शुक्रवार, 26 मार्च 2021

ओवैसी का अंक गणित

 

"ओवैसी का अंक गणित"



श्री असद ओवैसी जी कानून मे वैरिस्टर, योग्य और बुद्धिमान राजनैतिज्ञ के साथ साथ देश की संसद के वरिष्ठ माननीय सांसद भी है। कानूनों की बारीक समझ और जानकारी मे उनका कोई मुक़ाबला नहीं। एक जागरूक नागरिक होने के नाते मै उनका आदर और सम्मान भी रखता हूँ पर उनकी नीतियों और विचारधारा से असहमति के चलते अलग विचार रखता हूँ। कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश की श्री शिवराज सिंह सरकार के परिवहन मंत्री की निष्ठुरता के बारे मे लिखा था। "अंधेर नागरी चौपट मामा"(https://sahgalvk.blogspot.com/2021/02/blog-post_23.html)।  आज श्री ओवैसी की हठधर्मिता एवं कठोरता का उल्लेख यहाँ कर रहा हूँ।  बचपन मे मुल्ला नसरुद्दीन के चुटीले और शिक्षाप्रद  व्यंग और  किस्से हम  बच्चों मे  खूब लोकप्रिय थे।  अब जमाना बदल गया आजकल ओवैसी जी का एक नए मुल्ला के रूप मे प्रादुर्भाव हुआ है जिन्होने  "मुल्ला नसरुद्दीन" का स्थान ले लिया पर वे चुटीले और शिक्षाप्रद किस्से तो क्या गढ़ेंगे  इसके विपरीत ये "चोटिल और घ्राणास्पद" किस्से गढ़ने के लिये मशहूर है।

किसी भी तरह की धार्मिक कट्टरता, सामाजिक बुराई या निंदनीय प्रथा के चलन की  स्वीकृति किसी भी सभ्य समाज मे स्वीकार नहीं की जा सकती। पिछले दिनों अहमदाबाद की आयशा नाम की बच्ची ने अपने माता-पिता को संबोधित, दहेज के कारण अपने अत्महत्या पूर्व विडियो ने सभी को दुःख, दर्द और वेदना से झकझोर दिया। आँसू बहाते, उसके प्रौढ़ माता पिता की लाख मिन्नते, अनुनय, विनय, उनका  हाथ जोड़ गिड़गिड़ाना भी आयशा को अत्महत्या से न रोक सका!! उस युवा बच्ची के शब्दों की मर्मस्पर्शी चित्कार ने लोगो की मनोव्यथा को शोक संतृप्त कर दिया।  जरा कल्पना कीजिये, एम॰ए॰ पास आयशा के बूढ़े माता पिता पर क्या गुजरी होगी जो दहेज की भेंट चढ़ी अपनी बेटी को अपने सामने ही अत्महत्या से ने रोक सके!! ऐसा नहीं कि दहेज रूपी दानव मुस्लिम बहिन बेटियों को ही काल का ग्रास बना रहा हो हिन्दूओं मे भी समान रूप से  दहेज रूपी वेदी पर बेटियों की बलि बड़ी निर्दयता से चढ़ाई जा रही है।

माननीय ओवैसी जैसे कठोर हृदय  इंसान के दिल मे भी हिन्दू मुस्लिम के विपरीत सभी धर्मावलम्बियों से अमानवीय दहेज प्रथा के विरुद्ध आवाज बुलंद करने की अपील सुनने को मिली। उन्होने कहा, "चाहे आप कोई भी मजहव के हों, ये दहेज़ की लानत को खतम करों"। "अगर तुम मर्द हो न, तो बीबी पर जुल्म करना मर्दानगी नहीं है!!, बीबी को मारना मर्दानगी नहीं है, बीबी से पैसों का मुतालबा करना मर्दानगी नहीं है, तुम मर्द कहने के लायक भी नहीं होगे अगर तुम ऐसी हरकत करोगे!! ....................(पूरा भाषण के लिए लिंक https://www.youtube.com/watch?v=k3bYy4HVz4w) उस वीडियो मे ओवैसी जी ने युवाओं को ललकारते हुए उनकी मर्दानगी पर लानत की। सुन कर अच्छा लगा कि यदि ओवैसी हिन्दू मुसलमान की राजनीति न करें तो शायद हिंदुओं के भी निर्विवाद नेता हो जाएँ? दहेज के लिये आयशा की अत्महत्या के वीडियो ने ओवैसी की आत्मा को झकझोर दिया? पर आयशा तो हताशा और निराशा की  दहेज रूपी इस लड़ाई  मे पराजित हो जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो बहुत से अनुत्तरित सवाल छोड़ गई? पर समाज मे आज भी  ऐसी हजारों महिलाएं है जिन्होने आत्माहुति तो नहीं दी पर "तीन तलाक" या "हलाला" जैसी कुप्रथा के दंश के बीच जीते जी हर रोज तिल तिल कर मरने को मजबूर है!! उनके दुःख, दर्द और तकलीफ का क्या!!? क्या माननीय ओवैसी जी दर्द झेल रही ऐसी महिलाओं की लड़ाई को लड़ने का झण्डा ले इस लड़ाई की अगुवाई करेंगे??

उनके चाल-चलन, और विचार धारा से तो ऐसा नहीं लगता, इन्ही ओवैसी महाशय ने तीन तलाक के विरुद्ध कैसे दहाड़ मार-मार कर संसद मे आसमान सिर पर उठा लिया था एवं  तीन तलाक के बिल का जबर्दस्त विरोध किया था!! हिन्दू-मुसलमान को तराजू पर रख, हमेशा राजनीति करने वाले ओवैसी जी जिनकी कथनी और करनी के इसी  अंतर के कारण कदाचित ही उनके वक्तव्य आम जनों को प्रभावित करेंगे ??           

पिछले दिनों बाटला हाउस मुठभेड़ कांड के प्रतिक्रिया स्वरूप श्री ओवैसी का "हिन्दू-मुस्लिम"  तराजू एक बार फिर बापस निकल आया। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक पहलू पर तुलना के बाद ओवैसी जी अब "अंक गणित" मे भी हिन्दू-मुस्लिम को ले आये। अनुपात, समानुपात और प्रतिशत के ज्ञान का विस्तार उन्होने मुस्लिमों के विरुद्ध मुठभेड़ मे 37% का आंकड़ा पेश कर दिया। उनका कहना है कि योगी सरकार द्वारा कुल मुठभेड़ों मे 37 प्रतिशत मुठभेड़े अल्पसंख्यकों  के विरुद्ध हुई है। वे ये भूल गये कि अपराधी, अपराधी होता है उसका कोई धर्म-समाज और मजहब से कोई लेना देना नहीं होता। जैसा कि उनसे अपेक्षित था, उन्होने, अपराधियों और असामाजिक तत्वों के वर्गीकरण के  बीच  भी अपनी  विघटनकारी सोच को उजागर कर दिया। ठीक ही है इस अर्थप्रधान समय मे हर सौदागर अपने वाणिज्य-व्यापार, विपणन के विस्तार के लिए येन-केन-प्रकारेण, नीति या अनीति पूर्वक प्रयास करेगा फिर वह भले ही कफन का सौदाई ही क्यों न हो।

वे भूल गये कि पुलिस या सुरक्षा बल तब ही मुठभेड़ को  अंतिम अस्त्र के रूप मे इस्तेमाल करती है जब उनकी अपनी जान पर बन आती है और आततायी, गुंडा या बदमाश उनकी ही जान के लिये खतरा बन जाता है। मुठभेड़ मे धर्म का कोई मतलब नहीं रहता  फिर मुठभेड़ भले ही "विकास" (वही "विकास दुबे, कानपुर वाला" ) की हो या अभी हाल ही मे  कासगंज मे  सिपाही की हत्या करने वाले शराब माफिया "मोती" की मुठभेड़!!

बकील और वैरिस्टर के रूप मे सुविख्यात ओवैसी जी गणित मे भी इतने प्रवीण और पारंगत होंगे इसका गुमान न था। कितनी तेजी से गणना कर 37% का आंकड़ा निकालने वाले  कानूनविद गणितज्ञ ओवैसी जी, ईराक, लीबिया, सीरिया, अफगानिस्तान मे होने वाली आंतंकवादी घटनाओं मे शामिल शत प्रतिशत इस्लामी आतंकवादियों की संलिप्तता के बारे मे क्या कहेंगे?? दुर्भाग्य ये कि इन देशों मे इस्लाम के नाम पर इस्लाम के ही अनुयायियों पर  हिंसा, अत्याचार, दमन करने वाले कट्टरपंथी, आतंकी, आततायी, इस्लाम को मानने वाले तो कदापि नहीं हो सकते? अन्यथा अपने ही धर्म के मानने वालों पर इतनी दहशतगर्दी तो कदापि न करते? अतः इतना तो तय है कि "आतंकवादियों", "दहशतगर्दों", "अतिवादियों" का कोई धर्म नहीं होता। वहाँ तो उत्तर प्रदेश या योगी जी की सरकार नहीं है?? माननीय ओवैसी जी जितनी ऊर्जा मुठभेड़ मे हिन्दू मुसलमान का अनुपात या समानुपात निकालने मे व्यय कर रहे है कदाचित इस ऊष्मा का  एकांश भी इन जैसे लोग यदि इन भटके हुए, कट्टरपंथी सोच, और रूढ़िवादी विचारधारा से पोषित इन युवाओं को हिंसा के इस रास्ते को त्यागने के लिये शिक्षित-प्रशिक्षित करते तो उन माँओं के जिगर के टुकड़ों को असमय, बेमौत और निर्दयी तरह से  नहीं मरना पड़ता और न ही "आरिज"  जैसे अपराधियों को फांसी की सजा सुन रात की नींद उड़ने के दौर से गुजरना पड़ता।  हम सभी को इस कहावत की  कड़वी लेकिन धुर्व सत्य की सच्चाई को याद रखना होगा कि  "बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय"?? या जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे??   

अपने बीबी बच्चों को सात पर्दों के पीछे छुपा कर रखने वाले, अपने बेटे बेटियों को विदेशों मे आधुनिक सुख सुविधाओं वाली शिक्षा व्यवस्था मे  शिक्षित कराने वाले कश्मीर के अलगाववादी या इसी तरह के चरमपंथी, अशिक्षित गरीब, पिछड़े युवाओं को 72 हूरों का सब्जबाग दिखा कर हिंसा और कट्टरवाद की आग मे झौंकते है और आंतंकवादी गतिविधियों मे इनकी अमानवीय मौत पर प्रतिशत और अनुपात के नियमों का प्रतिपादन करते है!! क्यों नहीं अपने स्वजनों को या 72 हूरों की शिक्षा नीति  के सब्जबाग मे खुद अपने आपको शामिल नहीं करते?? कब तक निरीह, भोले-भाले सीधे-सरल लोगों  की लाशों पर अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेंकेंगे या राजनैतिक गोटियाँ फेंकेंगे??

माननीय ओवैसी सहित समाज के हर प्रबुध वर्ग के बुद्धिजीवियों से आवाहन है कि  कृपया आइये और देश के  भटके, दिशा भृमित, राह भटके  नौजवान युवाओं को चाहे वे किसी भी धर्म और मजहब के हों नफरत और घृणा से परे शांति और सौहार्द का संदेश दे एक नई राह दिखायेँ  तो शायद  आपको गणित की कठिन प्रतिशत और अनुपात के सवालों के हल करने मे अपनी ऊर्जा व्यर्थ मे जाया न करनी पड़े।

विजय सहगल   

3 टिप्‍पणियां:

P.c.saxena ने कहा…

आपने निष्पक्षता के साथ आलोचना की है कम ही लेखक इतनी स्पष्टता के साथ अपनी बात रख पाते हैं

N K Dhawan ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं स्पष्ट विश्लेषण । ओवैसी जैसे नेताओं के लिए आतंकवादियों और अपराधियों की मौत भी एक अवसर लेकर आती है। मुस्लिम आतंकवादियों और अपराधियों का धर्म नही होता पर जय एंकाउंटर हो जाने पर यह मातम मनाने और उनका धर्म निर्धारित करने में शर्म महसूस नही करते ।

Unknown ने कहा…

Very true you have exposed owaisi