"जनादेश 2024
- खटाखट, खटाखट!!"
इस
बार के संसदीय चुनाव 2024 अपने आप मे विशेष रहा। 543 सीटों की क्षमता वाली लोकसभा मे 234 सीटें जीतने वाला कॉंग्रेसी इंडि गठबंधन, ऐसे
प्रचारित और प्रसारित कर रहा है मानों उसने चुनाव जीत लिया हो और 293 सीटें जीतने
के बावजूद एनडीए गठबंधन को ऐसे प्रस्तुत
कर भ्रमित किया रहा हैं मानों मोदी का गठबंधन ने चुनाव 2024 मे कॉंग्रेस के सामने
घुटने टेक दिये हों? जिस
कॉंग्रेस को मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल, त्रिपुरा अर्थात छह राज्यों मे एक भी सीट न मिली हों और पश्चिमी
बंगाल, ओड़ीशा और गुजरात मे मात्र एक-एक सीट मिली हो, वह 2024 के चुनावी जनादेश को एनडीए और नरेंद्र मोदी के खिलाफ बता रही
है!! जब वोटों का प्रतिशत और बहुमत की सीटें एनडीए के पक्ष मे है तो फिर जनादेश की
कोंग्रेसी परिभाषा का पैमाना हास्यास्पद और तर्कहीन ही माना जाएगा। जैसा कि अंदेशा था कि चुनावी हार का ठीकरा इंडि
गठबंधन ईवीएम वोटिंग मशीन पर फोड़ेगा पर चुनावी नतीजों ने ईवीएम की लाज़ रख ली और
वोटिंग मशीन पर लाक्षन लगाने की इंडि गठबंधन के सारे मंसूबे,
इरादे और साजिशें धरी की धरी रह गयी। एक
बार पुनः सिद्ध हो गया कि भारत का लोकतन्त्र दुनियाँ मे सबसे मजबूत हैं और चुनाव
आयोग की निष्पक्षता पर इंडि गठबंधन द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और निरर्थक हैं।
आइये
अब अपने शीर्ष विषय पर आते हैं। गुरुवार, 11 अप्रैल 2024 को राहुल गांधी ने बीकानेर
की एक चुनावी रैली मे गरीबी दूर करने का
एक नया फार्मूला पेश किया जिससे एक ही झटके मे हिंदुस्तान की गरीबी को मिटाना संभव
होगा। उन्होने कहा गरीबी रेखा के नीचे के हर परिवार की एक महिला के खाते मे एक लाख
रुपए आयेगा जो हर महीने 8500 रुपए के हिसाब से खटाखट, खटाखट
उनको मिलेगा। 8500 रुपए प्रतिमाह से साल मे एक लाख की जगह 102000 रुपए बनते हैं!! राहुल
गांधी के कथानुसार, इस तरह कॉंग्रेस 8500 रुपए की दर से सरकारी
खजाने से 102000 रुपए बसूल कर, महिलाओं को सिर्फ साल मे एक लाख
रुपए देगी अर्थात 2000 का प्रति परिवार का घोटाला?? राहुल गांधी की इस खटाखट योजना मे 2000 रुपए की हेराफेरी का यदि
विश्लेषण करें तो फरवरी 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत मे इस समय 26 से 30 लाख
के बीच गरीबी रेखा के नीचे के परिवार हैं। मैं अपने अंक गणितीय हिसाब से अनेकों
बार गुणा भाग कर, इस नतीजे पर पहुंचा कि या तो माननीय राहुल
गांधी का गणितीय ज्ञान कमजोर है अन्यथा इस योजना मे 2000 रुपए प्रति परिवार के हिसाब से 30 लाख
परिवार को मिलने वाली कुल रकम मे 6 अरब रुपए का घोटाला संभव था और पाँच साल मे इस
खटाखट योजना मे 30 अरब रुपए की गड़बड़ी हो जाती। वह तो भला हो देश के मतदाताओं का
जिसने अपना जनादेश देकर इस संभावित घोटाले
बाज योजना मे घोटाला होने से बचा लिया। निश्चित
ही 30 अरब रुपए के इस संभावित घोटाले ने राजीव गांधी के एक रुपए मे सिर्फ 15 पैसे
ही हितग्राही तक पहुँचने और 85 पैसे का बिचौलियों द्वारा घोटाले कर हजम करने की याद ताज़ा करा दी।
गरीब
महिलाओं को प्रति वर्ष एक लाख रुपए, 25 लाख का इन्शुरेंस, पहली नौकरी पक्की जैसी राहुल गांधी की गारंटियों रूपी लोभ लालच को नज़रअंदाज़ कर लोगो ने एनडीए गठबंधन पर विशवास जता कर नरेंद्र मोदी के पक्ष मे
जनादेश दिया। यध्यपि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कॉंग्रेस के युवा
नेता राहुल गांधी सहित इंडि गठबंधन, एनएडी प्रमुख
नरेंद्र मोदी के "अबकी बार 400 पार" के लक्ष्य को हांसिल न कर पाने
को, अपनी बड़ी सफलता
मान, अपनी पराजय को ढाँपने
और छुपाने का असफल प्रयास कर रहे है। इंडि
गठबंधन के सभी घटक दलों का व्यवहार एक ऐसे
ठेठ पूर्वाग्रही अभिभावक की तरह हैं जिसे परीक्षा मे अपने बेटे के फेल होने के
दुःख से ज्यादा अपने पड़ौसी के
बच्चे के इम्तिहान मे पास होने का दुःख और संताप हैं। काश!! पड़ौसी का
बेटा भी फेल हो जाता तो उसे अपने बेटे की असफलता से कहीं कोई दुःख या पीड़ा न
होती!!
चुनावी
कार्यक्रम 2024 के दौरान इस तरह की रिपोर्ट टीवी पर दिखाई तो जा रही थीं कि बड़ी
संख्या मे महिलायेँ द्वारा पोस्ट ऑफिस मे खाते
खुलवाये जा रहे हैं ताकि कॉंग्रेस की सरकार बनते ही महिलाओं के खाते मे
8500 रुपए प्रति माह खटा खट, खटा खट जमा कराएं जाएंगे। लेकिन कॉंग्रेस अपने चुनावी कार्यक्रम मे देश के मतदाताओं को इस कदर
भ्रमित कर वोट हंसिल करेगी, ये इस बात से उजागर हुआ जब 5 जून
को कर्नाटक के बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के लखनऊ मे सैकड़ों महिलाओं ने कॉंग्रेस के
दफ्तर मे जाकर एक लाख रुपए की मांग की। उन महिलाओं को बताया गया था कि आप कॉंग्रेस
के पक्ष मे मतदान करें,
4 जून की मतगणना के बाद, 5 जून को आप लोगों को एक-एक
लाख रुपए प्रदान किया जाएगा। इस आशय के लिखित दस्तावेज़ भी उन महिलाओं को दिये गए
थे। 5 जून के इन दृश्यों को टीवी मीडिया द्वारा प्रमुखता से
दिखलाया गया जिसमे महिलाएं उनसे किए गए वादे के मुताविक एक लाख रुपए लेने के लिए
कॉंग्रेस के ऑफिस मे आयीं हुईं थी। राहुल गांधी की कॉंग्रेस के, एक झटके मे गरीबी हटाने के इस इस
खटाखट-खटाखट फॉर्मूला को सुन कर कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि भ्रम, झांसा और प्रलोभन देना तो कॉंग्रेस का स्वभाव रहा हैं। 1971 मे भी
श्रीमती गांधी ने गरीबी हताओं, देश बचाओ का नारा देकर दो बार
सत्ता हांसिल की थी। बाद मे श्री राजीव गांधी
भी इस नारे के उपयोग कर सत्ता मे आए।
पर देश की गरीबों की गरीबी तो क्या
हटी आज 2024 मे एक बार फिर कॉंग्रेस ने खटाखट-खटाखट फोर्मूले से देश की जनता की
आँखों मे धूल झोंकने का अप्रिय कुत्सित प्रयास किया पर धन्य है देश के मतदाता
जिन्होने कॉंग्रेस के इस प्रलोभन को नकार दिया।
इंडि
गठबंधन की ममता बैनेर्जी ने तो एनडीए गठबंधन के नेता नरेंद्र मोदी से उनके सत्ता
मे आने के पूर्व ही इस्तीफे की मांग कर दी। कॉंग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन
खरगे, कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री जयराम रमेश ने तो एनडीए गठबंधन के स्पष्ट
बहुमत 293 के बावजूद भी इसे मोदी की व्यक्तिगत हार, नैतिक
हार और राजनैतिक हार बता कर संसदीय चुनाव 2024 को मोदी के विरुद्ध जनादेश बताया।
उन्होने मोदी के 400 पार सीटे न ला पाने का उपहास उड़ाया पर ये दोनों नेता द्व्य
भूल गये कि चुनावी रैलियों मे राहुल गांधी सहित इंडि गठबंधन ने लिख कर देने की
भविष्यवाणी की थी कि 4 जून को मोदी प्रधानमंत्री नहीं
रहेंगे!! इन नेताओं ने इंडि गठबंधन को 295 सीटे जीतने की भविष्यवाणी भी की थी पर क्या वे अपने कथन पर, खरे उतरे? तब उन्हे मोदी के "400 पार"
वाले कथन पर सवाल खड़ा करने का क्या नैतिक अधिकार हैं? आरोप
प्रत्यारोप का ये सिलसिला तो यूं ही चलता रहेगा पर इंडि गठबंधन सहित कॉंग्रेस के नेताओं को इस बात से तो सहमति जतलानी ही पड़ेगी, जिसमे नरेंद्र मोदी ने तमाम मंचों और चुनावी
रैलियों मे सैकड़ों बार भविष्यवाणी की थी कि "आयेगा तो मोदी ही"!! और "अबकी बार मोदी सरकार!!" इसे
नरेंद्र मोदी का बड़बोलापन कहें या उनकी भविष्यवाणी, क्या कॉंग्रेस, नरेंद्र मोदी के 400 पार के कथन के साथ इन कथनों पर भी कुछ प्रकाश डालेगी??
विजय
सहगल
