"श्री भद्र मारुति मंदिर, ग्राम-वेरुल, संभाजी नगर महाराष्ट्र"
रविवार
13 जुलाई 2025 को अपने यात्रा प्रवास के दौरान महाराष्ट्र राज्य के संभाजी नगर
जिले मे स्थित खुल्दाबाद मे स्थित श्री भद्र मारुति मंदिर मे लेटे हुए हनुमान जी
के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस पवन भूमि के आसपास जहां बारहवें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर (5 किमी॰), विश्व
प्रसिद्ध एलोरा की गुफाएँ (4किमी॰) की दूरी पर स्थित हैं। प्रातः ज्योतिर्लिंग
घृष्णेश्वर के परम दर्शनों के पश्चात शाम को जब विदित हुआ कि यहाँ लेटे हुए हनुमान
जी का मंदिर है तो दर्शनों की अभिलाषा बलवती हो गई। इसके पूर्व प्रयागराज मे
अनेकों बार जाना हुआ और हाल ही मे महा कुम्भ मे पूरे कुम्भ क्षेत्र मे भी घंटों
रहना और भ्रमण करना हुआ, मन मे तीव्र आकांक्षा और अभिलाषा के
बावजूद पर प्रयाग के संगम तट पर स्थित लेटे हनुमान के दर्शन अत्याधिक
भीड़ के कारण भाग्य मे नहीं लिखे थे, लेकिन कहीं कुछ तो नियति या प्रारब्ध था कि प्रयाग मे लेटे हुए हनुमान के दर्शनों के पूर्व हजारों
किमी॰ दूर, लेटे हनुमान श्री भद्र मारुति के दर्शन संभाजी
नगर के खुलदाबाद कस्बे मे होंगे। वास्तव मे मुझे तो जानकारी भी नहीं थी कि प्रयागराज
के अलावा कहीं अन्य जगह भी कोई लेटे हुए हनुमान का मंदिर भी है? बाद मे ज्ञात हुआ कि प्रयागराज और भद्रवती (खुल्दबाद) के साथ ही मध्य
प्रदेश के जिला पाढुर्ना पूर्व छिंदवाड़ा के
जामसावली मे भी लेटे हुए हनुमान मंदिर स्थित हैं।
मंदिर
मे लेटे हुए हनुमान जी के दर्शनों की एक अलग ही उत्कंठा, उत्सुकता
और उमंग मन मे लिए हम अपनी पत्नी रीता के साथ मंदिर मे पहुंचे। मंदिर के
विशाल प्रांगण देख कर, नये शहर मे कार पार्किंग के अदृश्य भय और चिंता नहीं रही। हम लोग शायद
मंदिर के पिछले गेट से प्रवेश कर एक विशाल बरामदे और हाल को पार कर मंदिर प्रांगण
मे पहुंचे। रविवार के कारण बहुत ज्यादा श्रद्धालु नहीं थे। प्रायः मंगलवार और
शनिवार को भक्तों की परंपरागत भीड़ तो पूरे भारत मे सर्विदित है लेकिन इस मंदिर मे हनुमान
जयंती और रामनवमी पर पूरे संभाजीनगर क्षेत्र से लोग पैदल चलकर दर्शनों को आते हैं।
ऐसी किवदंती है कि प्राचीन काल मे खुल्दाबाद जिसे भद्रावती के नाम से जाना जाता है, के महान प्रतापी शासक राजा
भद्रसेन, भगवान राम के परम भक्त थे और उनकी स्तुति मे अपने
सुमधुर कंठ से उनके भजन गाया करते थे। एक बार राजा भद्रसेन के भक्ति गीतों को श्री
हनुमान जी मंत्रमुग्ध हो भाव विभोर हो गये
और अनजाने मे ही समाधि मे लीन हो कर विश्राम की मुद्रा मे लेट गए। जब राजा ने हनुमान जी को समाधि की अवस्था
मे देखा तो उनसे सदा यहीं रह भक्तों को अपना आशीर्वाद देने की प्रार्थना की। राजा
की अटूट भक्ति और श्रद्धा से हनुमान जी प्रसन्न हो गए और शास्वत रूप से विराजमान
हो कर अपना आशीर्वाद प्रदान किया। ऐसी भी मान्यता है कि हनुमान जी जब लक्ष्मण के
मूर्छित होने पर हनुमान जी जिस पर्वत को लेकर लंका जा रहे थे रास्ते मे इसी स्थान
पर उन्होने विश्राम किया था। एक अन्य लोककथा के अनुसार प्रसिद्ध संत श्री स्वामी
समर्थ रामदास ने लेटे हुए हनुमान की खोज की थी और इस स्थान को श्री भद्र अर्थात "शुभ" और मारुति अर्थात "हनुमान" मंदिर के रूप
मे स्थापित किया।
मध्यकाल
मे जब इस क्षेत्र पर मुगलों का कब्जा हो गया तो आततायी मुगलों द्वारा इस मंदिर को
भी नष्ट किया गया लेकिन कुछ लोगों ने मंदिर की प्रतिमा को बचा कर छुपा दिया। 1960
मे प्रतिमा को इस भव्य मंदिर मे स्थापित कर इसे वर्तमान स्वरूप दिया गया तब से इस
मंदिर मे श्री भद्र मारुति के दर्शनों हेतु श्रद्धालु बड़ी संख्या मे हर रोज आते
हैं। मंदिर मे भगवान श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता के भी मंदिर हैं।
मंदिर
के केंद्र मे स्थित गर्भगृह मे श्री हनुमान की लेटी हुई प्रतिमा है। प्रतिमा के
चारों ओर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बड़ी बड़ी जंगले/खिड़की नुमा आकृति बनाई गयी है
जहां से भक्तगण मारुति नन्दन के दर्शन कर सकते हैं जिनको स्टील की रैलिंग द्वारा
घेरा गया हैं जिसमे से होकर दर्शनार्थी दर्शन करते हैं। हम दोनों मे भी परिक्रमा लेते हुए भद्र मारुति हनुमान की प्रतिमा के दर्शन, हर दिशा
और कोण से किए। तत्पश्चात मंदिर मे स्थित गर्भगृह के चारों ओर बने मंडपम मे बैठ कर
श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया।
जहां
एक ओर महाराष्ट्र के संभाजी नगर जिले मे स्थित तहसील खुल्ताबाद के वेरुल गाँव की इस
धरा पर सनातन धर्म के पवित्र बारह ज्योतिर्लिंग मे से एक घृष्नेश्वर महादेव स्थित है और दुनियाँ का सबसे सुंदर
एक चट्टान को काट कर, तराशकर बनाई गयी एलोरा की विश्वप्रसिद्ध
गुफाएँ विशेषकर (गुफा संख्या सोलह) कैलाश मंदिर होने का सौभाग्य प्राप्त है वहीं एक
दुष्ट, आततायी, धर्मांध मुगल शासक औरंगजेब
की मृत्यु स्थल भी यहाँ है। समय एक साक्षी की तरह वेरुल मे दुनियाँ को ये संदेश देता
है कि सनातन के बारह ज्योतिर्लिंग मे से एक और विश्व के सर्वाधिक एलोरा निर्माण को
देखने हर रोज़ लाखों लोग यहाँ आते हैं वहीं ध्वंस का प्रतीक की मज़ार पर कदाचित ही लोग
जाते हैं।
विजय
सहगल





1 टिप्पणी:
*देश के विभिन्न पर्यटक स्थलों,देव स्थानों के विस्तारपूर्वक आलेखों को पढ़कर इतना अंतर तो स्पष्ट हो गया कि आप की जिज्ञासा प्रवृत्ति व स्थान संबंधी जानकारियां एकत्रित कर संस्मरणों को भाषा बद्ध कर प्रस्तुत करना काबिल-ए-तारीफ़ है जबकि हममें से अधिकांश सैर-सपाटा कर लौट आते हैं और दीर्घ कालांतर के बाद लगभग विस्मृत से हो जाते हैं।*
*कुछ वर्षों से एंड्रॉयड फोन के माध्यम से तस्वीरों या वीडियोग्राफी कर यादें अवश्य संजोली जाती है।सेल्फी का ट्रेंड भी चल रहा है जिसमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके। खैर,यह सब अतिउत्साह व लापरवाही के परिणाम हैं।*
*श्री भद्र मारुति मंदिर,ग्राम -वेरुल, औरंगाबाद जो अब संभाजी नगर है,के पावन दर्शन का संस्मरण आपके अन्य संस्मरणों की तरह सराहनीय व अनुकरणीय है। आपका अनेकानेक साधुवाद।*
👌👌👌🌹🙏🌹👍👍👍
सुरेन्द्र सिंह कुशवाहा ग्वालियर
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