"स्व॰ श्री प्रणव मुखर्जी"
भारत के पूर्व राष्ट्रपति
श्री प्रणव मुखर्जी का आज दुःखद निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। उन्होने 25 जुलाई 2012 से 25 जुलाई
2017 तक देश के 13वे राष्ट्रपति के रूप मे कार्य किया। 26 जनवरी 2019 मे देश के सर्वोच्च
सम्मान "भारत रत्न" से सम्मानित किया गया था। उनको स्वतंत्र भारत के एक मृद व्यवहार कुशल राजनीतिज्ञ,
योग्य विद्वान, बुद्धिमान व्यक्तित्व के
धनी राष्ट्रपति के रूप मे याद किया जायेगा। पश्चिमी बंगाल के बीरभूमि जिले के एक छोटे
से कस्बे "किरनाहर" से दिल्ली तक की यात्रा उनकी मेहनत,
संघर्ष का ही परिणाम थी। उन्होने अपने राजनैतिक जीवन मे सरकार के विभिन्न मंत्रालय
के मंत्री पदों को सुशोभित किया और अंततः देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद आसीन हुए।
उनके निधन पर देश
के जाने माने राजनैतिक दलों के नेता,
गणमान्य नागरिक और अन्य अनेक प्रसिद्ध व्यक्तित्व
अपने आपको उनके साथ जोड़ कर उनके साथ विताए क्षणों,
उनके साथ के अपने अनुभवों और सुखद पलों का स्मरण कर उनको याद किया पर दुर्भाग्य से
मेरा ऐसा कोई निजी प्रत्यक्ष अनुभव,
संपर्क या यादगार पल उनसे नहीं रहा जिसे आज
स्मरण कर उल्लेख कर सकूँ। लेकिन एक साधारण नागरिक के नाते मेरा सौभाग्य रहा
कि सन् 2016 एवं 2017 मे राष्ट्रपति भवन के प्रांगढ़ मे फूलों की प्रदर्शनी के दर्शन हेतु भ्रमण कर सका।
अपने इस सौभाग्य को ही मै राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति से अपने आपको जुड़े
होने पर संतोष व्यक्त करता हूँ।
वर्तमान राष्ट्रपति,
प्रधानमंत्री एवं दूसरी तीसरी लाइन से लेकर
अन्य अनेक छोटे मोटे राजनैतिक श्रेष्ठी तक के लोग अपनी उपलब्धियों,
सिद्धियों, अनुभूतियों और सफलता से
अपने आप को महामहिम "प्रणव दा" से जोड़ कर उनको याद कर उन्हे अपनी भावांजलि अर्पित कर रहे हों पर एक बात तो निश्चित
है कि श्री प्रणव मुखर्जी ने ही अपने कार्यकाल मे राष्ट्रपति भवन के एक भाग मे म्यूजियम का निर्माण
करा आम नागरिकों को राष्ट्रपति भवन मे पूरे साल प्रवेश के लिये उपलब्ध करा एक अति उल्लेखनीय
और महत्व पूर्ण कार्य किया अन्यथा राष्ट्रपति भवन के दरबाजे मे प्रवेश साल मे मात्र
एक महीने के लिये ही बसंत ऋतु मे फरवरी से मार्च तक ही फूलों की प्रदर्शनी के दर्शन
के लिये ही साधारण नागरिकों के लिये उपलब्ध था।
देश के एक साधारण
नागरिक की हैसियत से मै माननीय श्री प्रणव
मुखर्जी द्वारा देश के लिये किये उनके महान कार्यों एवं अमूल्य योगदान के साथ ही आम
नागरिकों के लिये उक्त म्यूजियम का निर्माण
को मै महान उपलब्धि मानता हूँ। स्व॰ श्री प्रणव
मुखर्जी ऐसे बिरले राजनीतिज्ञ थे जो देश के आम नागरिकों के प्रति सोच,
सहजता और सरलता रखते हों। मै उनके निधन पर अपनी व्यक्तिगत वेदना,
श्रद्धा एवं सम्मान प्रकट कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। मै ईश्वर से उनके परिवार को इस गहन दुःख
को वहन करने की शक्ति हेतु भी प्रार्थना करता हूँ। उनका निधन समाज,
देश और दुनियाँ के लिये अपूर्णीय क्षति है।
ॐ शांति॰
विजय
सहगल

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