बुधवार, 1 मई 2019

मजदूर दिवस



मजदूर दिवस

आज 1 मई को बरबस ही बहुत से साथी याद आ जाते हैं जिनसे मैं पिछले 40 साल से उम्र के अलग-अलग पढ़ाव पर अलग अलग शहरों मे बैंक के संघर्ष मे उनका साथी रहा। वास्तव मे कहें तो जीवन मे अस्तित्व का एक बहुत बड़ा संघर्ष ताउम्र चलता रहता हैं जिसे हर व्यक्ति अपनी  तॉई लड़ता हैं किन्तु संघर्ष को जब कोई संस्था धार देकर किसी एक निश्चित दिशा मे मोड़ देती हैं तो वह संघर्ष एक विचार या यों कहे एक आंदोलन बन जाता हैं। ऐसे आंदोलन या विचार रूपी संस्था को गढ़ने बाले निश्चित ही वे लोग होते हैं जिन्होने  अपना जीवन अपने मकसद की प्राप्ति के लिए न्योछावर कर दिया। एआईबीईए एवं एआईबीओए   ऐसी  संस्थायेँ  हैं जो सच्चे अर्थो मे बैंक कर्मियों की लड़ाई को उनके हितों और अधिकारों के लिये तो तत्पर  है ही अपितु मजदूरों चाहे वे संगठित क्षेत्र के हों या असंगठित क्षेत्र के मजदूर उनके संघर्ष को अन्य मजदूर संगठनों के साथ राष्ट्रिय और अंतर राष्ट्रिय पर आगे बढ़ाया हैं। हमे याद हैं 1980 मे बैंकों के धरना प्रदर्शन मे उन दिनों लखनऊ मे कॉम॰ यू॰ सी॰ बाजपई (पंजाब नेशनल बैंक) और कॉम॰ आर॰ पी॰ सिंह (सेंट्रल बैंक) बैंक आंदोलन के झंडावरदार हुआ करते थे। कॉम॰ बाजपेई उन दिनों 55 वर्ष के उपर ही रहे होंगे पर अपने ओजस्वी विचारों और तेज दमदार आवाज से आंदोलन की शुरुआत करते थे। कॉम॰ आर॰ पी॰ सिंह अपने एक पुराने लेदर बैग मे आवश्यक परिपत्र लिये आंदोलन को नारे बाजी के बाद  संबोधित करते थे। कॉम॰ बाजपेई जी क्रमवद्ध तरीके से लगातार नारे वाजी करने बाले कॉमरेड पर नज़र रख हौसला अफजाई करते। आंदोलन प्रायः हज़रत गंज मे हनुमान मंदिर के सामने स्थित सेंट्रल बैंक की शाखा की सीढ़ियों पर होता। आंदोलन या प्रदर्शन के बाद बाजपई जी चैन से जब बीड़ी का कश खींचते थे वो उनका चेहरा आज भी हमारे ज़ेहन मे याद हैं। कॉम॰  सच्चे मायनों मे एक मजदूर।  उन जैसा बुजुर्ग नौजवान कॉमरेड आज देखने को नहीं मिलते। लखनऊ के  इन  दोनों सच्चे समर्पित एआईबीईए के  ध्वज वाहक बैंक  नेताओं  की पाठशाला के दरअसल हम विध्यार्थी थे जिनसे हम जैसे लोगो ने इन साथियों से मजदूर आंदोलन की क,,ग सीखी। एआईबीईए हमेशा संगठित होकर अपने बैंक कर्मी  सदस्यों के साथ संघर्ष के पथ पर अनासक्त भाव से चलते  हुए मंजिल पाने तक बढ़ते रहने  और  जुल्म ओं सितम के विरुद्ध लगातार संघर्ष का बिगुल बजाते रहने की प्रेरणा देता रहा हैं।

1984 मे जब स्थंतरण होकर ग्वालियर आये तो ग्वालियर की एआईबीईए यूनिट भी उन दिनो कॉम माखीजानी के नेतृत्व मे संघर्षरत थी। कॉम॰ मखीजानी के बाद  कॉम॰ विनोद बहल, कॉम॰ अतुल प्रधान, दाऊ दयाल वर्मा, कॉम॰ दानौरिया, कॉम॰ भरत शर्मा, कॉम॰ यशवीर, कॉम॰ बलबीर  एवं अन्य साथियों ने ग्वालियर मे एआईबीईए का झण्डा न केवल बुलंद किया बल्कि सफलता के साथ इस आगे बढ़ाया। ग्वालियर मे एआईबीईए के धरने प्रदर्शन प्रायः स्टेट बैंक ऑफ इंदौर की पाटनकर बाजार की शाखा पर होते रहें थे। यूनाइटेड फ्रंट के प्रदर्शन स्टेट बैंक की बाड़ा शाखा पर होते थे। बाड़े की  सिंधिया रियासत काल मे बनी बिल्डिंग के बीच बैंक कर्मियों का धरना, प्रदर्शन  बैंक कर्मियों के संघर्ष मे चार चाँद लगा देता। एआईबीईए एवं एआईबीओए संगठन की ग्वालियर यूनिट का काम वगैर किसी शंका के उत्तम रहा हैं। मई दिवस की रैली हो, बैंक की हड़ताल हो और ऐसे मे जुलूस न निकले ऐसा हो ही नहीं सकता। जब श्री ए॰ के॰ पुरवार, पूर्व चेयरमैन के विरुद्ध स्टेट बैंक की लगातार 5-6 दिन की हड़ताल मे सफलता न मिलने पर एआईबीईए/एआईबीओए ने अपना समर्थन दिया तब हमारे साथियों  की सफलता पूर्वक सहभागिता ग्वालियर के इतिहास दर्ज की गई थी।

1988-89 का छोटा कार्यकाल सागर, मध्यप्रदेश भी रहा, यहाँ पर श्री रमेश शुक्ला। दिनेश खरे उस समय एआईबीईए के पदाधिकारी थे। यध्यपि संख्या मे काम होने के बबजूद सदस्यों का समर्पण किसी से काम नहीं था। छोटे से शहर मे हड़ताल का जलूस या धरना प्रदर्शन त्वरित गति से खबर बन जाती थी। कॉम॰ शुक्ला के नेतृत्व मे बैंक ऑफ बड़ोदा मे प्रबन्धक के विरुद्ध किसी मुद्दे पर सारी रात चले उच्च अधिकारियों से वार्तालाप यादगार रही थी।

1996 मे रायपुर प्रवास हमारा प्रत्येक पैमाने पर   एक बहुत ही सफल एवं सुखद कार्यकाल रहा हैं। फिर  चाहे पैमाना संगांठनात्मक हो, शाखा या उसके व्यवसाय से जुड़ा हो, उत्तम एवं त्वरित ग्राहक सेवा से जुड़ा हो या हमारे शाखा की पहचान जिले के सबसे प्रभाव शाली व्यूरोक्रेसी रूपी मूल्यवान ग्राहकों मे की जाती थी। रायपुर कलेक्टरेट स्थित विस्तार पटल पर  कलेक्टरेट के अधिकारियों और कर्मचारियों से लगभग 20 साल बाद भी आज हमारे संबंध हैं। हमारे रिहाईश के आस पास भी सर्वोत्तम पड़ौसी भी इस कार्यकाल मे हमे मिले। जिनसे आज भी हमारे संबंध एवं संपर्क हैं। श्री डी॰के॰ चटेर्जी, कॉम॰ पुरषोत्तम और कॉम॰ चौधरी, पप्पू मुखर्जी निर्विवाद रूप से एआईबीईए एवं एआईबीओए  के कुशल संगठनकर्ता हैं। रायपुर यूनिट के समर्पित एवं क्रियाशील सदस्य प्रसंशा योग्य हैं। सालों साल बुढ़ापारा स्थित श्री डी॰के॰ चटर्जी के दो कमरे के छोटे से घर हमारा प्रायः आना जाना था। संगठन के प्रति दादा का समर्पण उनके छोटे से घर मे कागजों, फ़ाइलों किताबों  को  अस्त व्यस्त देख कर सहज ही लगाया जा सकता था। मैं उनसे हुई पहली ही मुलाक़ात से प्रभावित था। अपनी दुबली पतली क्रश काया पर सफ़ेद सफारी सूट मे दादा धरना, प्रदर्शन, आंदोलन मे अलग ही नज़र आ जाते थे और पान का अटूट शौक उनके लखनवी अंदाज़ को पान के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता था। मैंने दादा को हमेशा पूर्ण मान-सम्मान अपने बैंक के  किसी भी अन्य अधिकारी/नेता से अधिक दिया। हमारे जीवन का बह एक अविस्मर्णीय पल था जब दादा ने हमे कहा कि श्री ए॰वी॰ वर्धन जो उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव थे उनको रायपुर एयरपोर्ट से अपनी कार से लाकर शंकर नगर स्थित गेस्ट हाउस मे छोड़ना हैं। कॉम॰ चटर्जी जैसे एआईबीईए के  समर्पित कार्यकर्ता पर  हम सबको नाज़ हैं।

2010 से 2015 का कार्यकाल मेरा मध्य प्रदेश कि राजधानी भोपाल मे रहा। मध्यप्रदेश का पहले नंबर का शहर न छोटा न महानगर कि तरह, मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करता विकसित शहर हैं। एआईबीईए और एआईबीओए के संगठनात्मक रूप से वेमिसाल इस शहर मे संगठन बहुत ही मजबूत देखने को मिला। कॉम॰ वी॰ के॰ शर्मा उर्फ वीरू भाई (माफ करना पूरा नाम हमे भी नहीं मालूम यध्यपि मैं उन से बहुत ही क्लोज़ रूप से 5 साल जुड़ा रहा) एमपीबीईए  के न केवल माहासचिव हैं बल्कि भोपाल मे संगठन की रीढ़ हैं। अधिकारी कर्मचारी संगठन के अधिकतर समस्त बैंक वाइज़ यूनियन के मुख्य पदाधिकारी  यहाँ हैं जिनकी वजह से संगठन अत्यधिक मजबूत हैं। धरना प्रदर्शन मे सदस्यों की उपस्थिती देखने को बनती हैं। अखिल भारतीय बैंक संगठन के समस्त निर्देश शब्दशः यहाँ लागू किए जाते हैं। हड़ताल बाले दिन तो युवा लड़के एवं महिला साथी बड़ी संख्या मे बढ़ चढ़ कार हिस्सा लेते हैं। उनका हड़ताल या धरना प्रदर्शन मे शामिल होना नई पीढ़ी की तरफ से कुछ तस्सली देता हैं। लगभग 4000 कर्मचारी, अधिकारियों की संख्या को हड़ताल मे शामिल होते मैंने स्वयं देखा हैं। वीरू भाई के अलावा, श्री दीपक रत्न शर्मा, कॉम॰ पौददार, कॉम॰ पौनीकर, कॉम॰ जे॰पी॰ दुबे, कॉम॰ शिंदे, कॉम॰ कुरैशी, कॉम॰ रावत, कॉम॰ गुनशेखरन, कॉम॰ बाबू लाल, जैसे अंगिनित साथी हमेशा धरना प्रदर्शन मे वगैर किसी चूक के शामिल होते हैं। प्रदर्शन प्रायः एमपी नगर मे स्थित ओबीसी, बीओआई, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, मे होते हैं। बड़े अफसोस और दुख: हैं कि भोपाल, रायपुर, ग्वालियर और यहाँ तक सागर कि पोस्टिंग के दौरान हमने बैंक कर्मियों, अधिकारियो का जुझारूपन, इतना समर्पण,  इतना उत्साह, इतनी संख्या मे संगठन के कॉल पर एकत्रित होना देखा हैं बैसी प्रतिबद्धता हमने  2015 से 2018 तक देश कि राजधानी दिल्ली मे पदस्थ रहते हुए, कभी भी  दूर दूर तक नहीं देखी। जबकि दिल्ली मे भोपाल के मुक़ाबले बैंक कर्मियों कि संख्या दस गुने से ज्यादा ही होगी। आज के इस सूचना माध्यमों कि तकनीकी प्रधान युग मे दिल्ली मे बैंक कर्मियों, अधिकारियों का  आपसी संवाद  न के बराबर हैं। जो संगठन के लिये निश्चित तौर पर चिंता का विषय होना चाहिये।

आइये आज मई दिवस पर हम संकल्प ले कि हमारे पितृ संगठन एआईबीईए एवं एआईबीओए को अधिक से अधिक मजबूत करने का कार्य करे। मजदूर दिवस पर सभी सथियों को बहुत बहुत बधाई।

विजय सहगल

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