"ट्वीटर की
"सीनाजोरी"!!"
आज
के इस तेज सूचना प्रोधौगिकि जीवन मे सूचनाओं की मानों बाढ़ आ गयी। सोशल मीडिया के
माध्यम से हर व्यक्ति के पास आने वाली हजारों हज़ार सूचनाओं का विश्लेषण आसान काम
नहीं रहा। जहां एक ओर सकारात्मक, शिक्षाप्रद और ज्ञानवर्धक संदेशो ने इन मंचों की सार्थकता को बढ़ाया है वही इसके
विपरीत इस सूचना तकनीकि ने अभिव्यक्ति की
आज़ादी की आड़ मे असामाजिक तत्वों, येन केन प्रकारेण सत्ता
हथियाने की इन राजनैतिक दलों की लालसा एवं विदेशी आर्थिक सहायता पाने वाले निहित
स्वार्थी तत्वों द्वारा छद्म, झूठे,
भड़काऊँ एवं आपसी वैमनस्य और सद्भाव बिगाड़ने वाले संदेशों,
फोटो एवं वीडियो ने सामाजिक माध्यमों
के इस्तेमाल को दूषित और प्रदूषित किया
है। व्हाट्सप, ट्वीटर जैसे सोशल माध्यमों पर विध्वंसक पोस्ट, फोटो, वीडियो की सूचनाओं के प्रेषण और पुनः प्रेषण
(forward) से ये पता करना असंभव हो गया है कि बदनीयती से प्रेषित, कूट रचित पोस्ट का स्त्रोत क्या है? किस अपराधी व्यक्ति
ने सामाजिक माधुर्य को बिगाड़ने का संदेश सबसे पहले प्रेषित कर सद्भाव को बिगाड़ने का
कुत्सित कृत किया? मानसिक रूप से विक्षिप्त ऐसी सोच के मूल
उद्गम स्थल वाले व्यक्तियों और सोशल मीडिया मंचों की जबाबदेही के अभाव मे ऐसे तत्वों के विरुद्ध
कानूनी कार्यवाही एक दुरूह और कठिन कार्य हो गया है। सूचनाओं के इस सैलाब मे ये
जान पाना कठिन हो गया है कि माहौल बिगाड़ने की तह मे कौन लोग है? कभी कभी तो ऐसा प्रतीत होने लगा
है कि इन सोशल माध्यमों को सदुपयोग से ज्यादा दुर्पयोग होने लगा है। तब सवाल उठता
है कि सामाजिक माध्यमों के इन मंचों पर कैसे नियंत्रण किया जाये?? सामाजिक ताने बने को अक्षुण और आपसी सद्भाव कायम रखने के प्रयास के तहत, क्यों न एक विकल्प के रूप मे इन सोशल माध्यम मंचों पर देश मे प्रतिबंध
लगाने पर विचार किया जाना चाहिये??
अभी
हाल ही मे पिछले दिनों गाजियाबाद के मुस्लिम वृद्ध अब्दुल समद के एक वाइरल वीडियो
मे देखने को मिला जिसमे उससे "भगवान श्री राम" और
"वन्देमातरम" कहलवाने के नाम पर एक राजनैतिक दल के उम्मेद पहलवान ने एक
वीडियो बना धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और उन्माद फैलाने की असफल कोशिश की। पुलिस
द्वारा त्वरित कार्यवाही करने से उक्त कुत्सित कृत का भंडाफोड़ समय रहते हो गया। भारत सरकार ने सूचना तकनीकि कानून मे संशोधन कर सोशल
मीडिया को ऐसे संदेशों, वीडियो या फोटो के मूल स्त्रोत अर्थात उद्गम स्थल से संबन्धित व्यक्ति की सूचना, कानून
व्यवस्था के पालन करने वाली एजेन्सी के साथ सांझा करने की बाध्यता को लागू किया
है। ट्वीटर, व्हाट्सप, इंस्तग्राम जैसे
मंचों पर भड़काऊ और वैमनस्य फैलाने वाले
संदेशों के उस अपराधी व्यक्ति की सूचना एवं इन संदेशो को आगे बढ़ाने और
फैलाने वालों की सूची को पुलिस और अन्य कानूनी एजेंसी को देने की बाध्यता
के निर्देश दे कर ठीक ही किया है। साथ ही व्हाट्सप, फ़ेस बुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम को भी निर्देशित किया है कि उन्माद
और वैमनस्य फैलाने वाले इन झूठे, अप्रामाणिक फोटो, वीडियो को अपने मंचों से तत्काल हटा देश के कानून का पालन सुनिश्चित करें।
बड़ा
खेद और अफसोस है कि ट्वीटर ने गाजियाबाद के अब्दुल समद के उस झूठे एवं मनगढ़ंत वीडियो को पुलिस के निर्देश
के बावजूद नहीं हटाने का दुष्कृत, अक्षम्य कार्य
किया। चोरी और सीनाजोरी की कहावत को चरितार्थ करती ट्वीटर की निर्लज्ज टिप्पड़ी अखबारों मे देख मन
आक्रोशित हो पीढ़ा से भर गया!! ट्वीटर के अधिकारियों द्वारा ये कहना कि हम अपनी
कंपनी की सोच, रीतियों-नीतियों को भारतीय कानून से परे वरीयता देते है। उक्त ब्यान खीज़ और गुस्सा
दिलाने वाला है। संसदीय समिति के समक्ष उक्त वक्तव्य एक संप्रभु एवं सार्वभौमिक
राष्ट्र को खुली चुनौती है। सरकार को बगैर किसी देरी के ट्वीटर के विरुद्ध कड़ी
कार्यवाही जिसमे ट्वीटर को देश मे प्रतिबंधित करना एवं जुर्माना लगाना भी शामिल है
जैसी कड़ी कार्यवाही करने मे कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
पिछले
दिनों जिस ट्वीटर ने अमेरिका मे 9 जनवरी
2021 को "कैपिटल हिल कांड" पर
पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के अकाउंट पर रोक लगा ऐसे भड़काऊ संदेशों को
ब्लॉक कर दिया था। जिसके कारण लोगो
द्वारा अमरीकी संसद का अंदर और बाहर घेराव कर बंधक बनाया गया था। आज वही ट्वीटर अपने "दोहरे चरित्र" और
"दोगली नीतियों" के तहत लाल किले पर 26 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ मे हिंसात्मक
अतिक्रमण और गाजियाबाद मे अब्दुल समद के समाज मे धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाले खोटे और जाली वीडियो को अभिव्यक्ति
की आज़ादी के नाम पर हटाने से इंकार करता है। सरकार को ट्वीटर या अन्य सोशल मीडिया
को "अननथेबैल" जैसा निरंकुश व्यवहार करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिये। उन्हे ये बलपूर्वक याद दिलाना
चाहिये कि "देश के कानून के तहत ट्वीटर को बदलना होगा", "न
कि ट्वीटर की नीतियों की बजह से देश का
कानून"!!
ट्वीटर, व्हाट्सप
जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को इस मुगालते मे नहीं रहना चाहिये, उन्हे ये स्मरण रखना होगा कि कंपनियाँ
आएंगी और चली जाएंगी, बनेंगी और मिट जाएंगी पर हमारा
देश एक सारभौमिक, संप्रभु राष्ट्र है,
"वसुधैव कुटुम्बकम" और सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया"
जिसकी
विरासत है, आचार्यों,
ऋषि-मुनियों के गहन गूढ अध्यन से प्राप्त
उपदेश एवं शिक्षाएं जिसके मूल आधार है, वे हमे अभिव्यक्ति की
आज़ादी का पाठ पढ़ाएंगे??
अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर हमे आंखे
दिखा, नसीहत देने वाले
ट्वीटर पर क्यों न सरकार को पिछले वर्ष जून और सितम्बर 2020
मे 177 चीनी एप्प्स पर प्रतिबंध की तरह
भारतीय कानून न मानने वाले एप्प्स पर देश मे प्रतिबंध लगा देना चाहिये ताकि इनकी
गलत फहमी को दूर किया जा सके कि चीनी एप्प्स की तरह ट्वीटर,
व्हाट्सप्प के बिना भी देश आगे बढ़ सकता है और अच्छी तरह प्रगति के पथ पर चल सकता
है।
जो
लोग सोशल मीडिया और मंचों को जीवन का एक अभिन्न अंग मानने लगे है वे ये नहीं जानते
कि व्हाट्सप, फ़ेस बुक, ट्वीटर वास्तव मे ज्ञान, सूचना तकनीकि के मंच से परे एक नशे का रूप ले चुके है। एक व्यसन और लत के
रूप मे इन्होने हमारे दिल और दिमाक पर कब्ज़ा कर लिया है। दृढ़ निश्चय और कड़े संकल्प
के साथ इन व्यसन रूपी मंचों से छुटकारा हमारे स्वास्थ और सामाजिक रिश्तों की
पुनर्स्थापना के लिये आवश्यक है। मुझे गायत्री परिवार के एक छः दिवसीय कार्यक्रम मे
मुनस्यारी (पिथोरागढ़ का सीमांत क्षेत्र)
मे बगैर किसी सूचना तकनीकि या मोबाइल के शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त
हुआ। बिना किसी व्हाट्सप्प, फ़ेस बुक,
ट्वीटर यहाँ तक कि जब बिना मोबाइल के उपयोग के छह दिन निकाले जा सकते है तो छह माह
निकालना भी "आसमान से तारे तोड़ने" से कठिन तो नहीं ही हो सकता है!! वहाँ
हमने जाना कि जिन सोशल माध्यमों के बिना हम एक मिनिट जीवन की कल्पना भी न कर सकें, हमारे ज्ञान कौशल मे उनके बिना भी बढ़ोतरी हो सकती है?? और एक शानदार, शांति और सुखमय जीवन व्यतीत किया जा
सकता है, बस आवश्यकता है एक दृढ़ निश्चय और कड़े संकल्प की!!
दुनियाँ
के समस्त कार्यकलाप किसी व्यक्ति या वस्तु
के होने या न होने के बावजूद यूं ही चलते
रहेंगे? आपके लिये मात्र "समय" ही गौढ़ है,
अनिवार्य है, अपरिहार्य है पर समय के लिये न तो आप गौढ़ है, न ही अनिवार्य है और न ही अपरिहार्य!!! तब सामाजिक माध्यमों के मंच आपके
जीवन के अनिवार्य अंग कैसे हो सकते है??
अतः
हम सभी को हमारे देश के कानून और अस्तित्व को चुनौती देने वाले "ट्वीटर"
को तुरंत बंद करने या देश के कानून मानने के लिये, सरकार से आग्रह करना चाहिये
ताकि दूसरी देश विरोधी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हमारे राष्ट्र के कानून को चुनौती
देने का दुस्साहस पुनः न कर सके!! आदि ऋषि
बाल्मीकि एवं गोस्वामी तुलसी दास जी के रामचरित मानस मे निम्न पंक्तियाँ सामयिक एवं बड़ी प्रासंगिक है -
विजय सहगल




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