शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

नागरिक संशोधन बिल 2019


"नागरिक संशोधन बिल 2019"




किसी व्यक्ति की ज़िंदगी मे इससे ज्यादा दुर्भाग्य क्या होगा जब उसे धर्म के आधार पर उत्पीढ़ित किया जाये। धर्म के आधार पर उनको पढ़ने-लिखने  से बंचित किया जाये। अपने धर्म के पालन करने से रोका जाये, उनके धर्मस्थलों को तोड़ा जाये, एक धर्म विशेष के मानने बालों की बहिन बेटियों को अपहरण कर ज़ोर जबर्दस्ती की जाये, उनका बलपूर्वक धर्मपरिवर्तन कर अत्ताइयों द्वारा अपने धरम मे परिवर्तित करा दिया जाये, उनके व्यवसाय को लूट लिया जाये, उनके बच्चो बुजुर्गों से जबर्दस्ती बंधुआ मजदूरी कराई जाये और इतना सब होने के बाबजूद प्रशासन, जिम्मेदार संवैधानिक संस्थाए,  सुरक्षा मे लगी पुलिस के सिपाही  न केवल उनकी शिकायतों की अनदेखी करे बल्कि गैरकानूनी कार्य करने बाले अपराधियों के साथ खड़े हो तो ऐसे शोषित, पीढ़ित व्यक्ति की क्या मनोदशा होगी? ऐसा व्यक्ति अपने साथ हो रहे अन्याय पर अपने परिवार के सामने, अपने छोटे, नौजवान बच्चों या बूढ़े माँ-बाप के सामने अपने आपको कितना असहाय, कितना दीन, कितना हीन भावना से ग्रसित महसूस करता होगा जब खुद सही होते हुए भी  उसके साथ घटित अपराध का बो प्रतीकार भी न कर सके? सारी कानून सम्मत संस्थाओं के बाबजूद उसे कोई सहायता न मिले? अर्थात "मारें और रोने भी न दे",  और ये अन्याय, अत्याचार, उत्पीढन, जुल्मों-सितम सिर्फ और सिर्फ इसलिये किये जायें  क्योंकि वो एक धर्म विशेष के मानने बाले थे, क्योंकि बे हिन्दू थे? आतताइयों  आतंकियों, लुटेरों, गुंडों बदमाशो को पराश्रय देने बाला देश नापाक  पाकिस्तान है, जो इस तरह की अमानवीय, अदयालु, क्रूर घटनाओं को देखते रहने के बाबजूद मूक और अंधा बन खड़ा रहकर समाज, धर्म विरोधी लोगो के क्रत को अपनी स्वीकृति प्रदान करता है!!

धिक्कार है ऐसे देश पाकिस्तान  और वहाँ के निर्दयी देशवासियों पर, लानत है ऐसे देश पाकिस्तान और उनके मुर्दा वासिंदों पर, तरस आता है उन सियासी रहनुमाओं  पर जो अपने अल्पसंख्यक नागरिकों के  धार्मिक उत्पीढन  और सामाजिक अधिकारों  की हिफाजत और रक्षा करने मे असफल और नाकामयाब रहे और जो इस अत्याचार और अनाचार पर मौन रहे?

चोरी और सीनाज़ोरी करते हुए पाकिस्तान के धूर्त और मक्कार रहनुमाओं तुम भारत पर तोहमत लगाते हो कि भारत हिन्दू देश बनने की राह पर बढ़ रहा है? उल्टा चोर कोतवाल को डांटे? जैसा तुम अपने देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों, उनकी जानमाल, व्यवसाय और संपत्ति और उनके स्वाभिमान और अस्मिता  की रक्षा करने  मे पूरी तरह असफल रहे, नाकामयाब रहे हो  बैसा इस देश के किसी भी अल्पसंख्यक  के विरुद्ध उक्त उल्लेखित धार्मिक उत्पीढन, धर्म के नाम पर अपहरण, बलात्कार, बलात धर्मपरिवर्तन, धन-संपत्ति की खुली लूटपाट    की  एक भी घटना 130 करोड़ की आबादी बाले हमारे देश मे देखने को नहीं मिलेगी इस बात का पाकिस्तान तुम्हें खुला चैलेंज है।  

पाकिस्तान से आये ऐसे संघर्षशील उत्पीढ़ित हिन्दू शरणार्थी भाइयों की बहदुरी और धैर्य की जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है जिन्होने अपने धर्मपालन करने के लिये अपनी मातृभूमि को छोड़ा, अपने घर-बार, व्यवसाय को छोड़ शरणार्थियों के रूप मे तमाम दुःख और कष्टों को स्वीकार कर अपने पूर्वजों के देश मे अपने स्वाभिमान अपने स्व्धर्मपालन के लिये आश्रय की तलाश मे एवं श्रीमद्भग्बद गीता मे भगवान श्री कृष्ण के संदेश को चरतार्थ करने भारत चले आये। इस श्लोक मे भगवान श्री कृष्ण कहते है :-
  
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।3.35।।
(अर्थात अच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरे के धर्म से गुणरहित अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरेका धर्म भयको देनेवाला है।)
धर्म के नाम पर सताये ऐसे हिन्दू शरणार्थियों भाइयों का "नागरिकता संशोधन विधेयक 2019" के पारित होने पर उनकी नागरिकता की राह मे आ रही अंतिम बाधा  के हटने पर उन्हे बहुत बहुत बधाई।

विजय सहगल  



1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

आपने यथार्थ वर्णन किया है, बिलकुल एसी ही दशा हिन्दुओं, सिक्खों और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति पाकिस्तान में है।दरअसल उसका नाम पाकिस्तान न होकर नापाकिस्तान होना चाहिए और उस पर तुर्रा यह कि फिर भी यहाँ का तथाकथित विपक्ष कह रहा है कि यह विधेयक संविधान सम्मत नही है।