" माउंट आबु पार्ट-3 (देलवाड़ा मंदिर)"
बापसी
मे वन विभाग द्वारा संचालित ट्रेवेर्स
टैंक के भ्रमण हेतु उनके द्वारा निर्मित एवं नियंत्रित पार्क बनाया गया है। इस पार्क मे रीछ, जंगली
सूअर, बघेरा एवं पार्क के आखिरी सिरे पर स्थित झील मे
विभिन्न मछलियों के अतरिक्त मगरमच्छ, घड़ियाल आदि जलचर भी है। पक्षियों मे जंगली मुर्गे,
मोर, उल्लू, मैना, तोता आदि बहुतायत मे कलरव करते मिलेंगे। नितांत सुनसान वनाच्छादित पेड़ो
के बीच लोग पैदल ट्रेक करते है पर दोपहिया या चार पहिया वाहनों को आवश्यक फीस के
भुगतान पर प्रवेश की अनुमति दी जाती है। दोपहिया वाहन की आवश्यक फी के भुगतान कर लगभग
4-5 किमी लंबे ट्रेक पर अंदर प्रवेश किया। पार्क के आखिरी मे झील मे विभिन्न रंगो
और आकारों की मछलियों को देखना रोमांचकारी अनुभव था। मेरे पहुँचने पर कोई अन्य
पर्यटक वहाँ नहीं था लेकिन कुछ समय बाद तीन चार अन्य वाहन आने से डर मे कुछ सुकून
मिला। कुल मिला के जंगल के बीच यात्रा ठीक ठाक ही रही।
यात्रा
के अंतिम पढ़ाव मे सूर्यास्त स्थल देखने के इरादे से प्रस्थान किया जो मेरे होटल के
ही नजदीक ही था। अन्य पर्यटन स्थल की तरह माउंट आबू के सभी पर्यटकों की दिशा सन सेट पॉइंट की तरफ ही थी। वन विभाग
द्वारा आवश्यक फीस लेने के बाद लगभग 1 किमी॰ की चढ़ाई थी। एक विशेष छोटी बच्चा गाड़ी
की सहायता से लोगो को उपर चढ़ाने की व्यवस्था की गई थी। सीढ़ियों चढ़ कर बड़ी से पहाड़ी
से सूर्यास्त देखने की व्यवस्था थी। मेले जैसा माहौल था खाने पीने खेल खिलौने की
वस्तुओं के विक्रय हो रहा था। जैसे ही
सूर्य अस्ताञ्चल की ओर बढ़ा मोबाइल और कैमरों के माध्यम से लोगो ने सूर्यास्त के
फोटो निकालना शुरू कर दी। दूर पहाड़ियों के पीछे सूरज का डूबना देखना अलौकिक अनुभव
था। सूर्य देव एक नई ऊर्जा और शक्ति प्राप्त करने के लिये अस्त हो रहे थे ताकि कल
नए ओज और चमक के साथ पुनः उदय हो सके। मैंने भी सूर्यास्त की कुछ फोटो अपने कैमरे मे कैद की।
माउंट
आबू की इस शानदार अविस्मरणीय यात्रा ने मन की
प्रसन्नता और उत्साह को आनंद से भर दिया। शानदार मौसम साफ सुथरे वातावरण और
धूल रहित पर्यावरण ने मन को मोह लिया। ग्रामीण परिवेश मे लोगो का अभावों और सुविधा
रहित रहन सहन के बावजूद उनके सामाजिक और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण स्वभाव ने
महानगरों की चकाचौंध को भी फीका कर दिया। माउंट आबू की यात्रा मेरे अंतर्मन की एक
शानदार और यादगार यात्रा थी। माउंट आबू परिक्षेत्र और वहाँ के निवासियों को नमन, बारंबार
नमन।
विजय
सहगल




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