शनिवार, 13 मार्च 2021

कोविड का टीकाकरण

 

"कोविड का टीकाकरण क्यों जरूरी है"




चिकित्सा हॉस्पिटल नोएडा मे 13  मार्च को वरिष्ठ नागरिकों के लिये शुरू हुई इस मुहिम मे यदि मै बाहर प्रवास पर न होता तो शायद टीका करण 1-2 मार्च मे ही करा चुका होता। बगैर किसी दर्द, टीकाकरण पश्चात प्रभाव के सम्पन्न हो गया।  ऐसा नहीं है कि मै कोविड के डर और भय के कारण इतनी जल्दी मे था ताकि टीका करण कराने के बाद मै कोविड से सुरक्षित हो जाऊंगा या मैंने अब कोविड पर विजय प्राप्त कर ली है। नहीं ऐसा नहीं, कदापि नहीं!!

कोविड रूपी इस महामारी मे मेरा कोविड टीकाकरण का मुख्य उद्देश्य  बीमारी से बचाव तो है ही साथ मे आपका जीवन आपके परिवार के लिये अमूल्य है, पर इसके परे इस नवीन महामारी और अनखोजी बीमारी पर हमारे भारत देश के श्रेष्ठ  वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के शोध के प्रति मेरा  विश्वास, उनके प्रति  मेरी निष्ठा और समर्पण का प्रतीक था। हमारे वैज्ञानिकों द्वारा इतने कम समय मे कोविड बीमारी के टीकाकरण की खोज करना उन चिकित्सकों, शोधकर्ताओं के प्रति मेरा मूक सम्मान है जो देश और दुनियाँ मे मानव जीवन बचाने मे लगे है।

जनवरी 2020 मे  मेरे गाल्ब्लैड्डर के ऑपरेशन के पूर्व "मृत्यु पूर्व घोषणा पत्र" पर मेरे हस्ताक्षर लेने पर भी मेरा  रत्ती भर भी अविश्वास उन चिकित्सकों या चिकित्सकीय कर्मचारियों  के प्रति नहीं था। ये मेरी निष्ठा और विश्वास उन लोगो के प्रति था कि अब मै उनकी देख-रेख मे हूँ, अब हमारा कुछ भी अहित नहीं होगा। मुझे तब भी अपने देश के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों पर विश्वास था मै जनता हूँ डॉक्टर द्वारा  ऑपरेशन के पूर्व ली जाने वाली यह एक वैधानिक औपचारिकता है, जिसमे डॉक्टर द्वारा अपने सर्वोत्तम प्रयास के बावजूद अगर मरीज के साथ कुछ अनहोनी  या मृत्यु होने की दशा मे चिकित्सक उत्तरदायी नहीं होगा।

एक जागरूक नागरिक के नाते महामारी के विरुद्ध लड़ने की  सरकार की नीति के  समर्थन मे  साथ खड़े होना ही मेरा इस टीकाकरण का उद्देश्य भी था। आइये दुनियाँ की इस विकटतम, भयंकर बीमारी के विरुद्ध टीकाकरण करा कर न केवल इस महामारी से अपनी रक्षा करे बल्कि अपने पारंगत, श्रेष्ठ, प्रवीण  चिकित्सकों, शोधकर्ताओं के प्रति  अपनी निष्ठा और विश्वास व्यक्त करे बल्कि सरकार के विषाणुजनित कोविड  व्याधि के विरुद्ध संघर्ष के अभियान मे जागरूक नागरिक, देशभक्त शहरी की तरह समाज और देश के प्रति अपना कर्तव्य को परिपूर्ण करें।      

विजय सहगल 

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