"लता
मंगेशकर एवं सचिन तेंदुलकर के ट्वीट"
महाराष्ट्र सरकार को हो क्या गया जो अपने
उल-जलूल निर्णयों के कारण अपनी भद्द पिटवा देश मे
जग हँसाई का पात्र बनी हुई है। एक अदनी सी अभिनेत्री के विरुद्ध सरकार की
अति सक्रियता के मामले मे अपनी फजीहत से लगता है उसे पूरी तसल्ली नहीं हुई थी?
जो उनके गृह मंत्री ने हाल ही मे देश के निर्विवाद गौरव,
भारत के अमूल्य रत्न, भारत रत्न
पुरस्कार प्राप्त सर्व श्री लता मंगेशकर
और सचिन तेंदुलकर के अपने देश के पक्ष मे किये गये ट्वीट की जांच कराने की बात कही है। दुर्भाग्य
तो तब और हुआ कि महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने भी अपने गृह मंत्री अनिल
देशमुख के निर्णय पर मुहर लगा दी। उनका
कहना कि इन दोनों भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त माननीयों सहित देश के अन्य अनेक गणमान्य सितारों ने किन
के दबाब मे देश की सर्वभौमिकता के पक्ष मे ट्वीट किया?
क्या भारत देश के लोकतान्त्रिक और सर्व भौमिकता के पक्ष मे लिखना,
बोलना, ट्वीट करना अपराध है?
क्या साधारण जनों के सहित देश के गौरव,
भारत रत्न लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर
साहित गणमान्य प्रतिष्ठित लोगो को अपनी
देशभक्ति के दर्शन और प्रदर्शन के लिए महाराष्ट्र सरकार की अनुमति लेनी होगी?
मंत्रियों, विधायकों की ज्ञान,
बुद्धिमत्ता पर फख्र करना इतराना तो समझा जा सकता है लेकिन इन गौरवशाली व्यक्तियों
द्वारा देश के पक्ष मे ट्वीट करने के निर्णय लेने की क्षमता पर संदेह करना क्या इन मंत्रियों की ओछी और तंग मानसिकता
का परिचायक नहीं? लता मंगेशकर और सचिन
जैसी भारत श्रेष्ठ हस्तियाँ जो अपने अपने क्षेत्रों मे दुनियाँ का सर्वश्रेष्ठ
अनुभव और दुनियाँ भर मे अपना एक अलग महत्वपूर्ण स्थान रखते है,
तो क्या विधायक और मंत्री उन्हे अच्छे-बुरे का पाठ सिखाएँगे?
क्या माननीय गृह मंत्री महाराष्ट्र सरकार इन विशिष्ट महत्वपूर्ण हस्तियों को नादान
बच्चा समझते है जिन्हे अच्छे बुरे की पहचान सिखाई जाये?
बेशक महाराष्ट्र के विधायकों, गृह मंत्री या
मुख्य मंत्री को भारत के इन गौरवशाली रत्नों
के ट्वीट पर किसी दवाब की शक या शंका हो
पर देश की 130 करोड़ जनता को लेश मात्र भी संशय नहीं कि दुनियाँ की कोई ताकत,
कोई शासन सत्ता या कोई धन कुबेर उनके उपर दबाब डाल ट्वीट कराने को मजबूर कर सके। सिर्फ और सिर्फ छुद्र और विक्षिप्त मानसिकता का
ही व्यक्ति ऐसी गिरी हुई सोच रख इन हस्तियों
पर बेहूदा आरोप लगा सकता है। कॉंग्रेस के चाटुकार नेता शायद ये भूल गये कि
आसमान की ओर देख कर थूंकने बाले लोगो के मुंह पर ही थूंक बापस गिरता है।
काश गृह मंत्री महोदय अनिल देशमुख अपने
श्रीमुख से मुंबई सहित देश के दुश्मन दाऊद इब्रहीम के बारे मे जांच करने के आदेश पर
विचार कर अपने बल और पौरुष का प्रदर्शन करते तो महाराष्ट्र सहित देश की जनता उन्हे
अपने सिर आँखों पर बैठाती, उनकी वाहवाही,
शाबाशी और जय जय कार करती।
कॉंग्रेस की एक नेत्री ने 9 फरवरी को टीवी परिचर्चा पर ये कहते हुए काँग्रेस का बचाव किया कि "लोगो
को ये नहीं भूलना चाहिये कि श्री सचिन तेंदुलकर को राज्य सभा मे सांसद के रूप मे
मनोनीत करना एवं भारत रत्न पुरस्कार से विभूषण काँग्रेस के
ही कार्यकाल मे किया गया था"!! तो क्या ये माना जाये कि सचिन तेंदुलकर
को भारत रत्न से नवाजना या राज्य सभा मे मनोनीत करने से उन्हे ये अधिकार मिल जाता
है कि उनके राष्ट्रभक्ति पूर्ण ट्वीट करने पर उनकी जांच करें?
या सचिन तेंदुलकर के विरूद्ध उनके
कार्यकर्ता उनकी आदमक़द कट आउट पर कालिख
पोत उनको अपशब्द कह उनकी निंदा और आलोचना करें?
केरल काँग्रेस के इस कुत्सित घटना को देख
मुझे भक्त प्रहलाद एवं हिरण्य कश्यप की कथा याद हो आई जिससे आप सभी भलीभाँति
परिचित होंगे। कैसे आसुरी मानसिकता और अपने विचार को थोपने के लिये दैत्यराज हिरण्य कश्यप ने भक्तपरायण अपने ही पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिये
होलिका की सहायता ली! कैसे ईश्वर भक्त प्रह्लाद को अग्नि छू भी न सकी और कैसे
होलिका स्वयं ही अग्नि मे जल कर भस्म हो गई!! ठीक इसी तरह सारे देश ने एक विडियो मे
देखा कि सचिन के आदम कद कट आउट पर लीटरों कालिख डालने के प्रयास करने वाले केरल
काँग्रेसी सदस्यों की एक बूंद कालिख उस कट आउट पर न टिक सकी अपितु इन
कार्यकर्ताओं की झक सफ़ेद लुंगियाँ जरूर
कालिख से काली हो गई। ये घटना इन
विक्षिप्त नेताओं को ये सख्त संदेश है कि देश की 130 करोड़ ईश्वर रूपी जनता की
क्रोधाग्नि इन छद्म नेताओं के शासन सत्ता
के मद मे चूर इनके अहंकार रूपी ताकत को
ठीक होलिका की तरह अग्नि मे भस्म कर देगी। सरकार की निर्दयी,
कुत्सित एवं तानाशाही सोच वाली अग्निपरीक्षा से देश की करोड़ो जनता की आँखों के
तारे, दुनियाँ के गौरव,
सम्मानीय लता मंगेशकर एवं सचिन तेंदुलकर
खरे सोने की भांति चमकदार सूर्य के
सदृश्य और निखरेंगे एवं उज्ज्वलित होंगे।
जिस व्यक्ति को देश और दुनियाँ के करोड़ो
क्रिकेट प्रेमी क्रिकेट की दुनियाँ का बेताज बादशाह मान भगवान की श्रेणी मे रख
पूजते है, खेद और अफसोस है कि
केरला और महाराष्ट्र के कुछ चाटुकार कोंग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपने आकाओं की
तलुओं के रसास्वादन करने वालों की सूची मे
जगह पाने के लिए सचिन के आदम कद चित्र के उपर कालिख पोतने विरूपित करने और नारे लगाने
का कायरता पूर्ण दुस्साहस किया है। उनकी इस क्रूर और कायरता पूर्ण कृत को सारा देश
न केवल उनकी निंदा और आलोचना कर रहा है बल्कि उन की छद्म और दिवालिया मानसिकता पर
बहुत बड़े सवाल भी कर रहा है?
अपनी लेखनी से उन दो दुष्टाओं और एक अवोध
बालिका का नाम लिखना भी हम लेखनी का अपमान समझते है जिन्होने किसान आंदोलन के
बहाने हमारे देश की सर्वभौमिकता को चुनौती दी एवं
हमारे अंदुरुनी मामले मे दखल देने का कुत्सित प्रयास किया। हम इनका नाम लिख
कर इन तीनों का महिमा मंडन भी नहीं करना
चाहते क्योंकि इन लोगो को हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत,
गौरवशाली परंपरा और प्राचीन भारतीय संस्कार
को जानने समझने के लिये कदाचित सात जन्म भी कम पढ़ें!!
विजय सहगल


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें