गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

"जंगल की आग"


"जंगल की आग"


मैं एक व्हाट्स ऐप ग्रुप का सदस्य हूँ जिसे हमारे एक वरिष्ठ साथी श्री शर्मा जी बहुत ही सुचारु रूप से मैनेज करते हैं। ग्रुप मे इन दिनो हैल्थ इन्शुरेंस के ऊपर चर्चा चल रही थी। एक ओर  इन्शुरेंस प्रीमियम बहुत  ज्यादा है बही दूसरी ओर प्रीमियम के  ऊपर  GST 18% की मार उसको और भी महंगा कर रही है। कुछ सदस्यों की राय थी GST वरिष्ठ नागरिकों से न लिया जाय। राय अच्छी थी हमने भी सुझाव दिया की इस हेतु प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री को उनके टिवीटर अकाउंट पर ट्वीट कर GST न लगाने की  मांग की जाय, हमारे एक साथी  का सुझाव था उससे कोई फ़ायदा नही होगी यह महज एक परंपरा का निर्वहन मात्र होग। हमारे एक और साथी दिनेश महरोत्रा जी ने " नमो ऐप" पर अपनी बात प्रधान मंत्री को लिखने का सुझाव दिया जो की प्रधान मंत्री का आधिकारिक ऐप है। दूसरे अन्य लोगो ने उनके सुझाव का समर्थन किया पर कुछ लोगो ने ऐसे प्रयासों को निरर्थक बताया।  कहने का तात्पर्य यह है कि जब कोई समस्या या शिकायत या सुझाव  हो तो  हमे संबन्धित व्यक्ति या संस्था को लिखना चाहिये या नहीं इस की चर्चा हो रही थी। यध्यापि ये भी सत्य है कि 99% मामलों मे शिकायत या सुझाव पर कोई सुनता नही है (बैंन्को विशेषतया: OBC को छोड़ कर जहाँ तत्परता से सुनवाई होती हैं ) जैसा कि मेरे अन्य  मित्रों ने ग्रुप मे लिखा था। मेरा मानना है हमे अनासक्त भाव से अपना काम करना चाहिये जैसा कि श्रीमद्भगवत गीता के श्लोक मे लिखा है:-

कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषुकदाचन ।
माकर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि ।। (भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 47).

अभी दो दिन पूर्व मे शाम को घूमने निकला मैं प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन सैक्टर 50 के नीचे 1 नंबर गेट पर वैठा आने जाने वाहनों की भीड़ देख रहा था अचानक सड़क के पार एक बच्चे की चीखने की आवाज ज़ोर से सुनाई दी। एक व्यक्ति उसे प्लास्टिक के पाइप से पीठ रहा था। तमाम वाहन, लोग वहाँ से आ, जा  रहे थे। बच्चे की चीख सड़क के इस पार हमे साफ सुनाई दे रही थी। तुरंत  समझ नही आया क्या करें पर  अचानक मैं ज़ोर से चीख कर चिल्लाया "ए ए !!!!!!!!!!........" । आवाज सुनकर दूर वैठा व्यक्ति चौंका और इधर उधर देख कर मेरी तरफ देखा।  इसी वीच उसने बच्चे को मारना बंद कर दिया था। "हिंसा के विरुद्ध इस तरह आवाज देना"  का विज्ञापन काफी समय पूर्व दूरदर्शन पर दिखाया जाता रहा था जिसकी याद हमे सहसा इस घटना को देख कर चिल्ला कर  आवाज  देने के रूप मे आई । मैंने जाकर इस तरह पब्लिक प्लेस पर बच्चे को पीटने के विरुद्ध चेताया, यध्यपि अंदर ही अंदर मुझे डर लग रहा था कि कही प्रतिक्रिया स्वरूप वह मेरे साथ भी हिंसा न कर दे जो कि दिल्ली NCR की सांस्कृति है!!  
हाल ही की गुजरात मे उत्तरी भर्तियों के साथ हिंसा, मारपीट की गई। कुछ गुंडों द्वारा अचानक ही हजारों मजदूरों, गरीब परिवारों को गुजरात से घर वापस जाने को  मजबूर कर दिया जो  अपने जीवन यापन के लिये अपने घर से हजोरों किलो मीटर दूर गुजरात के शहरों मे मजदूरी करने आये थे। दुर्भाग्य देखिये गुजरात सरकार ने देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल के विधायक को इस मामले मे उत्तर भर्तियों के विरुद्ध लोगो को भड़काने बाले विडियो देखते हुए भी उसके विरुद्ध कार्यवाही नही की वही दूसरी ओर उस सबसे पुराने दल के नौजवान अध्यक्ष  ने भी उस विधायक के विरुद्ध कोई एक्शन नही लिया। इसे देश का दुर्भाग्य कहें या हम आम जनता की जागरूकता मे कमी कि सरकार और विपक्ष दोनों ही गुजरात मे हुई इस नृशंस घटना पर दुखी एवं चिन्तित है और दोनों ही अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आते है और एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे है। हमने अपने आक्रोश को गुजरात के मुख्यमंत्री को उनके ट्वीटर अकाउंट पर लिख कर किया। राहुल गांधी के ट्वीटर पर भी उनके विधायक द्वारा वाइरल विडियो के माध्यम से फैलाई जा रही हिंसा पर कार्यवाही करने को कहा। विवेक तिवारी हत्या कांड पर भी योगी आदित्यनाथ जी को कानून व्यवस्था के हालत पर ट्वीट कर लिखा। हमे मालूम है हमारे लिखने से इनमे से किसी एक पर भी कुछ फर्क पड़ा होगा।
 कुछ दिन पूर्व भी इस तरह की घटनायें हरियाणा मे घटित हुई थी जब एक जाति विशेष के लोगो ने हरियाणा मे  बुरी  तरह लूटपाट और आगजनी कर हाईजैक  कर लिया था और किसी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नही हुई। अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिये राजस्थान मे भी इस तरह की घटनाये हुई है जब एक जातिविशेष दुवारा महीनो जन जीवन को रोक कर व्यवस्था को अंगूठा दिखाया।  महाराष्ट्र मे भी ऐसी घटनायें आम हो गई है जब धार्मिक या भाषाई आधार पर छोटे-छोटे मजदूर, ऑटो ड्राईवर, रेहड़ी लगाने बाले यू. पी., एम. पी., बिहार, राजस्थान के गरीब लोगो पर अत्याचार कर उनके साथ मारपीट की गई  और उन्हे अपने गाँव जाने को मजबूर किया जाता रहा। कुछ साल पूर्व उत्तर भारत से गये हजारों बेरोजगार युवकों को लातों, डंडों, से वुरी तरह पीट कर उन परीक्षा केन्द्रों से भगाया गया था जब बे रोजगार की प्रवेश परीक्षा देने हेतु आये थे। महाराष्ट्र और गुजरात मे तथाकथित हिंदुवादी सेनाओं एवं वर्गविशेष जाति संगठनों  द्वारा जहाँ एक ओर अपने आप को क्रमशः हिन्दू हितैषी दल  और अनुसूचित जतियों  का हितैषी बताती  है बही दूसरी ओर  इन्ही वर्गो के लोगो के साथ मारपीट कर इन्हे डरा - धमका कर रोजगार से विस्थापित कर अपने दोगले चरित्र को दर्शाती है।  ऐसे व्यक्ति राजनैतिक लाभ और सत्ता के लिये किसी भी हद तक गिर सकते है और ऐसे दोमुहे व्यक्तियों को वड़े वड़े राजनैतिक दलों का संरक्षण मिला हुआ है जो इन प्रदेशों मे मजदूरी करने आये लोगो पर अत्याचार करते है। हमे ऐसे लोगो की निंदा और भर्त्स्ना करना चाहिये।
हमने  एक कहानी अखंड ज्योति मे पड़ी थी "एक बार जंगल मे बहुत तेज आग लगी, सभी जानवर अपने-अपने तरीके और शक्ति से आग पर काबू करने का प्रयास कर रहा था। एक छोटी चिड़िया भी बारबार अपनी चोंच मे पानी भर कर उड़ कर जाती और आग के उपर चोंच मे भरे पानी को आग पर डालती। तभी वहाँ खड़े हाथी ने उससे पूंछा नन्ही चिड़िया तेरी छोटी से चोंच मे भरे पानी से जंगल की आग कैसे बुझेगी?? चिड़िया ने हाथी को जबाब दिया "माननीय हाथी जी सभी अपनी शक्ति और क्षमता से आग बुझाने का प्रयास कर रहे है, यध्यापि जंगल की आग बड़ी विकराल है फिर भी  मैं भी अपनी शक्ति अनुसार आग बुझाने की कोशिस कर रही हूँ। ये मायने नही रखता कि किसका प्रयास बड़ा या किसका प्रयास छोटा था। मायने ये रखता है कि जब कभी "जंगल की आग" का इतिहास लिखा जायेगा मेरा नाम आग  बुझाने बालों मे लिखा जायेगा न कि मूक दर्शक बन जलती आग देखने बालों मे"।  
कहानी छोटी है पर संदेश बड़ा है कि देश की स्वतन्त्रता से पूर्व मुग़ल साम्राज्य से लेकर ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन तक, स्वतन्त्रता के पश्चात भारत विभाजन से लेकर धार्मिक, जातिगत, क्षेत्रीयबाद तक की  सभी घटनाओं मे जिससे  देश मे कटुता, वैमनस्य, दंगे लड़ाई आदि फैली इस देश  का "बुद्धिजीवी वर्ग मौन" क्यों रहा ????

विजय सहगल


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