शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

दोहरे नक़ाब

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-:दोहरे नकाब:-
कल टी॰ वी॰ पर एक समाचार देखा, देख कर काफी निराशा और महाराष्ट्र सरकार के प्रति बहुत  क्रोध और क्षोभ हुआ।  उक्त समाचार मे एक राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता एक उत्तर भारतीय परिवार के पुरुष एवं महिला सदस्यों  को बहुत बुरी तरह पीट रहे थे और अंधेरी मुंबई स्थित उनके आवास को खाली  कर अपने गृह नगर बिहार जाने के लिये धमका रहे थे। उनका कसूर मात्र ये था कि ये  लोग अपनी आजीविका के लिये सिद्ध विनायक मंदिर के पीछे खाने पीने की रेहड़ी लगा कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। आखिर महाराष्ट्र सरकार का पुलिस/प्रशासन ने दिन-दहाड़े हुए हुई इस मारपीट की घटना पर इन राजनैतिक गुंडों के विरुद्ध  क्यों कोई कार्यवाही नही की? पूर्व मे भी ये तथाकथित  हिन्दू सेना सेवक मुंबई मे इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके है।
हमे जून 2018 मे  अमरनाथ यात्रा के दौरान ये देख कर सुखद आश्चर्य हुआ था, जब जम्मू कश्मीर के  पहलगाम, अनंतनाग जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्रों मे  दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के बहादुर सेवादार हमारे बहादुर सेना के सैनिकों के सुरक्षा घेरे मे आतंकियों को चुनौती देते हुए  लंगर लगा कर अमरनाथ यात्रा के यात्रियो को नि:शुल्क भोजन प्रसाद खिला रहे थे या  ये उत्तर भारतीय जो सुदूर उत्तर प्रदेश और बिहार से आकार अमरनाथ यात्रा के समय सुबह 5-6 बजे अपनी जान जोखिम मे डाल कर यात्रियों को रेहड़ी लगा कर चाय नाश्ता आदि खिला कर धर्म और देश की सेवा कर सच्ची देशभक्ति का परिचय दे रहे थे,  बहीं महाराष्ट्र के ये राजनैतिक समाज विरोधी तत्व सिर्फ इन निरीह गरीब और कमजोर वर्ग के उत्तर भारतियों लोगो के विरुद्ध तोड़-फोड़ करने या मारपीट करने मे  ही अपनी ताकत दिखाते हैं। इनकी मर्दानगी दाऊद इब्राहिम और उनके गुर्गों या उन जैसे लोगो के विरुद्ध इस तरह की कार्यवाही करने मे काफ़ूर हो जाती है जो इनकी नाक के नीचे आतंक का राज्य चलाते हैं। महाराष्ट्र जब मुंबई हमले से जूझ रहा था सारा देश मुंबई के साथ खड़ा होकर आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ रहा था तब ये कायर  तथाकथित राजनैतिक सेना के लोग दुवक कर  अपने बिलों मे छुप हुए थे। इन राजनैतिक गुंडों और आतंकवादियों मे कोई फर्क नही है।
हमारे देश का दुर्भाग्य है हजारों साल पहले से अब तक  हम विदेशी आक्रांताओं से या आज के दोगले धर्म के ठेकेदारों से  सदा इसलिये हारे और सताये गये  क्योंकि हम धार्मिक रूप से तो एक थे परंतु  महाराष्ट्र, गुजरात और देश के अन्य जगहों पर  इसी तरह के दोगले चरित्र के राजनैतिक  लोगो द्वारा  अपने निजी स्वार्थ के कारण भाषायी क्षेत्रीयता और  जातीयता  के आधार पर अपने लोगो को ही मारते  या सताते रहे। किसी शायर ने बहुत सुंदर लाइन इस प्रसंग पर कही हैं: -
"मुझे अपनों ने मारा, गैरों मे कहाँ दम था ।
मेरी  कश्ती बहाँ डूबी, जहाँ पानी बहुत कम था"।।  

हम न केवल महाराष्ट्र के लोगो से बल्कि देश के अन्य सभी लोगो से अपील करते है कि वे इस क्षेत्रीयता और भाषाई आधार पर मुंबई के कुछ देशद्रोही राजनैतिक व्यक्तियों द्वारा की गई हिंसा के विरुद्ध अपनी आवाज उठाये और महाराष्ट्र सरकार से अपील करे कि इन असामाजिक तत्वों के विरुद्ध शीघ्र और सख्त कार्यवाही करे।  
विजय सहगल, नोएडा॰ 

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