ओबीसी गृह पत्रिका "आधार"
मेरे बैंक(ओरिएंटल बैंक) की गृह पत्रिका "आधार" के मार्च 2020 के अंक मे मेरे दो संस्मरण इस पत्रिका मे प्रकाशित हुए। मुझे इस पत्रिका के इस विशेष अंक का हिस्सा होने मे जहाँ एक ओर अपार प्रसन्नता है वही दूसरी ओर इस बात का अत्यंत दुःख भी है कि सरकार की नीतियों के कारण जैसे हमारे बैंक "ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स" का नाम इतिहास के पन्नों मे खोने की मुढ़ेर पर है और धीरे धीरे इतिहास के काल के गाल मे समा जाने को सन्निहित है, उसी तरह बैंक की गृह पत्रिका "आधार" का मार्च 2020 का ये अंतिमतम अंक होगा। इसके बाद हम सभी की प्रिय पत्रिका जिसके माध्यम से बैंक परिवार मे घटित हर छोटी बड़ी घटना की सूचना सभी कार्यरत और सेवानिव्रत्त साथियों को मिल जाती थी। अब इस प्रिय पत्रिका "आधार" के देखने से हम हमेशा हमेशा के लिये वंचित हो जायेंगे। बैंक के साथ-साथ पत्रिका के इस विछोह को भी अब हमे सहन करना पड़ेगा, लेकिन हम सभी ओ॰बी॰ सीयन के दिलों मे बैंक एवं पत्रिका हमेशा जीवित रहेगी।





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