"गराडिया महादेव"
"गराडिया महादेव"
"विन
मांगे मोती मिले मांगे मिले न भीख" कहावत को मैंने फलार्थ होते देखा। मुझे एक
सामाजिक कार्यक्रम मे अपने नजदीकी
रिश्तेदारी मे 4 फरवरी 2020 को कोटा
(राजस्थान) जाना हुआ। तीन दिन का प्रवास
था सोचा क्या किया जाये, कैसे समय व्यतीत हो। सालों पहले एक बार कोटा आना हुआ था चंबल
नदी के पास डैम और चंबल गार्डन के अलावा एक दो प्रसिद्ध मंदिर थे जिनहे पूर्व मे
भी देखा हुआ था अतः उन स्थानों के लिये विशेष
रुचि न थी। एक बारगी सवाई माधोपुर टाइगर
सफारी देखने की योजना बनाई जिसकी कोटा से दूरी 130 किमी लगभग थी और टाइगर सफारी घूमने के
लिये स्पॉट पर सुबह 6-7 बजे तक पहुँचना बगैर सवाई माधोपुर रात्रि विश्राम के संभव
न था। इसलिये सवाई माधोपुर का कार्यक्रम भी छोड़ना पड़ा। चार फरवरी को यहाँ वहाँ
सोते और टीवी देख समय व्यतीत किया। शाम को कार्यक्रम के चलते समय अच्छा बीता। पाँच
तारीख को दिन मे कोटा स्टेशन और आसपास की सड़कों को नापते हुए भ्रमण किया शाम को
कार्यक्रम मे शामिल होने के पश्चात अब हमारे लिये 6 तारीख का पूरा दिन था। अपने
मेजबान से बातचीत करने पर उन्होने गराडिया महादेव जाने के सलाह दी। बड़े वेमन से सोचा
दिन भर घर पर विस्तर तोड़ने और लोटने से
वेहतर रहेगा कि 5-6 घंटे का समय घूम फिर कर व्यतीत करे। पास मे रेल्वे स्टेशन स्थित स्टैंड से मैजिक
गाड़ी बाले से बात कर हम लोग कोटा स्टेशन से करीब 30 किमी दूर स्थित गराडिया महादेव
के लिये रवाना हुए। कोटा मे राष्ट्रिय राजमार्ग संख्या 76 पर स्थित हैंगिंग ब्रिज पर
खड़े होकर हिलते पुल का कुछ मिनिट रोमांच
अनुभव कर आगे बढ़े। लक्ष्य से कुछ किमी
पहले हम लोगो ने राष्ट्रीय राजमार्ग से हट कर एक जंगलात की सड़क का रुख किया।
रास्ता ठीक ठाक ही था पर नितांत सुनसान और पत्थरीले रेगिस्तानी जंगल का रास्ता था।
छोटे कांटे दार पेड़ों के जंगल के बीच 4-5 किमी दूर वन विभाग का एक जांच केंद्र था।
वन विभाग के जांच केंद्र से पर्यटकों और
गाड़ी का निर्धारित शुल्क को जमा कर हम लोग
ने मैजिक गाड़ी के साथ वन विभाग की सीमा मे
प्रवेश किया। यहाँ से हम लोगो को लगभग 2 किमी अंदर जाना था। यात्रा के बाद हमे लगा
वास्तव मे हमे ट्रेक्किंग का आनंद लेते हुए पैदल ही वन विभाग की सीमा मे स्थित गराडिया
महादेव स्थल तक जाना चाहिए था।
अपने वांछित स्थल पर जो दृश्य देखा तो मारे खुशी के
मै तो झूम उठा। ये तो वह सीन था जिसे
देखने की ईक्षा हर उस बार करता था जब जब मै टीवी पर राजस्थान पर्यटन विभाग का वो
विज्ञापन देखता था जिसमे एक नीलांबर श्रीकृष्ण वेशधारी बालक साइकिल से चल कर कुछ
विदेशी पर्यटकों को लेकर उस शानदार स्थल पर पहुंचता है जो एक शांत नदी से घिरे
पहाड़ को नदी के दूसरी ओर के पहाड़ पर खड़े होकर निहारता है। मेरे सामने वही स्थल अपनी
प्रकृतिक सुंदरता की धरोहर को सँजोये हुए मेरे सामने खड़ा था। मुझे कतई उम्मीद नहीं
थी कि गराडिया महादेव स्थल ही वो जगह है
जिसे देखने की अभिलाषा मैंने पहली बार राजस्थान पर्यटन मण्डल के विज्ञापन को टीवी
पर देख कर की थी। बिना आकांक्षा या योजना के अचानक मनोवांछित स्थल को देखना मन को प्रफ़्फुलित करने बाला था। बहुत ही
अद्भुत अकल्पनीय प्रकर्तिक सुंदरता से भरपूर भव्य दृश्य। कुछ मिनटों तक तो मै एकटक
उस सुंदरता को यूं ही निहारता रहा। सामने उतनी ही ऊंचाई लिये पर्वत जिसके सिर पर
हरे भरे पेड़ों से आच्छादित मुकुट और पर्वत की नीचे भी उतनी ही विशाल संख्या मे वृक्षों की हरियाली जिसे चारों तरफ वलयाकार मे
बहती शांत शीतलता देती चंबल नदी की हल्की हरी और आसमानी विशाल जलराशि बगैर किसी कोलाहल के बह रही थी। चंबल नदी के
वेग का अनुमान लगाना उतना ही मुश्किल था मानों कोई सिंह दबे पाँव अपने बेपरवाह शिकार की ओर बढ़ रहा हो।
धीरे धीरे कदमों को बढ़ाते हुए हम लगभग 200 फुट नीचे
गहरे मंदिर मे छोटी छोटी सीढ़ियों से उतर कर गराडिया महादेव मंदिर के दर्शनार्थ उतरे।
प्राकर्तिक जलधारा से प्राप्त जल से सभी लोगो ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया वहाँ
से भी चंबल नदी का दृश्य अति दर्शनीय था। बहती जल धाराएँ एक अद्भुत मनमोहक दृश्य
उत्पन्न कर रही थी। नीचे से पर्वत की बड़ी बड़ी चट्टानें एक के उपर एक ऐसे लग रही थी
मानों बचपन मे सितोलिया, पिट्ठू, या टीपो खेलते समय पत्थरों को एक के उपर एक रख कर खेलते थे। ऊंची
नीची चट्टानों से चंबल नदी के उस पार के पर्वत का दृश्य हर स्थान से अलग-अलग तरह की छवि उत्पन्न कर रहा था। सावन के महीने मे
इस स्थल की कल्पना स्वर्गिक आनंद देने बाली होगी।
चंबल नदी हो और चंबल के दस्युओं का जिक्र न हो ऐसा
तो हो ही नहीं सकता। चंबल के बीहड़ों के दस्यु सम्राटों की तरह यहाँ भी उनकी
उपस्थिती बंदरों के रूप मे मिली। बंदरों का आतंक यहाँ खुल कर देखा जा सकता है। कोई
भी खाने की वस्तु यदि आप अति सावधानी पूर्वक नहीं रखेंगे तो निश्चित तौर पर उसे
बंदरों द्वारा अचानक लूट लिया जायेगा।
कृपया यहाँ इस बात का विशेष ध्यान रखे।
अचानक से प्राप्त इस प्रियतम गराडिया महादेव पर्यटक स्थल को घूमने का अद्भुत
आनंद ऐसा लगा मानों हमे अचानक बिना मांगे विना मोल मोती माणिक का ख़जाना मिल गया हो।
विजय सहगल








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