सोमवार, 8 जून 2020

दिल्ली मे कोरोना के इलाज़ का भेदभाव

"दिल्ली मे कोरोना के इलाज़ का भेदभाव"




बधाई हो दिल्ली सल्तनत के बादशाह जिल्दे सुहानी, नूरे शाही, प्रवासी मजदूरों और गरीबों के मसीहा, श्री श्री एक हज़ार आठ महा माहिम श्री अरविंद केजरीबाल जी मुख्य मंत्री, दिल्ली सरकार तुम्हारे ठकुरसुहाती सचिवों ने तुम्हारे मनसा के अनुरूप दिल्ली मे कोरोना महामारी का इलाज़ दिल्ली के अस्पतालों मे सिर्फ और सिर्फ दिल्ली के रहने बालों का ही इलाज करने की सिफ़ारिश की है।
लोकतन्त्र का अपने अनुरूप उपयोग की चालाकी लोमड़ी को छोड़ अब कोई आप से सीखे। दिल्ली की आधिकारिक आबादी 1 करोड़ दस लाख के मात्र 6.8% लोगो की राय लेकर आपने कोरोना का इलाज दिल्ली के इतर न करने के संकल्प अपने अनुरूप पारित करवा कर एक सफल नाटक करने का प्रयास किया और इस तरह देश के अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को कोरोना के इलाज दिल्ली मे कराने से वंचित कर इसे लोकतन्त्र का अमलीजामा पहना दिया। तब श्रीमान केजरीबाल जी क्या लोकतन्त्र मे क्या 93.2% को नज़रअंदाज़ कर 6.8% लोगो के मत के साथ जाकर आप लोकतन्त्र का मज़ाक नहीं उढ़ा रहे?
यदि आज आप, अपने आप को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की पसंद के लिये लोगो का मत आमंत्रित करेंगे और 6.8% प्रतिशत से कहीं बहुत अधिक लोग आपकी इस स्वार्थपरक अमानवीय नीति के विरुद्ध आपको मुख्यमंत्री के पद पर बने रहना पसंद नहीं करेंगे!! तब क्या इस छद्म रायसुमारी पर आप अपने पद को तिलांजलि दे त्याग पत्र देंगे?? आपको दिल्ली की जनता ने पाँच वर्ष हेतु जनादेश दिया था आप इस तरह कदम-कदम, घड़ी-घड़ी लोगो का मत लेकर राज्य चलाने से बाज आयें? लोक हित मे मानव कल्याण के लिये राजा जनक की भांति कार्य करे। श्रीमान अपने आपको योग्य और चतुर समझना उचित और सरहनीय है पर देश के आम नागरिकों को अविवेकपूर्ण और मूर्ख समझना आपकी बुद्धिमत्ता पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है??
महोदय, आपने लॉक डाउन के पूर्व दिल्ली के प्रवासी मजदूरों और श्रमिकों को दिल्ली मे ही रहने के बड़े बड़े लोक लुभावन वादे किए थे। उनको दिल्ली मे रहने खाने-पीने, इलाज एवं चिकित्सकीय सुविधा देने के बड़ी बड़ी कसमें खाई थी। प्रत्येक दिन पाँच लाख लोगो को सुबह शाम भोजन आदि की गंगा जलि उठा शपथ ली थी? क्या हुआ उन सब कसमें वादों का?? देश के दूसरे दूर दराज़ के प्रांतों से आये जिन मजदूरों और श्रमिकों ने खून पसीने के श्रम से दिल्ली को आर्थिक रूप से सम्पन्न बना देश का ताज बनाया था और आपको मुख्यमंत्री के नाते दिल्ली के तख्ते ताउस पर बैठाया था उन प्रवासी श्रमिकों के प्रति आपने गिरगिट के रंग बदलने की गति से भी तेज अपने वादों का बदल कर आपने तो गिरगिट को भी शर्मिंदा कर दिया। वो तो अच्छा हुआ जो आपकी पूर्व नियोजित योजना का पूर्वाभास उन गरीब और स्वाभिमानी मजदूरों और श्रमिकों को होने के कारण देश के दूर दराज़ प्रांतो से आये उन अभागे प्रवासी मजदूरों को कोरोना महामारी के पीढ़ित होने के पूर्व ही अपने अपने गाँव जाने का निर्णय लेने के लिये प्रेरित कर दिया था अन्यथा जिन मजदूरों और मेहनतकशों को आपने दिल्ली मे ही रह कर रहने खाने-पीने, ठहरने और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी आपने उपर ली थी वे आज दिल्ली मे रह कर आपके इस दोमुंहे चाल-चरित्र को देख कर अपने भारतीय होने पर रो रहे होते और अपने भाग्य को कोस रहे होते की क्यों कर उन्होने आपके वादे पर भरोसा कर दिल्ली मे रुकने का निर्णय लिया??
हे! आर्यावर्ते, जंबूदीपे भारत, हम आज भारतीय होने के बाबजूद भी दिल्ली मे अभारतीय है और एक आम भारतीय नागरिक को मेडिकल चिकित्सा के अधिकारों से वंचित कर दिये गये है।
हमे नाज़ था अपने भारतीय होने हम सुनते आये थे कि साधन सम्पन्न लोग, जन सेवक आम नागरिकों के लिये धर्मशालाएँ बनवाते थे, प्याऊ खुलवाते थे और आम शहरियों के लिये अस्पताल खुलवाते थे। महोदय श्रीमान अरविंद केजरीवाल जी धन्य हो आप और आपके चाटुकार, चापलूस सचिव जिन्होने आपके कहे अनुसार मांगे गये सुझावों पर कोरोना महामारी का इलाज़ सिर्फ दिल्ली बालों के लिये ही आरक्षित करने की सिफ़ारिश की है। आप तो लोकतन्त्र के बहुत बड़े पक्षधर थे, माननीय अन्न हज़ारे के बहुत बड़े अनुयायीओं मे एक थे, पानी पी-पी कर भारत माता की जय का उद्घोष करते थे आज दिल्ली के तख्ते ताऊस के मद और पद के अहंकार मे आपने भारत माता को भुला दिया? कहाँ गई आपकी छद्म देशभक्ति? कहाँ गई आपकी झूठी, मिथ्या और नकली देश भक्ति?
पिछले कई दिनों से गरीब और आम नागरिकों के विडियो टीवी चैनलों पर दिखाये जा रहे है जिनमे अस्पतालों की चौखट पर कई मरीजों ने इलाज़ को तरसते हुए दम तोड़ दिया? आपने बड़ी बड़ी बाते टीवी पर कर उन अस्पतालों विरुद्ध पुलिस एफ़आईआर करने की सिफ़ारिश की क्योंकि उन अस्पतालों ने अपने दायित्व के निर्वहन अर्थात मरीजों का इलाज़ न कर उनके इलाज़ मे लापरवाही वरती और उनको झूठे कारणों से अस्पताल मे भर्ती होने तक से भी वंचित रखा यहाँ तक कि प्राथमिक उपचार से भी वंचित कर आम नागरिक के अधिकार से महरूम रखा जिनके कारण कई मरीजों की मृत्यु भी हो गई। हमे आपकी इस सख्त कार्यवाही करने पर गर्व था। आपने ऐसे क्रूर, अमानवीय, दुर्दांत धन पिपासु, लोभी अस्पतालों के विरुद्ध कार्यवाही के आदेश दिये हमे ये देख कर गर्व हुआ था। पर आज आपका वही दुर्दांत क्रूर अमानवीय चेहरा देख कर आप पर घिन आती है जब आप ये निर्देश देते है कि कोरोना महामारी का इलाज देश के किसी भी अन्य नागरिकों को छोड़ कर सिर्फ और सिर्फ दिल्ली के नागरिकों का ही किया जायेगा। श्रीमान कल तक आप इलाज़ न करने बाले अस्पतालों को दोषी ठहराते हुए आपराधिक कार्यवाही की धमकी दे रहे थे वो ही कार्यवाही कोरोना का इलाज़ दिल्ली के सिवाय देश के अन्य शहरी का न करने की नीति के तहत आपके और आपके शासन के विरुद्ध क्यों न आपराधिक कार्यवाही की जानी चाहिये??
आपको दिल्ली की सत्ता आपके दल को बहुमत के कारण दिल्ली का मुख्यमंत्री चुना गया था। स्वाभिक तौर पर मुख्यमंत्री के पूर्व आपमे एक सह्रदय, दयालु, देशभक्त, जागरूक मानव की कल्पना आम नागरिकों के मन मे रही होगी पर आज आपके इस नागरिकों के बीच भेद-भाव की नीति के कारण अपके ह्रदय मे अदायलुता, कठोरता, निर्दयता के भाव को देख आम जन दुःखी आक्रोशित, हताश और निराश है। देश की राजधानी दिल्ली के मुखिया होने के नाते नागरिकों के इलाज़ मे दिल्ली और गैर दिल्ली के भेदभाव की आपके इस तरह के पक्षपात पूर्ण कार्य-व्यवहार की अपेक्षा देश के लोगो ने कतई न की थी।
देश का इतिहास इस बात का गवाह है कि द्रौपदी के चीर हरण के लिये कौरव तो दोषी थे ही जूएँ मे द्रोपदी को दांव पर लगाने बाले धर्मराज युधिष्ठिर के साथ अन्य पांडव भी उतने ही दोषी थे लेकिन इतिहास ने इस अन्याय पर इससे भी ज्यादा पितामह भीष्म, द्रोण, धृतराष्ट्र, विदुर एवं उन वयोवृद्ध गुरुजनों को माना जो इस अन्याय पर मौन रहे।
उक्त परिदृश्य के दृष्टिगत मै अपने देश के सर्वोच्च पदासीन प्रथम गणमान्य महामहिम राष्ट्रपति महोदय से हाथ जोड़ कर करबद्ध निवेदन करता हूँ कि देश की राजधानी मे दिल्ली सरकार के आम नागरिकों के चिकित्सा पाने के मूलभूत अधिकार मे दिल्ली वासी और गैर दिल्ली वासी के भेदभाव पूर्ण नीति पर तुरंत रोक लगा उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही करें।
देश की सर्वोच्च न्याय पालिका मे पदस्थ सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश महोदय से विनम्र अनुरोध करूंगा कि देश मे आम नागरिकों के चिकित्सा पाने के मूलभूत अधिकारों के दिल्ली सरकार के दिल्ली वासी और गैर दिल्ली वासी के बीच के वैमनस्य पूर्ण नीति के विरुद्ध स्वतः संज्ञान ले कर कोरोना महामारी के भेदभाव पूर्ण इलाज़ के आदेश पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दें ताकि दिल्ली सहित देश के किसी भी नागरिक को इस कोरोना महामारी मे इलाज़ से वंचित न किया जा सके।
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार से भी आदर सहित अनुरोध कि अपनी कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग कर दिल्ली सरकार की इस अनीति के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करे।
एक आम नागरिक के नाते हमे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि विश्व की सर्वोत्तम लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत दिल्ली सरकर के कोरोना महामारी के इलाज़ से सिर्फ दिल्ली वासियों के अधिकार देने और देश के अन्य आम नागरिकों को इलाज़ से वंचित करने बाले भेद-भाव पूर्ण नीतियों/आदेशों पर तुरंत रोक लेगेगी।
विजय सहगल
(दिल्ली का गैर नागरिक लेकिन देश का एक "आम नागरिक")

1 टिप्पणी:

विजय सहगल ने कहा…

[6:50 PM, 6/8/2020] D K Shukla: बहुत शानदार, कोई व्यंग नहीं,सीधा कटाक्ष, लेखनी, विषय, सभी कुछ पर पूरी ईमानदारी से लिखा,हो सकता है ये अब अपनी खांसी के इलाज के लिए बैंगलोर भी ना जायें।
by D.K. SHUKLA ON WHATSAP