रविवार, 8 दिसंबर 2024

"21वीं शताब्दी की भारतीय रेल"

"21वीं शताब्दी की भारतीय रेल"






पिछले दिनों पारवारिक कार्यकर्मों के चलते पिछले दो रविवार, सोश्ल मीडिया से अवकाश पर रहा।  पर इसी दौरान  रेल विभाग के एक सुखद अनुभव से आश्चर्य चकित और अभिभूत था, जिसे मै आप सभी के साथ सांझा करना चाहूँगा।  यूं तो रेल से देश के आम आदमी का संबंध आवागमन की दृष्टि से बड़ा गहन है और इसके बिना गमनागमन की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन स्वतन्त्रता के बाद से रेल सेवाओं का  ढर्रा एक तय लाल फीताशाही के रास्ते पर अनेक वर्षों तक चलता रहा। यात्री सेवाओं के मामले मे रेल विभाग के  रवैये को    दशकों तक यात्री सुविधाओं की दृष्टि से एक आदर्श पैमाने से अच्छा नहीं कहा जा सकता था। रेल आरक्षण मे आरक्षण और दलाली, टिकिट विंडो पर ज्यादा पैसे की बसूली आदि  से देश का आम नागरिक भलीभाँति परिचित है।  इन कड़वे अनुभवों के बारे मे मैंने अपने ब्लॉग हीराकुंड एक्स्प्रेस (https://sahgalvk.blogspot.com/2018/11/blog-post_15.html ) दिनांक 15 नवंबर 2018  और 30 मई 2020 को ब्लॉग शताब्दी एक्स्प्रेस (https://sahgalvk.blogspot.com/2020/05/blog-post_30.html) तथा ब्लॉग माल गाड़ी (https://sahgalvk.blogspot.com/2018/09/blog-post_44.html) दिनांक 28 सितंबर 2018 मे उल्लेख किया था। इस बात को स्वीकार करने मे कोई परिहेज नहीं कि पिछले एक दशक से रेल सेवाओं मे सकारात्मक बदलाब देखने को मिले। रेल सेवाओं मे उन्नति के साथ तकनीकि और गतिमान, वंदे भारत एक्स्प्रेस, तेजस, हमसफर जैसी नई और आधुनिक सुख सुविधाओं वाली रेल गाड़ियों देखने को मिली।

दिनांक 25 नवम्बर 2024 की अल सुबह लगभग 2.45  बजे, मै अपने हैदराबाद के मित्रो को 12723 तेलंगाना एक्ष्क्प्रेस  लेने के लिए ग्वालियर स्टेशन पहुंचा तो इस सर्द सुबह मे गाड़ी सही समय से प्लेट फ़ोर्म संख्या दो पर आने वाली थी। जैसे ही मै प्लेट फ़ोर्म नंबर एक पर पहुंचा तो देख कर चिंतित था कि प्लेट फ़ोर्म  एक से प्लेटफ़ोर्म नंबर दो पर को जोड़ने वाले  पहाड़ जैसे ऊंचे पुल पर चढ़ने वाली यांत्रिक सीढ़ियाँ (एस्क्लेटर) और लिफ्ट दोनों ही बंद थी। रेल स्टेशन की ऊंची ऊंची सीढ़ियो पर जैसे तैसे मै  चढ़ तो गया लेकिन मै हैदराबाद से आ रहे 83 बर्षीय  मेरे साथी श्री नारायण राव के लिए चिंतित था कि कैसे वे ऊंचे पुल की सीढ़ियों से उतरेंगे? मैंने तुरंत ही रेल मंत्री के ट्वीटर एकाउंट पर ट्वीट कर एस्क्लेटर न चलने की शिकायत की। गाड़ी प्लेटफ़ोर्म पर आ रही थी कि अचानक एक फोन काल आया और शिकायत के बारे मे विस्तृत जानकारी मांगी। मैंने प्लेटफ़ोर्म संख्या एक की लिफ्ट और एस्क्लेटर न चलने की शिकायत को दोहराया। अब तक ट्रेन आ चुकी थी और हम अपने चारों मेहमानों के साथ प्लेटफ़ोर्म नंबर 2 की लिफ्ट की ओर बढ़ रहे थे जो सौभाग्य से प्लेटफॉर्म संख्या दो की लिफ्ट ठीक थी। जैसे ही हम लोग प्लेटफ़ोर्म 2 की लिफ्ट से रेल ब्रिज पर चढ़े पुनः रेल विभाग के श्री हर्ष का फोन आ गया। उन्होने माफी मांगते हुए बतलाया कि लिफ्ट कल 6 बजे से खराब है और जिसकी सूचना विभाग के उच्च अधिकारियों को हैं। मैंने हैरानी जताते हुए उनसे अपनी अप्रसन्नता प्रकट की। उन्होने व्हील चेयर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया लेकिन हम लोग तो रेल पैदल पुल पर थे और व्हील चेयर प्लेटफ़ोर्म एक की लिफ्ट बंद होने के कारण अनुपयोगी थी। अब तक  रेल मदद और रेल मंत्रालय के ट्वीटर पर शिकायत ने अपना प्रभाव दिखलाना शुरू कर दिया था। प्लेटफ़ोर्म एक का एस्कलेटर चालू होकर नीचे से ऊपर यात्रियों को ला रहा था।   अब अंतिम प्रस्ताव के रूप मे रेल विभाग के अधिकारी ने रेल पुल से उतरने का जो प्रस्ताव दिया, जिसे सुन कर मै आश्चर्यचकित था। उस अधिकारी ने कहा कि आपके 83 वर्षीय साथी को पुल से नीचे उतारने के लिए एस्कलेटर को कुछ मिनटों के लिये  उल्टी दिशा मे चला कर मै आपकी सहायता कर सकता हूँ।

अब क्या था "अंधे को क्या चाहिये? दो आंखे"!! मैंने अधिकारी के फोन पर मिले इस प्रस्ताव को तुरंत अपनी सहमति दे दी। अब  हम सभी साथी पुल के ऊपरी सिरे पर खड़े होकर एस्कलेटर का विपरीत दिशा अर्थात ऊपर से नीचे की दिशा मे चलने का इंतज़ार करने लगे। अचानक एस्कलेटर जो अब तक नीचे से ऊपर की दिशा मे चल रहा था, रुका और टों-टों के दो तीन आवाज करने के बाद ऊपर से नीचे की ओर चलने लगा। मै देख कर बहुत खुश हुआ और एस्कलेटर की सीढ़ियों पर सवार होकर अपने साथी राव साहब के साथ पांचों मित्रों के साथ नीचे आ गया।

रेल विभाग के इस सुखद शिकायत समाधान मेरे लिये किसी दोहरे  आश्चर्य से कम न था। पहला तो, हो सकता है आप मे से बहुत से लोग जानते हों कि एस्कलेटर को उल्टा भी चलाया जा सकता है, लेकिन मुझे  ऐसी जानकारी  नहीं थी  कि ऐसा भी संभव है? दूसरा रेल विभाग द्वारा बमुश्किल 15 मिनिट मे एक साधारण यात्री की शिकायत का इतना सुखद और प्रशंसनीय समाधान रेल विभाग देगा मुझे दूर-दूर तक उम्मीद न थी। रेल बिभाग की यह घटना प्रमाणित  करने के लिये काफी है कि 21वी सदी की नया भारत बदला हुआ भारत है।

यात्रियों की शिकायत को तत्परता से समाधान हेतु धन्यवाद रेल मंत्रालय !!, धन्यवाद रेल मदद !! धन्यवाद संबन्धित अधिकारीगण !!         

विजय सहगल