मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

प्रगतिशील कानून






"प्रगतिशील कानून "



महाराज की जय हो।
क्या खबर लाये हो सेवक, राजा ने मंत्री दरबारी से पूंछा।
पर्यावरण की रक्षा हेतु नया कानून राज्य मे लागू करने जा रहे है,   महाराज! सेवक बोला।
"आम आदमी या निरपराधी को सजा न मिले इस का तो पूरा ध्यान रखा गया है कानून मे, जैसा मैंने सुझाव दिया था"।  महाराज बोले।
जी हाँ महाराज मंत्रियों ने अतिसय विचार-विमर्श के बाद कानून बनाया है, "प्रगतशील कानून है" महाराज जनता स्वस्थ और सुखी होकर आप की जय जय कार करेंगी।
फिर भी कानून के कुछ विशेष फीचर बतलाओ, महाराज बोले!!
दरबारी मंत्री ने कहा- महाराज!! आज से राज्य मे पोलिथीन के कैरि बैग पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया।  इसके इस्तेमाल से वातावरण मे प्रदूषण बहुत फैलता था  जो अब समाप्त हो जायेगा। अब से  इसके इस्तेमाल करने बालों, खरीद-विक्री करने बालों और बनाने बालों पर  कड़ा दंड-जुर्माना लगाया जायेगा, पुलिस उन्हे गिरफ्तार करेगी और आवश्यकता पड़ने पर  उन्हे जेल मे भी डाल देंगी,  महाराज!!
राजा ने एक आशंका जताते हुए मंत्री से सवाल किया? पोलिथीन का इस्तेमाल करने बाले राज्य मे कितने लोग है, और कितने लोग इस पोलिथीन  के क्रय विक्रय के व्यापार मे लगे है तथा कितने उद्धोयोगपति राज्य मे पोलिथीन  के निर्माण  मे कार्यरत है ??
मंत्री ने विस्तार पूर्वक बताया राज्य की लगभग सारी जनता जो आवादी के हिसाब से लगभग 10 लाख होगी  इस का इस्तेमाल कर वातावरण को प्रदूषित करती है, और लगभग 1000-1100 से व्यापारी इस के क्रय विक्रय के कारोबार से जुड़े है जो वातावरण को प्रदूषित कर अपना व्यापार करते है, जहां तक इसके निर्माण की बात है बमुश्किल 5-7 कारखानो मे इस का निर्माण होता है, भले लोग है जनता की आवश्यकताओं की पूर्ति कर शासन को आर्थिक रूप से सुद्र्ढ करते है।  
राजा ने सुझाव देते हुए कहा "तब क्यों न पोलिथीन के निर्माण मे रत व्यक्तियों, करखानों   से पोलिथीन के प्रदूषण पर   बात कर पोलिथीन का  निर्माण बंद करा दिया जाय तब "न रहेगा बाँस न बजेगी बांसुरी"। न बनेगी पोलिथीन कैरि बैग न इस्तेमाल करेगी जनता और न ही होगा व्यापार।    कानून बनाने-लागू करने, जुर्माना, जेल, पुलिस कार्यवाही  आदि की आवश्यकता पड़ेगी न राज्य के संसाधन को इसके लागू करने पर होने बाला व्यय करना पड़ेगा। राज्य की आम जनता को भी अनावश्यक रूप से पोलिथीन के  इस्तेमाल करने पर गिरफ्तारी-जुर्माना, पुलिस आदि के झंझटों से मुक्ति मिलेगी। जनता खुशहाल होगी और हम एक आदर्श राज्य के रूप मे जाने जायेंगे!!  
यह सुनते ही मंत्री मण्डल मे सन्नाटा छा गया। अब उनका क्या होगा, रागदरबारी गा रहे उनके मातहतों का क्या होगा।   सब एक-दूसरे का मुह ताकने लगे किन्तु महामंत्री जो राज्य के शाषन मे काफी पुराने व अनुभवी थे। बोले महाराज!! राज्य के आर्थिक विकास मे "प्रगतिशील कानून" बनाना राज्य का दायित्व है जिससे राज्य के साथ-साथ  जनता  का विकास भी होगा। इस हेतु मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ जो प्रगतिशील कानून पर पूर्ण प्रकाश डालेगी।
बहुत पुरानी बात है एक देश मे एक   xxxx नाम (यहाँ जो भी भ्रष्टतं व्यवस्था, मंत्री, राजा, या व्यक्ति जिसे आप जानते है उसका नाम लिख/पढ़ ले) का  राजा था। उसके राज्य मे हमेशा कोई भी योजना, कानून, नियम आदि आम जनता के  हित और उससे जुड़े "प्रगतिशील कानून" को गहन सोच-विचार कर बनाया या लागू किया जाता था। ऐसे ही एक बार राज्य की सड़कों मे भारी वारिश के कारण बड़े बड़े गड्ढे हो गए। जनता को आने जाने मे भारी असुविधा एवं कठिनाईयों   का सामना करना पड़ रहा था। रोज आम जनता दुर्घटनाओं के कारण चोट और लहूलुहान  का शिकार हो रही थी। आम जनता ने सड़क के गड्ढों की समस्या के समाधान हेतु राजा को निवेदन किया। राजा ने मंत्रियों को गड्ढों को भरकर समस्या के समाधान हेतु आदेश दिया। मंत्रियों ने मीटिंग कर समस्या के समाधान हेतु  गहन विचार किया और निर्णय लिया कि सर्वजन सुखाय - सर्वजन हिताय को मद्देनज़र सड़क के गड्ढों को नहीं  भरा जाय, क्योंकि ऐसा करने पर किसी एक व्यक्ति या ठेकेदार को लाभ होगा। अतः सभी जनो के हित के लिये सभी आम जनता को, उनके परिवार और बच्चों को एक-एक रज़ाई (रुई का लिहाफ) दे दी जाय। उनको सख्त  हिदायत दी जाय कि जब भी जनता  अपने घर से बाहर निकले तो रज़ाई ओढ  कर निकले  ताकि गड्ढों मे गिरने आदि  से उन्हे कोई चोट न लगे और न ही आमजन दुर्घटनाओं के शिकार होंगे। इस गहन और विचारणीय कानून को दरबारियों ने  "प्रगतशील कानून" कहा। सभी दरबारियों ने  समूहिक तौर पर  ज़ोर ज़ोर से महाराज की जयकारे किए !!
 मंत्री मण्डल की राय थी कि शासन कि पूंछ-परख तभी होगी जब  ऐसे कानून बने  जो कुछ फ़ैक्टरी निर्माताओं   या कुछ सैकड़ा व्यापारीयों पर ही न लागू बल्कि सम्पूर्ण  आम जनता पर भी लागू हो ताकि बेशक समस्या का समाधान न हो परंतु शासन-प्रशासन की पूंछ-परख हर स्तर पर हो अतः पोलिथीन पर प्रतिबंध लगाने का  "प्रगतिशील कानून" मंत्री मण्डल की सिफ़ारिश पर राज्य मे लागू कर दिया गया। आप को जान कर प्रस्न्न्ता होगी इस "प्रगतिशील कानून" के बाद  पोलिथीन का उपयोग पूरी तरह समाप्त हो गया और किसी  भी व्यक्ति, व्यापारी, निर्माता के विरुद्ध इस कानून के अंतर्गत कभी कोई कार्यवाही करने की नौबत आई। जनता सुखी है और महाराज की जय जय कार कार रही है।  "प्रगतिशील कानून" को बहुत से इतिहासकार "राग दरबारी" या "अंधेर नागरी" के रूप मे भी उल्लेख करते है।
प्रगतिशील कानून की जय हो!!

विजय सहगल

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