समय आज तू है क्यों मौन.....?
समय आज तू है क्यों मौन?
तुझसे बड़ा अभागी कौन?
रक्षक ही रक्षक को मारे,
गाँव के लोग है भाग्य सहारे।
प्रजा तंत्र सोने की लंका,
घात विभीषण,
किसे पुकारे?
महलों के राज षडयंत्र मे,
मानव मूल्य है आधा पौन।
समय आज तू है क्यों मौन?
शासक रहे जो दशकों देश के,
अर्थ प्रधान हुई वो सत्ता।
लगा रहे है शत्रु,
देश मे,
देश भक्ति को चूना-कत्था॥
सरहद पर लड़ सके "अरि" से,
पर घर के "नाग भुजंगे" जौन?
समय आज तू है क्यों मौन?
"रीढ़" विखंडित राजनीति है,
जन रक्षक भी नीति विहीन।
दो पाटों के बीच पिस रहे,
जनगण के जो "जनाधीन"॥
रक्षक शस्त्र विहीन हो पिसते
शस्त्र सुसज्जित गुंडे बौन?
समय आज तू है क्यों मौन?
घटाटोप अँधियारा चहुंदिश,
आज पुनः दुःशासन आया।
हरणचीर दुर्योधन करते,
दंड कभी ने उसने पाया॥
वहशी लूट रहे जन मानस,
शासन भीष्म पितामह कौन?
समय आज तू है क्यों मौन?
घड़ी आगमन की फिर आये।
नभ मे छटा सुनहरी छाये॥
हे केशव! अब कर्म प्रधान हो
शास्त्र विहित समुचित निदान हो।
धर्म संस्थापनार्थ हो काया,
रूप अवतरित बूझे कौन?
समय आज तू है क्यों मौन?
विजय सहगल


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