रविवार, 21 जून 2020

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार



"चीनी वस्तुओं का बहिस्कार"

 प्रिय वंधु,

आपके द्वारा प्रेषित विडियो देखा चीनी सामानों के बहिष्कार पर  सत्य (https://youtu.be/od-Rw8ltNQs)  चैनल के विचार सुने। उक्त विडियो मे गांधी जी द्वारा विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार के वैकल्पिक  रूप मे खादी के उपयोग बढ़ाने की बात की है।  उक्त प्रवाचक एक जगह 7.52 मिनिट पर कहता है कि 8146 सामान  चीन से आयात किये जाते है जिनमे 343 वस्तुओं का आयात आगे दस वर्ष भी बंद न होने का दावा किया है और इन्हे असंभव बताया है। इस प्रवाचक के ही अनुसार क्या संख्या की द्रष्टि से उन शेष 7803 वस्तुओं जो कुल आयात वस्तुओं का 95.78% होती है पर हमे विस्तार से विचार विमर्श कर चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के विचार का समर्थन नहीं करना चाहिये? मेरा मानना है कि इन 95.78% वस्तुओं मे यदि आधी भी जो देश के आम नागरिकों से सरोंकार रखती होंगी उनके उपयोग को समाप्त करने पर आम राय नहीं बनानी चाहिये? क्या चीनी एप्प को तुरंत ही हटा कर इसकी शुरुआत हम नहीं कर सकते? विद्धुत झालर, खिलौने, शो पीस, फटाके, जूते, पेन, चमड़े के सामान, घड़ियाँ जैसे हजारों आइटम है जिनके उपयोग को बड़ी आसानी से तुरंत ही बंद किया जा सकता है। विडियो मे  इन वस्तुओं के विकल्प की चिंता के विरुद्ध उक्त  सारी वस्तुओं के विकल्प भी आसानी से  देश मे उपलब्ध है। विडियो मे प्रवाचक चीन और चीनी वस्तुओं का प्रसंशक प्रतीत होता है। दूर क्यों जाये क्या हम प्रवाचक के विचारों के मानसिक खालीपन के विरुद्ध अभी इसी वक्त चीनी वस्तुओं  के बहिष्कार के विचार जी हाँ सिर्फ विचार को भी अपने मन मे लाने और पोषित करने की भावनाओं पर चिंतन मनन भी नहीं कर सकते? क्या हम अपनी स्थिति से गिर अपने वीर जवानों के बलिदान को भूल जाये? हमे ये नहीं  भूलना चाहिये कि 15 जून 2020 के बाद का चीन हमारे परिवार के भाइयों/बेटों का हत्यारा है और हत्यारों  से सम्बन्धों के विच्छेद मे विडियो का प्रवाचक चीन की आत्मप्रवंचना और देश की  लाचारी, हताश, निराशा को प्रकट करने बाले विचारों से ओतप्रोत प्रतीत होता है हमे इसके स्वराष्ट्र  प्रेमी, स्वाभिमानी और आत्मसम्मानी होने पर शंका और संदेश उत्पन्न होता है? 
  
मैं इस संदर्भ मे एक छोटा व्रतांत सांझा करना चाहूँगा एक बार एक जंगल मे बड़ी भयंकर आग लगी। जंगल के बड़े-बड़े शेर, भालू, रींछ आदि अन्य अनेक जंगली जानवर इस दावानल पर नियंत्रण असंभव मान हताश और निराशा का भाव लिये हाथ पर हाथ धरे बैठे थे (ठीक उक्त वीडियो के प्रवाचक की तरह जो चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को असंभव मन चल रहा है) जंगल मे लगी आग को एक नन्ही चिड़िया बार-बार तालाब से चोंच मे पानी भर आग पर डाल बुझाने का प्रयास कर रही थी।  उसके इस प्रयास पर वहाँ खड़े शेर, भालू, बंदर, हाथी जैसे बड़े पशु हँस  और मुस्करा कर उसका मखौल उड़ा कह रहे थे "ए नन्ही चिड़िया तेरे एक बूंद पानी से ये  जंगल की आग नहीं बुझने बाली? तू व्यर्थ ही अपने श्रम और समय को बेकार कर रही है। उस चिड़िया ने बहुत ही सुंदर जबाब हताशा निराशा फैलाने बाले उन बल और वैभव शाली जंगल के प्राणियों को कहा "हे महनुभावों मेरा एक बूंद पानी से आग का बुझाना वेशक एक छोटा प्रयास है पर जब इस "जंगल की आग" का इतिहास लिखा जायेगा तो मेरा नाम आग बुझाने बालों की सूची मे होगा न कि आग लगाने या  मौन खड़े आग का तमाशा देखने बालों मे।

पर अंग्रेज परस्त टाई बाले बाबूओं से  इस बात की उम्मीद करना व्यर्थ है पर जैसे कि कहावत है कि परोपकार की शुरुआत घर से होती है अतः इन चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कोई करे, न करे पर मेरा ये द्रढ़ निश्चय है कि मै किसी भी ऐसी वस्तु का उपयोग न करूं जो चीन मे निर्मित है। हो सकता है तमाम वस्तुओं का तिरिस्कार संभव न हो लेकिन 8146 वस्तुओं मे से कहीं किसी से इसकी शुरुआत तो हम आप कर ही सकते है और न हो तो कम से कम ऐसे विचार को तो हम मन मे ला ही सकते है?

विजय सहगल        

विजय सहगल        



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