"जॉर्ज
सोरोस - विक्षिप्तचिन्तनम्"
हंगरी मे सन 1930 मे जन्मे 93
वर्षीय अरबपति अमेरिकन उधयोगपति जॉर्ज सोरोस
आज कल देश सहित दुनियाँ मे भारत की लोकतान्त्रिक मोदी सरकार को अपदस्थ करने के दुष्टता
पूर्ण, पैशाचिक,
धूर्त कलुषित वक्तव्य के लिये कुचर्चित
है। जॉर्ज सोरोस दूसरे विश्व युद्ध मे
अपनी नकली पहचान के आधार पर जान बचा कर हंगरी छोड़ने वाला एक कायर भगोड़ा इंसान है। कुली और होटल के रेस्टुरेंट मे सेवक
के कार्य करने वाले निर्धन और संघर्ष शील युवक से अपेक्षा थी कि धन,
संपत्ति वैभव अर्जन, व्यक्ति को नम्र और
संस्कारवान बना समाज कल्याण और लोक कल्याण
के लिये प्रेरित करेंगे पर दुर्भाग्य से ऐसे संत पुरुष विरले ही होते है जो धन,
वैभव, यश,
कीर्ति के साथ नम्र, सौम्य,
सभ्य और सुशील भी हों? शायद ऐसे ही दुष्ट
और लंपट लोगो के बारे मे शतकों पूर्व हमारे ऋषि महापुरुष श्री भर्तृ हरि ने अपने नीति शतक के श्लोक संख्या 65 मे लिखा था-:
एके सत्पुरुष: परार्थघटकाः स्वार्थम परित्यज्य ये,
सामान्यास्तु परार्थ मुध्यमभृतः, स्वार्थाविरोधन ये,
तेsमी मानुष राक्षसाः परिहितं स्वार्थाय निघ्नन्ति ये,
ये निघ्नन्ति निर्थकं परहितं, ते के न जानीमहे . (भर्तृ हरि -नीति शतक, श्लोक-६५)
अर्थात
वे "मनुष्य उत्तम कोटि" के है जो स्वार्थ का परित्याग करके दूसरे की भलाई करते है.
अपना हित करते हुए जो दूसरे का भी हित करते है, वे "मध्यम कोटि के मनुष्य" कहलाते है.
जो मनुष्य स्वार्थ सिद्धि के लिए दूसरे का अहित करते है, वे" मनुष्य के रूप में राक्षस" है.
किन्तु जो मनुष्य बिना किसी स्वार्थ के दूसरे का अहित करते है, उन्हें क्या नाम दिया जाय हम नहीं जानते?
उक्त श्लोक से उक्त स्पष्ट है कि जॉर्ज सोरोस की मानसिकता कितनी अधम और ओछी है कि बिना अपने किसी स्वार्थ के वह भारत की लोकतान्त्रिक पद्धति को अपने धन दौलत के मद मे अंधे होकर तोड़ने का कुप्रयास कर रहा है। ऐसा नहीं है कि इसके पूर्व इसने इस तरह के कृकृत्य इसके पूर्व मे न किए हों! "अमेरिका के वाशिंगटन पोस्ट" समाचार पत्र मे दिनांक 11 नवम्बर 2003 मे प्रकाशित अपने साक्षातकर मे इस पाखंडी ने जनतांत्रिक पद्धति मे हस्तक्षेप करने का एक घिनौना प्रयस किया था जब इसने अपनी सारी संपत्ति ऐसे व्यक्ति को देने का खुल्लम-खुल्ला एलान किया था जो राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को हटाने की गारंटी लेता हो!! यही नहीं इस व्यक्ति ने अमेरिका मे 9/11 के हमले मे शामिल आतंकवादियों के विरुद्ध कार्यवाही का विरोध किया था। ये उसकी मूढ़ता, हटधर्मिता और दुस्साहस की पराकाष्ठा थी जो कि अमेरिका जैसे लोकतान्त्रिक देश को अपनी मन मर्जी से चलाने का कुकृत्य करने का प्रयास कर रहा था। देश मे धारा 370 के माध्यम से कश्मीर के विशेष दर्जे के समापन का भी विरोध जताया था!! उसने मोदी को झुकाने का दंभ भरते हुए भारत के लोकतन्त्र को चुनौती दी!! यह एक अहंकारी, घमंडी और उद्दंड व्यक्ति की भाषा थी जो भारतीय पुराणों मे एक समय, असुर राज "हिरण्य कश्यप" ने की थी और जिसे भगवान नरसिंघ ने अवतार ले कर हिरण्य कश्यप के अहंकार का संहार कर उसका वध किया था वैसे ही हमारे देश के जागरूक नागरिक अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों की रक्षा करते हुए जॉर्ज सोरोस की इस असुर विचारधारा को भी समूल नष्ट कर, इस दुष्ट को माकूल जवाब देंगे।
दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतन्त्र के शालीन और सौम्य विदेश मंत्री श्री एस जयशंकर ने अपनी सुशील और भद्र लेकिन सारगर्भित भाषा मे ठीक ही जवाब देते हुए जॉर्ज सोरोस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि, "जॉर्ज सोरोस एक बूढ़ा रईस, पूर्वाग्रही और खतरनाक व्यक्ति है"! उन्होने कहा कि, "वह एक ऐसा व्यक्ति है जो अपनी सोच से दुनियाँ को चलाना चाहता है", "किस देश मे कैसी विचार धारा बनाई जाय, वह इसमे निवेश करता है"। आगे उसकी मानसिकता पर टिप्पड़ी करते हुए श्री जय शंकर जी ने कहा कि, "लोकतन्त्र तभी बेहतर है, जब उसमे उसकी सोच के मुताबिक लोग विजयी हों!! लेकिन जब अनपेक्षित परिणाम आते है तो वह उस लोकतन्त्र मे खामियाँ निकालने लगता है!!"
जॉर्ज सोरोस भारत मे "ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन" नामक एनजीओ की आड़ मे अपनी विचारधारा को फैलाने का षड्यंत्र रच रहा है। बैसे काँग्रेस सहित कई दलों ने जॉर्ज सोरोस की इस मत से असहमति जता उसकी विचारधारा का विरोध किया है पर कहते हुए अफसोस है कि देश की सबसे बड़े राजनैतिक दल "भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस" द्वारा प्रायोजित "भारत जोड़ो यात्रा" मे श्री राहुल गांधी के साथ जॉर्ज सोरोस के तथाकथित एनजीओ "ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन" से संबद्ध अधिकारी श्री सलिल शेट्टी, हर्ष मंदर और सुश्री अमृता सिंह (जो पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की पुत्री है) सहभागिता करते नज़र आये!! जो इस भारत जोड़ो यात्रा के एजेंडे की मनसा और इरादे मे संदेह पैदा करते है। यही नहीं पिछले दिनों दिल्ली के शाहीन बाग मे देश मे अशांति और उपद्रव फैलाने वाले सीएए/एनआरसी जैसे आंदोलन मे भी जॉर्ज सोरोस के एनजीओ के अधिकारियों की संलिप्तता पर्याप्त संदेह पैदा करती है कि जय चंद और मीर जाफ़र जैसे लोग आज भी जिस थाली मे खा रहे है उसी मे छेद करने के षड्यंत्र मे शामिल है। तब ये विचार और भी पुख्ता होता है जब ये ही गेंग किसान आंदोलन, लाल किले पर खालिस्तानी आंदोलन के साथ खड़े नज़र आते है!! तब जॉर्ज सोरोस जैसे व्यक्तियों द्वारा आर्थिक सहायता दे इस तरह की गतिविधियों को पोषित करने और इन आंदोलनों को लंबे समय तक चलाने की गुप्त रूप रेखा को समझने कहीं कोई शक की गुंजाइश नहीं रहती। सरकार को जॉर्ज सोरोस के संगठन के लाभार्थियों पर पैनी निगाह रखने की अवश्यकता है ताकि ऐसी लोकतन्त्र विरोधी ताकतों को देश के समक्ष उजागर किया जा सके।
विजय सहगल



1 टिप्पणी:
बहुत सुंदर सहगल जी । आपने राहुल गांधी और जार्ज सोरेस के प्रतिनिधियों की साँठगाँठ को सबूत सहित उजागर किया । जार्ज सोरेस की कार्यशैली और घृणित मानसिकता को भी बहुत सुंदर व साफ़ शब्दों में उजागर किया ।
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