रविवार, 19 अप्रैल 2020

शुभलग्न-पाणिग्रहण संस्कार

"शुभलग्न-पाणिग्रहण संस्कार"


(नोट- ये ब्लॉग इंडिया टूडे के आधार पर लिखा गया जिसका लिंक निम्न है। https://www.indiatoday.in/india/story/did-nothing-wrong-former-karnataka-cm-hd-kumaraswamy-defends-son-s-lockdown-wedding-1668198-2020-04-17 




श्री एचडी कुमार स्वामी पूर्व मुख्यमंत्री कर्नाटक ने 14 अप्रैल 2020 को बाबा साहिब भीम राव अंबेडकर की जयंती पर कितने सुंदर विचार व्यक्त किये। उन्होने कहा की बाबा साहिब अंबेडकर के इस विचार मे मेरा द्रढ़ विश्वास है कि  "सरकार को समाज के अंतिम व्यक्ति का ध्यान रखना होगा" उक्त विचार ने ही देश का एकीकरण कर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया। शिक्षा, ज्ञान, समानता, बंधुत्व, मानवता और धर्मनिरेपेक्षता ही अंबेडकर का दूसरा नाम है जिस के तहत ही देश शांति पूर्वक प्रगति के पथ पर ले जाने की आवश्यकता है।

कितने सुंदर और गरिमा पूर्ण विचार है। कुमार स्वामी जी आपकी  समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति आपकी वेदना और दर्द आपको देश के अन्य सत्तालोलुप, लालची, अनुसाशन हीन   राजनैतिक नेताओं से कितना अलग रखता है। कितनी दया आपके दिल मे इन वंचित लोगो के लिये है जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है।

17 अप्रैल 2020 को बड़ी सादगी और सरलता से सम्पन्न हुई आपके बेटे चिरंजीव निखिल एवं सौभाग्यकांक्षि रेवती के शुभ विवाह की बहुत बहुत बधाई। वर्तमान मे देश मे फैली कोरोना कोविड19 की महामारी के बीच इस शादी मे आपने 15 लाख लोगो की जगह घर के ही मात्र 70 लोगो को बुला जितनी सादगी, संयम, शुद्धता से इस शादी को समपन्न कर देश की 130 करोड़ जनता को अनुग्रहित किया जिसके लिये देश आपका लंबे काल तक ऋणी रहेगा। श्रीमान स्वामी आपके  इस आभार और कृतज्ञता के लिये देश मे आपका यशोगान, गुणगान, स्तुति और सराहना इतिहास मे स्वर्णिम अक्षरों मे लिखी जाएगी। देश बेशक "अशुभलग्न" के इस दौर मे विश्व मे फैली कोरोना विषाणु जनित महामारी के सबसे दुःखद  और कठिन दौर से गुजर रहा हो, चारों तरफ त्राहि त्राहि मची हो, क्या बूढ़े, क्या जवान, क्या बच्चे, इस महामारी की चपेट मे आकर कालकबलित हो रहे हों, समाज का अंतिम व्यक्ति भूख और निराशा से दुःखी अपने बच्चों को सूखी रोटी भी उपलब्ध न करा पा रहा हो तब भी इन अनगिनित अशुभ लग्नों, संकटों, विपत्तियों, आफ़तों, जोखिमों के बीच आपके कुलपुरोहित द्वारा आपके चिरंजीव के विवाह की  शुभलग्न निकाल विवाह सम्पन्न कराना काबिले तारीफ है। धन्य है आप और आपके कुलपुरोहित और उनके द्वारा निकाली गई शुभलग्न।

हम देश के 130 करोड़ नागरिक आपको ईश्वर द्वारा प्रदाय उदारता और कृपा से अभिभूत है कि उसने आपके परिवार मे समस्त संस्कार शुभ मुहूर्त मे सम्पन्न कराये फिर चाहे वो पुंसवन संस्कार हो, नामकरण संस्कार हो, अन्नप्रासन संस्कार हो, विध्यारम्भ संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार या फिर 17 अप्रैल 2020 का ये विवाह संस्कार। आपने बहुत ही अच्छा किया जो इस शुभलग्न मे अपने पुत्र का विवाह इतनी आडम्बरहीन रीतिरिवाज और सादगी से सम्पन्न कराया। यदि आप कोरोना कोविड19 महामारी की फुंसियों मे उलझे रहते तो कदाचित ही ये शुभलग्न फिर प्राप्त होता। आप बधाई के पात्र है कि आपने अपने आत्मज का  ब्याह शुभलग्न मे कर  एक पिता होने का कर्तव्य बड़े अनासक्त और निष्काम भाव से सम्पन्न कर भारत भूमि के हजारों साल से चले आ रहे  धृतराष्ट्र के पुत्र मोह के वर्चस्व को तोड़ एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। 

आप इस राष्ट्र के सबसे शक्तिशाली परिवार मे से एक है इस मे कोई भी अतिस्योक्ति न होगी। आप और आप के पिताश्री कई बार कर्नाटक राज्य के मुख्य मंत्री के साथ आपके पूज्य पिता श्री एचडी देवेगौड़ा को भी देश के प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त है। इतने बड़े राजनैतिक रसूख के बाबजूद आपकी सरलता और सहृद्यता देखो कि शुभलग्न मे पुत्र के विवाह समारोह की समस्त संवैधानिक अनुमतियाँ आपने प्राप्त की शायद ही कोई इतना शक्तिशाली परिवार हो जो इस तरह की कानूनी प्रिकरियओं  का पालन करता हो। धन्य है हम सभी, श्रीमान हम सभी देशवासी आपके ऋणी है और सादर प्रणाम करते है। विवाह समारोह मे घरातियों और बरातियों का मास्क न पहनने का आपका तर्क विचारणीय है। देश और राज्य के कानून के तहत  घर के बाहर चेहरे के मास्क की आवश्यकता के परे आपने चेहरे के मास्क का उपयोग इसलिए नहीं किया क्योंकि विश्व स्वास्थ संगठन का ऐसा कोई भी बाध्यकारी आदेश नहीं थे!! आप जैसे ज्ञानवन पूर्व मुख्यमंत्री से ऐसी ही अपेक्षा थी क्योंकि अक्ल बड़ी या भैंस के बीच निश्चित भैंस ही बड़ी होगी और  विश्व बड़ा या देश तो निश्चित ही विश्व ही बड़ा होगा!! आपकी तर्क शक्ति अकाट्य है। बड़े से बड़े कानूनविद आपके सामने बौने होकर नतमस्तक है क्योंकि "देश" के कानून के उपर "विश्व" के कानून के मत की आपकी  प्राथमिकता निर्विवादित है, इति सिद्धम।

उक्त सामाजिक समारोह मे सामाजिक सुरकक्षित दूरी न रखने के कानून की धज्जियां उड़ाने के  आरोपों का जितनी सफागोई और स्पष्टता से आपने खंडन किया वो विधि शास्त्र के विध्यार्थियों के लिये एक सुंदर सीखने योग्य उदाहरण है। कैसे आपने प्रमाण दिये कि प्रधानमंत्री के ताली और थाली बजाकर स्वास्थकर्मियों के प्रति सम्मान ज्ञापित करने मे कैसे लोग समूह मे  एकत्रित हो सामाजिक सुरकक्षित दूरी रखने मे नकामयाब रहे! आपने एक अन्य मिसाल मे कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा कोरोना के संदर्भ मे बुलाई मीटिंग मे जिसमे आप भी थे बताया कि शासन के अधिकारियों, पोलटिकल नेताओं, ने न मास्क लगाया न सुरकक्षित दूरी कायम रखी! एक अन्य द्रष्टांत मे आपने गरीब, वंचित लोगो द्वारा राशन की पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) दुकानों पर सुरकक्षित दूरी के कानून का मखौल उड़ाये जाने की बात कही! जब देश के आम जनों द्वारा, नौकरशाहों द्वारा, देश के निचले तबके के गरीबों द्वारा सुरकक्षित दूरी का पालन न कराया जा रहा हो तो देश के सर्वशक्तिमान परिवार को सुरकक्षित दूरी रखने को कैसे वाध्य किया जा सकता है। जय हो कुमार  स्वामी जी जय हो। आपके कुतर्क बड़े से बड़े न्यायविदों को भी लाजबाब कर देंगे! धन्य हो प्रभु!! धन्य हो!! लेकिन एक बात निश्चित है कि शुभलग्न से पोषित शक्ति से सम्पन्न कोरोना आपको छू भी नहीं सकता।

जिस परिवार मे देश को एक प्रधानमंत्री और कर्नाटक राज्य को  दो मुख्यमंत्री के कई कार्यकाल दिये हों उस परिवार के पूर्व मुख्यमंत्री से क्या किसी ज़िम्मेदारी क्रत की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिये?? क्या इस परिवार की देश के आम नागरिक से हट कर कुछ अतरिक्त जवाबदेही के रूप मे एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिये?? जब देश मे इस महामारी की बजह से मध्यम और निम्न परिवारों ने आर्थिक हानि उठाते हुए हजारों शादियाँ या तो स्थगित कर दी या सिर्फ नव दंपति के अतरिक्त परिवार के 4-5 सदस्यों की उपस्थिती मे शादियाँ सम्पन्न की गई, ऐसे ही किसी आदर्श मिसाल की आप और आपके परिवार से अपेक्षा की गई थी।  दुर्भाग्य से ऐसा कोई द्रष्टांत प्रस्तुत करने मे आप चूक गये। हाँ इस बात मे कोई शक नहीं देश के करोड़ो परिवार आपकी तरह इतने सौभाग्य शाली नहीं है जो शुभलग्न मे अपने हर संस्कार संपादित करते हों!! क्योंकि उन गरीब, विपन्न, समाज के आखिरी मुहाने पर खड़े वंचित, शोषित  व्यक्तियों, मजदूरों  और अभावों मे पले बड़े किसानों  का जन्म ही अशुभ लग्न मे होता है और उसी अशुभ घड़ियों मे सारा जीवन यापन कर जिनका  अंतिम संस्कार भी अशुभलग्न मे सम्पन्न हो जाता है। देश के सामान्य जन जहां एक ओर  चेहरे के मास्क को न लगाने, सुरक्षित  दूरी के पालन न करने और लॉक डाउन के पालन न करने  के चलते कितनी बार कभी मेढक बनने, कभी मुर्गा कभी कान पकड़ कर उठक बैठक लगाने, कभी अगबाड़े या कभी पिछ्बाड़े पुलिस के डंडे खाने को बाध्य और अपमानित होता है वही आप जैसे लोग  इस नपुंसक व्यवस्था/सरकार और उनके नौकरशाहों से वैधानिक  स्वीकृति प्राप्त कर उन्ही आम जनों पर थोपे कानून को तोड़ते है (कृपया वैधानिक अधिकार प्राप्त अधिकारी इसको स्वत: संज्ञान न ले)।   
  
श्रीमान जिस अंतिम व्यक्ति की चिंता आपने अपने ट्विट्टर अकाउंट मे डॉ॰ बाबा साहिब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल 2020 को की थी पर 17 अप्रैल 2020 को पुत्र के विवाह मे आपके व्यवहार और आचरण मे उस अंतिम व्यक्ति के लिये वो दुःख और वेदना देखने को दूर दूर तक नहीं मिली। ऐसा प्रतीत होता है बाबा साहिब की जयंती पर समाज के उस अंतिम व्यक्ति के प्रति आपकी संवेदना मात्र एक दिखावा था।

एक साधारण नागरिक की वेदना।

विजय सहगल             


           

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