सोमवार, 20 जुलाई 2020

संपादक नवभारत टाइम्स न्यू दिल्ली को पत्र




टिप्पड़ी :-

दिनांक 16.07.2020 को नवभारत टाइम्स नई दिल्ली मे सम्पादकीय पृष्ठ  पर सुश्री नईशा हसन का लेख "खतरे की आहात है म्यूजियम को मस्जिद मे बदलना"। उक्त लेख मे लेखिका से असहमति रखते हुए उनकी भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था की टिप्पड़ी पर  मैंने संपादक महोदय "नव भारत टाइम्स, नई दिल्ली" को रीडर मेल के तहत अपने विचार प्रकाशनार्थ प्रेषित किए थे जिसे उन्होने आज दिनांक 21.07.2020 को नई दिल्ली के नवभारत टाइम्स मे पेज 08 पर रीडर्स-मेल के अंतर्गत मेरा मत भिन्नतात्मक संशोधित पत्र प्रकाशित किया गया है। मूल आलोचनात्मक पत्र नीचे अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।-विजय सहगल,     





श्रीमान संपादक                                                16.07.2020
नव भारत टाइम्स,
न्यू दिल्ली

महोदय,

16 जुलाई 2020 के अंक मे "हागिया सोफिया म्यूजियम" को मस्जिद मे बदलने का सुश्री नाइश हसन जी का लेख पढ़ा। "हागिया सोफिया" जो पहले एक चर्च था जिसे बाद मे मस्जिद मे परिवर्तित किया गया, तदुपरान्त इसे म्यूजियम मे परिवर्तित कर दिया गया। उन्होने बड़ी बेवाकी से  तुर्की सरकार के संकुंचित संप्रदायवादी सोच की आलोचना करते हुए धर्मनिरपेक्ष तुर्की के विचार का समर्थन किया।  पर खेद है लेख के अंत मे आते आते स्वयं भी उसी सांप्रदायिक सोच का शिकार हो गई, जिसमे उन्होने भारत के लोकतान्त्रिक स्वरूप पर सवाल कर उसको "राजसत्ता और धर्मसत्ता का गठजोड़ करार दिया"। सुप्रीम कोर्ट के बाबरी मस्जिद पर निर्णय को गठजोड़ का नमूना बताना आपकी इसी सोच को परलक्षित करता है।  ये जानते हुए भी कि लगभग एक शतक से चले आ रहे इस न्यायिक प्रकरण मे सुप्रीम कोर्ट की पाँच न्याधीशों की पीठ ने सर्वानुमती से इस फैसले को मंदिर के पक्ष मे सुनाया था जिसमे एक न्यायधीश माननीय श्री जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर भी थे। फैसले का मुख्य आधार आर्कियोलोजीकल सर्वे ऑफ इंडिया के प्रमुख श्री के॰के॰ मोहम्मद की वह रिपोर्ट थी जिसमे मस्जिद के नीचे के ढांचे को इस्लामिक नहीं माना गया था। भारतीय संसद द्वारा पारित एनआरसी कानून तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के अल्पसंख्यक नागरिकों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव और उत्पीढन पर आधारित है।  देश के किसी भी धर्म संप्रदाय से इसका दूर दूर तक कोई वास्ता ही नहीं है। काश तुर्की के धर्म आधारित चरित्र को उजागर करने के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश की इस्लामिक कट्टरवादी सोच के लोगो के विरुद्ध भी कुछ प्रकाश डालती तो सुश्री नाइश हसन जी की  विशाल एवं  प्रगतशील सोच मे चार   चाँद लगते।

विजय सहगल
नोएडा॰


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