रविवार, 28 अप्रैल 2019

सेवानिव्रत बेरोजगार


सेवानिव्रत बेरोजगार




युवा अवस्था मे जब रोजगार की तलाश थी तब चाहत थी एक अदद नौकरी की ताकि नौकरी कर अर्थ उपार्जन किया जा सके। प्राथमिकता धन अर्जन थी। पर आज लगभग 40 साल की बैंक सेवा के बाद जब अप्रैल 2018 मे सेवानिव्व्रत हुआ तब कभी सोचने का समय ही नहीं मिला कि रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे या कैसे समय व्यतीत करेंगे? चूंकि रिटायरमेंट के पूर्व  अप्रैल मे ही हमने हमारे मित्र यशवीर सिंह के साथ जून 2018 मे श्री अमरनाथ यात्रा जाने का परिवार सहित कार्यक्रम बना लिया था अतः सेवा निव्रति के बाद यात्रा का परमिट, मेडिकल सर्टिफिकेट आदि मे और यात्रा के उपयोग मे आने बाले समान जैसे, गरम कपड़े, बरसाती, जूते, छाता आदि की व्यवस्था करने मे 2 महीने कैसे निकल गये पता नहीं चला। 7 जुलाई 2018 मे यात्रा की बापसी  के कुछ समय बाद से सेवानिव्व्रत जीवन का अहसास होना शुरू हो गया। जुलाई के अंत तक खाली बैठने का अहसास खलने लगा था। अब प्राथमिकता अर्थ उपार्जन नहीं था अपितु समय का उपयोग न  हो पाना अब कुछ-कुछ समस्या होने लगी थी। भगवान श्री कृष्ण ने श्री भगवत् गीता के  एक श्लोक मे कहा हैं जिसके अनुसार मनुष्य एक पल भी बिना कर्म किये नहीं रह सकता।  इसलिये अब  अकर्मणता कुछ कुछ कष्टप्रद होने लगी थी।  कभी विचार भी आया तो ये सोच कर कि 40 साल बैंक की सेवा का अनुभव हैं कहीं न कहीं अनुभव का लाभ लेकर अपना समय व्यतीत कर लेंगे।

हम सोच कर खुश थे कि बैंक ने एल॰आर॰एम॰रिव्यूर का कार्य सेवानिव्रत अधिकारियों से कराना शुरू कर दिया हैं। इस तरह कुछ समय तो व्यस्त रहकर टाइम पास हो जायेगा, लोगो से मेल-मुलाक़ात एवं कुछ आर्थिक लाभ तो अतरिक्त फायदे के रूप मे होगा ही। यही सोच कर हमने  सेवानिव्रति के बाद एल॰आर॰एम॰ रिव्यूर के लिये  बैंक मे दो बार आवेदन डाला, सोचा निरीक्षण विभाग मे 6-7 साल एवं 39 साल का बैंक सेवा  के अनुभव का लाभ मिलेगा पर एक साल बाद तक भी कुछ जबाब नहीं आया। हो सकता हैं कुछ पैमाने पर नियम शर्ते मैं पूरी न कर पाया हूँ।  

जैसे जैसे समय व्यतीत होने लगा समय का उपयोग या अपने को व्यस्त रखने के प्रयास करने की  धारणा दिन-व-दिन गहरी हो रही थी वेशक अर्थ उपार्जन न हो।

चूंकि हम लोग गायत्री परिवार से जुड़े थे संस्था से संपर्क किया कि क्या  मैं समय दान कर संस्थान की  कुछ सेवा अपने प्राप्त अनुभव के आधार पर कर सकता हूँ? तो हमे बताया गया कि इस संबंध मे उनके कुछ नियम है जिसके अनुसार प्रत्येक सेवक को हरिद्वार मे 9 दिवसीय सत्र मे शामिल होना होगा उसी दौरान या उसके बाद ही आप समय दान देने की पात्रता रखेंगे। यह सोच कर हमने अगस्त 2018 मे 9 दिवसीय सत्र मे श्रीमती जी के साथ भाग लिया। अद्भुद अनुभव रहा यध्यपि दिनचर्या कठिन थी। पर विभिन्न शहरों से आये परिजनों के साथ बड़ी आत्मीयता के साथ रहकर समय कैसे व्यतीत हुआ पता ही नहीं चला। पर बाद मे पता चला कि इस 9 दिवसीय सत्र के बाद 1 माह का विशेष सेवा सत्र करने के बाद ही आप समय दानी कार्यकर्ता बन सकेंगे। कुछ परिस्थिति ऐसी बनी कि एक माह के सत्र के लिये समय नहीं निकाल सके और ये मिशन भी अधूरा छूट गया। इसी दौरान चेतना केंद्र जो कि गायत्री परिवार का एक बड़ा केंद्र नोएडा मे हैं के एक परिजन से संपर्क हुआ कि शायद नोएडा मे ही कुछ समय दान देकर अपनी  कुछ दिनचर्या मे व्यस्त रहा जाय परंतु एक-दो बार वहाँ गये भी और आने का अपना आशय बताया, उन्होने हमारा मोबाइल नंबर नोट कर लिया कि समय आने पर हम आपको सूचित करेंगे पर कोई भी सूचना कभी नहीं आयी हम फिर सेवानिव्वृत बेरोजगार बने रहे।

एक बार प्रधानमंत्री के ट्वेट्टर अकाउंट पर सेवानिव्रत अधिकारियों कर्मचारियों कि सेवाये देश और समाज हित मे लेने का आग्रह किया हमने लिखा मेरे जैसे लाखों लोग वगैर किसी आर्थिक लालच या लाभ लिये देश और समाज के लिये अपना समय दान देने को तैयार हैं, आप इन लाखों रिटायरमेंट व्यक्तियों की सेवा और अनुभव का निशुल्क  लाभ ले सकते हैं। ये कुछ भी कार्य हो सकता हैं जो वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, पद और प्रथिष्टता के अनुरूप हो। पर कोई जबाब आना  नहीं था, न आया, बैसे हमे इसकी अपेक्षा भी नहीं थी।

इसी उधेड्बुन मे हर रोज नये विचार आते, बनते और विखर कर टूट जाते। कभी एक दो बहुत नजदीक मित्रों श्री यशवीर और श्री संजय पांडे से इस सेवानिव्रत बेरोजगारी पर लंबी चौड़ी  चर्चा होती पर बगैर किसी नतीजे पर पहुंचे बंद हो जाती। हाँ एक बात अवश्य होती चर्चा का बह समय या यों कहे गपशप  बहुत अच्छे से  व्यतीत हो जाता। समय यों ही अपनी गति से आगे बढ़ता रहा। सुवह-शाम की सैर और थोड़ा लेखन मे समय व्यतीत होता रहता था पर फिर भी कहीं न कहीं खाली समय का उपयोग करने की जद्दोजहद चलती रहती। इसलिये जब कभी भी अपने पैतृक घर, झाँसी  या निवास ग्वालियर/भोपाल या कहीं भी जाने का कोई भी बहाना मिलता मैं बगैर किसी देरी के  वहाँ चल देता ताकि किसी भी तरह समय पास हो। एक बार जब मैं शायद 8-9 मार्च 2019 मे  नोएडा मे होशियारपुर से होकर निकल रहा था वहाँ मैंने छोटे छोटे मजदूर गरीब  बच्चों की दशा देखी तो दिल के किसी कोने मे उनके लिये कुछ करने का मन किया। जिसका उल्लेख हमने अपने ब्लॉग "उड़ान" मे भी किया था। लेकिन क्या शुरू करे कुछ स्पष्ट नहीं सोच पा रहा था। हमारे मन मे हमारे एक सेवानिव्रत साथी श्री डी॰ आर॰ कालिया जी का उदाहरण कही जहन मे था जिसमे उन्होने अपने फ़ेस बुक पोस्ट मे अपने गाँव मे 10वी-12वी के बच्चों को पढ़ाने का उल्लेख किया था। एक दिन जब मैं सैक्टर 50 स्थित सफल सब्जी केंद्र के पीछे बनी झुग्गी बस्ती मे नवरात्रों मे बच्चों को कुछ खाने की वस्तुएँ देने  गया था तो ढेर सारे बच्चे उस बस्ती मे  मिले थे। उन बच्चों से एक बार फिर से मिलने का मन हमे हुआ। उन से कैसे मिले, क्या कहे, उनके माँ-बाप से मिले, वे कैसे प्रतिउत्तर देंगे इन्ही सवाल-जबाबों मे अनेकों दिन  उलझा रहा। अनेकों बार हमने उनकी झुग्गी बस्ती मे जाने का मन  बनाया पर हर बार हमारे सामने हमारी पद-प्रतिष्टिता, नाम-ज्ञान-सम्मान, श्रेष्ठता का भाव   जैसे  छद्म आवरण आड़े आ जाते। पर इस चैत्र नवरात्रों के शुरू होने के कुछ दिन पूर्व एक दिन बैठे-बैठे अचानक मैं  बगैर घर मे किसी को बताये सारे छद्म आवरणों को पूरी ताकत के साथ  उतार फेंक कर उन की झुग्गी बस्ती की ओर  चला दिया। निर्मांधीन आवासीय बिल्डिंग "अंबिएंस" जो कि सैक्टर 50 मे जैन मंदिर के पास हैं। जब मैंने वहाँ स्थित गार्ड श्री सुशील से बच्चों के बारे मे जानकारी चाही तो उसने बताया  उक्त बिल्डिंग के निर्माण मे लगे मजदूरों के परिवार बच्चों के साथ  उस बिल्डिंग के सामने टीन शेड से बनाई गई झुग्गी बस्ती मे रहते हैं। उसने आवाज देकर सारे बच्चों को बुलाया जो यों ही खेल-कून्द कर रहे थे। 4 साल से 10-11 साल के लगभग 25-30 बच्चे उस बस्ती मे थे। जब हमने उनसे पूंछा की कौन कौन बच्चा स्कूल जाता हैं तो पता चला सिर्फ 3-4 बच्चे ही स्कूल जाते हैं बाकी सभी बही झुग्गी के आसपास खेल कर यूं ही समय व्यतीत करते  रहते हैं। बहुत से बच्चों ने बताया की  बे यहाँ आने के पूर्व  अपने गाँवों मे स्कूल जाते थे। कोई बच्चा  दूसरी- तो कोई तीसरी या अन्य क्लास मे जाते थे। बच्चों ने बात चीत मे बताया वे भी पढ्न चाहते हैं। मैंने गहन विचार किया जो बच्चे स्कूल जाते हैं उनके लिये तो शायद सुविधायें कुछ कम-ज्यादा मिल ही जाती हैं, पर  ये जो बच्चे अपने माँ-बाप के जीवाका उपार्जन के कारण और आर्थिक कमी के कारण स्कूल नहीं जा पा  रहे हैं क्यों न ऐसे बच्चों के साथ पढ़ाई की क्लास शुरू की जाये?? हमने गार्ड श्री सुशील से इन बच्चों के माँ-बाप से मिलने की इच्छा  जाहिर की, गार्ड साहब भले आदमी थे उन्होने हमे शाम 7 बजे पर बुलाया। जब हम 7 बजे झुग्गी बस्ती पहुंचे और बच्चों के माँ-बाप से बातचीत की। हमने बच्चों को पढ़ाने की इच्छा  बताई। माँ-बाप ने संकुचाते हुए  सोचा शायद कोई फीस लेंगे उनमे से एक ने ऐसी शंका भी प्रकट की। मैंने बताया हम कोई पैसा या फीस नहीं लेंगे बच्चों को फ्री पढ़ायेंगे। अब मेरा अगला लक्ष्य क्लास के लिये जगह एवं पढ़ाई के साधन जुटाने मे था। जब जगह के लिये हमने गार्ड साहब से पूंछा तो उन्होने मुंशी जो मजदूरों का ठेकेदार था बात की उसने हमे कल बुलाया, गार्ड ने झुग्गी के प्रवेश द्वार पर जगह की सफाई कराने का आश्वासन दिया, जब दूसरे दिन 4 अप्रैल को  गये तो न तो जगह साफ हुई न ही मुंशी मिला मोबाइल पर बात की तो शाम को आने के लिये बोला। शाम को गये तब भी बही हल। इस बीच मैं मन  बना चुका था कि नवरात्रि अच्छा दिन हैं क्यों न क्लास कि शुरुआत 6 अप्रैल नवरात्रि को करें। अब मात्र एक दिन था 5 अप्रैल को भी सुबह जब पहुंचे तो गार्ड जी ने अपनी लाचारी दिखाई कि जिसे सफाई के लिये बोला था बो आया नहीं आदि आदि। तब मैंने कहा गार्ड साहब मैं 6 अप्रैल को किसी भी कीमत पर बच्चों कि क्लास शुरू करूंगा चाहे व्यवस्था बने या न बने। 5 को भी जब कुछ नहीं हुआ तो सबसे पहले हमने पढ़ाई के लिये सामाग्री कि तलाश शुरू की। अब जगह से ज्यादा सामाग्री की आवश्यकता थी। न तो वर्ण माला की कोई किताब हमारे पास थी। हम जब पास ही मार्केट मे गये तो एक मात्र किताबों की दुकान पर  अँग्रेजी की ही किताब या चार्ट थे गिनती का भी चार्ट भी हिन्दी मे नहीं था। तब शाम को हमने इंटरनेट का सहारा लिया। बचपन मे हमने हिन्दी बलपोथी की किताब से पढ़ाई की थी। नेट पर हिंदीबालपोथी का पीडीएफ़ कॉपी प्राप्त हो गई उसे हमने अपने लेपटोप पर डाऊनलोड कर लिया। हमे दुगनी खुशी हुई, एक तो हिंदीबालपोथी की किताब लगभग 55 साल बाद देखी, बैसी-की-बैसी, दूसरी खुशी  कुछ सामाग्री मिलने की थी, ताकि नवरात्रि पर कक्षा तो शुरू हो सके। 6 अप्रैल 2019 को सुवह 10 बजे  नहा धोकर ईश्वर को याद कर हम लेपटोप लेकर झुग्गी मे पहुँच गये। सभी बच्चों को झुग्गी मे आवाज देकर बुलाया। एक दो बड़े बच्चे जो 9-10 साल के होंगे उनको लेकर झुग्गी बस्ती का चक्कर लगाया ताकि क्लास के लिये जगह तलाशी जा सके। पींछे एक नई झुग्गी बनाई गई थी किसी नये मजदूर परिवार के लिये वह खाली पड़ी थी। एक कर्मचारी ने कहा जब तक मजदूर परिवार नहीं आता तब तक आप क्लास यहाँ लगा लो। हमे खुशी हुई चलो शुरुआत हो गई आगे  ईश्वर पुनः राह दिखा सहायता करेंगी। एक बच्चे ने झाड़ू लगा दी। बच्चे भी बड़े खुश एवं उत्साहित थे। लगभग   18-19 बच्चे एकत्रित हो गये। क्लास के पूर्व भगवान की प्रार्थना भी शुरू करनी थी। मोबाइल पर फिल्म अंकुश की प्रार्थना "इतनी शक्ति हमे देना दाता........." डाउन लोड कर प्रार्थना शुरू कर दी। कुछ बच्चे  हँसते कुछ बात करते प्रार्थना गुनगुनाते क्लास का शुभारंभ हो गया। सभी बच्चों का एक रजिस्टर मे नाम लिख कर उस दिन की हाजिरी लगाई। हाजरी के जबाब मे बच्चों के साथ "जय हिन्द सर" बोलना  तय हो गया। बच्चों को इसमे भी मजा आ रहा था।   लेपटॉप पर हिन्दी बाल पोथी की वर्णमाला एवं एक से सौ तक गिनती पढ़ाई। एक दो वर्णमाला के कार्टून गीत और "मछ्ली जल की रानी हैं" का विडियो भी बच्चों को दिखाया। क्लास के अंत मे एक-एक टोफ़्फ़ी देकर लगभग 2 घंटे मे क्लास समाप्त की। बहुत शानदार शुरुआत हुई। अगले दिन मजदूर परिवार के बगल मे दूसरी झुग्गी मे कक्षा लगाई इस क्लास  मे आधे मे टीन शेड था आधे मे नहीं। कुछ दिन बाद इसे भी खाली करना पड़ा।  दो दिन खुले मे  झुग्गी के बीच क्लास लगाई पर आधा घंटे मे ही धूप आने के कारण पुनः जगह बदली और झुग्गी बस्ती के प्रवेश द्वार पर एक पेड़ के नीचे कक्षा अब प्रातः 10 बजे से  नियमित चलने लगी हैं। एक दिन दरिया गंज मार्केट दिल्ली मे से वर्णमाला, गिनती, पशु, पक्षी, फल, सब्जी के चार्ट लेकर आये और बाजार से हिन्दी बलपोथी लाकर बच्चों मे बांटी ताकि क्लास नियमित चले। अब कुछ क्लास मे  स्थिरता बननी शुरू हो गई हैं। बच्चे बड़े होनहार हैं। बड़े स्कूल के बच्चों की तरह पानी की बोतल आधा लीटर से 2 लीटर तक की कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलों मे पानी लाते हैं, हर 15-20 मिनिट मे टॉइलेट की अनुमति मांगते वक्त उन के चेहरे कि शैतानी अलग झलकती। बैठने की जगह पर झाड़ू हर दिन कोई नया बच्चा लगता और उसकी कृतज्ञता को ज्ञापित करने के लिए सारे छोटे बच्चे सफाई करने बाले भैया को एक स्वर मे "थैंक यू भैया" कहकर आभार व्यक्त करते हैं। चप्पल भी हर बच्चे की करीने से लाइन मे लगा कर रखी जाती हैं। सुबह मेरे पहुँचते ही सभी बच्चे दौड़ कर नमस्ते सर कह कर हमारे बैग को उठाने की चाहत मे  एकत्रित हो जाते हैं। उन  बच्चों का हर  दिन जीवन के  अस्तित्व के लिये  एक नया संघर्ष की तरह होता क्योंकि पढ़ने परिस्थितियाँ ही कुछ  ऐसी हैं?    

यध्यपि सेवानिव्व्रति के बाद इस रोजगार से मैं खुश और संतुष्ट हूँ पर  इतिहास इस बात का गवाह हैं अमीरों के महल रूपी यज्ञ मे हमेशा गरीबों की  झुग्गी-झोपड़ी रूपी आहुतियाँ डाली जाती हैं। अभी इस झुग्गी बस्ती के मजदूरों  द्वारा निर्माणाधीन बिल्डिंग का कार्य पूर्णता की ओर हैं।  इसे विडम्बना ही कहेंगे इस अंधे विकास में जैसे-जैसे  इस बहुमंजिला इमारत का कार्य समाप्ति  की ओर होगा इस सोसाइटी मे विकास के अधिकारी पुरुष रहने  आयेंगे बैसे-बैसे इसके सामने की झुग्गी बस्ती का विनाश भी बढ़ता जायेगा और एकदिन समाप्ति की ओर अग्रसर  होकर "अमरता" को प्राप्त हो इतिहास के काल खंड का हिस्सा बन  जायेगा। साथ मे  समाप्त हो जायेगी इन मासूम बच्चों की पढ़ने की चाहत, इनकी रोज की प्रार्थना, इनकी रोज हाजरी रजिस्टर से हाजरी, इनकी वर्णमाला एवं गिनती और साथ मे इनकी कक्षा भी!!  जो नहीं समाप्त होगा बो कक्षा के इन बच्चों की यादें, इनकी मीठी मुस्कान, निश्चल प्रेम और समर्पण, इनके नेक इरादे और इन की पढ़ने और बढ्ने की चाहत एवं आत्मविश्वास। जैसा कि इन पंक्तियों मे इन मेहनतकश मजदूरों के बारे मे कहा हैं:-

अधिकतर हैं, पर कुछ हैं जो बिकते नहीं हैं।
हम वो नीव के पत्थर हैं जो लगते हैं, पर दिखते नहीं हैं॥

आइये, ऐसा कुछ होने के पूर्व हम आपको आमंत्रण दे रहे हैं इन बच्चों के साथ कुछ वक़्त  बिताने का??

आप आयेंगे न ??

आपके इंतज़ार मे हम नन्हें मुन्ने बच्चे :- इमरान, सुमित, राकेश, शाकिर, रिंकू, रोशनी, निशा, मुस्कान, फिजा, नाज़ परवीन, मासूम, गौतम, गोलू, किशन, धर्मेंद्र, परवीन खातून, सलमान, खुशी, आहिद तेजपाल, और पार्वती। 

विजय सहगल

4 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

तुमने निश्चय ही एक अंतहीन भगीरथ प्रयास किया है और इसमें अपने लक्ष्य की गरिमापूर्ण आहुति दी है जो आने वाले समय में औरों के लिए पथ प्रदर्शन का कार्य करेगा,अस्तु साधुवाद

aarorask ने कहा…

Very nice🙂🙂

Unknown ने कहा…

Nice sir ji

विजय सहगल ने कहा…

आप सभी महानभावों के प्रेरणास्पद संदेश के लिये धन्यवाद। आपके संदेश हमे अपने मार्ग पर उत्साहपूर्वक आगे बढ्ने के लिये ऊर्जा एवं शक्ति देंगे। सादर नमस्कार।