शनिवार, 2 नवंबर 2019

गोलु देवता मंदिर


"गोलु देवता मंदिर - चितई (अल्मोड़ा)"






भारत एक विभिन्न आस्थाओं और विश्वास का देश है इसकी यही विशेषता सारी दुनियाँ मे हमारे देश को अन्य देशों से अलग रखती हैं। अल्मोड़ा से 20-21 किमी दूर स्थित चितई ग्राम मे  गोलु देवता मंदिर मे श्रद्धालुओं के  इस आस्था और विश्वास को और मजबूत किया हैं। उत्तराखंड प्रदेश के कुमायूं मण्डल मे गोलु देवता त्वरित न्याय के देवता का मंदिर आमजन के बीच  सर्वमान्य देवता के रूप मे काफी लोकप्रिय है। 3 अक्टूबर 2019 को भगवान गोलू देवता के दर्शन का सौभाग्य मिला। गोलु देवता के प्रति श्रद्धा और विश्वास का समर्पण चितई स्थित मंदिर मे कदम कदम पर  देखने को मिलता है। मंदिर मे श्रद्धालुओं द्वारा उनकी मनोकामना के पूर्ण होने पर मंदिर मे पीतल की घंटियाँ समर्पित की जाती हैं। मंदिर मे मनोकामनाओं की ईक्षा पूर्ति के लिये श्रद्धालू मंदिर मे कानूनी याचिकायेँ गोलु देवता के समक्ष त्वरित न्याय हेतु प्रस्तुत करते है। ये याचिकाये स्टैम्प पेपर या सादा कागज पर भक्तगण मंदिर मे प्रस्तुत करते है। ऐसी हजारों याचिकाये जिनमे श्रद्धालू अपनी अपनी समस्यायों को स्टैम्प पेपर या सादे कागज पर लिख या टाइप करा कर मंदिर मे ही घंटियो के साथ मे धागे से बांध कर लोहे के छड़ों मे टांग देते है। इन याचिकाओं मे स्थानीय लोगो द्वारा अपनी-अपनी समस्याओं, घरेलू परेशानियों, कोर्ट-कचहरी के मामलों का निराकरण उनके पक्ष मे,  व्यवसाय की सफलता की  कमाना, नौकरी पाने की लालसा, बच्चों की सफलता का आशीर्वाद, संतानों  की शीघ्र और अच्छी शादी की कामना  आदि का निवेदन गोलु देवता के समक्ष याचिकाओं के रूप मे किया जाता है।  कहने का तात्पर्य हजारों समस्याओं के लिये गोलु देवता के समक्ष हजारों हजार याचिकाये।  इन याचिकाओं मे श्रद्धालुओं द्वारा ये भी उल्लेख किया जाता है कि उनकी मनोकामना पूर्ति होने या समस्या का निवारण होने पर वायदा अनुसार पीतल की घंटी गोलु देवता को समर्पित करेंगे। 

मनोकामना की पूर्ति पर प्रतिवद्धता के परिणाम स्वरूप श्रद्धालू  पीतल की ये घंटियाँ गोलु देवता के मंदिर को  समर्पित की जाती हैं। हमने मंदिर मे 1 कुंटल से अधिक के भारी भरकम घंटे से लेकर 100, 50 ग्राम की छोटी-छोटी घण्टियों के रूप मे मंदिर प्रांगण के चारों ओर देखा। मंदिर की मुख्य प्रतिमा गौर वर्ण भैरव देवता के रूप मे एक छोटे से मंदिर मे विराजमान है। इस मुख्य  मंदिर मे बमुश्किल तीन चार आदमी एकसाथ दर्शन कर सकते है। मंदिर के चारों ओर विशाल टीन शेड के दोनों ओर जमीन से लेकर टीन शेड के ऊपरी हिस्से मे लगे लोहे की लंबी  मजबूत छड़ों की तीन-चार कतारों मे पीतल की घंटियाँ लटकी हैं। मंदिर तक जाने बाले रस्तों के दोनों ओर सिर्फ और सिर्फ पीतल के छोटी बड़ी घंटियाँ चारों तरफ नज़र आती है।  हल्की और मध्यम बजन की घण्टियों को मध्य और उपर की कतारों मे लटकाया गया है जबकि भारी भरकम घंटों को निम्न कतारों मे मोटे मोटे एंगल मे लटकाया गया हैं। मंदिर के खुले आँगन के चारों ओर बाउंड्री वाल पर भी इसी तरह लोहे के छड़ों पर छोटी बड़ी घंटियाँ लगाई गई है और भविष्य मे श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित की जाने बाली घण्टियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

इस मंदिर की छोटी बड़ी घण्टियों की यदि गणना की जाये तो इनकी संख्या लाख के उपर तो होगी ही। ये लाखों घंटियाँ प्रतीक है गोलु देवता के प्रति श्रद्धा और विश्वास का, उनके प्रति भक्ति का, उनके प्रति आस्था का। इस आस्था विश्वास मे श्रद्धालुओं की समस्या का निवारण उनके कष्टों का हरण, भक्तों के दुःखों का समाधान पीतल की छोटी बड़ी घण्टियों के रूप मे मंदिर के प्रांगण मे चारों ओर दृष्टिगोचर होता है। त्वरित न्याय के प्रतीक भगवान गोलू देवता को सादर नमन्।

विजय सहगल