गई हो?
कहीं न कहीं ये निरंकुश वेलगाम वाहन आज और अभी भी चल रहे होंगे!! वो बात दूसरी है
कि ये गैर कानूनी परमिट, लाईसेंस तब तक
नहीं दिखाई देंगे जब तक की कोई अन्य अगली दुर्घटना न घटे!! क्योंकि शासन प्रशासन
के भ्रष्ट अधिकारियों की लचर और ढुलमुल रवैया अभी भी बदस्तूर जारी है। परिवहन और
यातायात विभाग के ये विचारशील, कुशल और होनहार जनसेवक,
जनसाधारण के दुपहिया और चौपहिया वाहनों के इन्श्योरेंस,
लाईसेंस पर्यावरण प्रमाण पत्र आदि पर तो अपनी सारी ऊर्जा व्यय करेंगे (देखे मेरा ब्लॉग
उन्नाव बालाजी, दिनांक 25 दिसम्बर 2020:-
https://sahgalvk.blogspot.com/2020/12/blog-post_24.html)
पर इन अनफ़िट, बगैर परमिट,
बगैर इन्श्योरेंस के सरपट भाग रहे अनत्थे बैलों की तरह अनियंत्रित ट्रकों,
बसों या अन्य व्यापारिक वाहनों पर लगाम
लगाने मे अपने समय का सौवाँ हिस्सा भी लगाएँ तो यातायात व्यवस्था चाक चौबन्द हो
जाए और साधारण जन मानस इस असमय मौत का शिकार न बने।
एक
अन्य समाचार पत्र ने भी इस अमंगलकारी
दुर्घटना पर राज्य शासन के परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत के अमर्यादित
आचरण की ओर मेरा ध्यानाकर्षित किया। माननीय मंत्री महोदय ने दुर्घटना स्थल पर जाना
भी गवारा नहीं किया इसके विपरीत वे बसंत पंचमी के भोज मे आमोद-प्रमोद,
हास-परिहास और मौज-मस्ती करते नज़र आये। श्री
राजपूत के अनैतिक एवं लोकलाज विरुद्ध आचरण की उम्मीद उस दल के सदस्यों से अपेक्षित नहीं की जा सकती जो भारतीय
सांस्कृति और सनातन परंपरा के वाहक होने और "जनसेवक" की भावना से ओतप्रोत
होने का दम भरता हो। उपर से तुर्रा उनके इस
बयान ने "जले पर नमक छिड़कने" का कार्य किया कि उस स्वादिष्ट और स्वरूचि भोज
मे "और भी मंत्री थे"।
मुख्य
मंत्री श्री शिवराज सिंह जो मामा के रूप मे जनसामान्य के बीच प्रसिद्ध है और अपने
आप को जनसामान्य के दुःख-सुख मे शामिल होने का कोई मौका नहीं चूकते। उनकी कैबिनेट के परिवहन मंत्री बस दुर्घटना मे मारे गये 47
व्यक्तियों की मौत की खबर से बेखबर हो,
ऐसी निर्लज्ज,
असभ्य आचरण उनके मंत्रिमंडल के सदस्य द्वारा
प्रस्तुत किया जाये ऐसी अपेकक्षा जनकल्याण कारी सरकार से कदापि नहीं की जा सकती। इसकी
जितनी भी आलोचना, निंदा,
भर्त्सना की जाये कम है।
एक
बात से मै अनिभिज्ञ हूँ कि क्यों मध्यप्रदेश मे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अवैध
उत्खनन एवं अवैध यात्री बसों का वहन/परिवहन क्यों नहीं समाप्त हो पाया। फलस्वरूप
विन्ध्यांचल मे 6 बड़ी बसों की जलसमाधि मे
322 लोगो ने अपनी जान गंवाई। सीधी-सतना की इस बस दुर्घटना मे भी अवैध उत्खनन
से क्षतिग्रस्त सड़कों और यातायात के जाम के कारण बस दुर्घटना हुई। कुछ वर्ष पूर्व 2012
मे मुरैना मे एक आईपीएस अधिकारी श्री नरेंद्र
सिंह की इसी अवैध उत्खनन के कारण दिन
दहाड़े ट्रैक्टर चढ़ा कर हत्या की गई थी।
आखिर क्यों मध्य प्रदेश की कोई सरकार इस अवैध रेत उत्खनन एवं अवैध यात्री बस परिवहन पर नियंत्रण नहीं कर पा रहीं है? सरकारें कोई भी रही हों पर अवैध उत्खनन एवं
परिवहन पर नियंत्रण शासकीय मशीनरी एवं अधिकारियों की ढुलमुल रवैये एवं भ्रष्ट
आचरण के कारण इन पर कभी अंकुश नहीं लगाया
जा सका। शायद माननीय मुख्यमंत्री श्री
शिवराज सिंह जी की सरकार भी इस से अछूती नहीं रही??
न
जाने वो दिन कब आएंगे जब इन दुर्घटनाओं पर
अंकुश मुमकिन होगा?? आइये तब तक इन अकाल काल
कवलित लोगो को अपने श्रद्धा सुमन तो अर्पित कर ही सकते है। मृतकों को हार्दिक
श्रद्धांजलि!! ॐ शांति!!
विजय सहगल





2 टिप्पणियां:
अत्यन्त दुखद व ह्रदय विदारक घटना । यदि प्रशासन ज़रा भी इस घटना पर शर्मिंदा हो तो ऐसे समस्त अधिकारियों को अरेस्ट कर कठोर दंड का भागी बनाये ताकि अन्य लोग सबक़ ले सके।
Bahut hi dukhad ghatna h bechare abodh bachche kaise tadpe hoge
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