मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

लॉक डाउन पार्ट-1


"लॉक डाउन पार्ट-1"





पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की ये सद्वाक्य आज के पूर्ण बंद (लॉक डाउन) की मौजूदा संकट की  परिस्थितियों का सामना करने के लिये एकदम सटीक है कि  "प्रसन्न रहने के दो ही उपाय  हैं, आवश्यकताएँ कम करें और परिस्थितियों से तालमेल बिठाएँ"। मेरा मानना है कि समय और परिस्थितियों का नियंत्रण किसी भी व्यक्ति के वश मे नहीं है। या तो आप परिस्थितियों से दुःखी हो पल-पल, तिल-तिल घुटते रहे या आचर्य जी की उक्ति के अनुरूप अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर अपने आपको उन परिश्थितियों के अनुरूप ढाले, हमने ऐसा ही किया। लॉक डाउन जैसी घटना "न भूतो न भविष्यति" न तो अब तक हुई और न भविष्य मे होगी। सारे विश्व मे एक साथ ऐसी आपदा का घटित होने उल्लेख नहीं मिलता। सरकार के  घर मे एकांत वास के निर्देश का शब्दशः पालन मैंने अपने 13वी मंजिल के अपने फ्लैट मे रह कर किया। समस्या तो गंभीर थी पर दिन भर के समय काल को खंडों मे बांटने से समस्या कुछ आसान हो गई। इन काल खंडों को आधुनिक तकनीकों से  अपने आपको जोड़ने से हर दिन को प्रसन्नता पूर्वक व्यतीत करने मे आसानी रही इन मे निम्न माध्यम मुख्यतः रहे:-

आकाशवाणी की विविध भारती एवं एफ़एम गोल्ड सेवा  

फ्लैट के बाहर प्रातः पौने छः बजे अपने नियमित समय पर उठ कर रेल के डिब्बे जितने लंबे गैलरी मे हमारा प्रातः भ्रमण शुरू हो जाता जो लगातार प्रातः 05.45 के लगभग शुरू होकर  7.20-30 तक जारी रहता। भ्रमण और सुरीले भजन के साथ साथ श्रवण अद्भुद होता, लगभग सवा घंटे के थकाऊ और मैराथन पद संचलन से उत्पन्न थकान विविध भारती एफ़एम बैंड (106.4) से  कभी भीमसेन जोशी, कभी पंडित जसराज और कभी जगजीत सिंह, हरिओम शरण और अनूप जलोटा के  भजन सुनकर तिरोहित हो जाती। इस भ्रमण मे हमारा साथी (100.1 पर) एफ़एम गोल्ड भी बीच बीच मे हो जाता।  इस संकट की घड़ी मे विविध भारती के कार्यक्रमों मे भी भारी फेर बदल किया गया। जो विविध भारती के दशकों से चली आ रही अपनी परंपरा से हटकर था। विविध भारती 5.52 बजे सुबह शुरू करने के बजाय आज कल 24x7 श्रोताओं की सेवा कर रही है। 24 घंटे की सेवा के कारण प्रातः विविध  भारती की चित परिचित विशेष  धुन गायब रहती। 6 बजे प्रातः के समाचार से 2-3 मिनिट पहले बजने बाली विस्मिल्ला खाँ की शहनाई भी इन दिनों सुनाई नही पड़ी। प्रातः 6 बजे, पाँच मिनिट के समाचारों का समय 10 मिनिट हो चुका है। समाचार देश और दुनियाँ मे फैल रही महामारी कोरोना कोविड19 के इर्द-गिर्द ही घूमते। आकाशवाणी के इन दोनों स्टेशन से नवीनतम समाचार देश और विश्व के लगातार मिलते रहते।   "वंदनबार" कार्यक्रम  कुछ दिन लॉक डाउन मे चला लेकिन इसमे रामचरित मानस के और जुड़ जाने से भक्तिमय कार्यक्रम के विस्तार से  और रौनक आ गई। जिसके बाद 23 मिनिट का बंदनबार बदस्तूर सुनने से मन को भारी सुकून मिलता। भूले बिसरे गीत का अंतराल थोड़ा कम जरूर हुआ पर कार्यक्रम की गहराई मे कही कोई कमी न हुई। इस दौरान कभी कभी 100.1 मीटर पर एआईआर का एफ़एम गोल्ड का भी श्रवण करते। एफ़एम गोल्ड भी काफी बदला बदला नज़र आया, या यूं कहे कि एफ़एम गोल्ड एक तरह से कोरोना कोविड-19 से पीढ़ित हो एकांतवास (कोरंटीन) मे चला गया। स्टाफ की कमी एवं अन्य नीतिगत निर्णयों के चलते इस का स्थान 24x7 एआईआर न्यूज़ ने ले लिया। इन रेडियो स्टेशन के नये रूप के श्रवण/दर्शन भी अच्छे लगे।

शाम को चाय पीने के बाद साढ़े पाँच-पौने छः बजे से विविध भारती के संग हमारी दूसरे सभा पुनः शुरु हो जाती। "शाम सिंदूरी" मे 60 के दशक से 70-80 के दशक तक के पुराने फिल्मी गीत बड़े मनभावन लगते। लगभग 30 से 45 मिनिट तक रेल के डिब्बे नुमा गलियारे मे चहल कदमी होती। नॉन स्टॉप बगैर श्रोताओं के नाम-उपनाम और पते सुने पुराने गाने हमे भ्रमण से उपजी थकान का अहसास भुला देते। यध्यपि मै विविध भारती का  चालीस साल से भी ज्यादा पुराना श्रोता हूँ पर  अनुगूंज कार्यक्रम इसी लॉक डाऊन मे सुना अच्छा लगा। एक दिन श्री उपेन्द्रनाथ अश्क का साक्षात्कर उनकी ही आवाज मे सुना मंत्र मुग्ध कर गया। श्री  मुक्ति बोध और महान कवि सुब्रमण्यम भारती का तमिल भाषा के स्वर्णिम योगदान पर आकाशवाणी के श्रेष्ठ जनों द्वारा तैयार कार्यक्रम बहुत  ही अच्छा लगे  जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है। इस पर आने बाला कार्यक्रम शाम 6.30 से 7.00 बजे तक  मार्केट मंत्रा भी सुनने मे अच्छा जानकारी देने बाला लगा।

 शाम 7बजे के समाचार के बाद "शाम सिंदूरी" कार्यक्रम जय माला के पूर्व तक जारी रहता। लगभग पैतालीस मिनिट गैलरी मे घूमने के बाद आराम के कुछ क्षण विताने हमारी बैठक बारहवी-तेरहवी मंजिल के मध्य की सीढ़ियों के चबूतरे पर जो सैक्टर 50 की मुख्य सड़क पर खुलती,  लगभग 1.30 घंटे की बैठक घर से लाई प्लास्टिक की कुर्सी पर होती। इस दौरान विविध भारती का श्रवण और सुदूर-दूर छत्तों पर खेलते बच्चों, आती जाती आवश्यक वस्तुओं की गाड़ी, यदा कदा सड़क पर दौड़ती कारें  और स्कूटर को आते जाते देख कर समय व्यतीत करता। कुछ दिन पूर्व तक सड़क के पार आईपीएस स्कूल और मानव रचना स्कूल जहां सैकड़ो बच्चों की चहल-पहल रहती थी पर आज बच्चों के बिना वीरान पड़े है।  इसी दौरान शाम 7.00 बजे के आस पास एक साथ सड़कों, गलियों की  लाइट जलने  से नोएडा रोशन हो जाता जो एक बहुत ही शानदार और मनोहारी द्रश्य प्रस्तुत करता। शाम 7 बजे के 5-10 मिनिट आगे पीछे  सुरक्षा एवं अन्य सरकारी ड्यूटि मे लगे कर्मियों को लाने, ले जाने  ब्लू लाइन की मेट्रो को देखना बचपन मे गाँव से गुजरती रेल और मालगाड़ी को गुजरते देखना और उन के डिब्बों को गिनना की  यादे ताजा कर देता। नियत समय पर मेट्रो को आते जाते देखने का लोभ संभरण मे एक भी  दिन की चूक नहीं हुई।  इसी दौरान जय माला मे कुँवर विक्रमजीत सिंह, किरण जुनेजा, कारगिल युद्ध के नायक  कैप्टन स्व॰ विवेक गुप्ता   के बारे मे जानना मेरे लिये नया अनुभव था। इसी लॉक डाऊन के दौरान एक बार एफ़एम रेडियो के दोनों स्टेशन मे से किसी पर जब आकाशवाणी केंद्र कठुआ, कोहिमा और श्री नगर के स्टाफ से बात चीत दिल को छू गई। कितनी कठिन परिस्थिति और कितने कम स्टाफ  के साथ आकाशवाणी केंद्र के स्टाफ बड़ी कर्मठता और समर्पण के भाव से अपने आकाशवाणी केंद्र से कार्यक्रमों को प्रसारित कर रहे थे। स्वर एक रंग अनेक मे पंडित श्री जसराज जी और पंडित आशकरन शर्मा जी की वार्ता अच्छी लगी। भारतीय संगीत के रगों से सरावोर "रसिकनी राधा पलना झूले" सुनकर  आनंद आ गया। सर्वोच्च वीरता के पदक से सम्मानित  स्वर्गीय कैपटिन विवेक गुप्ता की वीर गाथा आज के जयमाला कार्यक्रम के अंतर्गत बहुत ही हृदयस्पर्शी लगी देश के इस जांबाज सेना अधिकारी ने 29 साल की उम्र मे भारत माता की रक्षा के लिये अपना जीवन आहूत कर दिया। कारगिल युद्ध के इस बीर सपूत को हार्दिक नमन।

21 दिनों के इस लॉक डाउन मे आकाशवाणी के विविध भारती एवं एफ़एम गोल्ड के सभी स्टाफ सदस्यों का बड़ा योगदान रहा। आकाशवाणी के सभी अधिकारी कर्मचारी इस हेतु बधाई के पात्र है। एक-दो दिन पूर्व किस तकनीकी खराबी के चलते विविध भारती के प्रसारण केंद्र  से (शायद शाम को) से लगभग 10 मिनिट प्रसारण बंद रहा नहीं मालूम?? एक दिन सुबह  समाचार वाचन के दौरान पृष्ठभूमि से आने बाली "चीं-चीं" की आवाज बड़ी ही भद्दी लगी जो शायद उद्घोषणा कक्ष मे लगे दरबाजे से आ रही होगी। संबन्धित अधिकारियों को समाचार के दौरान इस भद्दी आवाज को बंद करने हेतु कार्यवाही अपेक्षित है।

टेलिविजन

यूं तो टेलिविजन आज के दौर का सबसे मुख्य साधन है जो मनोरंजन के साथ समाचारों के माध्यम से देश दुनियाँ की खबर देता है।  इस दौरान भरसक कोशिश रही कि टीवी के समाचार चैनलों पर राजनैतिक दलों और कुछ तथाकथित मूर्ख और पाखंडी, बेबकूफ और मंदबुद्धि राजनैतिक विश्लेषकों के बीच की कुत्तों जैसे संग्राम रूपी चर्चा, और मिस्टर खीश के प्राइम टाइम  का हिस्सा न बनू। इस दौरान डिस्कवरी, डिस्कवरी साइन्स, हिस्ट्री चैनल का भी उपयोग खूब किया। मैन वर्सिस वाइल्ड मे बेयर ग्रिल्ल्स की साहस और चुनौती से परिपूर्ण यात्रा सुखद रोमांच देने बाली लगतीं। (क्रमश:)


विजय सहगल 

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